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भारतीय इतिहास क्विज: हर्षवर्धन और दक्षिण भारतीय राज्य

  • 12 प्रश्न
  • 12 मिनट
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इस क्विज के बारे में

भारतीय इतिहास के अंतर्गत "हर्षवर्धन और दक्षिण भारतीय राज्य" विषय पर यह क्विज़ 12 बहुविकल्पीय प्रश्न रखता है, जो GK24 के इसी विषय के नोट्स के साथ प्रकाशित सत्यापित प्रश्न हैं, जिनमें 4 प्रश्न पिछले वर्षों की वास्तविक परीक्षाओं में पूछे गए हैं। हर प्रश्न के साथ सही विकल्प की और शेष विकल्पों के गलत होने की पूरी व्याख्या दी गई है, ताकि आप केवल उत्तर याद न करें बल्कि उसके पीछे का तथ्य समझें। नोट्स पढ़ने के तुरंत बाद इसे हल करें, निर्धारित समय का पालन करें, और अंत में व्याख्याएं पढ़कर कमजोर बिंदु चिह्नित करें। परीक्षा से पहले दोहराव के लिए इसे दोबारा दें।

इस क्विज के प्रश्न

12 प्रश्न उत्तर और व्याख्या सहित

Q1.भारतीय इतिहासपूछा गया: SSC CGL · 02 Dec 2022, Shift 2मध्यम

हर्षवर्धन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही नहीं है?

  1. A.हर्षवर्धन ने लगभग 1400 वर्ष पूर्व शासन किया था
  2. B.ह्वेनसांग ने हर्ष के दरबार में बहुत समय बिताया
  3. C.हर्षवर्धन का दरबारी कवि हरिषेण था
  4. D.हर्षचरित हर्षवर्धन पर लिखी गई जीवनी है
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. हर्षवर्धन का दरबारी कवि हरिषेण था

व्याख्या

सही उत्तर C है, क्योंकि हर्षवर्धन का दरबारी कवि बाणभट्ट था, हरिषेण नहीं। हरिषेण तो कहीं पहले की शताब्दी का है: वह समुद्रगुप्त का दरबारी कवि था और उसने प्रयाग प्रशस्ति अर्थात इलाहाबाद स्तंभ अभिलेख की रचना की थी। इसलिए यही कथन गलत है, और प्रश्न गलत कथन ही पूछ रहा है।

विकल्प A सही कथन है, क्योंकि हर्ष ने 606 ईस्वी से लगभग 647 ईस्वी तक शासन किया, जो आज से लगभग चौदह सौ वर्ष पूर्व का काल है। विकल्प B भी सही है, क्योंकि चीनी यात्री ह्वेनसांग 629 से 645 ईस्वी के बीच भारत में रहा और कई वर्ष हर्ष के दरबार में बिताए, जिसका विवरण उसकी पुस्तक सी-यू-की में है। विकल्प D भी सही है, क्योंकि हर्षचरित बाणभट्ट द्वारा लिखी गई हर्ष की जीवनी है और इसे संस्कृत का पहला ऐतिहासिक जीवनचरित माना जाता है।

Q2.भारतीय इतिहासपूछा गया: SSC MTS · 14 Oct 2021, Shift 3आसान

राजा शशांक, जिसके विरुद्ध हर्षवर्धन ने युद्ध की घोषणा की, किस राज्य का शासक था?

  1. A.कान्यकुब्ज
  2. B.जूनागढ़
  3. C.मगध
  4. D.गौड़
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. गौड़

व्याख्या

सही उत्तर D, गौड़ है। शशांक गौड़ का राजा था, अर्थात बंगाल का वह क्षेत्र जिसका केंद्र कर्णसुवर्ण था। उसने हर्ष के बड़े भाई राज्यवर्धन की हत्या की थी, और इसी हत्या का बदला लेने तथा अपनी बहन राज्यश्री को वापस पाने के लिए हर्ष ने युद्ध की घोषणा की और कामरूप के भास्करवर्मन से संधि की।

विकल्प A, कान्यकुब्ज, कन्नौज का प्राचीन नाम है, जो मौखरि राजधानी थी और जिसे हर्ष ने स्वयं अपनी राजधानी बनाया, अतः वह हर्ष का शत्रु राज्य नहीं था। विकल्प B, जूनागढ़, गुजरात के सौराष्ट्र का स्थान है, जो अशोक के शिलालेख तथा रुद्रदामन और स्कंदगुप्त के अभिलेखों के लिए जाना जाता है और शशांक से इसका कोई संबंध नहीं। विकल्प C, मगध, दक्षिण बिहार का राज्य है जहाँ हर्यंक, नंद, मौर्य और गुप्त शासक हुए; हर्ष के समय यह उसके ही साम्राज्य का भाग था।

Q3.भारतीय इतिहासपूछा गया: UPSC CAPF · 7 Aug 2022मध्यम

निम्नलिखित में से कौन सी पुस्तक हर्षवर्धन द्वारा लिखी गई थी?

  1. A.हर्षचरित
  2. B.कादंबरी
  3. C.रत्नावली
  4. D.गीतगोविंद
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. रत्नावली

व्याख्या

सही उत्तर C, रत्नावली है। हर्षवर्धन राजा के साथ-साथ नाटककार भी था और संस्कृत के तीन नाटक उसके नाम से जुड़े हैं: रत्नावली, प्रियदर्शिका और नागानंद। रत्नावली राजा उदयन और रत्नावली की प्रेमकथा पर आधारित दरबारी नाटिका है और प्रश्नपत्रों में यही रचना सबसे अधिक पूछी जाती है।

विकल्प A, हर्षचरित, हर्ष के बारे में अवश्य है किंतु उसकी लिखी हुई नहीं; यह उसके दरबारी कवि बाणभट्ट की रचना है। विकल्प B, कादंबरी, भी बाणभट्ट की ही रचना है, जो उसकी मृत्यु के कारण अधूरी रह गई और उसके पुत्र ने पूरी की। विकल्प D, गीतगोविंद, बहुत बाद की रचना है: इसे बारहवीं शताब्दी में बंगाल के सेन राजा लक्ष्मणसेन के दरबार में जयदेव ने लिखा और इसमें राधा-कृष्ण का वर्णन है। अतः केवल रत्नावली ही राजा की अपनी कृति है।

Q4.भारतीय इतिहासपूछा गया: SSC MTS · 14 Oct 2021, Shift 2आसान

अपनी साहित्यिक कृतियों के लिए प्रसिद्ध 'बाणभट्ट' किसके शासनकाल में हुआ?

  1. A.अशोक
  2. B.बिंदुसार
  3. C.चंद्रगुप्त द्वितीय
  4. D.हर्षवर्धन
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. हर्षवर्धन

व्याख्या

सही उत्तर D, हर्षवर्धन है। बाणभट्ट सातवीं शताब्दी ईस्वी में हर्ष का दरबारी कवि था। उसने अपने आश्रयदाता की जीवनी हर्षचरित लिखी, जो संस्कृत का पहला ऐतिहासिक जीवनचरित है, तथा गद्य कथा कादंबरी लिखी, जिसे उसके पुत्र भूषणभट्ट ने पूरा किया।

विकल्प A, अशोक, तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व का शासक था, अर्थात नौ सौ वर्ष पहले का, और उसके अभिलेख प्राकृत में हैं, संस्कृत दरबारी काव्य में नहीं। विकल्प B, बिंदुसार, अशोक का पिता और उससे भी पहले का मौर्य शासक था। विकल्प C, गुप्त शासक चंद्रगुप्त द्वितीय, लगभग 375 से 415 ईस्वी तक रहा; परंपरा में उसके दरबार से कालिदास सहित नवरत्न जोड़े जाते हैं, जबकि उसके पिता समुद्रगुप्त के अभिलेख का कवि हरिषेण था। बाणभट्ट इनमें से किसी दरबार का नहीं, केवल हर्ष के दरबार का है।

Q5.भारतीय इतिहासमध्यम

हर्षवर्धन की पराजय का उल्लेख करने वाला ऐहोल अभिलेख किस शासक के दरबारी कवि ने रचा था?

  1. A.नरसिंहवर्मन प्रथम
  2. B.पुलकेशिन द्वितीय
  3. C.दंतिदुर्ग
  4. D.महेंद्रवर्मन प्रथम
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. पुलकेशिन द्वितीय

व्याख्या

सही उत्तर B, पुलकेशिन द्वितीय है। ऐहोल अभिलेख की रचना संस्कृत में बादामी के चालुक्य राजा पुलकेशिन द्वितीय के जैन दरबारी कवि रविकीर्ति ने की थी। इसमें उसकी विजयों की प्रशंसा है और कहा गया है कि उत्तरापथ के स्वामी हर्ष का हर्ष तब जाता रहा जब युद्ध में उसके हाथी मारे गए; लगभग 618 ईस्वी में नर्मदा पर हुई हर्ष की पराजय का यही एकमात्र अभिलेखीय साक्ष्य है।

विकल्प A, नरसिंहवर्मन प्रथम, वह पल्लव राजा था जिसने बाद में वातापि जीतकर पुलकेशिन द्वितीय को मारा, किंतु यह अभिलेख उसका नहीं है। विकल्प C, दंतिदुर्ग, राष्ट्रकूट शासक था जिसने लगभग 753 ईस्वी में चालुक्य सत्ता समाप्त की, अर्थात अभिलेख के एक शताब्दी से भी अधिक बाद। विकल्प D, महेंद्रवर्मन प्रथम, नरसिंहवर्मन प्रथम का पिता और मत्तविलास प्रहसन का लेखक था; पुलकेशिन द्वितीय ने उसे हराया था, इसलिए वह अपने प्रतिद्वंद्वी की प्रशस्ति क्यों लिखवाता।

Q6.भारतीय इतिहासआसान

हर्षवर्धन ने अपनी राजधानी थानेश्वर से हटाकर किस नगर में स्थापित की?

  1. A.पाटलिपुत्र
  2. B.कन्नौज
  3. C.उज्जैन
  4. D.प्रयाग
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. कन्नौज

व्याख्या

सही उत्तर B, कन्नौज है। हर्ष को पुष्यभूति वंश से आधुनिक हरियाणा का थानेश्वर विरासत में मिला था। जब उसकी बहन राज्यश्री के पति ग्रहवर्मन, जो कन्नौज का मौखरि शासक था, मारे गए, तब हर्ष ने दोनों राज्यों को मिलाकर गंगा तट पर स्थित कन्नौज को अपनी राजधानी बनाया, और अगली दो शताब्दियों तक कन्नौज उत्तर भारत की सर्वोच्चता का प्रतीक बना रहा।

विकल्प A, पाटलिपुत्र, मौर्यों और गुप्तों की राजधानी अवश्य रहा, किंतु हर्ष के समय तक उसका महत्व घट चुका था। विकल्प C, उज्जैन, अवंति का प्रसिद्ध नगर और गुप्तों का प्रांतीय केंद्र था, पर हर्ष की राजधानी कभी नहीं रहा। विकल्प D, प्रयाग, गंगा और यमुना के संगम पर वह स्थान है जहाँ हर्ष प्रत्येक पाँचवें वर्ष सभा करके अपना कोष दान करता था, अर्थात वह उसका धार्मिक केंद्र था, शासन का केंद्र नहीं।

Q7.भारतीय इतिहासमध्यम

महाबलीपुरम के एकाश्म रथों का निर्माण किस पल्लव शासक के काल में हुआ?

  1. A.सिंहविष्णु
  2. B.महेंद्रवर्मन प्रथम
  3. C.नरसिंहवर्मन प्रथम
  4. D.अपराजित
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. नरसिंहवर्मन प्रथम

व्याख्या

सही उत्तर C, नरसिंहवर्मन प्रथम है। उसे मामल्ल अर्थात महान मल्ल भी कहा जाता है, और इसी उपाधि पर बंदरगाह नगर मामल्लपुरम या महाबलीपुरम का नाम पड़ा। वहाँ के पाँच एकाश्म रथ, जिनमें से प्रत्येक एक ही चट्टान से तराशा गया है और जिनके नाम पांडवों तथा द्रौपदी पर हैं, सातवीं शताब्दी के मध्य में उसी के शासनकाल के हैं।

विकल्प A, सिंहविष्णु, आरंभिक पल्लव शासक था जिसने तमिल प्रदेश पर कलभ्रों की पकड़ समाप्त की, किंतु इस प्रकार का कोई स्मारक नहीं छोड़ा। विकल्प B, महेंद्रवर्मन प्रथम, ने पल्लव स्थापत्य के शैलकृत गुफा चरण की शुरुआत की, जैसे मंडगपट्टु के मंडप, पर स्वतंत्र रथ नहीं बनवाए। विकल्प D, अपराजित, अंतिम पल्लव राजा था जिसे नौवीं शताब्दी में चोल आदित्य प्रथम ने हराया। बाद का संरचनात्मक तटीय मंदिर नरसिंहवर्मन द्वितीय राजसिंह ने बनवाया।

Q8.भारतीय इतिहासकठिन

महाबलीपुरम का तटीय मंदिर और कांचीपुरम का कैलाशनाथ मंदिर किस शासक ने बनवाया?

  1. A.नरसिंहवर्मन द्वितीय राजसिंह
  2. B.पुलकेशिन द्वितीय
  3. C.कृष्ण प्रथम
  4. D.राजराज प्रथम
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. नरसिंहवर्मन द्वितीय राजसिंह

व्याख्या

सही उत्तर A, नरसिंहवर्मन द्वितीय राजसिंह है। उसका शासन आठवीं शताब्दी के आरंभ में था और उसी से पल्लव स्थापत्य का संरचनात्मक चरण आरंभ होता है, जब मंदिर चट्टान काटकर नहीं, बल्कि तराशे हुए पत्थरों को जोड़कर बनाए जाने लगे। महाबलीपुरम का समुद्र तट पर स्थित तटीय मंदिर और कांचीपुरम का कैलाशनाथ मंदिर दोनों उसी के बनवाए हुए हैं।

विकल्प B, पुलकेशिन द्वितीय, बादामी का चालुक्य राजा था जो हर्ष को हराने के लिए प्रसिद्ध है, और उसके वंश ने ऐहोल, बादामी तथा पट्टदकल में निर्माण कराया। विकल्प C, कृष्ण प्रथम, वह राष्ट्रकूट शासक था जिसने आठवीं शताब्दी में एलोरा का कैलाश मंदिर एक ही पहाड़ी से तराशवाया, और समान नाम के कारण इसे प्रायः कांचीपुरम वाले मंदिर से मिला दिया जाता है। विकल्प D, राजराज प्रथम, वह चोल शासक था जिसने लगभग 1010 ईस्वी में तंजावुर का बृहदेश्वर मंदिर बनवाया, अर्थात तीन शताब्दी बाद।

Q9.भारतीय इतिहासमध्यम

किस चीनी यात्री ने नालंदा में आचार्य शीलभद्र के अधीन अध्ययन किया था?

  1. A.फाह्यान
  2. B.ह्वेनसांग
  3. C.इत्सिंग
  4. D.वांग-ह्वेन-त्से
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. ह्वेनसांग

व्याख्या

सही उत्तर B, ह्वेनसांग है। वह 630 ईस्वी में भारत पहुँचा, लगभग पंद्रह वर्ष यहाँ रहा और नालंदा महाविहार में उसके वयोवृद्ध प्रमुख आचार्य शीलभद्र के अधीन योगाचार दर्शन का अध्ययन किया। उसका यात्रा विवरण सी-यू-की हर्ष के साम्राज्य का सबसे विस्तृत उपलब्ध वर्णन है।

विकल्प A, फाह्यान, दो शताब्दी पहले गुप्त शासक चंद्रगुप्त द्वितीय के समय आया था, और तब नालंदा वह विश्वविद्यालय बना ही नहीं था जिसका श्रेय उसे कभी-कभी दे दिया जाता है। विकल्प C, इत्सिंग, सातवीं शताब्दी में बाद में आया, अर्थात हर्ष की मृत्यु के पश्चात, और उसने मठीय अनुशासन तथा सुमात्रा होकर जाने वाले समुद्री मार्ग पर लिखा। विकल्प D, वांग-ह्वेन-त्से, यात्री नहीं बल्कि चीनी राजदूत था; वह हर्ष की मृत्यु के बाद आया, अरुणाश्व ने उस पर आक्रमण किया और वह तिब्बती तथा नेपाली सैनिकों के साथ लौटकर उसे पराजित कर गया।

Q10.भारतीय इतिहासआसान

आरंभिक मध्यकाल में पांड्य राज्य की राजधानी कौन सा नगर थी?

  1. A.कांचीपुरम
  2. B.मदुरै
  3. C.वातापि
  4. D.तंजावुर
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. मदुरै

व्याख्या

सही उत्तर B, मदुरै है। पांड्य प्रायद्वीप के अत्यंत दक्षिणी भाग पर वैगई नदी के तट पर बसे मदुरै से शासन करते थे, और तट पर उनका मोती निकालने वाला बंदरगाह कोरकई था। छठी शताब्दी में कडुंगोन ने इस वंश को पुनर्जीवित किया और कलभ्र अंतराल समाप्त करने में भूमिका निभाई; पल्लव और चोल शताब्दियों में भी मदुरै उनकी राजधानी बना रहा।

विकल्प A, कांचीपुरम, उत्तरी तमिल प्रदेश में पल्लवों की राजधानी थी, जो कैलाशनाथ मंदिर के लिए प्रसिद्ध है। विकल्प C, वातापि, अर्थात कर्नाटक का आधुनिक बादामी, चालुक्यों की राजधानी थी, जिन्होंने पल्लवों और हर्ष दोनों से युद्ध किया। विकल्प D, तंजावुर, बाद में महत्वपूर्ण हुआ, जब नौवीं शताब्दी में विजयालय से आरंभ होकर वह साम्राज्यवादी चोलों की राजधानी बना और राजराज प्रथम के बृहदेश्वर मंदिर के लिए जाना गया।

Q11.भारतीय इतिहासमध्यम

शिव की स्तुति में भजन रचने वाले तिरसठ तमिल संत किस नाम से जाने जाते हैं?

  1. A.आलवार
  2. B.नयनार
  3. C.सिद्धार
  4. D.आचार्य
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. नयनार

व्याख्या

सही उत्तर B, नयनार है। नयनार तमिल भक्ति आंदोलन के शैव संत थे, जिनकी परंपरागत संख्या तिरसठ मानी जाती है, और इनमें अप्पर, संबंदर, सुंदरर तथा माणिक्कवाचकर सम्मिलित हैं। उनके भजनों का संग्रह तेवारम कहलाता है, और उनकी भक्ति ने साधारण जन को जैन तथा बौद्ध मत से हटाकर मंदिर पूजा की ओर मोड़ा।

विकल्प A, आलवार, इनके वैष्णव समकक्ष थे, जिनकी संख्या बारह है और जिनके विष्णु विषयक भजन नालायिर दिव्य प्रबंधम् बनाते हैं; आंडाल उनमें एकमात्र स्त्री संत हैं। विकल्प C, सिद्धार, तमिल की एक अलग रहस्यवादी और चिकित्सा परंपरा के साधक थे, इस प्रकार के मंदिर भजनकार नहीं। विकल्प D, आचार्य, जैसे नाथमुनि और रामानुज, बाद में हुए और वे वैष्णव दर्शन को व्यवस्थित करने वाले शिक्षक थे, न कि गाने वाले संत। नयनार और आलवार का शिव-विष्णु जोड़ा ही परीक्षा में पूछा जाता है।

Q12.भारतीय इतिहासमध्यम

बादामी के चालुक्य वंश का अंत किस शासक ने किया?

  1. A.दंतिदुर्ग
  2. B.आदित्य प्रथम
  3. C.भास्करवर्मन
  4. D.कुब्ज विष्णुवर्धन
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. दंतिदुर्ग

व्याख्या

सही उत्तर A, दंतिदुर्ग है। वह राष्ट्रकूट शक्ति का संस्थापक था और उसने लगभग 753 ईस्वी में बादामी के अंतिम प्रमुख चालुक्य शासक कीर्तिवर्मन द्वितीय को अपदस्थ कर दिया। इसके बाद राष्ट्रकूटों ने मान्यखेट से दक्कन पर शासन किया और एलोरा का शैलकृत कैलाश मंदिर छोड़ा, जिसका निर्माण दंतिदुर्ग के उत्तराधिकारी कृष्ण प्रथम के समय आरंभ हुआ।

विकल्प B, आदित्य प्रथम, नौवीं शताब्दी का चोल राजा था जिसने अंतिम पल्लव अपराजित को हराया, किसी चालुक्य को नहीं। विकल्प C, भास्करवर्मन, असम के कामरूप का राजा और शशांक के विरुद्ध हर्ष का मित्र था, और उसने दक्कन में कभी अभियान नहीं किया। विकल्प D, कुब्ज विष्णुवर्धन, पुलकेशिन द्वितीय का भाई था जिसने तटीय आंध्र के वेंगी में पूर्वी चालुक्य शाखा की स्थापना की; उसने वंश की शक्ति बढ़ाई, समाप्त नहीं की।

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