भारत में भावी अभिखंडन के सिद्धांत का पहली बार प्रयोग किस वाद में हुआ?
- A.आई. सी. गोलकनाथ बनाम पंजाब राज्य, 1967
- B.मेनका गांधी बनाम भारत संघ, 1978
- C.इंदिरा साहनी बनाम भारत संघ, 1992
- D.एस. आर. बोम्मई बनाम भारत संघ, 1994
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर है A, आई. सी. गोलकनाथ बनाम पंजाब राज्य, 1967। ग्यारह न्यायाधीशों की पीठ ने छह के विरुद्ध पांच के बहुमत से कहा कि संसद संशोधन द्वारा मूल अधिकारों को कम नहीं कर सकती, परंतु न्यायालय पहले से क्रियान्वित भूमि सुधार संशोधनों को अस्थिर नहीं करना चाहता था, इसलिए उसने घोषित किया कि उसका निर्णय केवल आगे के लिए प्रभावी होगा। अमेरिकी पद्धति से ली गई यही युक्ति भावी अभिखंडन है। विकल्प B गलत है, क्योंकि मेनका गांधी, 1978 ने अनुच्छेद 21 में उचित प्रक्रिया पढ़कर उसका विस्तार किया। विकल्प C गलत है, क्योंकि इंदिरा साहनी वाद, 1992 अन्य पिछड़े वर्गों के आरक्षण से जुड़ा है। विकल्प D गलत है, क्योंकि एस. आर. बोम्मई, 1994 ने अनुच्छेद 356 के दुरुपयोग पर रोक लगाई। गोलकनाथ का निर्णय मुख्य न्यायाधीश के. सुब्बा राव ने दिया।
पूरा लेख पढ़ें: संवैधानिक सिद्धांत: प्रमुख वाद, अनुच्छेद और परीक्षा तथ्य
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंउच्चतम न्यायालय ने आच्छादन के सिद्धांत का प्रयोग निम्नलिखित में से किस वाद में किया?
- A.ए. के. गोपालन बनाम मद्रास राज्य
- B.भीखाजी नारायण धाकरस बनाम मध्य प्रदेश राज्य
- C.के. सी. गजपति नारायण देव बनाम ओडिशा राज्य
- D.बशेशर नाथ बनाम आयकर आयुक्त
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इस वाद में मध्य प्रांत और बरार का 1947 का मोटर वाहन कानून अनुच्छेद 19(1)(ग) के व्यापार की स्वतंत्रता से टकराने के कारण लागू करने योग्य नहीं रह गया था।
पूरी व्याख्या पढ़ें →न्यायालय सार और तत्व के सिद्धांत का प्रयोग मुख्यतः निम्नलिखित में से किससे जुड़े प्रश्नों के निर्णय के लिए करते हैं?
- A.संविधान के संशोधन
- B.संघ और राज्यों के बीच विधायी शक्तियों के बंटवारे
- C.रिट द्वारा मूल अधिकारों के प्रवर्तन
- D.उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों की नियुक्ति
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अनुच्छेद 246 के साथ सातवीं अनुसूची संसद और राज्य विधानमंडलों को कानून बनाने के अलग क्षेत्र देती है, परंतु व्यवहार में विषय एक-दूसरे पर आ जाते हैं, इसलिए न्यायालय कानून का वास्तविक स्वरूप और चरित्र, अर्थात उसका सार और तत्व खोजता है और दूसरी सूची पर पड़े आनुषंगिक अतिक्रमण की…
पूरी व्याख्या पढ़ें →यह सूत्र कि जो सीधे नहीं किया जा सकता वह घुमा-फिराकर भी नहीं किया जा सकता, किस सिद्धांत को व्यक्त करता है?
- A.राज्यक्षेत्रीय संबंध का सिद्धांत
- B.आच्छादित विधान का सिद्धांत
- C.आच्छादन का सिद्धांत
- D.अधित्याग का सिद्धांत
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इसका आशय है कि विधानमंडल उस काम को अप्रत्यक्ष मार्ग से नहीं कर सकता जिसे संविधान ने सीधे करने से रोका है; यदि उसे किसी विषय पर अधिकार नहीं है तो चतुर शब्दावली उसे वह अधिकार नहीं दे सकती।
पूरी व्याख्या पढ़ें →उच्चतम न्यायालय ने किस वाद में कहा कि मूल अधिकार का अधित्याग उसका धारक नहीं कर सकता?
- A.बशेशर नाथ बनाम आयकर आयुक्त, 1959
- B.दीप चंद बनाम उत्तर प्रदेश राज्य, 1959
- C.बॉम्बे राज्य बनाम एफ. एन. बलसारा, 1951
- D.कलकत्ता गैस कंपनी बनाम पश्चिम बंगाल राज्य, 1962
उत्तर देखें
याची ने अपनी कर देयता का निपटारा उस प्रावधान के अंतर्गत किया था जो बाद में अनुच्छेद 14 का उल्लंघन करता पाया गया, और यह तर्क दिया गया कि निपटारे पर सहमत होकर उसने समता के अधिकार का अधित्याग कर दिया।
पूरी व्याख्या पढ़ें →राज्यक्षेत्रीय संबंध का सिद्धांत संविधान के किस उपबंध से निकला है?
- A.अनुच्छेद 13(1)
- B.अनुच्छेद 245(2)
- C.अनुच्छेद 254(2)
- D.अनुच्छेद 368
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यह खंड कहता है कि संसद द्वारा बनाया गया कोई कानून इस आधार पर अविधिमान्य नहीं माना जाएगा कि उसका राज्यक्षेत्र के बाहर प्रभाव होगा, और न्यायालयों ने इसी पर यह नियम खड़ा किया कि राज्य का कानून भी राज्य के बाहर की वस्तु या व्यक्ति पर लागू हो सकता…
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