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GK क्विजभारतीय इतिहास

भारतीय इतिहास क्विज: बौद्ध और जैन धर्म

  • 12 प्रश्न
  • 12 मिनट
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इस क्विज के बारे में

भारतीय इतिहास के अंतर्गत "बौद्ध और जैन धर्म" विषय पर यह क्विज़ 12 बहुविकल्पीय प्रश्न रखता है, जो GK24 के इसी विषय के नोट्स के साथ प्रकाशित सत्यापित प्रश्न हैं। हर प्रश्न के साथ सही विकल्प की और शेष विकल्पों के गलत होने की पूरी व्याख्या दी गई है, ताकि आप केवल उत्तर याद न करें बल्कि उसके पीछे का तथ्य समझें। नोट्स पढ़ने के तुरंत बाद इसे हल करें, निर्धारित समय का पालन करें, और अंत में व्याख्याएं पढ़कर कमजोर बिंदु चिह्नित करें। परीक्षा से पहले दोहराव के लिए इसे दोबारा दें।

इस क्विज के प्रश्न

12 प्रश्न उत्तर और व्याख्या सहित

Q1.भारतीय इतिहासआसान

गौतम बुद्ध ने अपना प्रथम उपदेश निम्नलिखित में से किस स्थान पर दिया था?

  1. A.बोधगया
  2. B.सारनाथ
  3. C.कुशीनगर
  4. D.लुंबिनी
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. सारनाथ

व्याख्या

सही उत्तर B, सारनाथ है। संबोधि के बाद बुद्ध वाराणसी के निकट सारनाथ के मृगदाव पहुँचे और उन पाँच तपस्वियों को चार आर्य सत्यों का उपदेश दिया जिन्होंने पहले उनका साथ छोड़ दिया था। इसी उपदेश को धर्मचक्र प्रवर्तन कहा जाता है और बौद्ध संघ की स्थापना इसी घटना से मानी जाती है।

विकल्प A, बोधगया वह स्थान है जहाँ पैंतीस वर्ष की आयु में निरंजना के तट पर पीपल वृक्ष के नीचे उन्हें ज्ञान प्राप्त हुआ, उपदेश नहीं दिया गया। विकल्प C, कुशीनगर मल्ल जनपद का वह नगर है जहाँ अस्सी वर्ष की आयु में उनका महापरिनिर्वाण हुआ। विकल्प D, लुंबिनी नेपाल की तराई में उनका जन्मस्थान है, जहाँ बाद में अशोक ने स्तंभ लगवाया। प्रश्नपत्र इन्हीं चार स्थानों को आपस में बदलते हैं, इसलिए हर नाम के साथ केवल एक घटना जोड़ें।

Q2.भारतीय इतिहासमध्यम

चतुर्थ बौद्ध संगीति किस शासक के संरक्षण में आयोजित हुई थी?

  1. A.अशोक
  2. B.अजातशत्रु
  3. C.कनिष्क
  4. D.कालाशोक
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. कनिष्क

व्याख्या

सही उत्तर C, कनिष्क है। चतुर्थ बौद्ध संगीति पहली शताब्दी ईस्वी में कश्मीर के कुंडलवन में कुषाण शासक कनिष्क के संरक्षण में हुई, जिसकी अध्यक्षता वसुमित्र ने की और अश्वघोष उनके सहयोगी रहे। इसमें संस्कृत में टीकाएँ तैयार हुईं और महायान तथा हीनयान का भेद स्थायी रूप ले गया।

विकल्प A, अशोक ने पाटलिपुत्र की तृतीय संगीति को संरक्षण दिया, जिसकी अध्यक्षता मोग्गलिपुत्त तिस्स ने की और जिसमें अभिधम्म पिटक जोड़ा गया। विकल्प B, अजातशत्रु के समय बुद्ध के निधन के तुरंत बाद राजगृह में प्रथम संगीति हुई, जहाँ उपालि ने विनय और आनंद ने सुत्त सुनाया। विकल्प D, कालाशोक के संरक्षण में वैशाली की द्वितीय संगीति हुई, जिसमें संघ स्थविरवादी और महासांघिक में बँटा। संगीतियों को स्थान, राजा, अध्यक्ष और परिणाम की पंक्ति बनाकर याद करें।

Q3.भारतीय इतिहासआसान

निम्नलिखित में से कौन जैन धर्म के तेईसवें तीर्थंकर थे?

  1. A.ऋषभदेव
  2. B.पार्श्वनाथ
  3. C.नेमिनाथ
  4. D.महावीर
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. पार्श्वनाथ

व्याख्या

सही उत्तर B, पार्श्वनाथ है। वे तेईसवें तीर्थंकर थे, वाराणसी के राजा अश्वसेन के पुत्र, और उनका चिह्न सर्प है। परंपरा उन्हें महावीर से लगभग ढाई सौ वर्ष पूर्व रखती है और उन्होंने अपने अनुयायियों को चार व्रत दिए: अहिंसा, सत्य, अस्तेय और अपरिग्रह।

विकल्प A, ऋषभदेव या आदिनाथ प्रथम तीर्थंकर थे, जिनका चिह्न वृषभ है और जिनका नाम ऋग्वेद में भी मिलता है। विकल्प C, नेमिनाथ बाईसवें तीर्थंकर थे, जिन्हें परंपरा कृष्ण से जोड़ती है। विकल्प D, महावीर चौबीसवें और अंतिम तीर्थंकर थे, जिन्होंने पाँचवाँ व्रत ब्रह्मचर्य जोड़ा और जिनका चिह्न सिंह है। इतिहासकार पार्श्वनाथ और महावीर इन दो तीर्थंकरों को ही ऐतिहासिक व्यक्ति मानते हैं, शेष बाईस परंपरा से जाने जाते हैं। परीक्षा प्रायः पहला, तेईसवाँ और चौबीसवाँ तीर्थंकर ही पूछती है, इसलिए इन तीनों को उनके चिह्न तथा जन्मस्थान सहित याद रखें।

Q4.भारतीय इतिहासमध्यम

पार्श्वनाथ के चार व्रतों में महावीर ने कौन सा व्रत जोड़ा था?

  1. A.अहिंसा
  2. B.सत्य
  3. C.अपरिग्रह
  4. D.ब्रह्मचर्य
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. ब्रह्मचर्य

व्याख्या

सही उत्तर D, ब्रह्मचर्य है। पार्श्वनाथ ने चार संयम बताए थे और महावीर ने उनमें ब्रह्मचर्य जोड़ा, इसलिए जैन साधु का आचार पाँच महाव्रतों पर टिका है: अहिंसा, सत्य, अस्तेय, अपरिग्रह और ब्रह्मचर्य। यही जोड़ दोनों तीर्थंकरों को अलग करता है, इसलिए यह एक पंक्ति का प्रिय प्रश्न है।

विकल्प A, अहिंसा पुराने चार व्रतों में पहला था और जैन धर्म का केंद्रीय सिद्धांत है, जिसे वनस्पति और सूक्ष्म जीवों तक बढ़ाया गया। विकल्प B, सत्य और विकल्प C, अपरिग्रह भी उन्हीं चार पुराने व्रतों में सम्मिलित थे, जिनमें चौथा अस्तेय था। यह भी ध्यान रखें कि गृहस्थ इन्हीं व्रतों का हल्का रूप अणुव्रत के रूप में पालन करता है जबकि मुनि इन्हें पूर्ण रूप से निभाता है। पाँच महाव्रतों का यह क्रम और महावीर द्वारा जोड़ा गया पाँचवाँ व्रत, दोनों ही परीक्षा में बार बार पूछे जाते हैं, इसलिए सूची को क्रम से दोहराएँ।

Q5.भारतीय इतिहासमध्यम

अभिधम्म पिटक का संकलन किस बौद्ध संगीति में हुआ था?

  1. A.राजगृह की प्रथम संगीति
  2. B.वैशाली की द्वितीय संगीति
  3. C.पाटलिपुत्र की तृतीय संगीति
  4. D.कश्मीर की चतुर्थ संगीति
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. पाटलिपुत्र की तृतीय संगीति

व्याख्या

सही उत्तर C, पाटलिपुत्र की तृतीय संगीति है। अशोक के शासनकाल में मोग्गलिपुत्त तिस्स की अध्यक्षता में हुई इस संगीति ने संघ से भेदकारी तत्वों को अलग किया, दर्शन से संबंधित तीसरी पिटक अभिधम्म पिटक को ग्रंथ में जोड़ा और श्रीलंका सहित अन्य देशों में धर्म प्रचारक भेजने का निर्णय लिया।

विकल्प A, राजगृह की प्रथम संगीति में केवल विनय और सुत्त पिटक निश्चित हुए, जिन्हें क्रमशः उपालि और आनंद ने सुनाया। विकल्प B, वैशाली की द्वितीय संगीति संघ के नियमों में ढील को लेकर बुलाई गई और उसी से पहला बड़ा विभाजन हुआ। विकल्प D, कनिष्क के समय कश्मीर की चतुर्थ संगीति में नई पिटक नहीं, संस्कृत टीकाएँ तैयार हुईं। अर्थात तीन पिटक पहली और तीसरी संगीति से तथा दोनों विभाजन दूसरी और चौथी से जुड़े हैं।

Q6.भारतीय इतिहासकठिन

महावीर को कैवल्य अर्थात पूर्ण ज्ञान किस नदी के तट पर प्राप्त हुआ था?

  1. A.निरंजना
  2. B.ऋजुपालिका
  3. C.परुष्णी
  4. D.गंडक
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. ऋजुपालिका

व्याख्या

सही उत्तर B, ऋजुपालिका है। बारह वर्ष की कठोर तपस्या के बाद बयालीस वर्ष की आयु में जृंभिकग्राम में ऋजुपालिका नदी के तट पर साल वृक्ष के नीचे महावीर को कैवल्य प्राप्त हुआ, और उसी क्षण से वे जिन तथा केवलिन कहलाए।

विकल्प A, निरंजना यानी आधुनिक फल्गु बोधगया की वह नदी है जहाँ बुद्ध को पीपल वृक्ष के नीचे ज्ञान मिला, और यही इस प्रश्न का सबसे बड़ा भ्रम है। विकल्प C, परुष्णी यानी आधुनिक रावी वैदिक युग की नदी है, जिसके तट पर दाशराज्ञ युद्ध हुआ था। विकल्प D, गंडक वैशाली के पास बहती है और महावीर के जन्मस्थान कुंडग्राम से जुड़ी है, पर कैवल्य की घटना से इसका संबंध नहीं है। इस जोड़ी को दो पंक्तियों में याद रखें: बुद्ध, पीपल, निरंजना, बोधगया और महावीर, साल, ऋजुपालिका, जृंभिकग्राम।

Q7.भारतीय इतिहासआसान

बोधगया में गौतम बुद्ध की संबोधि किस वृक्ष के नीचे हुई थी?

  1. A.पीपल
  2. B.साल
  3. C.बरगद
  4. D.अशोक
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. पीपल

व्याख्या

सही उत्तर A, पीपल है। बुद्ध को बोधगया में पीपल वृक्ष के नीचे बैठकर ज्ञान प्राप्त हुआ, इसी कारण उस वृक्ष को बोधिवृक्ष कहा जाता है। आरंभिक बौद्ध कला में, जहाँ बुद्ध को मानव रूप में नहीं दिखाया जाता था, यही वृक्ष संबोधि का प्रतीक बना।

विकल्प B, साल वृक्ष इन कथाओं में दो बार आता है पर यहाँ नहीं: लुंबिनी में साल वृक्षों के उपवन में बुद्ध का जन्म हुआ और कुशीनगर में दो साल वृक्षों के बीच उनका निधन हुआ, तथा महावीर को साल वृक्ष के नीचे कैवल्य मिला। विकल्प C, बरगद परंपरा में संबोधि के बाद बोधगया के पास बिताए सप्ताहों से जुड़ा है, स्वयं घटना से नहीं। विकल्प D, अशोक वृक्ष जन्म संबंधी जैन और बौद्ध कथाओं का अंग है। एक वृक्ष को एक घटना से बाँध लें तो पूरा समूह सरल हो जाता है।

Q8.भारतीय इतिहासमध्यम

यह जैन सिद्धांत कि सत्य को अनेक दृष्टिकोणों से देखा जा सकता है, किस नाम से जाना जाता है?

  1. A.अनेकांतवाद
  2. B.शून्यवाद
  3. C.विज्ञानवाद
  4. D.क्षणिकवाद
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. अनेकांतवाद

व्याख्या

सही उत्तर A, अनेकांतवाद है। यह जैन मत है कि प्रत्येक वस्तु के अनंत पक्ष होते हैं और कोई एक कथन पूरे सत्य को नहीं पकड़ सकता। इसे कहने की पद्धति स्याद्वाद है, जिसमें हर कथन के आगे स्यात यानी किसी अपेक्षा से शब्द लगता है, और अंधों तथा हाथी की कथा इसका प्रचलित उदाहरण है।

विकल्प B, शून्यवाद नागार्जुन द्वारा स्थापित महायान की माध्यमिक शाखा का सिद्धांत है। विकल्प C, विज्ञानवाद यह मत है कि केवल चेतना सत्य है, और यह असंग तथा वसुबंधु की योगाचार शाखा से जुड़ा है। विकल्प D, क्षणिकवाद भी बौद्ध सिद्धांत है, जो अनित्यता से निकलता है और कहता है कि हर वस्तु क्षणभंगुर है। परीक्षा में हर वाद किसी एक धर्म का होता है, इसलिए इन्हें कभी आपस में न मिलाएँ।

Q9.भारतीय इतिहासमध्यम

जैन धर्म के प्राचीनतम ग्रंथ अंग किस भाषा में संकलित किए गए थे?

  1. A.पालि
  2. B.संस्कृत
  3. C.अर्धमागधी प्राकृत
  4. D.अपभ्रंश
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. अर्धमागधी प्राकृत

व्याख्या

सही उत्तर C, अर्धमागधी प्राकृत है। महावीर ने मगध की जनभाषा में उपदेश दिया और उनकी शिक्षा को सुरक्षित रखने वाले बारह अंग अर्धमागधी में हैं। इन्हें अंततः गुजरात के वल्लभी में देवर्धि क्षमाश्रमण की अध्यक्षता में हुई दूसरी जैन संगीति में लिपिबद्ध किया गया।

विकल्प A, पालि बौद्ध त्रिपिटक की भाषा है, जैन ग्रंथों की नहीं, और यही इस प्रश्न का सामान्य भ्रम है। विकल्प B, संस्कृत का प्रयोग परवर्ती जैन टीकाओं तथा भद्रबाहु के कल्पसूत्र जैसी रचनाओं में हुआ, मूल अंगों में नहीं। विकल्प D, अपभ्रंश प्राकृत का परवर्ती रूप है, जिसमें मध्यकालीन जैन काव्य लिखा गया। इस जोड़ी को ऐसे याद रखें: बौद्ध धर्म के साथ पालि और जैन धर्म के साथ अर्धमागधी, दोनों कर्मकांडी संस्कृत के विरोध में चुनी गईं। यही कारण था कि दोनों धर्म सामान्य जनता तक तेजी से पहुँचे, क्योंकि उपदेश उसी भाषा में मिला जो लोग प्रतिदिन बोलते थे।

Q10.भारतीय इतिहासकठिन

राजगृह में हुई प्रथम बौद्ध संगीति की अध्यक्षता किसने की थी?

  1. A.महाकस्सप
  2. B.आनंद
  3. C.उपालि
  4. D.मोग्गलिपुत्त तिस्स
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. महाकस्सप

व्याख्या

सही उत्तर A, महाकस्सप है। बुद्ध के महापरिनिर्वाण के तुरंत बाद अजातशत्रु के शासनकाल में राजगृह में हुई प्रथम बौद्ध संगीति की अध्यक्षता महाकस्सप ने की, जिसका उद्देश्य शिक्षा के विकृत होने से पहले उसे निश्चित रूप देना था।

विकल्प B, आनंद बुद्ध के निजी सेवक थे और इस संगीति में उपस्थित भी थे, जहाँ उन्होंने वे उपदेश सुनाए जो सुत्त पिटक बने, पर वे अध्यक्ष नहीं थे। विकल्प C, उपालि ने संघ के नियम सुनाए जो विनय पिटक कहलाए; वे नाई थे और संघ में सम्मिलित हुए थे। विकल्प D, मोग्गलिपुत्त तिस्स ने अशोक के समय पाटलिपुत्र की तृतीय संगीति की अध्यक्षता की और कथावत्थु ग्रंथ की रचना का श्रेय उन्हीं को दिया जाता है। यह प्रश्न ठीक इसी भेद को जाँचता है कि किसी संगीति की अध्यक्षता किसने की और उसमें कौन सा पाठ किसने सुनाया, इसलिए चारों नाम भूमिका सहित याद रखें।

Q11.भारतीय इतिहासमध्यम

आरंभिक बौद्ध कला में चक्र अर्थात धर्मचक्र बुद्ध के जीवन की किस घटना का प्रतीक है?

  1. A.जन्म
  2. B.गृहत्याग
  3. C.प्रथम उपदेश
  4. D.महापरिनिर्वाण
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. प्रथम उपदेश

व्याख्या

सही उत्तर C, प्रथम उपदेश है। सांची और भरहुत के आरंभिक शिल्पी बुद्ध को मानव रूप में नहीं गढ़ते थे, इसलिए उन्होंने प्रतीकों का प्रयोग किया, और चक्र सारनाथ के प्रथम उपदेश का सूचक बना, जिसे स्वयं धर्मचक्र प्रवर्तन कहा जाता है।

विकल्प A, जन्म का प्रतीक इन शिल्पों में कमल तथा हाथी या वृषभ है। विकल्प B, गृहत्याग का प्रतीक बिना सवार का घोड़ा है, जो कपिलवस्तु से बुद्ध को ले जाने वाले कंथक की स्मृति है। विकल्प D, महापरिनिर्वाण का प्रतीक स्तूप है, अर्थात अवशेषों पर बना टीला, और इसीलिए बुद्ध के निधन के बाद स्तूपों की संख्या बढ़ती है। पदचिह्न और रिक्त सिंहासन उनकी सामान्य उपस्थिति के सूचक हैं। प्रतीकों का यह समूह कला एवं संस्कृति खंड में भी उतना ही पूछा जाता है।

Q12.भारतीय इतिहासकठिन

जैन संघ का दिगंबर और श्वेतांबर संप्रदायों में विभाजन परंपरागत रूप से किस जोड़ी से जोड़ा जाता है?

  1. A.भद्रबाहु और स्थूलभद्र
  2. B.मक्खलि गोसाल और जमालि
  3. C.देवर्धि क्षमाश्रमण और हेमचंद्र
  4. D.वसुमित्र और अश्वघोष
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. भद्रबाहु और स्थूलभद्र

व्याख्या

सही उत्तर A, भद्रबाहु और स्थूलभद्र है। मगध के लंबे अकाल में भद्रबाहु मुनियों के एक दल को लेकर कर्नाटक के श्रवणबेलगोला गए, जबकि स्थूलभद्र उत्तर में रहकर पाटलिपुत्र में संगीति बुलाते रहे। लौटने पर दक्षिण के मुनियों ने बदले हुए आचार को अस्वीकार किया और संघ नग्न रहने वाले दिगंबर तथा श्वेत वस्त्र धारण करने वाले श्वेतांबर में बँट गया।

विकल्प B में मक्खलि गोसाल आजीवक संप्रदाय के संस्थापक थे और जमालि महावीर के जामाता तथा पहले मतभेदी, पर इस विभाजन के कारण ये नहीं थे। विकल्प C में देवर्धि क्षमाश्रमण बाद की वल्लभी संगीति के अध्यक्ष थे और हेमचंद्र चालुक्य काल के जैन विद्वान। विकल्प D में दिए दोनों नाम चतुर्थ बौद्ध संगीति के हैं। परंपरा चंद्रगुप्त मौर्य को भी भद्रबाहु के साथ श्रवणबेलगोला में रखती है।

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