मुख्य सामग्री पर जाएं
GK24
GK क्विजविज्ञान और प्रौद्योगिकी

विज्ञान और प्रौद्योगिकी क्विज: आदित्य-एल1 और अंतरिक्ष विज्ञान मिशन

  • 11 प्रश्न
  • 11 मिनट
  • कठिनाई: मध्यम
क्विज शुरू करें
Read in English

इस क्विज के बारे में

विज्ञान और प्रौद्योगिकी के अंतर्गत "आदित्य-एल1 और अंतरिक्ष विज्ञान मिशन" विषय पर यह क्विज़ 11 बहुविकल्पीय प्रश्न रखता है, जो GK24 के इसी विषय के नोट्स के साथ प्रकाशित सत्यापित प्रश्न हैं, जिनमें 5 प्रश्न पिछले वर्षों की वास्तविक परीक्षाओं में पूछे गए हैं। हर प्रश्न के साथ सही विकल्प की और शेष विकल्पों के गलत होने की पूरी व्याख्या दी गई है, ताकि आप केवल उत्तर याद न करें बल्कि उसके पीछे का तथ्य समझें। नोट्स पढ़ने के तुरंत बाद इसे हल करें, निर्धारित समय का पालन करें, और अंत में व्याख्याएं पढ़कर कमजोर बिंदु चिह्नित करें। परीक्षा से पहले दोहराव के लिए इसे दोबारा दें।

इस क्विज के प्रश्न

11 प्रश्न उत्तर और व्याख्या सहित

Q1.विज्ञान और प्रौद्योगिकीपूछा गया: उत्तर प्रदेश · 1 Oct 2019, Shift 1आसान

कैप्टन राकेश शर्मा सोवियत अंतरिक्ष कार्यक्रम के अंतर्गत किस वर्ष अंतरिक्ष गए थे?

  1. A.1981
  2. B.1982
  3. C.1983
  4. D.1984
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. 1984

व्याख्या

सही उत्तर D, 1984 है। विंग कमांडर राकेश शर्मा अप्रैल 1984 में सोवियत संघ और भारत के संयुक्त कार्यक्रम के अंतर्गत सोवियत यान सोयुज टी-11 से अंतरिक्ष गए और साल्युत 7 अंतरिक्ष स्टेशन पर लगभग आठ दिन रहे। इस प्रकार वे अंतरिक्ष जाने वाले पहले भारतीय बने। प्रधानमंत्री के यह पूछने पर कि ऊपर से भारत कैसा दिखता है, उनका दिया उत्तर आज भी याद किया जाता है, और उन्हें अशोक चक्र से सम्मानित किया गया।

विकल्प A, B और C क्रमशः 1981, 1982 और 1983 बताते हैं, जो पास-पास के वर्ष हैं और यह परखने के लिए रखे गए हैं कि तिथि पक्की याद है या नहीं। इस वर्ष को उसी दशक के दो और तथ्यों से जोड़ लें, भारत ने अपना उपग्रह आर्यभट 1975 में भेजा और 1980 में भारतीय रॉकेट से रोहिणी को कक्षा में पहुँचाया, तथा उसके चार वर्ष बाद राकेश शर्मा गए। कल्पना चावला और सुनीता विलियम्स बहुत बाद में अमेरिकी कार्यक्रम से गईं।

Q2.विज्ञान और प्रौद्योगिकीपूछा गया: SSC GD कांस्टेबल · 13 Feb 2019, Shift 1आसान

निम्न में से किसे भारत का पहला मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम कहा गया है?

  1. A.मंगलयान 2
  2. B.गगनयान
  3. C.चंद्रयान 2
  4. D.आदित्य एल-1
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. गगनयान

व्याख्या

सही उत्तर B, गगनयान है। गगनयान वह कार्यक्रम है जिसके अंतर्गत भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन अपने ही चालक दल मॉड्यूल से भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को पृथ्वी की नीची कक्षा में भेजने और सुरक्षित लौटाने की तैयारी कर रहा है। इस कार्यक्रम में मानवरहित परीक्षण उड़ानें, चालक दल बचाव प्रणाली और मानव के लिए प्रमाणित प्रक्षेपण यान शामिल हैं। चालक दल बचाव प्रणाली की पहली परीक्षण उड़ान टीवी-डी1 अक्टूबर 2023 में हुई।

विकल्प A, मंगलयान मार्स ऑर्बिटर मिशन है, जो मानवरहित यान था और 2014 में मंगल की कक्षा में पहुँचा। विकल्प C, चंद्रयान-2 वर्ष 2019 का मानवरहित चंद्र मिशन था, जिसमें ऑर्बिटर, लैंडर और रोवर थे। विकल्प D, आदित्य-एल1 वर्ष 2023 में लैग्रेंज बिंदु एल1 की प्रभामंडल कक्षा में भेजी गई सौर वेधशाला है। इनमें से किसी पर चालक दल नहीं जाता, इसलिए केवल गगनयान ही उत्तर है।

Q3.विज्ञान और प्रौद्योगिकीपूछा गया: RRB JE · 23 May 2019, Shift 3मध्यम

भारत का पहला पीको उपग्रह कौन सा है?

  1. A.इनसैट
  2. B.स्टडसैट
  3. C.जीसैट-4
  4. D.अनुसैट
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. स्टडसैट

व्याख्या

सही उत्तर B, स्टडसैट है। स्टडसैट अर्थात स्टूडेंट सैटेलाइट भारत में बना पहला पीको उपग्रह था। पीको उपग्रह वह होता है जिसका भार लगभग एक किलोग्राम से कम हो, और स्टडसैट का भार उससे भी कम था। इसे बेंगलुरु तथा हैदराबाद के अभियांत्रिकी महाविद्यालयों के विद्यार्थियों ने बनाया था और 2010 में पीएसएलवी की एक उड़ान में सहायक भार के रूप में भेजा गया, जिसमें पृथ्वी का चित्र लेने के लिए छोटा कैमरा था।

विकल्प A, इनसैट कोई एक उपग्रह नहीं बल्कि भारतीय राष्ट्रीय उपग्रह प्रणाली है, जो भूस्थिर कक्षा के भारी संचार उपग्रहों का परिवार है। विकल्प C, जीसैट-4 प्रायोगिक संचार उपग्रह था, जो 2010 में प्रक्षेपण यान की विफलता में खो गया। विकल्प D, अनुसैट अन्ना विश्वविद्यालय ने बनाया था और 2009 में भेजा गया, पर वह लगभग चालीस किलोग्राम का माइक्रो उपग्रह था, पीको नहीं, और यही अंतर प्रश्न परख रहा है।

Q4.विज्ञान और प्रौद्योगिकीपूछा गया: RRB NTPC · 05 Jun, 2025, Shift 1मध्यम

चंद्रा सरफेस थर्मोफिजिकल एक्सपेरिमेंट (चेस्ट) उपकरण का मुख्य उद्देश्य क्या है?

  1. A.चंद्रमा की भूवैज्ञानिक संरचना का आकलन करना
  2. B.चंद्र मिट्टी में गहराई के अनुसार तापमान नापना
  3. C.चंद्रमा का वायुमंडलीय दाब नापना
  4. D.चंद्रमा के चुंबकीय क्षेत्र का अध्ययन करना
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. चंद्र मिट्टी में गहराई के अनुसार तापमान नापना

व्याख्या

सही उत्तर B, चंद्र मिट्टी में गहराई के अनुसार तापमान नापना है। चेस्ट चंद्रयान-3 के विक्रम लैंडर पर गया था। इसमें एक छड़ पर तापमान संवेदक लगे थे, जिसे दक्षिण ध्रुवीय क्षेत्र के पास चंद्र मिट्टी में लगभग दस सेंटीमीटर गहराई तक धँसाया गया। इसके पाठों से वैज्ञानिक यह देख सकते हैं कि चंद्रमा की ऊपरी परत में ऊष्मा कैसे चलती है, जिससे उस स्थान की मिट्टी के तापीय गुणों का पता चलता है, जहाँ पहले कभी माप नहीं हुई थी।

विकल्प A, भूवैज्ञानिक संरचना का काम प्रज्ञान रोवर पर लगे दो उपकरणों का था, जिन्होंने अल्फा कणों और लेजर से मिट्टी के तत्व पहचाने। विकल्प C इसलिए गलत है कि चंद्रमा पर गैस का अत्यंत विरल आवरण ही है, सामान्य अर्थ में मापने योग्य दाब वाला वायुमंडल नहीं। विकल्प D, चुंबकीय क्षेत्र चेस्ट का उद्देश्य नहीं था, लैंडर पर चंद्र कंपन और सतह के प्लाज्मा के उपकरण अलग थे।

Q5.विज्ञान और प्रौद्योगिकीपूछा गया: RRB NTPC · 9 May 2022, Shift 1कठिन

वर्ष 2021 में डीआरडीओ ने हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की निगरानी क्षमता बढ़ाने के लिए पीएसएलवी-सी51 से कौन सा उपग्रह भेजा था?

  1. A.सतीश धवन उपग्रह
  2. B.सिंधु नेत्र उपग्रह
  3. C.सिंधु दुर्ग उपग्रह
  4. D.श्री शक्ति उपग्रह
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. सिंधु नेत्र उपग्रह

व्याख्या

सही उत्तर B, सिंधु नेत्र उपग्रह है। सिंधु नेत्र को रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन ने बनाया था और इसे फरवरी 2021 में पीएसएलवी-सी51 उड़ान से कक्षा में पहुँचाया गया, जिसका मुख्य भार ब्राजील का अमेजोनिया-1 उपग्रह था। यह उपग्रह हिंद महासागर क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही देखने तथा उन जलक्षेत्रों से गुजरने वाले युद्धपोतों और व्यापारिक जहाजों की पहचान में सहायता के लिए बनाया गया है, जिससे सशस्त्र बलों को समुद्री जानकारी मिलती है।

विकल्प A, सतीश धवन उपग्रह भी इसी पीएसएलवी-सी51 उड़ान में गया था, पर वह एक निजी भारतीय दल का बनाया छोटा उपग्रह था, निगरानी उपग्रह नहीं। विकल्प C और D, सिंधु दुर्ग तथा श्री शक्ति गढ़े हुए नाम हैं जो सही उत्तर के पास रखे गए हैं। याद रखें कि पीएसएलवी-सी51 का मुख्य भार अमेजोनिया-1 था और सिंधु नेत्र सहयात्री उपग्रहों में था।

Q6.विज्ञान और प्रौद्योगिकीमध्यम

भारत की पहली सौर वेधशाला आदित्य-एल1 किस यान से प्रक्षेपित की गई थी?

  1. A.जीएसएलवी एमके 2
  2. B.पीएसएलवी-सी57
  3. C.एलवीएम3-एम4
  4. D.एसएसएलवी-डी2
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. पीएसएलवी-सी57

व्याख्या

सही उत्तर B, पीएसएलवी-सी57 है। आदित्य-एल1 को 2 सितंबर 2023 को श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से पीएसएलवी-सी57 उड़ान द्वारा भेजा गया, जिसमें ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान का सबसे शक्तिशाली रूप प्रयोग हुआ। यान को पहले पृथ्वी की कक्षा में रखा गया, फिर चरणों में कक्षा ऊँची की गई और उसके बाद वह लैग्रेंज बिंदु एल1 की ओर चला, जहाँ जनवरी 2024 में उसे प्रभामंडल कक्षा में स्थापित किया गया।

विकल्प A, जीएसएलवी एमके 2 मुख्यतः भूस्थिर स्थानांतरण कक्षा में जाने वाले संचार उपग्रहों के लिए प्रयोग होता है। विकल्प C, एलवीएम3-एम4 वही यान है जिसने जुलाई 2023 में चंद्रयान-3 भेजा था, और अभ्यर्थी उसी वर्ष के दोनों मिशनों में भ्रमित हो जाते हैं। विकल्प D, एसएसएलवी हल्के भार के लिए बना छोटा प्रक्षेपण यान है। याद रखें, चंद्रयान-3 के लिए एलवीएम3 और आदित्य-एल1 के लिए पीएसएलवी।

Q7.विज्ञान और प्रौद्योगिकीमध्यम

आदित्य-एल1 को किस बिंदु के चारों ओर प्रभामंडल कक्षा में रखा गया है और वह पृथ्वी से लगभग कितनी दूर है?

  1. A.एल2, लगभग 15 लाख किलोमीटर
  2. B.एल1, लगभग 15 लाख किलोमीटर
  3. C.एल1, लगभग 3.8 लाख किलोमीटर
  4. D.एल5, लगभग 15 करोड़ किलोमीटर
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. एल1, लगभग 15 लाख किलोमीटर

व्याख्या

सही उत्तर B, एल1, लगभग 15 लाख किलोमीटर है। सूर्य और पृथ्वी का लैग्रेंज बिंदु एल1 दोनों के बीच पड़ता है और पृथ्वी से लगभग पंद्रह लाख किलोमीटर दूर है। उस बिंदु पर सूर्य तथा पृथ्वी का गुरुत्वीय खिंचाव और यान की गति इस प्रकार मिलते हैं कि यान पृथ्वी के साथ-साथ चलता रहता है। वहाँ खड़ा यान सूर्य को बिना किसी रुकावट के देख सकता है, न ग्रहण बाधा बनता है न पृथ्वी की रात वाली ओर, और इसीलिए आदित्य-एल1 को वहीं भेजा गया।

विकल्प A, एल2 बताता है, जो सूर्य से पृथ्वी की दूसरी ओर लगभग उतनी ही दूरी पर है और वहाँ जेम्स वेब अंतरिक्ष दूरबीन है। विकल्प C में पृथ्वी से चंद्रमा की दूरी लगभग 3.84 लाख किलोमीटर दी गई है, जो बहुत कम है। विकल्प D में पृथ्वी से सूर्य की दूरी और एक अलग लैग्रेंज बिंदु दिया गया है। याद रखें कि एल1 सूर्य तक की दूरी का लगभग सौवाँ भाग है।

Q8.विज्ञान और प्रौद्योगिकीकठिन

आदित्य-एल1 का मुख्य उपकरण कौन सा है, जो सूर्य की चमकीली बिंब ढककर कोरोना का अध्ययन करता है?

  1. A.सूट
  2. B.वीईएलसी
  3. C.हेलिओस
  4. D.एस्पेक्स
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. वीईएलसी

व्याख्या

सही उत्तर B, वीईएलसी है। विजिबल एमिशन लाइन कोरोनाग्राफ आदित्य-एल1 पर लगा सबसे बड़ा और प्रमुख उपकरण है। कोरोनाग्राफ उपकरण के भीतर ही सूर्य की चमकीली बिंब को ढककर एक बनावटी ग्रहण बना देता है, जिससे उसका मंद बाहरी वायुमंडल यानी कोरोना दिखाई देने लगता है। वीईएलसी सूर्य की सतह के निकट कोरोना को देख सकता है और यह अध्ययन कर सकता है कि कोरोनीय द्रव्य उत्सर्जन कैसे आरंभ होते हैं, जो अंतरिक्ष मौसम समझने की कुंजी है।

विकल्प A, सूट अर्थात सोलर अल्ट्रावायलेट इमेजिंग टेलीस्कोप सूर्य को पराबैंगनी प्रकाश में चित्रित करता है। विकल्प C, हेलिओस उच्च ऊर्जा एक्स-किरण स्पेक्ट्रोमीटर है, जो सौर ज्वालाओं की कठोर एक्स-किरणें दर्ज करता है। विकल्प D, एस्पेक्स वह कण प्रयोग है जो यान तक पहुँचने वाली सौर पवन का नमूना लेता है। चारों इसी मिशन के असली उपकरण हैं, इसलिए प्रश्न यह परखता है कि मुख्य कौन सा है।

Q9.विज्ञान और प्रौद्योगिकीआसान

चंद्रयान-3 का विक्रम लैंडर चंद्र दक्षिण ध्रुव के निकट किस तिथि को उतरा था?

  1. A.14 जुलाई 2023
  2. B.23 अगस्त 2023
  3. C.2 सितंबर 2023
  4. D.6 जनवरी 2024
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. 23 अगस्त 2023

व्याख्या

सही उत्तर B, 23 अगस्त 2023 है। चंद्रयान-3 का विक्रम लैंडर 23 अगस्त 2023 को चंद्रमा के दक्षिण ध्रुवीय क्षेत्र के पास उतरा, जिससे भारत चंद्रमा पर सफलतापूर्वक उतरने वाला चौथा देश बना और चंद्र दक्षिण ध्रुव के निकट उतरने वाला पहला देश। इसके बाद प्रज्ञान रोवर बाहर निकला और एक चंद्र दिवस तक काम करता रहा। अवतरण स्थल को शिव शक्ति बिंदु नाम दिया गया और 23 अगस्त अब भारत में राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस के रूप में मनाया जाता है।

विकल्प A, 14 जुलाई 2023 चंद्रयान-3 के एलवीएम3-एम4 यान से प्रक्षेपण की तिथि है। विकल्प C, 2 सितंबर 2023 आदित्य-एल1 के प्रक्षेपण की तिथि है, जो कुछ ही दिन बाद गया। विकल्प D, 6 जनवरी 2024 वह तिथि है जब आदित्य-एल1 को लैग्रेंज बिंदु एल1 की प्रभामंडल कक्षा में स्थापित किया गया। तीनों उसी काल की असली तिथियाँ हैं, इसीलिए प्रश्न भ्रमित करता है।

Q10.विज्ञान और प्रौद्योगिकीमध्यम

भारत का मार्स ऑर्बिटर मिशन, जिसे मंगलयान कहा जाता है, किस वर्ष मंगल की कक्षा में पहुँचा था?

  1. A.2008
  2. B.2013
  3. C.2014
  4. D.2019
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. 2014

व्याख्या

सही उत्तर C, 2014 है। मार्स ऑर्बिटर मिशन 5 नवंबर 2013 को पीएसएलवी से प्रक्षेपित हुआ और 24 सितंबर 2014 को मंगल की कक्षा में पहुँचा। इसके साथ भारत संसार का पहला ऐसा देश बना जो पहले ही प्रयास में मंगल तक पहुँचा, और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन सोवियत संघ, संयुक्त राज्य अमेरिका तथा यूरोप की एजेंसियों के बाद वहाँ पहुँचने वाली चौथी एजेंसी बना। इस मिशन में पाँच उपकरण थे, जिनमें मीथेन संवेदक और रंगीन कैमरा शामिल थे, और यह बहुत कम लागत में बना था।

विकल्प A, 2008 चंद्रयान-1 का वर्ष है, जो पहला भारतीय चंद्र मिशन था। विकल्प B, 2013 मंगल मिशन के प्रक्षेपण का वर्ष है, पहुँचने का नहीं, और लगभग दस महीने का यही अंतर प्रश्न परख रहा है। विकल्प D, 2019 चंद्रयान-2 का वर्ष है। प्रक्षेपण वर्ष और पहुँचने के वर्ष को अलग रखने की आदत यहाँ बनानी चाहिए।

Q11.विज्ञान और प्रौद्योगिकीआसान

1975 में सोवियत संघ से प्रक्षेपित भारत का पहला उपग्रह कौन सा था?

  1. A.भास्कर
  2. B.आर्यभट
  3. C.रोहिणी
  4. D.एप्पल
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. आर्यभट

व्याख्या

सही उत्तर B, आर्यभट है। आर्यभट भारत का बनाया पहला उपग्रह था और इसे 19 अप्रैल 1975 को सोवियत प्रक्षेपण स्थल से भेजा गया, क्योंकि उस समय भारत के पास अपना प्रक्षेपण यान नहीं था। इसका नाम प्राचीन भारतीय खगोलशास्त्री और गणितज्ञ के नाम पर रखा गया, और इसमें एक्स-किरण खगोल विज्ञान, सौर भौतिकी तथा आयनमंडल के अध्ययन के प्रयोग थे। यही भारतीय उपग्रह कार्यक्रम का आरंभ है।

विकल्प A, भास्कर बाद में 1979 में भेजा गया प्रायोगिक पृथ्वी अवलोकन उपग्रह था। विकल्प C, रोहिणी उस शृंखला का नाम है जिसका आरएस-1 भारतीय प्रक्षेपण यान एसएलवी-3 से 18 जुलाई 1980 को कक्षा में पहुँचने वाला पहला उपग्रह बना। विकल्प D, एप्पल 1981 का एरियन पैसेंजर पेलोड एक्सपेरिमेंट था, जो भूस्थिर कक्षा में भारत का पहला प्रायोगिक संचार उपग्रह था। क्रम आर्यभट, भास्कर, रोहिणी, एप्पल याद रखें।

सभी क्विज देखें