अक्टूबर 2026 तक भारतीय कंपनियों ने कुल कितनी हरित हाइड्रोजन आपूर्ति की प्रतिबद्धता पर हस्ताक्षर किए थे?
- A.3,55,610 एमटीपीए
- B.4,55,610 एमटीपीए
- C.5,55,610 एमटीपीए
- D.6,55,610 एमटीपीए
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर 5,55,610 एमटीपीए है। नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार अक्टूबर 2026 तक भारतीय कंपनियों के पक्के और हस्ताक्षरित हरित हाइड्रोजन आपूर्ति अनुबंध इसी स्तर पर पहुंचे थे। यह दुनिया में सबसे बड़ी आपूर्ति प्रतिबद्धता है और राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के उत्पादन लक्ष्य के लगभग 11 प्रतिशत के बराबर बैठती है। बाकी तीनों विकल्प गलत हैं, क्योंकि वे घोषित मात्रा से कम या अधिक बताते हैं। यह आंकड़ा वर्ष 2026 में हुए 18 नए करारों के बाद ही इस स्तर तक पहुंचा, क्योंकि केवल इन करारों से 4 लाख एमटीपीए से अधिक की आपूर्ति तय हुई थी। मिशन की शुरुआत 2023 में हुई और तब से कुल 23 आपूर्ति अनुबंध हुए हैं। तय मात्रा का 70 प्रतिशत से अधिक हिस्सा निर्यात के लिए रखा गया है, जिसके खरीदार मुख्य रूप से यूरोप और जापान में हैं। इन सभी अनुबंधों को पूरा करने के लिए लगभग 90,000 करोड़ रुपये यानी करीब 9.5 अरब डॉलर की पूंजी की आवश्यकता होगी।
पूरा लेख पढ़ें: हरित हाइड्रोजन आपूर्ति अनुबंधों में भारत दुनिया में पहले स्थान पर
अभ्यास प्रश्न
राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के लिए स्वीकृत प्रारंभिक परिव्यय कितना है?
- A.8,000 करोड़ रुपये
- B.19,744 करोड़ रुपये
- C.10,371 करोड़ रुपये
- D.90,000 करोड़ रुपये
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मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन को इसी प्रारंभिक परिव्यय के साथ मंजूरी दी थी और यह परिव्यय वर्ष 2029-30 तक के लिए है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →दक्षिण कोरिया की सैमसंग सी एंड टी के साथ 3 अरब डॉलर से अधिक मूल्य का दीर्घकालिक हरित अमोनिया करार किस भारतीय कंपनी ने किया है?
- A.एक्मे समूह
- B.एएम ग्रीन
- C.रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड
- D.लार्सन एंड टुब्रो
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दक्षिण कोरिया की सैमसंग सी एंड टी कॉरपोरेशन के साथ उसका दीर्घकालिक आपूर्ति और क्रय करार 3 अरब डॉलर से अधिक मूल्य का है और इसे दुनिया के सबसे बड़े हरित अमोनिया आपूर्ति अनुबंधों में गिना जाता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →साइड इवेंट में केंद्रीय पर्यावरण मंत्री ने आनुवंशिक संसाधनों के उपयोग से मिले लाभ के न्यायसंगत बंटवारे का आधार किसे बताया?
- A.कार्टाजेना प्रोटोकॉल
- B.नागोया प्रोटोकॉल
- C.कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता रूपरेखा
- D.पेरिस समझौता
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लाभ-साझाकरण पर बोलते हुए मंत्री ने कहा कि यही प्रोटोकॉल आनुवंशिक संसाधनों के उपयोग से उत्पन्न लाभ के निष्पक्ष और न्यायसंगत बंटवारे का आधार देता है, और उन्होंने इस सिद्धांत को व्यावहारिक, पारदर्शी तथा न्यायसंगत प्रक्रियाओं में बदलने पर बल दिया।
पूरी व्याख्या पढ़ें →सीबीडी कॉप-17 के साइड इवेंट में भारत द्वारा जारी चार प्रकाशनों में निम्नलिखित में से कौन शामिल नहीं था?
- A.आई-ओईसीएम को नामित करने के दिशा-निर्देश
- B.कार्टाजेना जैव सुरक्षा प्रोटोकॉल पर पांचवीं राष्ट्रीय रिपोर्ट
- C.भारत वन स्थिति रिपोर्ट
- D.भारत की लाभ-साझाकरण सफलता गाथा
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साइड इवेंट में जो चार प्रकाशन सामने आए, वे इस प्रकार हैं। पहला, भारत के अन्य प्रभावी क्षेत्र-आधारित संरक्षण उपायों को नामित करने के दिशा-निर्देश, जिनसे संरक्षित क्षेत्रों के बाहर हुए संरक्षण कार्य को भी मान्यता मिल सकेगी।
पूरी व्याख्या पढ़ें →जिस सीबीडी कॉप-17 में भारत ने चार प्रकाशन जारी किए, वह किस शहर में हुआ?
- A.येरेवन
- B.बाकू
- C.त्बिलिसी
- D.अस्ताना
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भारत ने वहां अपने राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण तथा संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम के साथ एक साइड इवेंट किया और केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री ने उसमें चार प्रकाशन जारी किए।
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