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GK क्विजसामान्य विज्ञान

सामान्य विज्ञान मिश्रित क्विज: सेट 5

  • 20 प्रश्न
  • 20 मिनट
  • कठिनाई: मध्यम
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इस क्विज के बारे में

सामान्य विज्ञान मिश्रित क्विज़ (सेट 5) में 20 बहुविकल्पीय प्रश्न हैं, जो इस विषय के 19 अलग-अलग टॉपिक से लिए गए हैं: मात्रक और मापन, कार्बन और उसके यौगिक, प्रकाश: परावर्तन और अपवर्तन और अन्य। इनमें से 19 प्रश्न पिछले वर्षों की वास्तविक परीक्षाओं में पूछे जा चुके हैं। टॉपिक-वार क्विज़ एक अध्याय की जाँच करता है, जबकि यह सेट पूरे विषय को एक साथ दोहराता है, जैसा परीक्षा में होता है जहाँ अगला प्रश्न किसी भी अध्याय से आ सकता है। हर प्रश्न के साथ सही विकल्प की और बाकी विकल्पों के गलत होने की व्याख्या दी गई है। समय का पालन करते हुए हल करें, अंत में व्याख्याएँ पढ़ें और जिस टॉपिक में गलती हुई उसके नोट्स दोबारा पढ़ें।

इस क्विज के प्रश्न

20 प्रश्न उत्तर और व्याख्या सहित

Q1.सामान्य विज्ञानआसान

प्रकाश वर्ष निम्नलिखित में से किसका मात्रक है?

  1. A.समय
  2. B.दूरी
  3. C.चाल
  4. D.तारे की चमक
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. दूरी

व्याख्या

सही उत्तर B, दूरी है। प्रकाश वर्ष वह दूरी है जो लगभग तीन लाख किलोमीटर प्रति सेकंड की चाल से चलता प्रकाश एक वर्ष में तय करता है, अर्थात लगभग 9.46 खरब किलोमीटर। इसका प्रयोग तारों के बीच की विशाल दूरियों के लिए होता है, जहां किलोमीटर में संख्याएं संभालनी कठिन हो जाती हैं।

विकल्प A नाम में छिपा जाल है; वर्ष शब्द प्रकाश द्वारा लिए गए समय की ओर संकेत करता है, मापी जाने वाली राशि की ओर नहीं। विकल्प C, चाल के अपने मात्रक हैं, जैसे मीटर प्रति सेकंड। विकल्प D, चमक खगोल विज्ञान में कांतिमान जैसी भिन्न राशियों से मापी जाती है। इसी के साथ दो और दूरी मात्रक याद रखें: खगोलीय इकाई, जो पृथ्वी और सूर्य की औसत दूरी है, तथा पारसेक, जो लगभग 3.26 प्रकाश वर्ष के बराबर है।

Q2.सामान्य विज्ञानपूछा गया: RRB JE · CBT-1, 28 June 2019, Shift 3आसान

हीरे में प्रत्येक कार्बन परमाणु कितने कार्बन परमाणुओं से जुड़ा होता है?

  1. A.दो
  2. B.पाँच
  3. C.तीन
  4. D.चार
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. चार

व्याख्या

सही उत्तर है D, चार। हीरे में हर कार्बन परमाणु चार दूसरे कार्बन परमाणुओं से मज़बूत सहसंयोजक (covalent) बंधों द्वारा जुड़ा होता है। ये बंध चतुष्फलक (tetrahedron) के कोनों की ओर होते हैं और पूरे क्रिस्टल में एक कठोर त्रिविमीय जाल बना देते हैं। इसी जाल के कारण हीरा सबसे कठोर प्राकृतिक पदार्थ है और काटने व ड्रिलिंग के औज़ारों में इस्तेमाल होता है। चारों संयोजी इलेक्ट्रॉन बंध बनाने में लग जाते हैं और कोई मुक्त इलेक्ट्रॉन नहीं बचता, इसलिए हीरा बिजली का चालन नहीं करता। कार्बन के दूसरे रूप ग्रेफाइट में हर परमाणु केवल तीन कार्बन से जुड़कर षट्कोणीय परतें बनाता है; बचा हुआ इलेक्ट्रॉन उसे विद्युत चालक बनाता है। A गलत है क्योंकि दो बंधों से ठोस त्रिविमीय जाल नहीं बनता। B गलत है क्योंकि कार्बन की संयोजकता चार है, वह पाँच बंध नहीं बनाता। C गलत है क्योंकि तीन बंध ग्रेफाइट की पहचान है, हीरे की नहीं। परीक्षा टिप: हीरा = 4 बंध, कठोर, कुचालक; ग्रेफाइट = 3 बंध, नरम, सुचालक।

Q3.सामान्य विज्ञानपूछा गया: उत्तर प्रदेश · UPPSC PCS Pre GS-I, 15 Dec 2019आसान

प्रकाश ऊर्जा का ऑप्टिकल फाइबर में संचरण निम्नांकित घटना के अनुप्रयोग द्वारा किया जाता है

  1. A.पूर्ण आंतरिक परावर्तन
  2. B.विवर्तन
  3. C.प्रकीर्णन
  4. D.अपवर्तन
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. पूर्ण आंतरिक परावर्तन

व्याख्या

सही उत्तर है A, पूर्ण आंतरिक परावर्तन। सघन से विरल माध्यम में जाता प्रकाश जब सीमा पर क्रांतिक कोण से बड़े कोण पर टकराता है, तो बाहर निकलने के बजाय पूरा वापस परावर्तित हो जाता है। ऑप्टिकल फाइबर इसी सिद्धांत पर काम करता है। इसमें अधिक अपवर्तनांक वाले काँच या प्लास्टिक का पतला कोर होता है, जिस पर कम अपवर्तनांक वाली परत (क्लैडिंग) चढ़ी रहती है, इसलिए एक सिरे से घुसा प्रकाश बार-बार परावर्तित होकर मोड़ों पर भी बहुत कम हानि के साथ दूर तक पहुँचता है। इसी से इंटरनेट और टेलीफ़ोन के संकेत जाते हैं और एंडोस्कोप से शरीर के भीतर देखा जाता है। भारतीय मूल के भौतिक विज्ञानी नरिंदर सिंह कपानी को फाइबर ऑप्टिक्स का जनक कहा जाता है। विकल्प B गलत है, क्योंकि विवर्तन छोटी बाधाओं के किनारों या पतली झिरी से प्रकाश का मुड़ना है। विकल्प C गलत है, क्योंकि प्रकीर्णन प्रकाश को कई दिशाओं में बिखेरता है, जिससे आकाश नीला दिखता है। विकल्प D गलत है, क्योंकि अपवर्तन केवल नए माध्यम में जाते समय प्रकाश का मुड़ना है, जबकि फाइबर प्रकाश को बाहर निकलने से रोककर काम करता है। परीक्षा टिप: ऑप्टिकल फाइबर, मरीचिका और हीरे की चमक, तीनों पूर्ण आंतरिक परावर्तन से।

Q4.सामान्य विज्ञानपूछा गया: हरियाणा · HPSC HCS Prelims GS, 24 Jul 2022मध्यम

निःश्वसन के दौरान फेफड़ों से वायु तब निकलेगी, जब फेफड़ों के भीतर का दबाव

  1. A.वायुमंडलीय दबाव के बराबर हो
  2. B.वायुमंडलीय दबाव से कम हो
  3. C.वायुमंडलीय दबाव से अधिक हो
  4. D.डायाफ्राम का संकुचन हो
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. वायुमंडलीय दबाव से अधिक हो

व्याख्या

सही उत्तर है C, वायुमंडलीय दबाव से अधिक हो। हवा हमेशा अधिक दबाव वाली जगह से कम दबाव वाली जगह की ओर बहती है, इसलिए वह फेफड़ों से तभी बाहर निकलती है, जब भीतर का दबाव बाहर की हवा के दबाव से अधिक हो जाए। निःश्वसन के समय डायाफ्राम शिथिल होकर ऊपर की ओर गुंबद जैसा हो जाता है, और पसलियों की पेशियाँ ढीली पड़ने से पसलियाँ नीचे व अंदर आती हैं। इससे वक्ष गुहा का आयतन घटता है, फेफड़ों में दबाव बढ़ता है और हवा बाहर धकेल दी जाती है। अंतःश्वसन में इसका उल्टा होता है: डायाफ्राम सिकुड़कर चपटा होता है, वक्ष गुहा बड़ी होती है, फेफड़ों का दबाव वायुमंडलीय दबाव से कम हो जाता है और हवा अंदर आती है। विकल्प A गलत है, क्योंकि दबाव बराबर होने पर हवा नहीं चलती; ऐसा दो साँसों के बीच पल भर के लिए होता है। विकल्प B गलत है, क्योंकि फेफड़ों में कम दबाव होने पर हवा अंदर आती है, जो अंतःश्वसन है। विकल्प D गलत है, क्योंकि डायाफ्राम के संकुचन से अंतःश्वसन होता है, निःश्वसन नहीं। परीक्षा टिप: अंतःश्वसन में डायाफ्राम सिकुड़ता है और दबाव घटता है; निःश्वसन में डायाफ्राम शिथिल होता है और दबाव बढ़ता है।

Q5.सामान्य विज्ञानपूछा गया: हरियाणा · HSSC Police Constable, 25 Aug 2024आसान

एक एम्पीयर ________ के बराबर है।

  1. A.एक कूलंब प्रति सेकंड
  2. B.एक वोल्ट प्रति सेकंड
  3. C.एक जूल प्रति कूलंब
  4. D.एक सेकंड प्रति कूलंब आवेश
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. एक कूलंब प्रति सेकंड

व्याख्या

सही उत्तर है A, एक कूलंब प्रति सेकंड। विद्युत धारा आवेश के प्रवाह की दर है, जिसे I = Q/t लिखा जाता है, इसलिए जब किसी चालक के अनुप्रस्थ काट से एक सेकंड में एक कूलंब आवेश गुज़रता है, तो धारा एक एम्पीयर होती है। एक कूलंब आवेश लगभग 6.25 × 10^18 इलेक्ट्रॉनों के आवेश के बराबर होता है, इसलिए छोटी सी धारा में भी बहुत बड़ी संख्या में इलेक्ट्रॉन चलते हैं। एम्पीयर सात मूल SI मात्रकों में से एक है और इसका नाम फ्रांसीसी वैज्ञानिक आंद्रे-मारी एम्पीयर के नाम पर रखा गया है। धारा को एमीटर से मापा जाता है, जिसे परिपथ में हमेशा श्रेणीक्रम में लगाया जाता है, और छोटी धाराएँ मिलीएम्पीयर या माइक्रोएम्पीयर में बताई जाती हैं। विकल्प B गलत है, क्योंकि वोल्ट प्रति सेकंड धारा का मात्रक नहीं है; वोल्ट विभवांतर मापता है। विकल्प C गलत है, क्योंकि एक जूल प्रति कूलंब एक वोल्ट की परिभाषा है, जो विभवांतर का मात्रक है। विकल्प D गलत है, क्योंकि सेकंड प्रति कूलंब धारा का उल्टा है और किसी मात्रक के रूप में प्रयोग नहीं होता। परीक्षा टिप: एम्पीयर = कूलंब प्रति सेकंड, वोल्ट = जूल प्रति कूलंब, ओम = वोल्ट प्रति एम्पीयर।

Q6.सामान्य विज्ञानपूछा गया: CTET · Paper II Maths & Science, 21 Jan 2024मध्यम

निम्नलिखित में से कौन-सा/से पादप रोग जीवाणु से होता/होते है/हैं? (a) गेहूँ का किट्ट (रस्ट) (b) नींबू का कैंकर (c) भिंडी का पीत शिरा मोज़ेक

  1. A.केवल (c)
  2. B.(a) और (b)
  3. C.केवल (b)
  4. D.(b) और (c)
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. केवल (b)

व्याख्या

सही उत्तर है C, केवल (b)। इन तीनों में से केवल नींबू का कैंकर जीवाणु से होता है; गेहूँ का किट्ट कवक से और भिंडी का पीत शिरा मोज़ेक विषाणु से होता है। नींबू के कैंकर में नींबू, संतरा और दूसरे खट्टे फलों वाले पौधों की पत्तियों, टहनियों और फलों पर उभरे हुए, खुरदरे भूरे धब्बे बन जाते हैं, और यह रोग हवा से फैलता है। गेहूँ के किट्ट में पत्तियों और तनों पर जंग जैसे लाल-भूरे चूर्णी धब्बे बनते हैं, इसीलिए इसका यह नाम पड़ा। पीत शिरा मोज़ेक में भिंडी की पत्तियों की शिराएँ पीली पड़ जाती हैं, और कीट इस विषाणु को एक पौधे से दूसरे तक ले जाते हैं। NCERT की कक्षा 8 की विज्ञान की किताब जीवाणु, कवक और विषाणु से होने वाले पादप रोगों के उदाहरण के रूप में ठीक यही तीन रोग देती है। A गलत है क्योंकि पीत शिरा मोज़ेक विषाणु जनित रोग है। B गलत है क्योंकि इसमें गेहूँ का किट्ट जुड़ा है, जो कवक से होता है। D गलत है क्योंकि इसमें विषाणु से होने वाला पीत शिरा मोज़ेक जुड़ा है। परीक्षा टिप: नींबू का कैंकर – जीवाणु; गेहूँ का किट्ट – कवक; भिंडी का पीत शिरा मोज़ेक – विषाणु।

Q7.सामान्य विज्ञानपूछा गया: RRB ग्रुप D · 16 Sep 2022, Shift 2मध्यम

आधुनिक आवर्त सारणी में निम्नलिखित में से कौन-सा तत्व समूह संख्या 11 का सदस्य नहीं है?

  1. A.Ag
  2. B.Au
  3. C.Cu
  4. D.Hg
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. Hg

व्याख्या

सही उत्तर है D, Hg। पारा (Hg) समूह 12 का तत्व है, समूह 11 का नहीं। आधुनिक आवर्त सारणी के समूह 11 में ताँबा (Cu, परमाणु क्रमांक 29), चाँदी (Ag, 47) और सोना (Au, 79) आते हैं। इन तीनों को सिक्का धातुएँ (coinage metals) कहते हैं क्योंकि इनसे सिक्के बनते थे; इनके बाहरी s कक्षक में एक इलेक्ट्रॉन होता है, इसलिए ये नरम और चमकीली होती हैं, और चाँदी तथा ताँबा सभी धातुओं में बिजली के सबसे अच्छे चालक हैं। पारा आवर्त 6 में सोने के ठीक बगल में है, पर समूह 12 में जिंक और कैडमियम के साथ आता है, और यह कमरे के ताप पर द्रव रहने वाली एकमात्र धातु है। A गलत है क्योंकि चाँदी समूह 11 की धातु है। B गलत है क्योंकि सोना भी समूह 11 में है। C गलत है क्योंकि ताँबा समूह 11 का पहला तत्व है। परीक्षा टिप: समूह 11 = Cu, Ag, Au (सिक्का धातुएँ); समूह 12 = Zn, Cd, Hg; द्रव धातु पारा कभी सिक्का धातु नहीं।

Q8.सामान्य विज्ञानपूछा गया: CDS · CDS (II) 2024, 1 Sep 2024आसान

निम्नलिखित में से कौन-सा हॉर्मोन पौधों में वृद्धि क्रिया को रोकता है?

  1. A.ऑक्सिन
  2. B.साइटोकाइनिन
  3. C.एब्सिसिक अम्ल
  4. D.जिबरेलिन
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. एब्सिसिक अम्ल

व्याख्या

सही उत्तर है C, एब्सिसिक अम्ल। यह पादप हॉर्मोनों में मुख्य वृद्धि रोधक है और वृद्धि बढ़ाने वाले हॉर्मोनों के उलट काम करता है। एब्सिसिक अम्ल (ABA) को तनाव हॉर्मोन कहते हैं, क्योंकि यह सूखे, ठंड और लवणता में पौधे को बचाता है: पानी बचाने के लिए रंध्र बंद कराता है, बीजों और कलियों को सुप्त रखता है ताकि वे खराब मौसम में न फूटें, और पत्तियों व फलों को पुराना होकर गिरने में मदद करता है। इसलिए जब पूछा जाए कि कौन-सा हॉर्मोन वृद्धि धीमी या बंद करता है, तो उत्तर ABA है; बुढ़ापे और फल पकने से जुड़ा दूसरा हॉर्मोन एथिलीन है। A गलत है, ऑक्सिन कोशिकाओं को लंबा करके वृद्धि बढ़ाते हैं और तने को प्रकाश की ओर मोड़ते हैं। B गलत है, साइटोकाइनिन कोशिका विभाजन बढ़ाते हैं और पत्तियों के बुढ़ापे को टालते हैं। D गलत है, जिबरेलिन तने की लंबाई बढ़ाते हैं, बीज की सुप्तावस्था तोड़ते हैं और अंगूर का आकार बढ़ाने के लिए छिड़के जाते हैं। परीक्षा टिप: वृद्धि बढ़ाने वाले ऑक्सिन, जिबरेलिन और साइटोकाइनिन; रोकने वाला एब्सिसिक अम्ल, यानी तनाव हॉर्मोन।

Q9.सामान्य विज्ञानपूछा गया: RRB JE · CBT-1, 16 Dec 2024, Shift 1आसान

निम्नलिखित में से कौन-सी अभिक्रिया मीथेन के दहन को दर्शाती है?

  1. A.CH₄ + 2O₂ → CO₂ + 2H₂O
  2. B.CH₄ + Cl₂ → CH₃Cl + HCl
  3. C.CH₄ + O₂ → CO + H₂O
  4. D.CH₄ + H₂O → CO + H₂
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. CH₄ + 2O₂ → CO₂ + 2H₂O

व्याख्या

सही उत्तर है A, CH₄ + 2O₂ → CO₂ + 2H₂O। दहन का अर्थ है ऑक्सीजन में जलना, और मीथेन के पूर्ण दहन से कार्बन डाइऑक्साइड, पानी, ऊष्मा और प्रकाश मिलते हैं। यह समीकरण संतुलित है: दोनों ओर एक कार्बन, चार हाइड्रोजन और चार ऑक्सीजन परमाणु हैं। मीथेन सबसे सरल हाइड्रोकार्बन है और प्राकृतिक गैस, CNG तथा बायोगैस की मुख्य गैस है; इसीलिए यह चूल्हों और वाहनों में साफ़ नीली लौ के साथ जलती है। ऑक्सीजन कम हो तो दहन अपूर्ण होता है और कार्बन डाइऑक्साइड की जगह ज़हरीली कार्बन मोनोऑक्साइड बनती है। B गलत है क्योंकि यह प्रतिस्थापन अभिक्रिया है: सूर्य के प्रकाश में क्लोरीन मीथेन के एक हाइड्रोजन की जगह ले लेती है, कुछ जलता नहीं। C गलत है क्योंकि यह संतुलित नहीं है और इसमें अपूर्ण दहन वाली कार्बन मोनोऑक्साइड दिखाई गई है। D गलत है क्योंकि मीथेन की भाप (ऑक्सीजन नहीं) से अभिक्रिया कराकर कार्बन मोनोऑक्साइड और हाइड्रोजन बनाना 'स्टीम रिफॉर्मिंग' है, जिससे उद्योग में हाइड्रोजन बनाई जाती है। परीक्षा टिप: किसी भी हाइड्रोकार्बन का पूर्ण दहन = CO₂ + H₂O + ऊर्जा।

Q10.सामान्य विज्ञानपूछा गया: हरियाणा · HPSC HCS Prelims GS, 24 Jul 2022मध्यम

निम्नलिखित रोगों के समूह में से किसमें जिनेटिक रोग समाविष्ट हैं?

  1. A.सिकल सेल अनीमिया, AIDS, डाउन सिन्ड्रोम
  2. B.AIDS, हेपैटाइटिस B, कैन्सर
  3. C.हीमोफिलिया, हेपैटाइटिस B, कलर ब्लाइंडनेस
  4. D.सिकल सेल अनीमिया, हीमोफिलिया, डाउन सिन्ड्रोम
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. सिकल सेल अनीमिया, हीमोफिलिया, डाउन सिन्ड्रोम

व्याख्या

सही उत्तर है D, सिकल सेल अनीमिया, हीमोफिलिया, डाउन सिन्ड्रोम। ये तीनों आनुवंशिक रोग हैं, जो जीन या गुणसूत्रों में बदलाव से होते हैं और जन्म से मिलते हैं, किसी रोगाणु से नहीं। सिकल सेल अनीमिया एक अलिंगसूत्री अप्रभावी रोग है, जिसमें हीमोग्लोबिन के जीन में एक छोटे से बदलाव से लाल रक्त कोशिकाएँ हँसिए जैसी हो जाती हैं। हीमोफिलिया X गुणसूत्र से जुड़ा लिंग-सहलग्न अप्रभावी रोग है, जिसमें खून ठीक से नहीं जमता; यह ज़्यादातर पुरुषों को होता है, और महारानी विक्टोरिया के वंशजों में फैलने के कारण इसे शाही रोग कहा जाता है। डाउन सिन्ड्रोम गुणसूत्र 21 की एक अतिरिक्त प्रति से होने वाला गुणसूत्रीय विकार है, जिसे ट्राइसोमी 21 भी कहते हैं। विकल्प A गलत है, क्योंकि AIDS एचआईवी विषाणु से होता है और जीन से विरासत में नहीं मिलता। विकल्प B गलत है, क्योंकि AIDS और हेपैटाइटिस B विषाणु संक्रमण हैं, और अधिकतर कैंसर जीवन के दौरान हुए उत्परिवर्तन से होते हैं। विकल्प C गलत है, क्योंकि हेपैटाइटिस B विषाणु संक्रमण है, भले ही हीमोफिलिया और वर्णांधता आनुवंशिक हैं। परीक्षा टिप: आनुवंशिक रोगों में सिकल सेल अनीमिया, हीमोफिलिया, वर्णांधता, थैलेसीमिया और डाउन सिन्ड्रोम आते हैं।

Q11.सामान्य विज्ञानपूछा गया: दिल्ली · Delhi Police Const., 15 Nov 2023, S3मध्यम

हाइड्रोजन आयन अकेले नहीं रह सकते, बल्कि जल के अणुओं के साथ जुड़कर ही रहते हैं। हाइड्रोजन आयनों को दिखाने का सही तरीका निम्नलिखित में से कौन-सा है?

  1. A.HO-
  2. B.H3O+
  3. C.H2
  4. D.H2SO4
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. H3O+

व्याख्या

सही उत्तर है B, H3O+। हाइड्रोजन आयन (H+) केवल एक नंगा प्रोटॉन होता है, इसलिए यह पानी में अकेला नहीं रह सकता। यह तुरंत पानी के एक अणु से जुड़कर हाइड्रोनियम आयन, H3O+, बना लेता है। इसलिए जब हाइड्रोक्लोरिक अम्ल जैसा कोई अम्ल पानी में घुलता है, तो वास्तव में H3O+ आयन बनते हैं, और यही घोल को अम्लीय बनाते हैं। पानी के बिना अम्ल अम्लीय गुण नहीं दिखाते, इसीलिए सूखी HCl गैस सूखे नीले लिटमस पत्र का रंग नहीं बदलती। विकल्प A गलत है, क्योंकि HO- (OH-) हाइड्रॉक्साइड आयन है, जो क्षारक पानी में देते हैं। विकल्प C गलत है, क्योंकि H2 हाइड्रोजन गैस है, एक उदासीन अणु, कोई आयन नहीं। विकल्प D गलत है, क्योंकि H2SO4 स्वयं सल्फ्यूरिक अम्ल है, एक यौगिक जो पानी में हाइड्रोजन आयन छोड़ता है। परीक्षा टिप: अम्ल पानी में H3O+ आयन देते हैं और क्षारक OH- आयन; pH 7 वाला घोल उदासीन, 7 से कम अम्लीय और 7 से अधिक क्षारीय होता है।

Q12.सामान्य विज्ञानपूछा गया: CTET · Paper I, 7 Jul 2024मध्यम

पर्वतारोहियों की नाक से ऊँचाई पर खून बहने लगता है, क्योंकि:

  1. A.रक्त वाहिकाओं में दाब बाहरी दाब से अधिक हो जाता है।
  2. B.रक्त वाहिकाओं में दाब बाहरी दाब से कम हो जाता है।
  3. C.रक्त वाहिकाओं में दाब बाहरी दाब के बराबर हो जाता है।
  4. D.अधिक ऊँचाई पर रक्त गाढ़ा हो जाता है।
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. रक्त वाहिकाओं में दाब बाहरी दाब से अधिक हो जाता है।

व्याख्या

सही उत्तर है A, रक्त वाहिकाओं में दाब बाहरी दाब से अधिक हो जाता है। बहुत ऊँचाई पर हवा विरल होती है, इसलिए शरीर पर पड़ने वाला वायुमंडलीय दाब समुद्र तल की तुलना में काफी कम हो जाता है। पर रक्त वाहिकाओं के अंदर खून का दाब लगभग पहले जितना ही रहता है। नाक की रक्त वाहिकाएँ बहुत महीन होती हैं और सतह के पास रहती हैं, इसलिए जब उनके अंदर का दाब बाहर के दाब से अधिक हो जाता है, तो उनमें से कुछ फट जाती हैं और नाक से खून आने लगता है। पहाड़ों की ठंडी और सूखी हवा से नाक की भीतरी परत भी आसानी से फटती है। वायु दाब कम होने से ही पहाड़ों पर पानी 100 °C से कम पर उबलता है और खाना देर से पकता है। B गलत है क्योंकि वाहिकाओं के अंदर का दाब बाहर से कम नहीं, अधिक हो जाता है। C गलत है क्योंकि दाब बराबर होने पर वाहिकाओं को फाड़ने वाला कोई धक्का नहीं बनता। D गलत है क्योंकि ऊँचाई पर खून इतना गाढ़ा नहीं होता कि नाक से खून बहे। परीक्षा टिप: अधिक ऊँचाई – कम वायु दाब – रक्त वाहिकाओं का दाब अपेक्षाकृत अधिक – नाक से खून।

Q13.सामान्य विज्ञानपूछा गया: UPSC CAPF · Paper I, 18 Aug 2019मध्यम

एल्युमिनियम, लोह, ताम्र और जस्ता किससे निष्कर्षित किए जाते हैं?

  1. A.क्रमशः बाक्साइट, मैग्नेटाइट, मैलाकाइट और कैलेमाइन से
  2. B.क्रमशः मैग्नेटाइट, बाक्साइट, मैलाकाइट और कैलेमाइन से
  3. C.क्रमशः कैलेमाइन, मैलाकाइट, मैग्नेटाइट और बाक्साइट से
  4. D.क्रमशः मैलाकाइट, मैग्नेटाइट, बाक्साइट और कैलेमाइन से
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. क्रमशः बाक्साइट, मैग्नेटाइट, मैलाकाइट और कैलेमाइन से

व्याख्या

सही उत्तर है A, क्रमशः बाक्साइट, मैग्नेटाइट, मैलाकाइट और कैलेमाइन से। यहाँ हर धातु अपने सबसे जाने-माने अयस्क के साथ है। बाक्साइट जलयुक्त एल्युमिनियम ऑक्साइड है; इससे एल्युमिना शुद्ध करके हॉल-हेरॉल्ट प्रक्रिया में विद्युत अपघटन से एल्युमिनियम निकाला जाता है। मैग्नेटाइट (Fe3O4) लोहे का चुंबकीय अयस्क है, जबकि हेमेटाइट (Fe2O3) भारत का मुख्य लौह अयस्क है। मैलाकाइट हरे रंग का क्षारीय कॉपर कार्बोनेट है, हालाँकि ताँबे का मुख्य व्यावसायिक अयस्क कॉपर पाइराइट है। कैलेमाइन ज़िंक कार्बोनेट (ZnCO3) है और ज़िंक ब्लेंड (ZnS) जस्ते का दूसरा मुख्य अयस्क है; राजस्थान की ज़ावर खदानें इसके लिए प्रसिद्ध हैं। विकल्प B गलत है, क्योंकि इसमें एल्युमिनियम को मैग्नेटाइट से और लोहे को बाक्साइट से जोड़ा गया है। विकल्प C गलत है, क्योंकि इसमें सूची उलटी है और एल्युमिनियम को कैलेमाइन से, जस्ते को बाक्साइट से जोड़ा गया है। विकल्प D गलत है, क्योंकि मैलाकाइट ताँबे का अयस्क है, एल्युमिनियम का नहीं, और बाक्साइट ताँबे का अयस्क नहीं है। परीक्षा टिप: क्रम से "बा-मै-मै-कै": बाक्साइट-Al, मैग्नेटाइट-Fe, मैलाकाइट-Cu, कैलेमाइन-Zn।

Q14.सामान्य विज्ञानपूछा गया: RRB NTPC · 16 Jun 2022, Shift 1 (CBT 2, Level 2)मध्यम

जल का घनत्व लगभग ______ केल्विन पर सबसे अधिक होता है।

  1. A.0
  2. B.227
  3. C.277
  4. D.273
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. 277

व्याख्या

सही उत्तर है C, 277। जल का घनत्व लगभग 4 डिग्री सेल्सियस पर सबसे अधिक होता है, और 4 में 273 जोड़ने पर लगभग 277 केल्विन आता है। अधिकांश द्रव ठंडे होने पर सिकुड़ते जाते हैं, पर जल का व्यवहार अलग है: 4 डिग्री सेल्सियस से नीचे यह फिर फैलने लगता है क्योंकि इसके अणु बर्फ की खुली, षट्कोणीय संरचना बनाने लगते हैं। इसी असामान्य प्रसार के कारण बर्फ पानी से हल्की होती है और तैरती है, और झील ऊपर से जमती है जबकि 4 डिग्री वाला पानी नीचे बैठ जाता है, जिससे मछलियाँ सर्दी में जीवित रहती हैं। इस बिंदु पर इसका घनत्व लगभग 1 ग्राम प्रति घन सेंटीमीटर होता है। D गलत है क्योंकि 273 केल्विन यानी 0 डिग्री सेल्सियस हिमांक है, जहाँ जल 4 डिग्री की तुलना में कम घना होता है। A गलत है क्योंकि 0 केल्विन परम शून्य है, जहाँ द्रव जल हो ही नहीं सकता। B गलत है क्योंकि 227 केल्विन लगभग शून्य से 46 डिग्री सेल्सियस नीचे है, हिमांक से बहुत नीचे। परीक्षा टिप: जल का अधिकतम घनत्व 4 डिग्री सेल्सियस = 277 K; हिमांक 273 K, क्वथनांक 373 K।

Q15.सामान्य विज्ञानपूछा गया: RRB ALP · CBT-1, 30 Aug 2018, Shift 3आसान

ब्लीचिंग पाउडर को पानी में मिलाने पर कौन-सी गैस निकलती है?

  1. A.हाइड्रोजन
  2. B.क्लोरीन
  3. C.कार्बन मोनोऑक्साइड
  4. D.कार्बन डाइऑक्साइड
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. क्लोरीन

व्याख्या

सही उत्तर है B, क्लोरीन। ब्लीचिंग पाउडर पानी से क्रिया करके क्लोरीन छोड़ता है और यही क्लोरीन रंग उड़ाने तथा कीटाणु मारने का काम करती है। ब्लीचिंग पाउडर कैल्शियम ऑक्सीक्लोराइड, CaOCl2, है, जो सूखे बुझे चूने, Ca(OH)2, पर क्लोरीन गैस प्रवाहित करके बनाया जाता है। पानी के साथ यह फिर से कैल्शियम हाइड्रॉक्साइड और क्लोरीन देता है: CaOCl2 + H2O → Ca(OH)2 + Cl2। इससे मिलने वाली क्लोरीन को "उपलब्ध क्लोरीन" कहते हैं। इसी कारण इसमें क्लोरीन जैसी गंध आती है और इसका उपयोग पीने के पानी व स्विमिंग पूल को कीटाणुरहित करने तथा सूती कपड़े और कागज़ को सफेद करने में होता है। A गलत है क्योंकि ब्लीचिंग पाउडर से हाइड्रोजन गैस नहीं निकलती। C गलत है क्योंकि कार्बन मोनोऑक्साइड ईंधन के अधूरे जलने से बनती है। D गलत है क्योंकि कार्बन डाइऑक्साइड तब निकलती है जब अम्ल धोने के सोडा या खाने के सोडा जैसे कार्बोनेट से क्रिया करता है। परीक्षा टिप: ब्लीचिंग पाउडर = CaOCl2 (क्लोरीन देता है), खाने का सोडा = NaHCO3, धोने का सोडा = Na2CO3.10H2O, प्लास्टर ऑफ पेरिस = CaSO4.½H2O।

Q16.सामान्य विज्ञानपूछा गया: मध्य प्रदेश · MPPSC Pre GS, 18 Feb 2018आसान

मनुष्य की श्रव्यता की सीमा क्या है?

  1. A.20 हर्ट्ज – 20000 हर्ट्ज
  2. B.80 हर्ट्ज – 100 हर्ट्ज
  3. C.2 लाख हर्ट्ज – 4 लाख हर्ट्ज
  4. D.0 हर्ट्ज – 20 हर्ट्ज
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. 20 हर्ट्ज – 20000 हर्ट्ज

व्याख्या

सही उत्तर है A, 20 हर्ट्ज – 20000 हर्ट्ज। स्वस्थ मानव कान लगभग 20 हर्ट्ज से 20,000 हर्ट्ज (20 किलोहर्ट्ज) आवृत्ति वाली ध्वनि तरंगें सुन सकता है; इसे श्रव्य परास कहते हैं। 20 हर्ट्ज से कम आवृत्ति की ध्वनि अवश्रव्य (इन्फ्रासोनिक) कहलाती है, जिसका उपयोग हाथी और व्हेल दूर तक संदेश भेजने में करते हैं। 20 किलोहर्ट्ज से अधिक की ध्वनि पराश्रव्य (अल्ट्रासोनिक) कहलाती है; चमगादड़, कुत्ते और डॉल्फ़िन इसे सुन सकते हैं, और अल्ट्रासाउंड का उपयोग मेडिकल जाँच, नाज़ुक पुर्ज़ों की सफ़ाई और सोनार में होता है। पाँच साल से छोटे बच्चे और कुछ जानवर लगभग 25 किलोहर्ट्ज तक सुन लेते हैं, और उम्र बढ़ने के साथ ऊपरी सीमा घटती जाती है। विकल्प B गलत है, क्योंकि 80 से 100 हर्ट्ज श्रव्य परास का बहुत छोटा हिस्सा भर है। विकल्प C गलत है, क्योंकि 2 लाख से 4 लाख हर्ट्ज, यानी 200 से 400 किलोहर्ट्ज, पूरी तरह पराश्रव्य क्षेत्र में है। विकल्प D गलत है, क्योंकि 0 से 20 हर्ट्ज अवश्रव्य क्षेत्र है, जिसे मनुष्य नहीं सुन सकता। परीक्षा टिप: 20 हर्ट्ज से नीचे अवश्रव्य, 20 हर्ट्ज से 20 किलोहर्ट्ज तक श्रव्य, 20 किलोहर्ट्ज से ऊपर पराश्रव्य।

Q17.सामान्य विज्ञानपूछा गया: उत्तर प्रदेश · UPPSC PCS Pre GS-I, 22 Dec 2024आसान

वह एकमात्र शिरा जो ऑक्सीजन युक्त रक्त वहन करती है, कहलाती है:

  1. A.सिस्टिक शिरा
  2. B.पल्मोनरी शिरा
  3. C.हिपेटिक पोर्टल शिरा
  4. D.कार्डियक शिरा
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. पल्मोनरी शिरा

व्याख्या

सही उत्तर है B, पल्मोनरी शिरा। आमतौर पर शिराएँ कम ऑक्सीजन वाला रक्त हृदय तक वापस लाती हैं, पर फुफ्फुसीय (पल्मोनरी) शिराएँ इसका अपवाद हैं। फेफड़ों में ऑक्सीजन लेने के बाद यह ऑक्सीजन युक्त रक्त चार पल्मोनरी शिराओं, हर फेफड़े से दो, के द्वारा हृदय के बाएँ आलिंद में पहुँचता है। वहाँ से यह बाएँ निलय में जाता है, जो इसे महाधमनी (एओर्टा) के ज़रिए पूरे शरीर में पंप करता है। इसका उल्टा तथ्य भी खूब पूछा जाता है: पल्मोनरी धमनी एकमात्र धमनी है जो ऑक्सीजन रहित रक्त ले जाती है, दाएँ निलय से फेफड़ों तक। यानी नियम यह है कि धमनी रक्त को हृदय से दूर और शिरा हृदय की ओर ले जाती है, रक्त में ऑक्सीजन कितनी भी हो। विकल्प A गलत है, क्योंकि सिस्टिक शिरा पित्ताशय से रक्त लाती है। विकल्प C गलत है, क्योंकि हिपेटिक पोर्टल शिरा आँतों से पोषक तत्वों से भरपूर पर कम ऑक्सीजन वाला रक्त यकृत तक ले जाती है। विकल्प D गलत है, क्योंकि कार्डियक शिराएँ हृदय की मांसपेशियों का इस्तेमाल हो चुका रक्त दाएँ आलिंद में लाती हैं। परीक्षा टिप: पल्मोनरी शिरा – अकेली शिरा जिसमें ऑक्सीजन युक्त रक्त; पल्मोनरी धमनी – अकेली धमनी जिसमें ऑक्सीजन रहित रक्त।

Q18.सामान्य विज्ञानपूछा गया: RRB ALP · CBT-1, 27 Nov 2024, Shift 3आसान

एड्रेनालिन हार्मोन किस ग्रंथि से स्रावित होता है?

  1. A.थायरॉइड ग्रंथि
  2. B.अधिवृक्क (एड्रेनल) ग्रंथि
  3. C.पीनियल ग्रंथि
  4. D.पीयूष (पिट्यूटरी) ग्रंथि
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. अधिवृक्क (एड्रेनल) ग्रंथि

व्याख्या

सही उत्तर है B, अधिवृक्क (एड्रेनल) ग्रंथि। एड्रेनालिन अधिवृक्क ग्रंथियाँ बनाती हैं, जो दोनों गुर्दों के ऊपर टोपी की तरह बैठी होती हैं। डर, गुस्से या अचानक खतरे में यह हार्मोन निकलता है, इसलिए इसे "लड़ो या भागो" हार्मोन कहा जाता है। यह दिल की धड़कन और साँस की गति बढ़ाता है, रक्त में शर्करा बढ़ाता है और मांसपेशियों तक ज़्यादा खून भेजता है ताकि शरीर तुरंत प्रतिक्रिया कर सके। एड्रेनालिन ग्रंथि के भीतरी भाग, अधिवृक्क मेडुला, से निकलता है; बाहरी भाग, कॉर्टेक्स, कॉर्टिसोल और एल्डोस्टेरोन बनाता है। A गलत है क्योंकि गर्दन में स्थित थायरॉइड ग्रंथि थायरॉक्सिन बनाती है, जो उपापचय को नियंत्रित करता है और जिसके लिए आयोडीन ज़रूरी है। C गलत है क्योंकि मस्तिष्क की पीनियल ग्रंथि मेलाटोनिन बनाती है, जो सोने-जागने का चक्र नियंत्रित करता है। D गलत है क्योंकि पीयूष ग्रंथि वृद्धि हार्मोन बनाती है और कई दूसरी ग्रंथियों को नियंत्रित करती है, इसलिए उसे मास्टर ग्रंथि कहते हैं। परीक्षा टिप: अधिवृक्क = एड्रेनालिन (आपातकालीन हार्मोन), थायरॉइड = थायरॉक्सिन (उपापचय), अग्न्याशय = इंसुलिन (रक्त शर्करा), पीयूष = मास्टर ग्रंथि।

Q19.सामान्य विज्ञानपूछा गया: SSC MTS · 7 Oct 2021, Shift 2मध्यम

विटामिन ______ की कमी से पेलाग्रा होता है।

  1. A.B3
  2. B.B6
  3. C.B2
  4. D.B12
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. B3

व्याख्या

सही उत्तर है A, B3। पेलाग्रा विटामिन B3 की कमी से होता है, जिसे नियासिन या निकोटिनिक अम्ल भी कहते हैं। शरीर ट्रिप्टोफैन नामक अमीनो अम्ल से भी नियासिन बना लेता है, इसलिए यह रोग वहां ज्यादा होता है जहां लोग मुख्य रूप से मक्का खाते हैं, क्योंकि उसमें दोनों की कमी होती है। पेलाग्रा को 'चार D' से याद रखा जाता है: डर्मेटाइटिस (धूप लगने वाली त्वचा का खुरदरा और काला पड़ना), डायरिया, डिमेंशिया और इलाज न हो तो डेथ यानी मृत्यु। नियासिन मांस, मछली, मूंगफली, साबुत अनाज और दूध में मिलता है। B गलत है क्योंकि विटामिन B6 (पाइरिडॉक्सिन) की कमी से एनीमिया, त्वचा रोग और शिशुओं में दौरे पड़ते हैं। C गलत है क्योंकि विटामिन B2 (राइबोफ्लेविन) की कमी से होंठ फटते हैं और मुंह के कोनों पर घाव होते हैं, जिसे एरिबोफ्लेविनोसिस कहते हैं। D गलत है क्योंकि विटामिन B12 (कोबालामिन) की कमी से घातक एनीमिया और नसों को नुकसान होता है। परीक्षा टिप: B1 बेरीबेरी, B2 एरिबोफ्लेविनोसिस, B3 पेलाग्रा, B12 घातक एनीमिया; पेलाग्रा = चार D।

Q20.सामान्य विज्ञानपूछा गया: राजस्थान · RPSC RAS Pre, 1 Oct 2023आसान

प्लास्मोडियम की प्रजाति जो घातक मलेरिया का कारण बनती है:

  1. A.विवैक्स
  2. B.फाल्सीपेरम
  3. C.ओवेल
  4. D.मलेरिये
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. फाल्सीपेरम

व्याख्या

सही उत्तर है B, फाल्सीपेरम। प्लास्मोडियम फाल्सीपेरम घातक या सेरेब्रल मलेरिया पैदा करता है, जो इस रोग का सबसे खतरनाक रूप है। इससे संक्रमित लाल रक्त कोशिकाएँ चिपचिपी होकर मस्तिष्क और दूसरे अंगों की छोटी रक्त वाहिकाओं को रोक देती हैं, जिससे इलाज में देर होने पर बेहोशी और मृत्यु तक हो सकती है। मलेरिया मादा एनोफिलीज़ मच्छर के काटने से फैलता है; परजीवी पहले यकृत में और फिर लाल रक्त कोशिकाओं में बढ़ता है, और इन कोशिकाओं के फटने से ठंड लगकर तेज़ बुखार के दौर आते हैं। रोनाल्ड रॉस ने भारत में काम करते हुए 1897 में मच्छर से संबंध सिद्ध किया और 1902 में नोबेल पुरस्कार पाया। विकल्प A गलत है, क्योंकि पी. विवैक्स सौम्य तृतीयक मलेरिया करता है, जो यकृत में छिपी अवस्थाओं से दोबारा लौट सकता है, पर कम ही जानलेवा होता है। विकल्प C गलत है, क्योंकि पी. ओवेल मुख्यतः अफ्रीका में मिलने वाला हल्का तृतीयक मलेरिया करता है। विकल्प D गलत है, क्योंकि पी. मलेरिये चतुर्थक मलेरिया करता है, जिसमें हर चौथे दिन बुखार आता है। परीक्षा टिप: फाल्सीपेरम = घातक; विवैक्स = सौम्य पर लौटने वाला; मादा एनोफिलीज़ = वाहक।

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