मुख्य सामग्री पर जाएं
GK24
GK क्विजभारतीय इतिहास

भारतीय इतिहास मिश्रित क्विज: सेट 25

  • 20 प्रश्न
  • 20 मिनट
  • कठिनाई: मध्यम
क्विज शुरू करें
Read in English

इस क्विज के बारे में

भारतीय इतिहास मिश्रित क्विज़ (सेट 25) में 20 बहुविकल्पीय प्रश्न हैं, जो इस विषय के 10 अलग-अलग टॉपिक से लिए गए हैं: हर्षवर्धन और दक्षिण भारतीय राज्य, सुभाष चंद्र बोस और आज़ाद हिंद फ़ौज, दिल्ली सल्तनत और अन्य। इनमें से 11 प्रश्न पिछले वर्षों की वास्तविक परीक्षाओं में पूछे जा चुके हैं। टॉपिक-वार क्विज़ एक अध्याय की जाँच करता है, जबकि यह सेट पूरे विषय को एक साथ दोहराता है, जैसा परीक्षा में होता है जहाँ अगला प्रश्न किसी भी अध्याय से आ सकता है। हर प्रश्न के साथ सही विकल्प की और बाकी विकल्पों के गलत होने की व्याख्या दी गई है। समय का पालन करते हुए हल करें, अंत में व्याख्याएँ पढ़ें और जिस टॉपिक में गलती हुई उसके नोट्स दोबारा पढ़ें।

इस क्विज के प्रश्न

20 प्रश्न उत्तर और व्याख्या सहित

Q1.भारतीय इतिहासआसान

हर्षवर्धन ने अपनी राजधानी थानेश्वर से हटाकर किस नगर में स्थापित की?

  1. A.पाटलिपुत्र
  2. B.कन्नौज
  3. C.उज्जैन
  4. D.प्रयाग
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. कन्नौज

व्याख्या

सही उत्तर B, कन्नौज है। हर्ष को पुष्यभूति वंश से आधुनिक हरियाणा का थानेश्वर विरासत में मिला था। जब उसकी बहन राज्यश्री के पति ग्रहवर्मन, जो कन्नौज का मौखरि शासक था, मारे गए, तब हर्ष ने दोनों राज्यों को मिलाकर गंगा तट पर स्थित कन्नौज को अपनी राजधानी बनाया, और अगली दो शताब्दियों तक कन्नौज उत्तर भारत की सर्वोच्चता का प्रतीक बना रहा।

विकल्प A, पाटलिपुत्र, मौर्यों और गुप्तों की राजधानी अवश्य रहा, किंतु हर्ष के समय तक उसका महत्व घट चुका था। विकल्प C, उज्जैन, अवंति का प्रसिद्ध नगर और गुप्तों का प्रांतीय केंद्र था, पर हर्ष की राजधानी कभी नहीं रहा। विकल्प D, प्रयाग, गंगा और यमुना के संगम पर वह स्थान है जहाँ हर्ष प्रत्येक पाँचवें वर्ष सभा करके अपना कोष दान करता था, अर्थात वह उसका धार्मिक केंद्र था, शासन का केंद्र नहीं।

Q2.भारतीय इतिहासपूछा गया: SSC CHSL · 19 Oct 2020, Shift 3आसान

'दिल्ली चलो' और 'तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूँगा' के नारे किसने दिए?

  1. A.मोहनदास करमचंद गांधी
  2. B.जवाहरलाल नेहरू
  3. C.सुभाष चंद्र बोस
  4. D.सरदार वल्लभ भाई पटेल
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. सुभाष चंद्र बोस

व्याख्या

सही उत्तर है C, सुभाष चंद्र बोस। दोनों नारे नेताजी और आजाद हिंद फौज से जुड़े हैं, जिसका नेतृत्व उन्होंने 1943 से किया। दिल्ली चलो का नारा देकर उन्होंने दिल्ली की ओर बढ़ना फौज का लक्ष्य बनाया, और दक्षिण पूर्व एशिया के भारतीयों से अपनी प्रसिद्ध अपील में आजादी के बदले खून माँगा। उन्होंने जय हिंद का अभिवादन भी दिया, अक्टूबर 1943 में सिंगापुर में आजाद हिंद की अस्थायी सरकार बनाई, और महिला सैनिकों की रानी झाँसी रेजिमेंट खड़ी की। विकल्प A गलत है, क्योंकि गांधीजी के नारे 1942 में दिए गए भारत छोड़ो और करो या मरो थे। विकल्प B गलत है, क्योंकि नेहरू अपने ट्रिस्ट विद डेस्टिनी भाषण के लिए याद किए जाते हैं, इन नारों के लिए नहीं। विकल्प D गलत है, क्योंकि लौह पुरुष पटेल बारदोली आंदोलन और देशी रियासतों के विलय से जुड़े हैं। परीक्षा टिप: दिल्ली चलो, जय हिंद और खून दो, तीनों सुभाष चंद्र बोस की ओर इशारा करते हैं।

Q3.भारतीय इतिहासपूछा गया: SSC GD कांस्टेबल · 22 Nov 2021, Shift 2आसान

दिल्ली सल्तनत के काल में निम्नलिखित में से कौन सा कर वसूला जाता था?

  1. A.रैयतवाड़ी कर
  2. B.आय कर
  3. C.महालवाड़ी कर
  4. D.खराज कर
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. खराज कर

व्याख्या

सही उत्तर D, खराज कर है। खराज कृषि उपज पर लगने वाला भूमि कर था और दिल्ली सल्तनत की आय का सबसे बड़ा एकल स्रोत था। अलाउद्दीन खिलजी ने दोआब में यह मांग उपज के आधे तक बढ़ाई और आकलन के लिए भूमि की पैमाइश कराई। खराज के साथ राज्य मुसलमानों से जकात, गैर-मुस्लिमों से जजिया और युद्ध की लूट में अपना हिस्सा खम्स लेता था। विकल्प A गलत है क्योंकि रैयतवाड़ी बंदोबस्त अंग्रेजों की भू-राजस्व व्यवस्था थी, जिसे थॉमस मुनरो और अलेक्जेंडर रीड ने मद्रास तथा बंबई प्रेसीडेंसी में सदियों बाद लागू किया। विकल्प B गलत है क्योंकि भारत में आय कर 1860 से आरंभ हुआ, जब जेम्स विल्सन ने औपनिवेशिक सरकार के अधीन इसे लागू किया। विकल्प C गलत है क्योंकि महालवाड़ी व्यवस्था भी अंग्रेजों का बंदोबस्त था, जो हॉल्ट मैकेंजी और बाद में विलियम बैंटिक से जुड़ा था और जिसमें गाँव या महाल राजस्व की इकाई था।

Q4.भारतीय इतिहासपूछा गया: CTET · 21st Dec 2021मध्यम

औपनिवेशिक भारत में भारतीय लोहा और इस्पात धातुकर्म के पतन के कारण के रूप में आप निम्नलिखित में से किसे बताएंगे? A. इंग्लैंड से लोहा और इस्पात आयात किया जाता था। B. नए वन कानूनों ने लोगों को आरक्षित वनों में लकड़ी लेने जाने से रोक दिया।

  1. A.केवल A
  2. B.केवल B
  3. C.A और B दोनों
  4. D.न A न B
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. A और B दोनों

व्याख्या

सही उत्तर है C, A और B दोनों। भारत के गांवों के लोहा गलाने वाले कारीगर एक साथ दो दबावों से उजड़ गए। उन्नीसवीं सदी के मध्य से ब्रिटिश कारखानों में बना सस्ता लोहा और इस्पात भारत में बड़ी मात्रा में आने लगा, और स्थानीय कारीगर उस दाम का मुकाबला नहीं कर सके, इसलिए उनके धातु की मांग गिर गई। उसी समय उन्नीसवीं सदी के उत्तरार्ध के औपनिवेशिक वन कानूनों ने बड़े इलाकों को आरक्षित वन घोषित कर दिया और गलाने वाले समुदायों का प्रवेश रोक दिया। अब वे अपनी भट्ठियों के लिए कोयला बनाने हेतु लकड़ी नहीं काट सकते थे, और लकड़ी के कोयले के बिना भट्ठियां ठंडी पड़ गईं। कुछ ने भारी शुल्क देकर प्रवेश लिया, पर बहुत से परिवारों ने यह काम छोड़कर खेती या मजदूरी अपना ली। A और B अकेले अधूरे हैं क्योंकि हर कथन केवल एक कारण बताता है। D गलत है क्योंकि दोनों कथन सही हैं। परीक्षा टिप: सस्ता ब्रिटिश आयात और वन कानूनों से कोयले की कमी, दोनों ने गांव का लोहा उद्योग खत्म किया।

Q5.भारतीय इतिहासमध्यम

महाबलीपुरम के एकाश्म रथों का निर्माण किस पल्लव शासक के काल में हुआ?

  1. A.सिंहविष्णु
  2. B.महेंद्रवर्मन प्रथम
  3. C.नरसिंहवर्मन प्रथम
  4. D.अपराजित
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. नरसिंहवर्मन प्रथम

व्याख्या

सही उत्तर C, नरसिंहवर्मन प्रथम है। उसे मामल्ल अर्थात महान मल्ल भी कहा जाता है, और इसी उपाधि पर बंदरगाह नगर मामल्लपुरम या महाबलीपुरम का नाम पड़ा। वहाँ के पाँच एकाश्म रथ, जिनमें से प्रत्येक एक ही चट्टान से तराशा गया है और जिनके नाम पांडवों तथा द्रौपदी पर हैं, सातवीं शताब्दी के मध्य में उसी के शासनकाल के हैं।

विकल्प A, सिंहविष्णु, आरंभिक पल्लव शासक था जिसने तमिल प्रदेश पर कलभ्रों की पकड़ समाप्त की, किंतु इस प्रकार का कोई स्मारक नहीं छोड़ा। विकल्प B, महेंद्रवर्मन प्रथम, ने पल्लव स्थापत्य के शैलकृत गुफा चरण की शुरुआत की, जैसे मंडगपट्टु के मंडप, पर स्वतंत्र रथ नहीं बनवाए। विकल्प D, अपराजित, अंतिम पल्लव राजा था जिसे नौवीं शताब्दी में चोल आदित्य प्रथम ने हराया। बाद का संरचनात्मक तटीय मंदिर नरसिंहवर्मन द्वितीय राजसिंह ने बनवाया।

Q6.भारतीय इतिहासपूछा गया: SSC GD कांस्टेबल · 13 Jan 2023, Shift 4मध्यम

'संथाल' नामक जनजातीय समूह ने _______ में विद्रोह किया था।

  1. A.1876
  2. B.1855
  3. C.1896
  4. D.1860
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. 1855

व्याख्या

सही उत्तर है B, 1855। संथाल विद्रोह, जिसे हूल कहा जाता है, 30 जून 1855 को संथाल परगना के राजमहल पहाड़ियों में भड़का, जो आज झारखंड में है। इसका नेतृत्व सिधू और कान्हू मुर्मू ने किया, जिनके साथ चाँद और भैरव भी थे, और उन्होंने हजारों संथालों को उन साहूकारों, व्यापारियों, जमींदारों और कंपनी अधिकारियों के विरुद्ध एकत्र किया जिन्होंने उनकी भूमि हथिया ली थी और उन्हें बंधुआ मजदूरी में धकेल दिया था। 1856 तक इस विद्रोह को कठोर बल से दबा दिया गया, लेकिन इसने अंग्रेजों को अलग संथाल परगना जिला बनाने पर विवश किया, जहाँ विशेष नियमों से बाहरी लोगों को जनजातीय भूमि खरीदने से रोका गया। विकल्प A गलत है, क्योंकि 1876 में कोई संथाल विद्रोह नहीं हुआ। विकल्प C गलत है, क्योंकि 1896 बिरसा मुंडा के मुंडा उलगुलान का वर्ष नहीं है, जो 1899 में शुरू हुआ। विकल्प D गलत है, क्योंकि 1860 तक विद्रोह कुचला जा चुका था। परीक्षा टिप: संथाल हूल 1855 सिधू-कान्हू के नेतृत्व में; मुंडा उलगुलान 1899-1900 बिरसा मुंडा के नेतृत्व में।

Q7.भारतीय इतिहासआसान

दिल्ली के किस सुल्तान ने काँसे और ताँबे की सांकेतिक मुद्रा चलाई?

  1. A.गयासुद्दीन तुगलक
  2. B.मुहम्मद बिन तुगलक
  3. C.फिरोजशाह तुगलक
  4. D.अलाउद्दीन खिलजी
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. मुहम्मद बिन तुगलक

व्याख्या

सही उत्तर B, मुहम्मद बिन तुगलक है। मुहम्मद बिन तुगलक ने 1325 से 1351 तक शासन किया और काँसे तथा ताँबे के सिक्के जारी किए जो चाँदी के मूल्य पर चलने थे। विचार स्वयं ठीक था, परंतु टकसाल पर राज्य का एकाधिकार नहीं था और सिक्कों पर ऐसा कोई चिह्न नहीं था जिसकी नकल कठिन हो, इसलिए जालसाजों ने बड़ी संख्या में सिक्के ढाले, कर नकली सिक्कों में चुकाए गए और चाँदी प्रचलन से गायब हो गई। सुल्तान को यह जारी मुद्रा वापस लेकर सांकेतिक सिक्के बदलने पड़े। विकल्प A गलत है क्योंकि गयासुद्दीन तुगलक, जिसने 1320 में वंश की स्थापना की, सिंचाई कार्यों और संतुलित राजस्व नीति के लिए याद किया जाता है। विकल्प C गलत है क्योंकि फिरोजशाह तुगलक ने नहरें और नगर बनवाए तथा फुतूहात-ए-फिरोजशाही लिखी। विकल्प D गलत है क्योंकि अलाउद्दीन खिलजी का प्रसिद्ध आर्थिक कदम बाजार मूल्य नियंत्रण था, सांकेतिक मुद्रा नहीं।

Q8.भारतीय इतिहासपूछा गया: SSC CGL · 24 Aug 2021, Shift 2मध्यम

विक्रमशिला विश्वविद्यालय की स्थापना किसने की और नालंदा विश्वविद्यालय को पुनर्जीवित किया?

  1. A.गोपाल
  2. B.वासुदेव
  3. C.श्रीगुप्त
  4. D.धर्मपाल
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. धर्मपाल

व्याख्या

सही उत्तर है D, धर्मपाल। बंगाल और बिहार के पाल वंश के दूसरे तथा सबसे प्रतापी शासक धर्मपाल ने आठवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में विक्रमशिला महाविहार और विश्वविद्यालय की स्थापना की, जो आज के बिहार के भागलपुर जिले में स्थित था। उन्होंने नालंदा विश्वविद्यालय को भी फिर से संवारा और उसे संरक्षण दिया। विक्रमशिला तांत्रिक बौद्ध धर्म का प्रमुख केंद्र बना और यहीं के विद्वान अतीश दीपंकर तिब्बत में बौद्ध धर्म का प्रचार करने गए। पाल शासक पूर्वी भारत में बौद्ध धर्म के अंतिम बड़े संरक्षक थे और लगभग 1200 ईस्वी में बख्तियार खिलजी ने दोनों विश्वविद्यालयों को नष्ट कर दिया। A गलत है क्योंकि गोपाल ने पाल वंश तथा ओदंतपुरी विहार की स्थापना की थी, विक्रमशिला की नहीं। B गलत है क्योंकि वासुदेव उत्तर-पश्चिम का कुषाण शासक था और बहुत पहले हुआ। C गलत है क्योंकि श्रीगुप्त ने गुप्त वंश की नींव रखी और पालों से सदियों पहले हुए। परीक्षा टिप: नालंदा - कुमारगुप्त प्रथम, पुनरुद्धार धर्मपाल; ओदंतपुरी - गोपाल; विक्रमशिला - धर्मपाल।

Q9.भारतीय इतिहासकठिन

महाबलीपुरम का तटीय मंदिर और कांचीपुरम का कैलाशनाथ मंदिर किस शासक ने बनवाया?

  1. A.नरसिंहवर्मन द्वितीय राजसिंह
  2. B.पुलकेशिन द्वितीय
  3. C.कृष्ण प्रथम
  4. D.राजराज प्रथम
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. नरसिंहवर्मन द्वितीय राजसिंह

व्याख्या

सही उत्तर A, नरसिंहवर्मन द्वितीय राजसिंह है। उसका शासन आठवीं शताब्दी के आरंभ में था और उसी से पल्लव स्थापत्य का संरचनात्मक चरण आरंभ होता है, जब मंदिर चट्टान काटकर नहीं, बल्कि तराशे हुए पत्थरों को जोड़कर बनाए जाने लगे। महाबलीपुरम का समुद्र तट पर स्थित तटीय मंदिर और कांचीपुरम का कैलाशनाथ मंदिर दोनों उसी के बनवाए हुए हैं।

विकल्प B, पुलकेशिन द्वितीय, बादामी का चालुक्य राजा था जो हर्ष को हराने के लिए प्रसिद्ध है, और उसके वंश ने ऐहोल, बादामी तथा पट्टदकल में निर्माण कराया। विकल्प C, कृष्ण प्रथम, वह राष्ट्रकूट शासक था जिसने आठवीं शताब्दी में एलोरा का कैलाश मंदिर एक ही पहाड़ी से तराशवाया, और समान नाम के कारण इसे प्रायः कांचीपुरम वाले मंदिर से मिला दिया जाता है। विकल्प D, राजराज प्रथम, वह चोल शासक था जिसने लगभग 1010 ईस्वी में तंजावुर का बृहदेश्वर मंदिर बनवाया, अर्थात तीन शताब्दी बाद।

Q10.भारतीय इतिहासपूछा गया: उत्तर प्रदेश · UPPSC PCS Pre GS-I, 15 Dec 2019आसान

मुस्लिम लीग एवं भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के बीच राजनीतिक गतिरोध को दूर करने के लिए “सी.आर. फॉर्मूला” किसने बनाया था?

  1. A.जवाहरलाल नेहरू
  2. B.राजगोपालाचारी
  3. C.चित्तरंजन दास
  4. D.वी. पी. मेनन
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. राजगोपालाचारी

व्याख्या

सही उत्तर है B, राजगोपालाचारी। सी. राजगोपालाचारी (राजाजी) ने 1944 में पाकिस्तान के सवाल पर कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच बने गतिरोध को तोड़ने के लिए यह फॉर्मूला दिया था। इसके अनुसार लीग स्वतंत्रता की माँग का समर्थन करेगी और अंतरिम सरकार बनाने में कांग्रेस का साथ देगी। युद्ध के बाद एक आयोग उत्तर-पश्चिम और पूर्व के मुस्लिम-बहुल ज़िलों की सीमा तय करेगा और वहाँ के सभी वयस्कों का जनमत संग्रह तय करेगा कि वे अलग होंगे या नहीं। सितंबर 1944 में बंबई में हुई गांधी-जिन्ना वार्ता इसी फॉर्मूले पर हुई, पर जिन्ना ने इसे ठुकरा दिया, क्योंकि वे पूरा पंजाब और बंगाल तथा केवल मुसलमानों का मतदान चाहते थे। विकल्प A गलत है, क्योंकि जवाहरलाल नेहरू ने यह योजना नहीं बनाई थी। विकल्प C गलत है, क्योंकि चित्तरंजन दास ने 1923 में स्वराज पार्टी बनाई थी और 1925 में ही उनका निधन हो गया था। विकल्प D गलत है, क्योंकि वी. पी. मेनन ने जून 1947 की विभाजन योजना का मसौदा बनाया और बाद में रियासतों के विलय में मदद की। परीक्षा टिप: सी.आर. फॉर्मूला 1944, गांधी-जिन्ना वार्ता सितंबर 1944, वेवेल योजना 1945।

Q11.भारतीय इतिहासपूछा गया: दिल्ली · 20 March 2022, shift 1आसान

खिलजी वंश के तुरंत बाद दिल्ली पर किस वंश ने शासन किया?

  1. A.तुगलक वंश
  2. B.राजपूत वंश
  3. C.सैयद वंश
  4. D.लोदी वंश
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. तुगलक वंश

व्याख्या

सही उत्तर A, तुगलक वंश है। खिलजी वंश 1320 में समाप्त हुआ, जब मुबारक शाह खिलजी के बाद गद्दी हथियाने वाले खुसरो खान को दीपालपुर के सूबेदार गाजी मलिक ने हराया। गाजी मलिक ने गयासुद्दीन तुगलक की उपाधि ली और तुगलक वंश की स्थापना की, जो 1414 तक चला और पाँचों में सबसे लंबे समय तक रहा। विकल्प B गलत है क्योंकि 1192 के बाद दिल्ली पर किसी राजपूत वंश का शासन नहीं रहा; पृथ्वीराज तृतीय के अधीन चाहमान या चौहान शासन सल्तनत के आरंभ से पहले ही समाप्त हो गया था। विकल्प C गलत है क्योंकि सैयद वंश बाद में आया, जिसकी स्थापना खिज्र खान ने 1414 में तैमूर के आक्रमण से तुगलक शक्ति टूटने के बाद की। विकल्प D गलत है क्योंकि बहलोल खान लोदी द्वारा 1451 में स्थापित लोदी वंश पाँचों में अंतिम था और सैयदों के बाद आया, खिलजियों के बाद नहीं।

Q12.भारतीय इतिहासपूछा गया: SSC CHSL · 02 Jul, 2024, Shift 4कठिन

बिजोलिया शिलालेख में निम्नलिखित में से किस वंश की वंशावली मिली है?

  1. A.चाहमान
  2. B.चंदेल
  3. C.परमार
  4. D.गहड़वाल
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. चाहमान

व्याख्या

सही उत्तर है A, चाहमान। बिजोलिया शिलालेख राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के बिजोलिया में है और 1170 ईस्वी का माना जाता है, यानी सोमेश्वर के शासनकाल का। इसमें शाकंभरी के चौहानों यानी चाहमान वंश की वंशावली दी गई है। संस्कृत में लिखा यह लेख जैन व्यापारी लोलाक ने पार्श्वनाथ मंदिर के पास उत्कीर्ण कराया था और इसमें सामंतराज से लेकर पृथ्वीराज चौहान के पिता सोमेश्वर तक के शासकों के नाम हैं। इतिहासकार इसे इसलिए महत्वपूर्ण मानते हैं कि इसमें चाहमानों को वत्स गोत्र का ब्राह्मण कहा गया है और अजमेर के लिए अजयमेरु जैसे पुराने स्थान-नाम मिलते हैं। विकल्प B गलत है, क्योंकि खजुराहो बनवाने वाले बुंदेलखंड के चंदेलों की जानकारी खजुराहो तथा मऊ अभिलेखों से मिलती है। विकल्प C गलत है, क्योंकि मालवा के परमारों का वर्णन उदयपुर प्रशस्ति में है। विकल्प D गलत है, क्योंकि कन्नौज के गहड़वालों की जानकारी चंद्रावती आदि ताम्रपत्रों से मिलती है। परीक्षा टिप: बिजोलिया - चाहमान; खजुराहो - चंदेल; उदयपुर प्रशस्ति - परमार।

Q13.भारतीय इतिहासमध्यम

किस चीनी यात्री ने नालंदा में आचार्य शीलभद्र के अधीन अध्ययन किया था?

  1. A.फाह्यान
  2. B.ह्वेनसांग
  3. C.इत्सिंग
  4. D.वांग-ह्वेन-त्से
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. ह्वेनसांग

व्याख्या

सही उत्तर B, ह्वेनसांग है। वह 630 ईस्वी में भारत पहुँचा, लगभग पंद्रह वर्ष यहाँ रहा और नालंदा महाविहार में उसके वयोवृद्ध प्रमुख आचार्य शीलभद्र के अधीन योगाचार दर्शन का अध्ययन किया। उसका यात्रा विवरण सी-यू-की हर्ष के साम्राज्य का सबसे विस्तृत उपलब्ध वर्णन है।

विकल्प A, फाह्यान, दो शताब्दी पहले गुप्त शासक चंद्रगुप्त द्वितीय के समय आया था, और तब नालंदा वह विश्वविद्यालय बना ही नहीं था जिसका श्रेय उसे कभी-कभी दे दिया जाता है। विकल्प C, इत्सिंग, सातवीं शताब्दी में बाद में आया, अर्थात हर्ष की मृत्यु के पश्चात, और उसने मठीय अनुशासन तथा सुमात्रा होकर जाने वाले समुद्री मार्ग पर लिखा। विकल्प D, वांग-ह्वेन-त्से, यात्री नहीं बल्कि चीनी राजदूत था; वह हर्ष की मृत्यु के बाद आया, अरुणाश्व ने उस पर आक्रमण किया और वह तिब्बती तथा नेपाली सैनिकों के साथ लौटकर उसे पराजित कर गया।

Q14.भारतीय इतिहासपूछा गया: SSC CHSL · 19 Oct 2020, Shift 2मध्यम

मैसूर राज्य और ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के बीच द्वितीय आंग्ल-मैसूर युद्ध किस वर्ष लड़ा गया था?

  1. A.1780-1784
  2. B.1769-1775
  3. C.1785-1789
  4. D.1766-1769
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. 1780-1784

व्याख्या

सही उत्तर है A, 1780-1784। द्वितीय आंग्ल-मैसूर युद्ध 1780 से 1784 तक चला। इसकी शुरुआत तब हुई जब अंग्रेजों ने हैदर अली के क्षेत्र में स्थित फ्रांसीसी बंदरगाह माहे पर कब्जा कर लिया और जवाब में हैदर अली ने कर्नाटक पर हमला किया। 1780 में उसने पोल्लिलूर में कर्नल बेली की सेना को बुरी तरह हराया, जो भारत में अंग्रेजों की सबसे बड़ी पराजयों में गिनी जाती है। इसके बाद वॉरेन हेस्टिंग्स ने सर आयर कूट को दक्षिण भेजा, जिसने 1781 में पोर्टो नोवो में हैदर अली को हराया। दिसंबर 1782 में हैदर अली की कैंसर से मृत्यु हो गई और उसके बेटे टीपू सुल्तान ने युद्ध जारी रखा। मार्च 1784 की मंगलोर की संधि से युद्ध समाप्त हुआ, जिसमें दोनों पक्षों ने जीते हुए इलाके लौटा दिए। B गलत है क्योंकि 1769-1775 में कोई आंग्ल-मैसूर युद्ध नहीं हुआ। C गलत है क्योंकि 1785-1789 दो युद्धों के बीच का शांति काल था। D गलत है क्योंकि प्रथम युद्ध 1767-1769 में लड़ा गया और मद्रास की संधि से समाप्त हुआ। परीक्षा टिप: प्रथम 1767-69 मद्रास, द्वितीय 1780-84 मंगलोर, तृतीय 1790-92 श्रीरंगपट्टनम, चतुर्थ 1799।

Q15.भारतीय इतिहासमध्यम

कौन सा विदेशी यात्री मुहम्मद बिन तुगलक के शासनकाल में भारत आया और दिल्ली का काजी नियुक्त हुआ?

  1. A.मार्को पोलो
  2. B.इब्न बतूता
  3. C.निकोलो कोंटी
  4. D.अब्दुर रज्जाक
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. इब्न बतूता

व्याख्या

सही उत्तर B, इब्न बतूता है। इब्न बतूता तांजियर का मोरक्कोवासी यात्री था, जो मुहम्मद बिन तुगलक के शासनकाल में दिल्ली पहुँचा, राजकीय सेवा में राजधानी का काजी अर्थात न्यायाधीश बनाया गया और बाद में दूत बनाकर चीन भेजा गया। अरबी में लिखा उसका यात्रा-वृत्तांत रिहला सल्तनतकालीन नगरों, बाजारों, डाक व्यवस्था तथा तटवर्ती नारियल और पान के विषय में प्रत्यक्ष स्रोत है। विकल्प A गलत है क्योंकि वेनिस का मार्को पोलो तेरहवीं शताब्दी के अंत के आसपास दक्षिण भारत के तट पर आया था और उसने दिल्ली में कभी सेवा नहीं की। विकल्प C गलत है क्योंकि वेनिस का निकोलो कोंटी पंद्रहवीं शताब्दी में विजयनगर साम्राज्य आया था। विकल्प D गलत है क्योंकि अब्दुर रज्जाक तैमूरी शासक शाहरुख का दूत था, जो देवराय द्वितीय के समय विजयनगर आया और उसने वहाँ का विस्तृत विवरण लिखा। परीक्षाओं में यात्री और शासक की जोड़ी बनाकर पूछा जाता है, इसलिए इब्न बतूता के साथ मुहम्मद बिन तुगलक और विजयनगर के साथ निकोलो कोंटी तथा अब्दुर रज्जाक याद रखने चाहिए।

Q16.भारतीय इतिहासपूछा गया: SSC CGL · 18 Jul 2023, Shift 1मध्यम

ब्रिटिश भारत में वर्नाक्युलर प्रेस अधिनियम किस वर्ष में लागू किया गया था?

  1. A.1876
  2. B.1874
  3. C.1872
  4. D.1878
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. 1878

व्याख्या

सही उत्तर है D, 1878। वर्नाक्युलर प्रेस अधिनियम 1878 में पारित हुआ था, जब लॉर्ड लिटन भारत के वायसराय थे।

यह अधिनियम भारतीय भाषाओं के समाचार पत्रों के विरुद्ध लाया गया था, जो 1876-78 के अकाल के बाद ब्रिटिश शासन की तीखी आलोचना करने लगे थे। इसके तहत मजिस्ट्रेट मुद्रक या प्रकाशक से बंधपत्र मांग सकता था और राजद्रोही सामग्री छपने पर प्रेस जब्त कर सकता था। अंग्रेजी अखबारों को इससे बाहर रखा गया, इसलिए इसे 'मुख बंद करने वाला कानून' कहा गया। सुरेंद्रनाथ बनर्जी सहित कई नेताओं ने इसका विरोध किया और अमृत बाजार पत्रिका रातोंरात बंगला से अंग्रेजी में छपने लगी। लॉर्ड रिपन ने 1882 में इसे रद्द कर दिया।

A गलत है: 1876 में रॉयल टाइटल्स अधिनियम आया, जिससे महारानी विक्टोरिया भारत की सम्राज्ञी बनीं। B गलत है: 1874 में कोई प्रेस कानून नहीं बना। C गलत है: 1872 में पहली अखिल भारतीय जनगणना हुई थी।

परीक्षा टिप: वर्नाक्युलर प्रेस अधिनियम - 1878 में लिटन ने लागू किया, 1882 में रिपन ने रद्द किया।

Q17.भारतीय इतिहासआसान

आरंभिक मध्यकाल में पांड्य राज्य की राजधानी कौन सा नगर थी?

  1. A.कांचीपुरम
  2. B.मदुरै
  3. C.वातापि
  4. D.तंजावुर
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. मदुरै

व्याख्या

सही उत्तर B, मदुरै है। पांड्य प्रायद्वीप के अत्यंत दक्षिणी भाग पर वैगई नदी के तट पर बसे मदुरै से शासन करते थे, और तट पर उनका मोती निकालने वाला बंदरगाह कोरकई था। छठी शताब्दी में कडुंगोन ने इस वंश को पुनर्जीवित किया और कलभ्र अंतराल समाप्त करने में भूमिका निभाई; पल्लव और चोल शताब्दियों में भी मदुरै उनकी राजधानी बना रहा।

विकल्प A, कांचीपुरम, उत्तरी तमिल प्रदेश में पल्लवों की राजधानी थी, जो कैलाशनाथ मंदिर के लिए प्रसिद्ध है। विकल्प C, वातापि, अर्थात कर्नाटक का आधुनिक बादामी, चालुक्यों की राजधानी थी, जिन्होंने पल्लवों और हर्ष दोनों से युद्ध किया। विकल्प D, तंजावुर, बाद में महत्वपूर्ण हुआ, जब नौवीं शताब्दी में विजयालय से आरंभ होकर वह साम्राज्यवादी चोलों की राजधानी बना और राजराज प्रथम के बृहदेश्वर मंदिर के लिए जाना गया।

Q18.भारतीय इतिहासपूछा गया: दिल्ली · 7 Dec 2020, Shift 2आसान

निम्नलिखित में से लोदी वंश का संस्थापक शासक कौन है?

  1. A.दौलत खान लोदी
  2. B.सिकंदर खान लोदी
  3. C.इब्राहीम खान लोदी
  4. D.बहलोल खान लोदी
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. बहलोल खान लोदी

व्याख्या

सही उत्तर D, बहलोल खान लोदी है। बहलोल खान लोदी अफगान सरदार और सरहिंद का सूबेदार था, जिसने 1451 में अंतिम सैयद शासक अलाउद्दीन आलम शाह के बदायूँ चले जाने के बाद दिल्ली की गद्दी ली। उसका वंश दिल्ली पर शासन करने वाला पहला अफगान वंश था और सल्तनत के पाँच वंशों में अंतिम। विकल्प A गलत है क्योंकि दौलत खान लोदी पंजाब का सूबेदार था, जिसने बाबर को भारत पर आक्रमण के लिए आमंत्रित किया; उसने वंश की स्थापना नहीं की। विकल्प B गलत है क्योंकि सिकंदर लोदी बहलोल का पुत्र और उत्तराधिकारी था, वही शासक जिसने 1504 में आगरा नगर बसाया और उसे अपनी राजधानी बनाया। विकल्प C गलत है क्योंकि इब्राहीम लोदी इस वंश का अंतिम शासक था, जिसे 1517 में खातौली में राणा सांगा ने हराया और 1526 में पानीपत के पहले युद्ध में बाबर ने मार डाला।

Q19.भारतीय इतिहासमध्यम

शिव की स्तुति में भजन रचने वाले तिरसठ तमिल संत किस नाम से जाने जाते हैं?

  1. A.आलवार
  2. B.नयनार
  3. C.सिद्धार
  4. D.आचार्य
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. नयनार

व्याख्या

सही उत्तर B, नयनार है। नयनार तमिल भक्ति आंदोलन के शैव संत थे, जिनकी परंपरागत संख्या तिरसठ मानी जाती है, और इनमें अप्पर, संबंदर, सुंदरर तथा माणिक्कवाचकर सम्मिलित हैं। उनके भजनों का संग्रह तेवारम कहलाता है, और उनकी भक्ति ने साधारण जन को जैन तथा बौद्ध मत से हटाकर मंदिर पूजा की ओर मोड़ा।

विकल्प A, आलवार, इनके वैष्णव समकक्ष थे, जिनकी संख्या बारह है और जिनके विष्णु विषयक भजन नालायिर दिव्य प्रबंधम् बनाते हैं; आंडाल उनमें एकमात्र स्त्री संत हैं। विकल्प C, सिद्धार, तमिल की एक अलग रहस्यवादी और चिकित्सा परंपरा के साधक थे, इस प्रकार के मंदिर भजनकार नहीं। विकल्प D, आचार्य, जैसे नाथमुनि और रामानुज, बाद में हुए और वे वैष्णव दर्शन को व्यवस्थित करने वाले शिक्षक थे, न कि गाने वाले संत। नयनार और आलवार का शिव-विष्णु जोड़ा ही परीक्षा में पूछा जाता है।

Q20.भारतीय इतिहासकठिन

एक सुल्तान के अपने शासन और नीतियों का विवरण देने वाली फुतूहात-ए-फिरोजशाही निम्नलिखित में से किसने लिखी?

  1. A.जियाउद्दीन बरनी
  2. B.अमीर खुसरो
  3. C.फिरोजशाह तुगलक
  4. D.मिन्हाज-उस-सिराज
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. फिरोजशाह तुगलक

व्याख्या

सही उत्तर C, फिरोजशाह तुगलक है। फुतूहात-ए-फिरोजशाही आत्मकथात्मक विवरण है, जिसमें 1351 से 1388 तक शासन करने वाले फिरोजशाह तुगलक ने अपने कार्य और आदेश लिखे, जिनमें उसकी नहरें, दान विभाग दीवान-ए-खैरात, उसका चिकित्सालय और उसकी धार्मिक नीति सम्मिलित हैं। यह सल्तनतकाल के उन थोड़े स्रोतों में है जो किसी शासक के विषय में नहीं, बल्कि स्वयं शासक द्वारा लिखे गए। विकल्प A गलत है क्योंकि जियाउद्दीन बरनी ने तारीख-ए-फिरोजशाही और फतवा-ए-जहांदारी लिखीं, जो सुल्तानों के विषय में हैं, किसी सुल्तान द्वारा नहीं लिखी गईं। विकल्प B गलत है क्योंकि तूती-ए-हिंद कहे जाने वाले कवि अमीर खुसरो ने खजाइन-उल-फुतूह, तुगलकनामा तथा अन्य काव्य लिखे। विकल्प D गलत है क्योंकि मिन्हाज-उस-सिराज ने तबकात-ए-नासिरी लिखी, जो नासिरुद्दीन महमूद के शासन तक गुलाम वंश का मुख्य इतिहास-ग्रंथ है और उसी सुल्तान को समर्पित है। परीक्षा में इन चारों को अलग रखने का सरल तरीका यह है कि विकल्पों में केवल एक ही शासक है, और फुतूहात के शीर्षक में उसी शासक का नाम आता है।

सभी क्विज देखें