आरंभिक मध्यकाल में पांड्य राज्य की राजधानी कौन सा नगर थी?
- A.कांचीपुरम
- B.मदुरै
- C.वातापि
- D.तंजावुर
सही उत्तर
B. मदुरै
व्याख्या
सही उत्तर B, मदुरै है। पांड्य प्रायद्वीप के अत्यंत दक्षिणी भाग पर वैगई नदी के तट पर बसे मदुरै से शासन करते थे, और तट पर उनका मोती निकालने वाला बंदरगाह कोरकई था। छठी शताब्दी में कडुंगोन ने इस वंश को पुनर्जीवित किया और कलभ्र अंतराल समाप्त करने में भूमिका निभाई; पल्लव और चोल शताब्दियों में भी मदुरै उनकी राजधानी बना रहा।
विकल्प A, कांचीपुरम, उत्तरी तमिल प्रदेश में पल्लवों की राजधानी थी, जो कैलाशनाथ मंदिर के लिए प्रसिद्ध है। विकल्प C, वातापि, अर्थात कर्नाटक का आधुनिक बादामी, चालुक्यों की राजधानी थी, जिन्होंने पल्लवों और हर्ष दोनों से युद्ध किया। विकल्प D, तंजावुर, बाद में महत्वपूर्ण हुआ, जब नौवीं शताब्दी में विजयालय से आरंभ होकर वह साम्राज्यवादी चोलों की राजधानी बना और राजराज प्रथम के बृहदेश्वर मंदिर के लिए जाना गया।
पूरा लेख पढ़ें: हर्षवर्धन और दक्षिण भारतीय राज्य: शासक और प्रश्न
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंहर्षवर्धन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही नहीं है?
- A.हर्षवर्धन ने लगभग 1400 वर्ष पूर्व शासन किया था
- B.ह्वेनसांग ने हर्ष के दरबार में बहुत समय बिताया
- C.हर्षवर्धन का दरबारी कवि हरिषेण था
- D.हर्षचरित हर्षवर्धन पर लिखी गई जीवनी है
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. हर्षवर्धन का दरबारी कवि हरिषेण था
व्याख्या
सही उत्तर C है, क्योंकि हर्षवर्धन का दरबारी कवि बाणभट्ट था, हरिषेण नहीं। हरिषेण तो कहीं पहले की शताब्दी का है: वह समुद्रगुप्त का दरबारी कवि था और उसने प्रयाग प्रशस्ति अर्थात इलाहाबाद स्तंभ अभिलेख की रचना की थी। इसलिए यही कथन गलत है, और प्रश्न गलत कथन ही पूछ रहा है।
विकल्प A सही कथन है, क्योंकि हर्ष ने 606 ईस्वी से लगभग 647 ईस्वी तक शासन किया, जो आज से लगभग चौदह सौ वर्ष पूर्व का काल है। विकल्प B भी सही है, क्योंकि चीनी यात्री ह्वेनसांग 629 से 645 ईस्वी के बीच भारत में रहा और कई वर्ष हर्ष के दरबार में बिताए, जिसका विवरण उसकी पुस्तक सी-यू-की में है। विकल्प D भी सही है, क्योंकि हर्षचरित बाणभट्ट द्वारा लिखी गई हर्ष की जीवनी है और इसे संस्कृत का पहला ऐतिहासिक जीवनचरित माना जाता है।
राजा शशांक, जिसके विरुद्ध हर्षवर्धन ने युद्ध की घोषणा की, किस राज्य का शासक था?
- A.कान्यकुब्ज
- B.जूनागढ़
- C.मगध
- D.गौड़
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. गौड़
व्याख्या
सही उत्तर D, गौड़ है। शशांक गौड़ का राजा था, अर्थात बंगाल का वह क्षेत्र जिसका केंद्र कर्णसुवर्ण था। उसने हर्ष के बड़े भाई राज्यवर्धन की हत्या की थी, और इसी हत्या का बदला लेने तथा अपनी बहन राज्यश्री को वापस पाने के लिए हर्ष ने युद्ध की घोषणा की और कामरूप के भास्करवर्मन से संधि की।
विकल्प A, कान्यकुब्ज, कन्नौज का प्राचीन नाम है, जो मौखरि राजधानी थी और जिसे हर्ष ने स्वयं अपनी राजधानी बनाया, अतः वह हर्ष का शत्रु राज्य नहीं था। विकल्प B, जूनागढ़, गुजरात के सौराष्ट्र का स्थान है, जो अशोक के शिलालेख तथा रुद्रदामन और स्कंदगुप्त के अभिलेखों के लिए जाना जाता है और शशांक से इसका कोई संबंध नहीं। विकल्प C, मगध, दक्षिण बिहार का राज्य है जहाँ हर्यंक, नंद, मौर्य और गुप्त शासक हुए; हर्ष के समय यह उसके ही साम्राज्य का भाग था।
निम्नलिखित में से कौन सी पुस्तक हर्षवर्धन द्वारा लिखी गई थी?
- A.हर्षचरित
- B.कादंबरी
- C.रत्नावली
- D.गीतगोविंद
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. रत्नावली
व्याख्या
सही उत्तर C, रत्नावली है। हर्षवर्धन राजा के साथ-साथ नाटककार भी था और संस्कृत के तीन नाटक उसके नाम से जुड़े हैं: रत्नावली, प्रियदर्शिका और नागानंद। रत्नावली राजा उदयन और रत्नावली की प्रेमकथा पर आधारित दरबारी नाटिका है और प्रश्नपत्रों में यही रचना सबसे अधिक पूछी जाती है।
विकल्प A, हर्षचरित, हर्ष के बारे में अवश्य है किंतु उसकी लिखी हुई नहीं; यह उसके दरबारी कवि बाणभट्ट की रचना है। विकल्प B, कादंबरी, भी बाणभट्ट की ही रचना है, जो उसकी मृत्यु के कारण अधूरी रह गई और उसके पुत्र ने पूरी की। विकल्प D, गीतगोविंद, बहुत बाद की रचना है: इसे बारहवीं शताब्दी में बंगाल के सेन राजा लक्ष्मणसेन के दरबार में जयदेव ने लिखा और इसमें राधा-कृष्ण का वर्णन है। अतः केवल रत्नावली ही राजा की अपनी कृति है।
अपनी साहित्यिक कृतियों के लिए प्रसिद्ध 'बाणभट्ट' किसके शासनकाल में हुआ?
- A.अशोक
- B.बिंदुसार
- C.चंद्रगुप्त द्वितीय
- D.हर्षवर्धन
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. हर्षवर्धन
व्याख्या
सही उत्तर D, हर्षवर्धन है। बाणभट्ट सातवीं शताब्दी ईस्वी में हर्ष का दरबारी कवि था। उसने अपने आश्रयदाता की जीवनी हर्षचरित लिखी, जो संस्कृत का पहला ऐतिहासिक जीवनचरित है, तथा गद्य कथा कादंबरी लिखी, जिसे उसके पुत्र भूषणभट्ट ने पूरा किया।
विकल्प A, अशोक, तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व का शासक था, अर्थात नौ सौ वर्ष पहले का, और उसके अभिलेख प्राकृत में हैं, संस्कृत दरबारी काव्य में नहीं। विकल्प B, बिंदुसार, अशोक का पिता और उससे भी पहले का मौर्य शासक था। विकल्प C, गुप्त शासक चंद्रगुप्त द्वितीय, लगभग 375 से 415 ईस्वी तक रहा; परंपरा में उसके दरबार से कालिदास सहित नवरत्न जोड़े जाते हैं, जबकि उसके पिता समुद्रगुप्त के अभिलेख का कवि हरिषेण था। बाणभट्ट इनमें से किसी दरबार का नहीं, केवल हर्ष के दरबार का है।
हर्षवर्धन की पराजय का उल्लेख करने वाला ऐहोल अभिलेख किस शासक के दरबारी कवि ने रचा था?
- A.नरसिंहवर्मन प्रथम
- B.पुलकेशिन द्वितीय
- C.दंतिदुर्ग
- D.महेंद्रवर्मन प्रथम
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सही उत्तर: B. पुलकेशिन द्वितीय
व्याख्या
सही उत्तर B, पुलकेशिन द्वितीय है। ऐहोल अभिलेख की रचना संस्कृत में बादामी के चालुक्य राजा पुलकेशिन द्वितीय के जैन दरबारी कवि रविकीर्ति ने की थी। इसमें उसकी विजयों की प्रशंसा है और कहा गया है कि उत्तरापथ के स्वामी हर्ष का हर्ष तब जाता रहा जब युद्ध में उसके हाथी मारे गए; लगभग 618 ईस्वी में नर्मदा पर हुई हर्ष की पराजय का यही एकमात्र अभिलेखीय साक्ष्य है।
विकल्प A, नरसिंहवर्मन प्रथम, वह पल्लव राजा था जिसने बाद में वातापि जीतकर पुलकेशिन द्वितीय को मारा, किंतु यह अभिलेख उसका नहीं है। विकल्प C, दंतिदुर्ग, राष्ट्रकूट शासक था जिसने लगभग 753 ईस्वी में चालुक्य सत्ता समाप्त की, अर्थात अभिलेख के एक शताब्दी से भी अधिक बाद। विकल्प D, महेंद्रवर्मन प्रथम, नरसिंहवर्मन प्रथम का पिता और मत्तविलास प्रहसन का लेखक था; पुलकेशिन द्वितीय ने उसे हराया था, इसलिए वह अपने प्रतिद्वंद्वी की प्रशस्ति क्यों लिखवाता।