अमृतलाल वेगड़ किससे संबंधित हैं?
- A.मूर्तिकला
- B.चित्रकला
- C.गायन
- D.संगीत
सही उत्तर
B. चित्रकला
व्याख्या
सही उत्तर है B, चित्रकला। अमृतलाल वेगड़ का जन्म 1928 में मध्य प्रदेश के जबलपुर में हुआ था। वे चित्रकार और कोलाज कलाकार थे, जिन्होंने शांतिनिकेतन के कला भवन में नंदलाल बोस से कला की शिक्षा पाई और बाद में जबलपुर में कला पढ़ाई। वे रंगीन कागज़ के टुकड़ों से बने कोलाज के लिए और नर्मदा पर लिखे अपने हिंदी यात्रा-लेखन में बनाए रेखाचित्रों तथा चित्रों के लिए याद किए जाते हैं; नर्मदा के किनारे उन्होंने हज़ारों किलोमीटर पैदल यात्रा की थी। इसी कारण मध्य प्रदेश की परीक्षाएँ उन्हें दृश्य कला से जोड़कर पूछती हैं, प्रदर्शन कला से नहीं। विकल्प A गलत है, क्योंकि उन्होंने पत्थर या धातु में काम नहीं किया, बल्कि कागज़ और रंग से समतल सतह पर किया। विकल्प C गलत है, क्योंकि वे गायक नहीं थे। विकल्प D गलत है, क्योंकि संगीत से उनका कोई संबंध नहीं था। परीक्षा टिप: वेगड़, जबलपुर, चित्रकला और कोलाज, नर्मदा पर हिंदी यात्रा-लेखन।
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंबीदर के शिल्पकार ______ की जड़ाई के काम के लिए बहुत प्रसिद्ध थे।
- A.सोना और कांसा
- B.कांसा और चांदी
- C.सोना और तांबा
- D.तांबा और चांदी
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. तांबा और चांदी
व्याख्या
सही उत्तर है D, तांबा और चांदी। बीदर के शिल्पकार तांबे और चांदी की जड़ाई के काम के लिए प्रसिद्ध थे, और इस शिल्प को नगर के नाम पर बिदरी कहा गया।
बीदर वर्तमान कर्नाटक में है और बहमनी शासकों तथा बाद में बरीदशाही वंश की राजधानी रहा। बिदरी शिल्प में कारीगर जस्ते और तांबे की मिश्र धातु से वस्तु ढालता है, काली की गई सतह पर डिजाइन उकेरता है और खांचों में शुद्ध चांदी का तार या पत्तर दबाता है, जिससे गहरे रंग की पृष्ठभूमि पर चमकदार नमूना उभर आता है। फूल, लता और ज्यामितीय आकृतियां इसके सामान्य डिजाइन हैं। बिदरीवेयर को भौगोलिक संकेत टैग मिला हुआ है।
A गलत है: सोना और कांसा बिदरी काम की धातुएं नहीं हैं। B गलत है: इस शिल्प में कांसे की जड़ाई नहीं होती। C गलत है: इसमें सोने का कोई काम नहीं है, हालांकि तांबा प्रयोग होता है।
परीक्षा टिप: बिदरी - कर्नाटक का बीदर, जस्ता-तांबा धातु पर चांदी की जड़ाई, जीआई टैग प्राप्त।
उन्नीसवीं शताब्दी में कथक का स्वर्ण युग __________ के अंतिम नवाब वाजिद अली शाह के संरक्षण में आया।
- A.हैदराबाद
- B.रामपुर
- C.अवध
- D.जौनपुर
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. अवध
व्याख्या
सही उत्तर है C, अवध। उत्तर भारत का शास्त्रीय नृत्य कथक उन्नीसवीं शताब्दी में अवध के अंतिम नवाब वाजिद अली शाह के संरक्षण में अपने स्वर्ण युग में पहुँचा, जिन्होंने लखनऊ से शासन किया और 1856 में अंग्रेजों ने उनका राज्य हड़प लिया। वे स्वयं नर्तक और रचनाकार थे, अख्तरपिया उपनाम से लिखते थे, रहस नामक नृत्य नाटिका रची और ठाकुर प्रसाद तथा बिंदादीन और कालका प्रसाद भाइयों को संरक्षण दिया, जिनके परिवार ने लखनऊ घराना खड़ा किया; इस घराने में लालित्य, भाव और ठुमरी पर जोर है। कथक के अन्य घराने जयपुर, बनारस और रायगढ़ हैं। विकल्प A गलत है, क्योंकि हैदराबाद पर आसफ जाही वंश के निजाम शासन करते थे। विकल्प B गलत है, क्योंकि रामपुर अलग रुहेला राज्य था, जो संगीत के रामपुर-सहसवान घराने के लिए जाना जाता है, कथक के लिए नहीं। विकल्प D गलत है, क्योंकि जौनपुर पंद्रहवीं शताब्दी की शर्की सल्तनत था। परीक्षा टिप: वाजिद अली शाह के साथ अवध, कथक का लखनऊ घराना और ठुमरी याद रखें।
ओडिशा राज्य ने 10 जुलाई 2023 को किस दक्षिण-पूर्वी द्रविड़ भाषा को भारत के संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की स्वीकृति दी?
- A.कुई
- B.माल्टो
- C.तुलु
- D.कोडगु
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. कुई
व्याख्या
सही उत्तर है A, कुई। कुई ओडिशा की कोंध (कंधा) जनजाति की भाषा है और द्रविड़ परिवार की दक्षिण-मध्य या दक्षिण-पूर्वी शाखा में तेलुगु तथा गोंडी के साथ रखी जाती है। यह मुख्य रूप से कंधमाल, रायगड़ा, कालाहांडी, कोरापुट और बौध जिलों में बोली जाती है, ओड़िया लिपि में लिखी जाती है, और इसमें मौखिक गीतों तथा लोककथाओं का बड़ा भंडार है। ओडिशा मंत्रिमंडल ने जुलाई 2023 में कुई को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की सिफारिश का प्रस्ताव मंजूर किया; इस अनुसूची में 1950 में चौदह भाषाएँ थीं और अब बाईस हैं, जिनमें ओड़िया भी है। विकल्प B गलत है, क्योंकि माल्टो झारखंड और पश्चिम बंगाल की राजमहल पहाड़ियों की उत्तरी द्रविड़ भाषा है। विकल्प C गलत है, क्योंकि तुलु तटीय कर्नाटक और केरल के कासरगोड की भाषा है और कर्नाटक उसके लिए अलग माँग रखता है। विकल्प D गलत है, क्योंकि कोडगु कर्नाटक के कोडगु जिले में बोली जाती है। परीक्षा टिप: ब्राहुई, कुरुख और माल्टो उत्तरी द्रविड़ हैं; कुई और गोंडी तेलुगु के साथ आती हैं।
टुसू परब निम्नलिखित में से किस भारतीय राज्य का फसल कटाई का त्योहार है?
- A.गुजरात
- B.सिक्किम
- C.कर्नाटक
- D.झारखंड
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. झारखंड
व्याख्या
सही उत्तर है D, झारखंड। टुसू परब झारखंड का फसल कटाई का त्योहार है, जो जनवरी के मध्य में मकर संक्रांति पर मनाया जाता है, जब जाड़े की धान की फसल घर आ जाती है। कुरमी, संथाल और अन्य समुदायों की कुँवारी लड़कियाँ बाँस और कागज से सजा हुआ ढाँचा बनाती हैं, जिसे चौड़ल कहते हैं; टुसू की प्रतिमा को टुसू गीत गाते हुए जुलूस में ले जाया जाता है और अंत में नदी या तालाब में विसर्जित किया जाता है। स्वर्णरेखा और दामोदर के किनारे मेले लगते हैं, और यही त्योहार पड़ोसी पुरुलिया क्षेत्र में भी मनाया जाता है। विकल्प A गलत है, क्योंकि गुजरात इसी मौसम को पतंग के त्योहार उत्तरायण के रूप में मनाता है। विकल्प B गलत है, क्योंकि सिक्किम में लेपचा और भूटिया दिसंबर में नामसूंग और लोसूंग मनाते हैं। विकल्प C गलत है, क्योंकि कर्नाटक फसल को सुग्गी हब्बा और एल्लु बेल्ला वाली मकर संक्रांति के रूप में मनाता है। परीक्षा टिप: टुसू और सरहुल झारखंड के, बिहू असम का और वांगला मेघालय का त्योहार है।
बेलूर का चेन्नकेशव मंदिर और हलेबिड का होयसलेश्वर मंदिर किस शैली के हैं?
- A.पल्लव
- B.होयसल
- C.चंदेल
- D.कलिंग
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. होयसल
व्याख्या
सही उत्तर B, होयसल है। होयसल शासक दक्षिण कर्नाटक पर बेलूर और द्वारसमुद्र, अर्थात आज के हलेबिड, से शासन करते थे, और उनके मंदिर सहज पहचाने जाते हैं — जगती नामक तारे के आकार का ऊँचा चबूतरा, तारकीय योजना पर बने गर्भगृह, मृदु क्लोराइटिक शिस्ट यानी सेलखड़ी जिसमें आभूषण और केश तक बारीकी से उत्कीर्ण हो सके, खराद पर गढ़े स्तंभ, तथा हाथी, घोड़े और महाकाव्य दृश्यों की पट्टियाँ। सोमनाथपुर इस समूह का तीसरा मंदिर है।
विकल्प A, पल्लव, महाबलीपुरम और कांचीपुरम के पूर्ववर्ती शैलकृत रथों तथा संरचनात्मक मंदिरों से संबंधित है। विकल्प C, चंदेल, मध्य प्रदेश के खजुराहो की शैली है, जो बलुआ पत्थर में पंचायतन योजना पर बनी है। विकल्प D, कलिंग, लिंगराज, जगन्नाथ और कोणार्क की ओडिशा शैली है। तारकीय योजना और सेलखड़ी से होयसल को चंदेल से अलग करना ही यहाँ का सामान्य जाल है।