अष्टकोणीय द्वार और पांच मंजिलों वाली अडालज की वाव किस राज्य में स्थित है?
- A.राजस्थान
- B.गुजरात
- C.महाराष्ट्र
- D.दिल्ली
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर है B, गुजरात। अडालज की वाव गांधीनगर जिले के अडालज में है और 1499 में महमूद बेगड़ा के शासनकाल में पूर्ण हुई; इसकी नक्काशी में हिंदू अलंकरण के साथ इस्लामी ज्यामितीय तथा पुष्प कार्य मिला हुआ है और इसकी कथा में रानी रूदाबाई स्मरण की जाती हैं। विकल्प A गलत है क्योंकि राजस्थान में इसके स्थान पर चांद बावड़ी, रानी जी की बावड़ी और पन्ना मीना का कुंड हैं। विकल्प C गलत है क्योंकि महाराष्ट्र इस अध्याय में फड़ प्रणाली के बंधारों के लिए आता है, वाव के लिए नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि दिल्ली में अग्रसेन की बावली, राजों की बावली और गंधक की बावली जैसी बावड़ियां हैं। गुजरात वाव परंपरा का घर है, क्योंकि वहां भूजल गहरा है और व्यापार मार्गों को छायादार पड़ाव चाहिए थे।
पूरा लेख पढ़ें: भारत की बावड़ियां: वाव, बावड़ी, कुंड और तालाब
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंयूनेस्को विश्व विरासत सूची में शामिल बावड़ी रानी की वाव कहां स्थित है?
- A.पाटन, गुजरात
- B.अडालज, गुजरात
- C.आभानेरी, राजस्थान
- D.बूंदी, राजस्थान
उत्तर देखें
रानी की वाव सरस्वती नदी के तट पर पाटन में है, जो सोलंकी काल की पुरानी राजधानी अन्हिलवाड़ पाटन थी, और सात तलों की मारू-गुर्जर शैली की मूर्तिकला के कारण इसे 2014 में विश्व विरासत स्थल घोषित किया गया।
पूरी व्याख्या पढ़ें →पाटन की रानी की वाव किस रानी ने बनवाई थी?
- A.रूदाबाई
- B.उदयमती
- C.नाथावती
- D.अहिल्याबाई होल्कर
उत्तर देखें
रानी उदयमती ने ग्यारहवीं शताब्दी में गुजरात के सोलंकी या चालुक्य वंश के अपने पति भीमदेव प्रथम की स्मृति में यह बावड़ी बनवाई, इसीलिए इसे उलटे मंदिर के रूप में बना स्मारक कहा जाता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →भारतीय सौ रुपये के नोट पर कौन-सी बावड़ी अंकित है?
- A.चांद बावड़ी
- B.रानी की वाव
- C.अडालज की वाव
- D.अग्रसेन की बावली
उत्तर देखें
महात्मा गांधी नई श्रृंखला के सौ रुपये के नोट के पृष्ठ भाग पर पाटन की रानी की वाव का चित्र है, जिसे इसलिए चुना गया कि वह विश्व विरासत स्थल है और भारतीय जल स्थापत्य का प्रतीक है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →लगभग तीन हजार पांच सौ संकरी सीढ़ियों और तेरह मंजिलों के लिए प्रसिद्ध चांद बावड़ी किस राज्य में है?
- A.गुजरात
- B.राजस्थान
- C.मध्य प्रदेश
- D.कर्नाटक
उत्तर देखें
चांद बावड़ी राजस्थान के दौसा जिले में आभानेरी में, हर्षत माता मंदिर के सामने स्थित है और इसका श्रेय लगभग नौवीं शताब्दी के निकुंभ वंशी राजा चांद को दिया जाता है; तेरह मंजिल नीचे उतरती आड़ी-तिरछी सीढ़ियां इसे भारत की सबसे गहरी बावड़ियों में रखती हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →कर्नाटक और दक्कन में मंदिर से जुड़े सीढ़ीदार जलकुंड को क्या कहा जाता है?
- A.झालरा
- B.खड़ीन
- C.कल्याणी या पुष्करणी
- D.आहर
उत्तर देखें
कर्नाटक और दक्कन में मंदिर के पास धार्मिक स्नान के लिए बने सीढ़ीदार कुंड को कल्याणी या पुष्करणी कहा जाता है, और जोड़कर रखे पत्थर के खंडों से बना हम्पी का सीढ़ीदार कुंड इसका सर्वाधिक प्रसिद्ध उदाहरण है।
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