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GK क्विजभारतीय इतिहास

भारतीय इतिहास मिश्रित क्विज: सेट 41

  • 20 प्रश्न
  • 20 मिनट
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इस क्विज के बारे में

भारतीय इतिहास मिश्रित क्विज़ (सेट 41) में 20 बहुविकल्पीय प्रश्न हैं, जो इस विषय के 20 अलग-अलग टॉपिक से लिए गए हैं: महाजनपद और मगध का उदय, भारतीय इतिहास की प्रसिद्ध रानियां और महिला शासक, हर्षवर्धन और दक्षिण भारतीय राज्य और अन्य। इनमें से 19 प्रश्न पिछले वर्षों की वास्तविक परीक्षाओं में पूछे जा चुके हैं। टॉपिक-वार क्विज़ एक अध्याय की जाँच करता है, जबकि यह सेट पूरे विषय को एक साथ दोहराता है, जैसा परीक्षा में होता है जहाँ अगला प्रश्न किसी भी अध्याय से आ सकता है। हर प्रश्न के साथ सही विकल्प की और बाकी विकल्पों के गलत होने की व्याख्या दी गई है। समय का पालन करते हुए हल करें, अंत में व्याख्याएँ पढ़ें और जिस टॉपिक में गलती हुई उसके नोट्स दोबारा पढ़ें।

इस क्विज के प्रश्न

20 प्रश्न उत्तर और व्याख्या सहित

Q1.भारतीय इतिहासपूछा गया: SSC CHSL · 5 Aug 2021, Shift 2मध्यम

प्राचीन भारत में युद्ध में बड़े पैमाने पर हाथियों का प्रयोग करने वाला पहला साम्राज्य कौन-सा था?

  1. A.कुषाण
  2. B.चोल
  3. C.मगध
  4. D.शुंग
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. मगध

व्याख्या

सही उत्तर है C, मगध। प्राचीन भारत में युद्ध में बड़े पैमाने पर हाथियों का उपयोग करने वाली पहली शक्ति मगध थी, जिसे पूर्वी भारत के घने जंगलों से हाथी मिलते थे। बिंबिसार, अजातशत्रु, महापद्म नंद और बाद में मौर्य शासकों के अधीन मगध एक महाजनपद से साम्राज्य बन गया। उसकी ताकत गंगा के उपजाऊ मैदान, राजगीर के पास की लोहे की खानों और इन युद्धक हाथियों पर टिकी थी। उसकी प्रारंभिक राजधानी राजगृह यानी आज का राजगीर थी, जो बाद में पाटलिपुत्र स्थानांतरित हुई और गंगा के जलमार्गों पर नियंत्रण रखती थी। यूनानी विवरणों में नंद तथा मौर्य सेनाओं में हजारों हाथी बताए गए हैं, और चंद्रगुप्त मौर्य ने सेल्यूकस से हुई संधि में 500 हाथी भेंट किए। A गलत है क्योंकि कुषाण अपनी घुड़सवार सेना और स्वर्ण सिक्कों के लिए जाने जाते हैं। B गलत है क्योंकि दक्षिण के चोल अपनी नौसेना और मंदिर निर्माण के लिए प्रसिद्ध हैं। D गलत है क्योंकि शुंग मौर्यों के बाद आए और उनका राज्य बहुत छोटा था। परीक्षा टिप: मगध की चार ताकतें याद रखें - लोहा, उपजाऊ भूमि, नदियाँ और युद्धक हाथी।

Q2.भारतीय इतिहासपूछा गया: RRB ALP · 29 Aug 2018, Shift 3आसान

दिल्ली सल्तनत की पहली महिला शासक रजिया सुल्तान किस वंश से संबंधित थीं?

  1. A.गुलाम वंश
  2. B.खिलजी वंश
  3. C.लोदी वंश
  4. D.मुगल वंश
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. गुलाम वंश

व्याख्या

सही उत्तर है A, गुलाम वंश। रजिया सुल्तान इल्तुतमिश की पुत्री थीं और इल्तुतमिश गुलाम वंश का शासक था, जिसे मामलूक वंश या इल्बरी तुर्क भी कहा जाता है। रजिया ने 1236 से 1240 तक दिल्ली पर शासन किया और वे दिल्ली सल्तनत की गद्दी पर बैठने वाली एकमात्र महिला थीं। इल्तुतमिश ने अपने पुत्रों के स्थान पर उन्हें उत्तराधिकारी चुना, और उन्होंने शासन अपने हाथ में लिया, पर्दा त्यागा, खुला दरबार लगाया तथा स्वयं सेना का नेतृत्व किया। तुर्क सरदारों के दल, चहलगानी, को महिला शासक स्वीकार नहीं थी; 1240 में उन्हें गद्दी से हटाकर मार डाला गया। B गलत है क्योंकि खिलजी वंश 1290 में जलालुद्दीन खिलजी के साथ सत्ता में आया। C गलत है क्योंकि लोदी वंश 1451 से 1526 तक रहा और सल्तनत का अंतिम वंश था। D गलत है क्योंकि मुगल साम्राज्य की स्थापना बाबर ने 1526 में की, रजिया के लगभग तीन शताब्दी बाद। परीक्षा टिप: रजिया - इल्तुतमिश की पुत्री, गुलाम वंश, 1236 से 1240 तक।

Q3.भारतीय इतिहासपूछा गया: SSC CGL · 13 April 2022, Shift 2मध्यम

निम्नलिखित में से किसने हर्षवर्धन को उस समय पराजित किया जब उसने दक्कन के चालुक्य राज्य पर आक्रमण किया?

  1. A.मंगलेश
  2. B.विक्रमादित्य प्रथम
  3. C.कीर्तिवर्मन प्रथम
  4. D.पुलकेशिन द्वितीय
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. पुलकेशिन द्वितीय

व्याख्या

सही उत्तर है D, पुलकेशिन द्वितीय। चालुक्य शासक पुलकेशिन द्वितीय ने नर्मदा के तट पर हर्षवर्धन को रोक दिया और उसे दक्कन में घुसने नहीं दिया। पुलकेशिन द्वितीय ने लगभग 609 से 642 ईसवी तक वातापि अर्थात बादामी से शासन किया और वह बादामी के चालुक्यों में सबसे महान था। उसके दरबारी कवि रविकीर्ति द्वारा रचित ऐहोल अभिलेख में हर्ष पर इस विजय का उल्लेख है। उसने खुसरो द्वितीय के फारसी दूतमंडल का भी स्वागत किया, परंतु बाद में पल्लव राजा नरसिंहवर्मन प्रथम ने उसे पराजित कर मार डाला। A गलत है क्योंकि मंगलेश उसका चाचा और पूर्ववर्ती था, जिसे पुलकेशिन द्वितीय ने गद्दी से हटाया था। B गलत है क्योंकि विक्रमादित्य प्रथम उसका पुत्र था, जिसने उसके बाद शासन किया और पल्लवों से बादामी वापस जीता। C गलत है क्योंकि कीर्तिवर्मन प्रथम का शासन हर्ष के सत्ता में आने से बहुत पहले था। परीक्षा टिप: नामों को जोड़कर याद रखें - रविकीर्ति का ऐहोल अभिलेख बताता है कि पुलकेशिन द्वितीय ने हर्ष को नर्मदा पर रोका।

Q4.भारतीय इतिहासपूछा गया: SSC MTS · 13 Oct 2021, Shift 2मध्यम

निम्नलिखित में से किसने 'ईस्ट इंडिया एसोसिएशन' की स्थापना की थी?

  1. A.गोपाल कृष्ण गोखले
  2. B.जॉर्ज यूल
  3. C.व्योमेश चंद्र बनर्जी
  4. D.दादाभाई नौरोजी
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. दादाभाई नौरोजी

व्याख्या

सही उत्तर है D, दादाभाई नौरोजी। दादाभाई नौरोजी ने 1866 में लंदन में ईस्ट इंडिया एसोसिएशन की स्थापना की, जिसका उद्देश्य भारतीय प्रश्नों को ब्रिटिश जनता और संसद सदस्यों के सामने रखना था; इसकी शाखाएँ जल्द ही बंबई, कलकत्ता और मद्रास में खुल गईं। एक वर्ष पहले उन्होंने लंदन इंडियन सोसाइटी भी शुरू की थी। 'भारत के वयोवृद्ध पुरुष' कहे जाने वाले नौरोजी ने 'पॉवर्टी एंड अन-ब्रिटिश रूल इन इंडिया' लिखी, जिसमें भारत से ब्रिटेन जाने वाले धन के निष्कासन (ड्रेन थ्योरी) को समझाया। वे 1892 में ब्रिटिश हाउस ऑफ कॉमन्स के लिए चुने जाने वाले पहले भारतीय बने और तीन बार कांग्रेस के अध्यक्ष रहे। विकल्प A गलत है, क्योंकि गोपाल कृष्ण गोखले ने 1905 में सर्वेंट्स ऑफ इंडिया सोसाइटी बनाई। विकल्प B गलत है, क्योंकि जॉर्ज यूल 1888 के इलाहाबाद अधिवेशन में कांग्रेस के पहले अंग्रेज़ अध्यक्ष बने। विकल्प C गलत है, क्योंकि व्योमेश चंद्र बनर्जी 1885 में कांग्रेस के पहले अध्यक्ष थे। परीक्षा टिप: लंदन इंडियन सोसाइटी 1865 और ईस्ट इंडिया एसोसिएशन 1866 — दोनों दादाभाई नौरोजी की।

Q5.भारतीय इतिहासपूछा गया: मध्य प्रदेश · MPPSC General Studies 2017 Official Papeमध्यम

गाजी मलिक किस वंश का संस्थापक था?

  1. A.तुगलक
  2. B.खिलजी
  3. C.सैयद
  4. D.लोदी
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. तुगलक

व्याख्या

सही उत्तर है A, तुगलक। गाजी मलिक गयासुद्दीन तुगलक की उपाधि थी, जिसने 1320 में दिल्ली सल्तनत के तुगलक वंश की नींव रखी। वह खिलजियों के अधीन दीपालपुर का सूबेदार था और खिलजी शासन का अंत करने वाले खुसरो खान को हराकर उसने दिल्ली की गद्दी पाई। उसने दिल्ली के पास तुगलकाबाद नामक किलेबंद नगर बसाया और 1325 में उसका पुत्र मुहम्मद-बिन-तुगलक उसका उत्तराधिकारी बना। यह वंश 1414 तक शासन करता रहा और इसके सबसे चर्चित शासक मुहम्मद-बिन-तुगलक तथा फिरोज शाह तुगलक रहे। B गलत है क्योंकि खिलजी वंश की स्थापना 1290 में जलालुद्दीन खिलजी ने की थी और उसका सबसे शक्तिशाली शासक अलाउद्दीन खिलजी था। C गलत है क्योंकि सैयद वंश की स्थापना तुगलकों के बाद 1414 में खिज्र खान ने की। D गलत है क्योंकि लोदी वंश की स्थापना 1451 में बहलोल लोदी ने की और यह सल्तनत का अंतिम वंश था। परीक्षा टिप: दिल्ली सल्तनत के पाँच वंशों का क्रम याद रखें - गुलाम, खिलजी, तुगलक, सैयद, लोदी।

Q6.भारतीय इतिहासपूछा गया: UPSC CAPF · 8 Aug 2021कठिन

दक्कन सल्तनतों और उनके संबंधित क्षेत्रों के निम्नलिखित युग्मों में से कौन-सा सही सुमेलित नहीं है?

  1. A.निजाम शाही : बीजापुर
  2. B.बरीद शाही : बीदर
  3. C.कुतुब शाही : गोलकुंडा
  4. D.इमाद शाही : बरार
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. निजाम शाही : बीजापुर

व्याख्या

सही उत्तर है A, निजाम शाही : बीजापुर, क्योंकि यही युग्म गलत सुमेलित है। निजाम शाही वंश अहमदनगर से शासन करता था, जिसकी नींव 1490 में मलिक अहमद ने रखी थी, जबकि बीजापुर यूसुफ आदिल शाह के आदिल शाही वंश का था। पाँचों दक्कन सल्तनतें लगभग 1490 से 1518 के बीच बहमनी राज्य के विघटन से निकलीं और उनमें से चार ने मिलकर 1565 में तालीकोटा के युद्ध में विजयनगर को कुचल दिया। बीजापुर गोल गुंबज के लिए, गोलकुंडा अपने किले और हीरों के लिए तथा अहमदनगर मुगलों के विरुद्ध चाँद बीबी की रक्षा के लिए याद किया जाता है। विकल्प B सही युग्म है, क्योंकि बरीद शाही वंश के पास बीदर था, जो बहमनी राज्य की अंतिम राजधानी थी। विकल्प C सही युग्म है, क्योंकि कुली कुतुब शाह के कुतुब शाही वंश ने गोलकुंडा पर शासन किया और बाद में हैदराबाद की नींव रखी। विकल्प D सही युग्म है, क्योंकि इमाद शाही वंश के पास बरार था, जो सबसे पहले अलग हुआ और सबसे पहले अहमदनगर में मिला लिया गया। परीक्षा टिप: अहमदनगर निजाम शाही, बीजापुर आदिल शाही, गोलकुंडा कुतुब शाही, बीदर बरीद शाही, बरार इमाद शाही।

Q7.भारतीय इतिहासपूछा गया: मध्य प्रदेश · MPPSC General Studies 2015 Official Papeआसान

गुरु नानक ने किसे अपना उत्तराधिकारी नियुक्त किया था?

  1. A.गुरु रामदास
  2. B.गुरु अमरदास
  3. C.गुरु हर राय
  4. D.गुरु अंगद
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. गुरु अंगद

व्याख्या

सही उत्तर है D, गुरु अंगद। सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक ने अपने निष्ठावान शिष्य भाई लहणा को उत्तराधिकारी चुना और उन्हें गुरु अंगद नाम दिया, अपने पुत्रों के दावे को छोड़कर। गुरु अंगद 1539 में दूसरे सिख गुरु बने और उन्हें गुरुमुखी लिपि को वर्तमान रूप देने के लिए याद किया जाता है, उसी लिपि में बाद में सिख ग्रंथ लिखे गए। उन्होंने लंगर यानी निःशुल्क सामूहिक रसोई की परंपरा को भी आगे बढ़ाया। A गलत है क्योंकि गुरु रामदास चौथे गुरु थे और अमृतसर नगर की स्थापना के लिए प्रसिद्ध हैं। B गलत है क्योंकि गुरु अमरदास तीसरे गुरु थे, जो गुरु अंगद के बाद आए, सीधे गुरु नानक के बाद नहीं। C गलत है क्योंकि गुरु हर राय सातवें गुरु थे और बहुत बाद के काल के हैं। परीक्षा टिप: पहले तीन गुरुओं का क्रम याद रखें - नानक, अंगद, अमरदास - और गुरु अंगद को गुरुमुखी लिपि से जोड़ें।

Q8.भारतीय इतिहासपूछा गया: UPSC CAPF · UPSC CAPF AC 2023 Official Paper-Iकठिन

प्राचीन भारतीय सिक्कों के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही नहीं है?

  1. A.इंडो-ग्रीक शासकों ने सबसे पहले ऐसे सिक्के जारी किए जिन पर शासकों के नाम और चित्र अंकित थे।
  2. B.कुषाणों ने सबसे पहले स्वर्ण सिक्के जारी किए।
  3. C.कुषाण स्वर्ण सिक्कों का भार समकालीन रोमन सम्राटों के सिक्कों से भिन्न था।
  4. D.ये कुषाण स्वर्ण सिक्के उत्तर भारत और मध्य एशिया के कई स्थलों से मिले हैं।
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. कुषाण स्वर्ण सिक्कों का भार समकालीन रोमन सम्राटों के सिक्कों से भिन्न था।

व्याख्या

सही उत्तर है C, क्योंकि यही कथन सही नहीं है। कुषाण स्वर्ण सिक्के उस समय के रोमन ऑरियस के समान भार मानक पर ढाले गए थे, भिन्न मानक पर नहीं, क्योंकि यह वंश रोमन जगत से जोरदार व्यापार करता था और उसी मानक को अपनाना सुविधाजनक समझता था। बाकी तीन कथन ठीक हैं। इंडो-ग्रीक शासकों ने भारत के वे पहले सिक्के जारी किए जिन पर शासक का नाम और उसका चित्र दोनों अंकित हैं, जो पहले के आहत (पंच-मार्क्ड) सिक्कों से बड़ा बदलाव था, क्योंकि उन पर केवल प्रतीक बने होते थे। कुषाणों ने विम कडफिसेस और कनिष्क के समय से भारत में पहली बार बड़ी संख्या में स्वर्ण सिक्के जारी किए, जिनके पृष्ठ भाग पर शिव और बुद्ध जैसे देवता दिखते हैं। और उनके स्वर्ण सिक्के वास्तव में उत्तर भारत तथा मध्य एशिया के कई स्थलों से मिले हैं, जो उनके व्यापार के विस्तार का सबसे स्पष्ट प्रमाण है। परीक्षा टिप: आहत सिक्के सबसे प्राचीन, इंडो-ग्रीक सिक्के पहले चित्रयुक्त, कुषाण सिक्के पहले स्वर्ण और सर्वाधिक स्वर्ण सिक्के गुप्तों के।

Q9.भारतीय इतिहासमध्यम

मद्रास प्रेसीडेंसी में 1925 में शुरू हुए आत्मसम्मान आंदोलन का नेतृत्व किसने किया?

  1. A.सी राजगोपालाचारी
  2. B.ई वी रामासामी नायकर
  3. C.श्री नारायण गुरु
  4. D.ज्योतिबा फुले
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. ई वी रामासामी नायकर

व्याख्या

सही उत्तर B, ई वी रामासामी नायकर है, जिन्हें पेरियार कहा जाता है। उन्होंने 1925 में आत्मसम्मान आंदोलन शुरू किया, जिसका उद्देश्य गैर ब्राह्मण जातियों को पुरोहित प्रभुत्व तथा कर्मकांड से मुक्त करना था, और जिसमें पुरोहित के बिना विवाह, विधवा पुनर्विवाह तथा संस्कृत के स्थान पर तमिल के प्रयोग को बढ़ावा दिया गया। विकल्प A गलत है क्योंकि उसी प्रांत के सी राजगोपालाचारी कांग्रेस नेता थे जिनका कार्यक्रम राष्ट्रीय आंदोलन और मद्यनिषेध था, इस प्रकार का जाति विरोधी आंदोलन नहीं। विकल्प C गलत है क्योंकि श्री नारायण गुरु ने केरल में काम किया और दो दशक पहले 1903 में एसएनडीपी योगम बनाया। विकल्प D गलत है क्योंकि ज्योतिबा फुले महाराष्ट्र के और पहले की पीढ़ी के थे, जिन्होंने 1873 में सत्यशोधक समाज बनाया और 1890 में उनका देहांत हुआ। पेरियार के कार्य ने आगे जस्टिस पार्टी और द्रविड़ राजनीति को आकार दिया, और वे दक्षिण में गैर ब्राह्मण आत्मबोध की प्रमुख आवाज के रूप में याद किए जाते हैं।

Q10.भारतीय इतिहासपूछा गया: SSC MTS · 11 Oct 2021, Shift 3मध्यम

रानी रुद्रमादेवी निम्नलिखित में से किस राज्य से संबंधित थीं?

  1. A.चोल
  2. B.वाकाटक
  3. C.पश्चिमी गंग
  4. D.काकतीय
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. काकतीय

व्याख्या

सही उत्तर है D, काकतीय। रुद्रमादेवी ने तेरहवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में वारंगल, जिसे तब ओरुगल्लु कहा जाता था, से काकतीय राज्य पर शासन किया; यह क्षेत्र आज तेलंगाना में है। उनके पिता गणपतिदेव को कोई पुत्र नहीं था, इसलिए उन्होंने रुद्रमादेवी को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया। उन्होंने स्वतंत्र शासक के रूप में राज किया, अभिलेखों में रुद्रदेव जैसा पुरुष नाम धारण किया और स्वयं सेना का नेतृत्व करते हुए विद्रोही सामंतों तथा देवगिरि के यादवों का सामना किया। उनके बाद उनका पौत्र प्रतापरुद्र द्वितीय अंतिम काकतीय शासक बना, जिसके समय वारंगल दिल्ली की सेनाओं के हाथ पड़ा। विकल्प A गलत है, क्योंकि चोल तमिल क्षेत्र में तंजावुर से शासन करते थे। विकल्प B गलत है, क्योंकि वाकाटक तीसरी से पाँचवीं शताब्दी के दक्कन के शासक थे, जिनका गुप्तों से वैवाहिक संबंध था। विकल्प C गलत है, क्योंकि पश्चिमी गंग कर्नाटक में तलकाड से राज करते थे और श्रवणबेलगोला की गोम्मटेश्वर प्रतिमा उनसे जुड़ी है। परीक्षा टिप: काकतीय यानी वारंगल, गणपतिदेव, रुद्रमादेवी और हनमकोंडा का हज़ार खंभों वाला मंदिर।

Q11.भारतीय इतिहासपूछा गया: SSC GD कांस्टेबल · 5 March 2019, Shift 2आसान

किस सेवानिवृत्त ब्रिटिश सिविल सेवा अधिकारी ने इंडियन नेशनल यूनियन की पहली बैठक बुलाने की पहल की?

  1. A.जॉन मॉर्ले
  2. B.एडविन मोंटेग्यू
  3. C.एलन ऑक्टेवियन ह्यूम
  4. D.गिल्बर्ट इलियट
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. एलन ऑक्टेवियन ह्यूम

व्याख्या

सही उत्तर C, एलन ऑक्टेवियन ह्यूम है। उत्तर पश्चिमी प्रांत में सेवा कर चुके इस सेवानिवृत्त भारतीय सिविल सेवा अधिकारी ने 1883 में कलकत्ता विश्वविद्यालय के स्नातकों के नाम अपील जारी की, इंडियन नेशनल यूनियन नाम से संस्था संगठित की, और दिसंबर 1885 में बंबई में उसका पहला अधिवेशन कराया, जहां उसका नाम भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस हुआ; वे कई वर्ष उसके महासचिव रहे। विकल्प A गलत है क्योंकि जॉन मॉर्ले भारत सचिव थे और 1909 के मॉर्ले मिंटो सुधारों के लिए याद किए जाते हैं, जो स्थापना के बहुत बाद आए। विकल्प B गलत है क्योंकि एडविन मोंटेग्यू बाद के भारत सचिव थे, जिनका नाम 1919 के मोंटेग्यू चेम्सफोर्ड सुधारों से जुड़ा है। विकल्प D गलत है क्योंकि गिल्बर्ट इलियट लॉर्ड मिंटो का कुल नाम है, और कोई वायसराय राष्ट्रवादी संगठन की बैठक नहीं बुलाता।

Q12.भारतीय इतिहासपूछा गया: SSC CHSL · 15 Oct 2020, Shift 3आसान

महमूद गज़नवी ने भारत पर कितनी बार आक्रमण किया?

  1. A.5
  2. B.15
  3. C.17
  4. D.7
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. 17

व्याख्या

सही उत्तर है C, 17। महमूद गज़नवी, जिसने 998 से 1030 तक गज़नवी राज्य पर शासन किया, ने लगभग 1000 से 1027 के बीच भारत पर सत्रह बार आक्रमण किए, ऐसा उल्लेख मिलता है। उसका उद्देश्य लूट था, स्थायी शासन नहीं, इसलिए वह धन-संपत्ति लूटकर ले जाता रहा और पंजाब के पूर्व में कोई व्यवस्थित प्रशासन नहीं छोड़ा। इनमें सबसे चर्चित आक्रमण 1025 में गुजरात के सोमनाथ मंदिर का विध्वंस था; इससे पहले उसने 1001 में हिंदूशाही वंश के जयपाल को हराया और मथुरा, थानेसर तथा कन्नौज के समृद्ध मंदिर-नगरों को लूटा। किताब-उल-हिंद लिखने वाला विद्वान अल-बरूनी और कवि फ़िरदौसी उसके दरबार से जुड़े थे। A गलत है क्योंकि पाँच वास्तविक संख्या से बहुत कम है। B गलत है क्योंकि पंद्रह वह संख्या है जिससे सबसे अधिक भ्रम होता है। D गलत है क्योंकि सात भी मान्य संख्या नहीं है। परीक्षा टिप: महमूद गज़नवी ने 17 आक्रमण किए और 1025 में सोमनाथ पर चढ़ाई की, जबकि मुहम्मद ग़ोरी की 1192 की तराईन विजय से तुर्क शासन शुरू हुआ।

Q13.भारतीय इतिहासपूछा गया: मध्य प्रदेश · MPPSC General Studies 2018 Paperमध्यम

भारत छोड़ो का नारा किसने दिया था?

  1. A.महात्मा गांधी
  2. B.पं. जवाहरलाल नेहरू
  3. C.यूसुफ मेहर अली
  4. D.अरुणा आसफ अली
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. यूसुफ मेहर अली

व्याख्या

सही उत्तर C, यूसुफ मेहर अली है। समाजवादी नेता यूसुफ मेहर अली, जो बंबई के महापौर भी रहे, ने भारत छोड़ो शब्द दिए, जैसे उन्होंने 1928 में साइमन वापस जाओ का नारा दिया था, और कांग्रेस ने 8 अगस्त 1942 के अपने प्रस्ताव के लिए यही शब्द अपनाए। विकल्प A आकर्षक होने पर भी गलत है, क्योंकि गांधीजी ने इस आंदोलन को उसका दूसरा और अधिक प्रसिद्ध आह्वान करो या मरो दिया, जो उन्होंने ग्वालिया टैंक के भाषण में कहा; आंदोलन का नाम उनका दिया हुआ नहीं था। विकल्प B गलत है क्योंकि जवाहरलाल नेहरू ने अखिल भारतीय कांग्रेस समिति में प्रस्ताव प्रस्तुत किया और उसका समर्थन किया, किंतु नारा नहीं गढ़ा। विकल्प D गलत है क्योंकि अरुणा आसफ अली 9 अगस्त 1942 को ग्वालिया टैंक पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने और भूमिगत आंदोलन चलाने के लिए स्मरण की जाती हैं, नारे के लिए नहीं।

Q14.भारतीय इतिहासपूछा गया: RRB ग्रुप D · 22 Sep 2018, Shift 1मध्यम

प्रतिहार वंश का संस्थापक कौन था?

  1. A.नरसिंहदेव प्रथम
  2. B.नागभट्ट प्रथम
  3. C.हर्षवर्धन
  4. D.रामचंद्र
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. नागभट्ट प्रथम

व्याख्या

सही उत्तर है B, नागभट्ट प्रथम। नागभट्ट प्रथम ने आठवीं शताब्दी के मध्य में गुर्जर-प्रतिहार वंश की नींव रखी, जिसकी शक्ति का केंद्र पश्चिमी भारत में अवंति और उज्जैन था। उसे मुख्य रूप से सिंध की ओर से बढ़ती अरब सेनाओं को रोकने के लिए याद किया जाता है, और इस उपलब्धि के लिए प्रतिहारों की प्रशंसा बहुत समय तक होती रही। उसके उत्तराधिकारी वत्सराज, नागभट्ट द्वितीय और मिहिर भोज ने इस वंश को उस युग की तीन बड़ी शक्तियों में शामिल कर दिया, और प्रतिहार, बंगाल के पाल तथा दक्कन के राष्ट्रकूट कन्नौज के लिए लंबे त्रिपक्षीय संघर्ष में उलझे रहे, जिसमें अंत में कन्नौज प्रतिहारों के हाथ रहा। A गलत है क्योंकि नरसिंहदेव प्रथम ओडिशा का पूर्वी गंग शासक था, जिसने कोणार्क का सूर्य मंदिर बनवाया। C गलत है क्योंकि हर्षवर्धन थानेसर और कन्नौज के वर्धन वंश का था। D गलत है क्योंकि रामचंद्र देवगिरि के यादव वंश का अंतिम प्रमुख शासक था। परीक्षा टिप: प्रतिहार वंश के संस्थापक नागभट्ट प्रथम, सबसे प्रतापी शासक मिहिर भोज।

Q15.भारतीय इतिहासपूछा गया: बिहार · 46th BPSC Prelims (Held in 2004) Officiaकठिन

1935 के उस विधेयक की संयुक्त संसदीय समिति के अध्यक्ष कौन थे, जिससे भारत सरकार अधिनियम, 1935 का निर्माण हुआ?

  1. A.लिनलिथगो
  2. B.जेम्स मैक्डोनाल्ड
  3. C.विंस्टन चर्चिल
  4. D.क्लेमेंट एटली
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. लिनलिथगो

व्याख्या

सही उत्तर है A, लिनलिथगो। भारतीय संवैधानिक सुधारों पर आए श्वेत पत्र की जाँच करने वाली संयुक्त संसदीय समिति के अध्यक्ष लॉर्ड लिनलिथगो थे, और 1934 में आई उसकी रिपोर्ट ही भारत सरकार अधिनियम, 1935 का मसौदा बनी। परीक्षा में पूछे जाने वाला क्रम इस प्रकार है - 1927 का साइमन आयोग, 1930 से 1932 तक के तीन गोलमेज सम्मेलन, मार्च 1933 का श्वेत पत्र, लिनलिथगो की अध्यक्षता वाली संयुक्त संसदीय समिति, और फिर 1935 का अधिनियम। यही लिनलिथगो 1936 में वायसराय बनकर भारत आए और 1943 तक इस पद पर रहे, अर्थात जिसने अधिनियम गढ़ा उसी ने उसे लागू भी किया। B गलत है क्योंकि ब्रिटिश प्रधानमंत्री रैमसे मैक्डोनाल्ड ने गोलमेज सम्मेलनों की अध्यक्षता की और सांप्रदायिक निर्णय की घोषणा की थी। C गलत है क्योंकि विंस्टन चर्चिल ने इस विधेयक के विरोध में अनुदार दल का नेतृत्व किया था। D गलत है क्योंकि क्लेमेंट एटली साइमन आयोग के सदस्य थे और बाद में उन्होंने सत्ता हस्तांतरण की घोषणा की। परीक्षा टिप: लिनलिथगो - संयुक्त संसदीय समिति 1933-34, फिर वायसराय 1936-43।

Q16.भारतीय इतिहासपूछा गया: UPSC CAPF · 8 Aug 2021कठिन

निम्नलिखित में से किसने हैदराबाद को अपना केंद्र बनाकर निजाम-उल-मुल्क आसफ जाह की उपाधि के साथ स्वयं को स्वतंत्र शासक के रूप में स्थापित किया?

  1. A.आसफ जाह द्वितीय
  2. B.बहादुर शाह
  3. C.अलीवर्दी खान
  4. D.चिन किलिच खान
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. चिन किलिच खान

व्याख्या

सही उत्तर है D, चिन किलिच खान। चिन किलिच खान, जो अपनी उपाधि निजाम-उल-मुल्क आसफ जाह से अधिक याद किए जाते हैं, एक मुगल अमीर थे जिन्हें मुहम्मद शाह ने दक्कन का सूबेदार नियुक्त किया। दिल्ली दरबार की साजिशों से ऊबकर वे दक्षिण लौटे, 1724 में शकर खेड़ा में अपने प्रतिद्वंद्वी मुबारिज खान को हराया और इसके बाद नाम भर के अतिरिक्त हर अर्थ में स्वतंत्र शासक की तरह दक्कन पर राज किया; उन्होंने हैदराबाद के आसफ जाही या निजाम वंश की नींव रखी, जो 1948 तक चला। उन्होंने मुगल निष्ठा का रूप बनाए रखा और बादशाह के नाम से सिक्के ढाले, पर अधिकारी स्वयं नियुक्त किए तथा युद्ध और संधि अपने निर्णय से की। विकल्प A गलत है, क्योंकि आसफ जाह द्वितीय यानी निजाम अली खान इसी वंश के बाद के शासक थे, संस्थापक नहीं। विकल्प B गलत है, क्योंकि बहादुर शाह 1707 से 1712 तक शासन करने वाला मुगल बादशाह था। विकल्प C गलत है, क्योंकि अलीवर्दी खान ने बंगाल में स्वतंत्रता कायम की थी, हैदराबाद में नहीं। परीक्षा टिप: हैदराबाद 1724 चिन किलिच खान, अवध 1722 सआदत खान, बंगाल मुर्शिद कुली खान।

Q17.भारतीय इतिहासपूछा गया: मध्य प्रदेश · MPPSC General Studies 2020 Official Papeकठिन

भारत सरकार अधिनियम, 1919 के अंतर्गत भारतीय विधानमंडल का अंतिम चुनाव किस वर्ष हुआ था?

  1. A.1930
  2. B.1934
  3. C.1945
  4. D.1947
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. 1945

व्याख्या

सही उत्तर है C, 1945। भारत सरकार अधिनियम 1919 के अंतर्गत बनी केंद्रीय विधानसभा का अंतिम चुनाव 1945 की सर्दियों में हुआ, जब दूसरा विश्वयुद्ध समाप्त हो चुका था और ब्रिटेन की लेबर सरकार भारतीय नेताओं से समझौते की दिशा में बढ़ रही थी। कांग्रेस ने लगभग सभी सामान्य सीटें जीतीं और मुस्लिम लीग ने मुसलमानों के लिए आरक्षित लगभग सभी सीटें, और इसी परिणाम ने 1946 की वार्ताओं, कैबिनेट मिशन योजना तथा प्रांतीय विधानमंडलों द्वारा चुनी गई संविधान सभा की दिशा तय की। 1935 के अधिनियम ने प्रांतों का पुनर्गठन किया, परंतु केंद्रीय विधानमंडल स्वतंत्रता तक 1919 के अधिनियम के अंतर्गत ही काम करता रहा। A गलत है क्योंकि 1930 में, जो सविनय अवज्ञा आंदोलन का वर्ष था, कोई केंद्रीय चुनाव नहीं हुआ। B गलत है क्योंकि 1934 का चुनाव इससे पहले का था, अंतिम नहीं। D गलत है क्योंकि 1947 में स्वतंत्रता मिली और कोई नया केंद्रीय चुनाव नहीं हुआ। परीक्षा टिप: 1945-46 के चुनावों को विभाजन से पहले के तीखे सांप्रदायिक बँटवारे से जोड़कर याद रखें।

Q18.भारतीय इतिहासपूछा गया: SSC CGL · 13 Dec 2022, Shift 3मध्यम

पुहार या कावेरीपट्टिनम निम्नलिखित में से किस राजवंश का बंदरगाह था?

  1. A.चेर
  2. B.चोल
  3. C.पांड्य
  4. D.वाकाटक
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. चोल

व्याख्या

सही उत्तर है B, चोल। पुहार, जिसे कावेरीपट्टिनम भी कहा जाता है, संगम युग के आरंभिक चोलों का प्रमुख बंदरगाह था।

यह नगर वहाँ बसा था जहाँ कावेरी नदी बंगाल की खाड़ी में मिलती है, और इसके विकास का श्रेय आरंभिक चोल शासक करिकाल को दिया जाता है। संगम साहित्य तथा तमिल महाकाव्य शिल्पादिकारम में इसके गोदामों, विदेशी व्यापारियों के अलग मोहल्ले और रोम तथा दक्षिण पूर्व एशिया के साथ काली मिर्च, मोती एवं महीन वस्त्रों के व्यापार का वर्णन मिलता है। उरैयूर आरंभिक चोलों की भीतरी राजधानी थी, जबकि पुहार तटवर्ती राजधानी और बंदरगाह के रूप में काम करता था।

A गलत है: केरल तट के चेरों के बंदरगाह मुज़िरिस और तोंडी थे। C गलत है: पांड्य मदुरै से शासन करते थे और उनका बंदरगाह कोरकई था, जो मोतियों के लिए प्रसिद्ध था। D गलत है: वाकाटक दक्कन में शासन करते थे और इस तट पर उनका कोई बंदरगाह नहीं था।

परीक्षा टिप: जोड़ी बनाकर याद रखें, चोल के पुहार और उरैयूर, चेर के मुज़िरिस और वंजी, पांड्य के कोरकई और मदुरै।

Q19.भारतीय इतिहासपूछा गया: CTET · July 2019, Paper 2 Social Studiesमध्यम

'पुटिंग आउट' व्यवस्था के अंतर्गत बुनकर और व्यापारी के बीच का व्यापारिक प्रबंध निम्नलिखित में से कौन-सा था?

  1. A.व्यापारी से सबसे कम बोली पर सूत खरीदा जाता है और कपड़ा सबसे ऊँची बोली पर बेचा जाता है।
  2. B.व्यापारी बुनकर को सूत बेचता है और बुनकर अपने उपयोग के लिए कपड़ा बनाता है।
  3. C.व्यापारी बुनकर को सूत देता है और तैयार कपड़ा बुनकर से कम कीमत पर वापस खरीद लेता है।
  4. D.बुनकर खुले बाज़ार से सूत खरीदता है और कपड़ा व्यापारी को कम कीमत पर बेचता है।
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. व्यापारी बुनकर को सूत देता है और तैयार कपड़ा बुनकर से कम कीमत पर वापस खरीद लेता है।

व्याख्या

सही उत्तर है C। पुटिंग आउट व्यवस्था में व्यापारी बुनकर को कच्चा माल देता था और तैयार कपड़ा अपनी तय की हुई कम कीमत पर वापस ले लेता था।

कारख़ानों के आने से पहले कपड़ा इसी तरह बनता था। व्यापारी या महाजन कारीगरों को सूत देता था और कभी-कभी करघा भी, कारीगर अपने घर पर ही काम करते थे और उन्हें प्रति कपड़े के हिसाब से मज़दूरी मिलती थी। बुनकर के पास न कच्चा माल अपना था और न अपना कोई ख़रीदार, इसलिए वह मोलभाव नहीं कर सकता था, जबकि आपूर्ति, गुणवत्ता और कीमत पर व्यापारी का नियंत्रण रहता था। बंगाल में ईस्ट इंडिया कंपनी के समय यही व्यवस्था दादनी या अग्रिम प्रथा बन गई, जिसने बुनकरों को कंपनी के गुमाश्तों से बाँध दिया।

A गलत है: इसमें खुली बोली नहीं लगती थी, शर्तें व्यापारी तय करता था। B गलत है: कपड़ा बाज़ार के लिए बनता था, बुनकर के अपने उपयोग के लिए नहीं। D गलत है: बुनकर खुले बाज़ार से सूत नहीं खरीदता था।

परीक्षा टिप: पुटिंग आउट यानी कच्चा माल व्यापारी का, श्रम कारीगर के घर का और कीमत व्यापारी की।

Q20.भारतीय इतिहासपूछा गया: बिहार · 30 Sept, 2023मध्यम

1854 के वुड डिस्पैच के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें: 1. इसने उच्च शिक्षा के लिए अंग्रेजी को शिक्षा का माध्यम बनाने की सिफारिश की। 2. इसने स्त्री शिक्षा और व्यावसायिक प्रशिक्षण पर बल दिया। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  1. A.केवल 1
  2. B.केवल 2
  3. C.1 और 2 दोनों
  4. D.न 1 न 2
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. 1 और 2 दोनों

व्याख्या

सही उत्तर है C, 1 और 2 दोनों। बोर्ड ऑफ कंट्रोल के अध्यक्ष चार्ल्स वुड द्वारा भेजे गए 1854 के वुड डिस्पैच को भारत में अंग्रेजी शिक्षा का मैग्नाकार्टा कहा जाता है, और दोनों कथन इसका सही वर्णन करते हैं। इसने उच्च शिक्षा के लिए अंग्रेजी को शिक्षा का माध्यम निर्धारित किया, जबकि प्राथमिक स्तर पर देशी भाषाओं को बनाए रखा, और सरकार से विशेष रूप से कहा कि वह स्त्री शिक्षा को बढ़ावा दे तथा व्यावसायिक एवं तकनीकी प्रकार के विद्यालय खोले। इसने हर प्रांत में लोक शिक्षा विभाग बनाने को कहा, लंदन विश्वविद्यालय के ढाँचे पर विश्वविद्यालयों की सिफारिश की, और निजी विद्यालयों को सहायता अनुदान देने का समर्थन किया। इसी पर अमल करते हुए 1857 में कलकत्ता, बंबई और मद्रास विश्वविद्यालयों की स्थापना हुई। विकल्प A गलत है, क्योंकि यह स्त्री तथा व्यावसायिक शिक्षा के लिए दिए गए स्पष्ट समर्थन को छोड़ देता है। विकल्प B गलत है, क्योंकि यह उच्च शिक्षा में अंग्रेजी माध्यम की सिफारिश को नकारता है। विकल्प D गलत है, क्योंकि दोनों कथन सही हैं। परीक्षा टिप: वुड डिस्पैच 1854 से ही 1857 के तीन विश्वविद्यालय बने।

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