1769-70 का बंगाल अकाल किसके कारण और गंभीर हो गया?
- A.टिड्डियों के हमले
- B.चूहों का प्रकोप
- C.कराधान का उच्च स्तर
- D.चेचक की महामारी
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर है C, कराधान का उच्च स्तर। 1769–70 का महान बंगाल अकाल वर्षा न होने से शुरू हुआ, पर ईस्ट इंडिया कंपनी की कठोर राजस्व मांग ने फसल की विफलता को महाविनाश में बदल दिया। 1765 में बंगाल, बिहार और उड़ीसा की दीवानी मिलने के बाद कंपनी ने द्वैध शासन के तहत भू-राजस्व वसूला, जिसमें राजस्व का अधिकार कंपनी के पास था और प्रशासन का बोझ नवाब पर। भूखे किसानों से भी उसके एजेंट वसूली जारी रखते रहे, कहीं-कहीं तो बढ़ा भी दी, और व्यापारियों ने अनाज की जमाखोरी की। उस समय के अनुमानों के अनुसार बंगाल की लगभग एक-तिहाई आबादी, करीब एक करोड़ लोग, मारे गए, और बाद में वारेन हेस्टिंग्स ने लिखा कि इस हानि के बावजूद राजस्व सख्ती से बनाए रखा गया। विकल्प A गलत है, क्योंकि टिड्डियों के झुंड इस अकाल का दर्ज कारण नहीं थे। विकल्प B गलत है, क्योंकि चूहों के प्रकोप की कोई दर्ज भूमिका नहीं थी। विकल्प D गलत है, क्योंकि चेचक कमज़ोर बचे लोगों में बाद में फैली; वह अकाल का परिणाम थी, उसे गंभीर बनाने वाला कारण नहीं। परीक्षा टिप: बंगाल अकाल 1770 = क्लाइव का द्वैध शासन (1765–72); इसकी भयावहता बंकिमचंद्र के आनंदमठ में दर्ज है।
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंनिम्नलिखित में से किस समाजवादी कार्यकर्ता ने गांधीजी को नमक सत्याग्रह को केवल पुरुषों तक सीमित न रखने के लिए राज़ी किया?
- A.कमलादेवी चट्टोपाध्याय
- B.सरोजिनी नायडू
- C.मातंगिनी हाज़रा
- D.मीठूबेन पेटिट
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समाजवादी और कांग्रेस नेता कमलादेवी चट्टोपाध्याय ने गांधीजी को 1930 के नमक सत्याग्रह में महिलाओं को शामिल करने के लिए राज़ी किया, जबकि गांधीजी ने पहले इसे केवल पुरुषों के साथ करने की योजना बनाई थी।
पूरी व्याख्या पढ़ें →निम्नलिखित में से कौन 'लोकहितवादी' के नाम से लोकप्रिय थे?
- A.गोपाल हरि देशमुख
- B.महादेव गोविंद रानाडे
- C.गोपाल कृष्ण गोखले
- D.ज्योतिबा फुले
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महाराष्ट्र के गोपाल हरि देशमुख (1823–1892) लोकहितवादी उपनाम से लिखते थे, जिसका अर्थ है लोगों के हित के लिए काम करने वाला, और यही नाम उनकी पहचान बन गया।
पूरी व्याख्या पढ़ें →मध्यकाल में मुंजनीक क्या था?
- A.तोप
- B.गुलेल (कैटापल्ट)
- C.तोपगाड़ी
- D.चल शस्त्रागार
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मुंजनीक, जिसे मंजनीक भी लिखा जाता है, किले की दीवारों पर भारी पत्थर फेंकने वाला घेराबंदी यंत्र था, यानी एक बड़ी गुलेल।
पूरी व्याख्या पढ़ें →गुप्त प्रशासनिक व्यवस्था के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. गुप्त राजाओं ने महाराजाधिराज, परम-भट्टारक और परमेश्वर जैसी साम्राज्यवादी उपाधियां धारण कीं। 2. गुप्त राजाओं ने परम-दैवत और परम-भागवत जैसे विशेषणों द्वारा स्वयं को देवताओं से भी जोड़ा। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- A.केवल 1
- B.केवल 2
- C.1 और 2 दोनों
- D.न तो 1 और न ही 2
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गुप्त अभिलेख बताते हैं कि राजा बड़ी साम्राज्यवादी उपाधियों के साथ ऐसे धार्मिक विशेषण भी लगाते थे जो उन्हें देवताओं से जोड़ते थे।
पूरी व्याख्या पढ़ें →भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के संदर्भ में, निम्नलिखित घटनाओं पर विचार कीजिए :
1. रॉयल इंडियन नेवी में विद्रोह
2. भारत छोड़ो आंदोलन का आरंभ
3. द्वितीय गोलमेज़ सम्मेलन
उपर्युक्त घटनाओं का सही कालानुक्रम क्या है?
- A.1-2-3
- B.2-1-3
- C.3-2-1
- D.3-1-2
उत्तर देखें
द्वितीय गोलमेज़ सम्मेलन 1931 में, भारत छोड़ो आंदोलन 1942 में और रॉयल इंडियन नेवी का विद्रोह 1946 में हुआ। गांधी-इरविन समझौते के बाद द्वितीय गोलमेज़ सम्मेलन सितंबर से दिसंबर 1931 तक लंदन में हुआ; गांधीजी कांग्रेस के एकमात्र प्रतिनिधि के रूप में गए और सम्मेलन बिना सहमति के खत्म हुआ।
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