अभिधम्म पिटक का संकलन किस बौद्ध संगीति में हुआ था?
- A.राजगृह की प्रथम संगीति
- B.वैशाली की द्वितीय संगीति
- C.पाटलिपुत्र की तृतीय संगीति
- D.कश्मीर की चतुर्थ संगीति
सही उत्तर
C. पाटलिपुत्र की तृतीय संगीति
व्याख्या
सही उत्तर C, पाटलिपुत्र की तृतीय संगीति है। अशोक के शासनकाल में मोग्गलिपुत्त तिस्स की अध्यक्षता में हुई इस संगीति ने संघ से भेदकारी तत्वों को अलग किया, दर्शन से संबंधित तीसरी पिटक अभिधम्म पिटक को ग्रंथ में जोड़ा और श्रीलंका सहित अन्य देशों में धर्म प्रचारक भेजने का निर्णय लिया।
विकल्प A, राजगृह की प्रथम संगीति में केवल विनय और सुत्त पिटक निश्चित हुए, जिन्हें क्रमशः उपालि और आनंद ने सुनाया। विकल्प B, वैशाली की द्वितीय संगीति संघ के नियमों में ढील को लेकर बुलाई गई और उसी से पहला बड़ा विभाजन हुआ। विकल्प D, कनिष्क के समय कश्मीर की चतुर्थ संगीति में नई पिटक नहीं, संस्कृत टीकाएँ तैयार हुईं। अर्थात तीन पिटक पहली और तीसरी संगीति से तथा दोनों विभाजन दूसरी और चौथी से जुड़े हैं।
पूरा लेख पढ़ें: बौद्ध और जैन धर्म: शिक्षाएँ, संगीतियाँ और परीक्षा तथ्य
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंगौतम बुद्ध ने अपना प्रथम उपदेश निम्नलिखित में से किस स्थान पर दिया था?
- A.बोधगया
- B.सारनाथ
- C.कुशीनगर
- D.लुंबिनी
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सही उत्तर: B. सारनाथ
व्याख्या
सही उत्तर B, सारनाथ है। संबोधि के बाद बुद्ध वाराणसी के निकट सारनाथ के मृगदाव पहुँचे और उन पाँच तपस्वियों को चार आर्य सत्यों का उपदेश दिया जिन्होंने पहले उनका साथ छोड़ दिया था। इसी उपदेश को धर्मचक्र प्रवर्तन कहा जाता है और बौद्ध संघ की स्थापना इसी घटना से मानी जाती है।
विकल्प A, बोधगया वह स्थान है जहाँ पैंतीस वर्ष की आयु में निरंजना के तट पर पीपल वृक्ष के नीचे उन्हें ज्ञान प्राप्त हुआ, उपदेश नहीं दिया गया। विकल्प C, कुशीनगर मल्ल जनपद का वह नगर है जहाँ अस्सी वर्ष की आयु में उनका महापरिनिर्वाण हुआ। विकल्प D, लुंबिनी नेपाल की तराई में उनका जन्मस्थान है, जहाँ बाद में अशोक ने स्तंभ लगवाया। प्रश्नपत्र इन्हीं चार स्थानों को आपस में बदलते हैं, इसलिए हर नाम के साथ केवल एक घटना जोड़ें।
चतुर्थ बौद्ध संगीति किस शासक के संरक्षण में आयोजित हुई थी?
- A.अशोक
- B.अजातशत्रु
- C.कनिष्क
- D.कालाशोक
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सही उत्तर: C. कनिष्क
व्याख्या
सही उत्तर C, कनिष्क है। चतुर्थ बौद्ध संगीति पहली शताब्दी ईस्वी में कश्मीर के कुंडलवन में कुषाण शासक कनिष्क के संरक्षण में हुई, जिसकी अध्यक्षता वसुमित्र ने की और अश्वघोष उनके सहयोगी रहे। इसमें संस्कृत में टीकाएँ तैयार हुईं और महायान तथा हीनयान का भेद स्थायी रूप ले गया।
विकल्प A, अशोक ने पाटलिपुत्र की तृतीय संगीति को संरक्षण दिया, जिसकी अध्यक्षता मोग्गलिपुत्त तिस्स ने की और जिसमें अभिधम्म पिटक जोड़ा गया। विकल्प B, अजातशत्रु के समय बुद्ध के निधन के तुरंत बाद राजगृह में प्रथम संगीति हुई, जहाँ उपालि ने विनय और आनंद ने सुत्त सुनाया। विकल्प D, कालाशोक के संरक्षण में वैशाली की द्वितीय संगीति हुई, जिसमें संघ स्थविरवादी और महासांघिक में बँटा। संगीतियों को स्थान, राजा, अध्यक्ष और परिणाम की पंक्ति बनाकर याद करें।
निम्नलिखित में से कौन जैन धर्म के तेईसवें तीर्थंकर थे?
- A.ऋषभदेव
- B.पार्श्वनाथ
- C.नेमिनाथ
- D.महावीर
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सही उत्तर: B. पार्श्वनाथ
व्याख्या
सही उत्तर B, पार्श्वनाथ है। वे तेईसवें तीर्थंकर थे, वाराणसी के राजा अश्वसेन के पुत्र, और उनका चिह्न सर्प है। परंपरा उन्हें महावीर से लगभग ढाई सौ वर्ष पूर्व रखती है और उन्होंने अपने अनुयायियों को चार व्रत दिए: अहिंसा, सत्य, अस्तेय और अपरिग्रह।
विकल्प A, ऋषभदेव या आदिनाथ प्रथम तीर्थंकर थे, जिनका चिह्न वृषभ है और जिनका नाम ऋग्वेद में भी मिलता है। विकल्प C, नेमिनाथ बाईसवें तीर्थंकर थे, जिन्हें परंपरा कृष्ण से जोड़ती है। विकल्प D, महावीर चौबीसवें और अंतिम तीर्थंकर थे, जिन्होंने पाँचवाँ व्रत ब्रह्मचर्य जोड़ा और जिनका चिह्न सिंह है। इतिहासकार पार्श्वनाथ और महावीर इन दो तीर्थंकरों को ही ऐतिहासिक व्यक्ति मानते हैं, शेष बाईस परंपरा से जाने जाते हैं। परीक्षा प्रायः पहला, तेईसवाँ और चौबीसवाँ तीर्थंकर ही पूछती है, इसलिए इन तीनों को उनके चिह्न तथा जन्मस्थान सहित याद रखें।
पार्श्वनाथ के चार व्रतों में महावीर ने कौन सा व्रत जोड़ा था?
- A.अहिंसा
- B.सत्य
- C.अपरिग्रह
- D.ब्रह्मचर्य
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सही उत्तर: D. ब्रह्मचर्य
व्याख्या
सही उत्तर D, ब्रह्मचर्य है। पार्श्वनाथ ने चार संयम बताए थे और महावीर ने उनमें ब्रह्मचर्य जोड़ा, इसलिए जैन साधु का आचार पाँच महाव्रतों पर टिका है: अहिंसा, सत्य, अस्तेय, अपरिग्रह और ब्रह्मचर्य। यही जोड़ दोनों तीर्थंकरों को अलग करता है, इसलिए यह एक पंक्ति का प्रिय प्रश्न है।
विकल्प A, अहिंसा पुराने चार व्रतों में पहला था और जैन धर्म का केंद्रीय सिद्धांत है, जिसे वनस्पति और सूक्ष्म जीवों तक बढ़ाया गया। विकल्प B, सत्य और विकल्प C, अपरिग्रह भी उन्हीं चार पुराने व्रतों में सम्मिलित थे, जिनमें चौथा अस्तेय था। यह भी ध्यान रखें कि गृहस्थ इन्हीं व्रतों का हल्का रूप अणुव्रत के रूप में पालन करता है जबकि मुनि इन्हें पूर्ण रूप से निभाता है। पाँच महाव्रतों का यह क्रम और महावीर द्वारा जोड़ा गया पाँचवाँ व्रत, दोनों ही परीक्षा में बार बार पूछे जाते हैं, इसलिए सूची को क्रम से दोहराएँ।
महावीर को कैवल्य अर्थात पूर्ण ज्ञान किस नदी के तट पर प्राप्त हुआ था?
- A.निरंजना
- B.ऋजुपालिका
- C.परुष्णी
- D.गंडक
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सही उत्तर: B. ऋजुपालिका
व्याख्या
सही उत्तर B, ऋजुपालिका है। बारह वर्ष की कठोर तपस्या के बाद बयालीस वर्ष की आयु में जृंभिकग्राम में ऋजुपालिका नदी के तट पर साल वृक्ष के नीचे महावीर को कैवल्य प्राप्त हुआ, और उसी क्षण से वे जिन तथा केवलिन कहलाए।
विकल्प A, निरंजना यानी आधुनिक फल्गु बोधगया की वह नदी है जहाँ बुद्ध को पीपल वृक्ष के नीचे ज्ञान मिला, और यही इस प्रश्न का सबसे बड़ा भ्रम है। विकल्प C, परुष्णी यानी आधुनिक रावी वैदिक युग की नदी है, जिसके तट पर दाशराज्ञ युद्ध हुआ था। विकल्प D, गंडक वैशाली के पास बहती है और महावीर के जन्मस्थान कुंडग्राम से जुड़ी है, पर कैवल्य की घटना से इसका संबंध नहीं है। इस जोड़ी को दो पंक्तियों में याद रखें: बुद्ध, पीपल, निरंजना, बोधगया और महावीर, साल, ऋजुपालिका, जृंभिकग्राम।