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GK क्विजसामान्य विज्ञान

सामान्य विज्ञान मिश्रित क्विज: सेट 47

  • 20 प्रश्न
  • 20 मिनट
  • कठिनाई: मध्यम
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इस क्विज के बारे में

सामान्य विज्ञान मिश्रित क्विज़ (सेट 47) में 20 बहुविकल्पीय प्रश्न हैं, जो इस विषय के 11 अलग-अलग टॉपिक से लिए गए हैं: मानव पाचन और श्वसन तंत्र, पादप जगत: शैवाल से आवृतबीजी तक, परिसंचरण और उत्सर्जन तंत्र और अन्य। इनमें से 10 प्रश्न पिछले वर्षों की वास्तविक परीक्षाओं में पूछे जा चुके हैं। टॉपिक-वार क्विज़ एक अध्याय की जाँच करता है, जबकि यह सेट पूरे विषय को एक साथ दोहराता है, जैसा परीक्षा में होता है जहाँ अगला प्रश्न किसी भी अध्याय से आ सकता है। हर प्रश्न के साथ सही विकल्प की और बाकी विकल्पों के गलत होने की व्याख्या दी गई है। समय का पालन करते हुए हल करें, अंत में व्याख्याएँ पढ़ें और जिस टॉपिक में गलती हुई उसके नोट्स दोबारा पढ़ें।

इस क्विज के प्रश्न

20 प्रश्न उत्तर और व्याख्या सहित

Q1.सामान्य विज्ञानमध्यम

आहारनाल का सबसे लंबा भाग कौन सा है और भोजन का अधिकांश अवशोषण कहां होता है?

  1. A.आमाशय
  2. B.ग्रासनली
  3. C.छोटी आंत
  4. D.बड़ी आंत
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. छोटी आंत

व्याख्या

सही उत्तर C, छोटी आंत है। लगभग छह से सात मीटर लंबी होने के कारण यह नौ मीटर की आहारनाल का सबसे लंबा भाग है, यहीं अग्न्याशयी और आंत्र रसों से पाचन पूरा होता है, और इसकी भीतरी भित्ति पर लाखों अंगुली जैसे रसांकुर होते हैं जो ग्लूकोज, अमीनो अम्ल, वसा अम्ल तथा ग्लिसरॉल को रक्त में सोखने के लिए विशाल पृष्ठ देते हैं। विकल्प A गलत है क्योंकि आमाशय लगभग पच्चीस सेंटीमीटर लंबा एक पेशीय थैला ही है और जल, एल्कोहॉल तथा कुछ औषधियों के अतिरिक्त वह कुछ भी अवशोषित नहीं करता। विकल्प B गलत है क्योंकि ग्रासनली लगभग पच्चीस सेंटीमीटर की एक साधारण संवाहक नली है जो क्रमसंकुचन से भोजन को नीचे धकेलती है। विकल्प D गलत है क्योंकि बड़ी आंत अधिक चौड़ी होकर भी बहुत छोटी है और मुख्यतः अपचे अवशेष से जल और लवण सोखती है।

Q2.सामान्य विज्ञानपूछा गया: SSC MTS · 7 Oct 2021, Shift 1आसान

लिटमस विलयन एक बैंगनी रंजक है, जो लाइकेन से प्राप्त होता है; यह पौधा ________ संघ (डिवीजन) का सदस्य है।

  1. A.जिम्नोस्पर्म
  2. B.टेरिडोफाइटा
  3. C.थैलोफाइटा
  4. D.ब्रायोफाइटा
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. थैलोफाइटा

व्याख्या

सही उत्तर है C, थैलोफाइटा। लिटमस एक बैंगनी रंजक है जो लाइकेन से निकाला जाता है, और विद्यालयी विज्ञान में प्रयुक्त वर्गीकरण में लाइकेन को थैलोफाइटा में रखा जाता है। थैलोफाइटा उन साधारण पौधों का समूह है जिनका शरीर अविभेदित थैलस होता है, यानी उनमें असली जड़, तना और पत्ती नहीं होती। शैवाल और कवक भी इसी समूह में आते हैं, और लाइकेन असल में एक शैवाल और एक कवक के सहजीवन से बनता है। लिटमस एक प्राकृतिक सूचक है: उदासीन विलयन में यह बैंगनी रहता है, अम्ल में लाल और क्षार में नीला हो जाता है; इसका उपयोग विलयन और लिटमस पत्र दोनों रूपों में होता है। विकल्प A गलत है, क्योंकि जिम्नोस्पर्म विकसित पौधे हैं जिनके बीज नग्न होते हैं, जैसे चीड़ और साइकस। विकल्प B गलत है, क्योंकि टेरिडोफाइटा यानी फर्न संवहन ऊतक वाले पहले पौधे हैं। विकल्प D गलत है, क्योंकि मॉस और मार्केंशिया जैसे ब्रायोफाइट को पादप जगत का जलस्थलचर कहा जाता है। परीक्षा टिप: लिटमस अम्ल में लाल, क्षार में नीला और उदासीन में बैंगनी।

Q3.सामान्य विज्ञानमध्यम

मानव शरीर के किस अंग को लाल रक्त कणिकाओं का कब्रिस्तान कहा जाता है?

  1. A.यकृत
  2. B.प्लीहा
  3. C.लाल अस्थि मज्जा
  4. D.अग्न्याशय
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. प्लीहा

व्याख्या

सही उत्तर B, प्लीहा है। एक लाल रक्त कणिका लगभग एक सौ बीस दिन जीती है। बूढ़ी होते हुए उसकी झिल्ली कठोर पड़ जाती है, और प्लीहा के सकरे टेढ़े मार्ग ऐसी कणिकाओं को फंसा लेते हैं, जिससे उनमें बैठे भक्षकाणु उन्हें तोड़कर हीमोग्लोबिन का लोहा बचा सकें। चूंकि वहां इतनी जीर्ण लाल कणिकाएं नष्ट होती हैं, प्लीहा को लाल रक्त कणिकाओं का कब्रिस्तान कहा जाता है; वह शरीर का सबसे बड़ा लसीका अंग भी है और रक्त के भंडार का काम करती है। विकल्प A गलत है क्योंकि यकृत, चाहे वह टूटे हीमोग्लोबिन से बचे बिलिरुबिन को संभालकर पित्त वर्णक में बदलता है, वह स्थान नहीं है जहां कणिकाएं फंसाकर नष्ट की जाती हैं। विकल्प C गलत है क्योंकि लाल अस्थि मज्जा इसका उलटा है: वह लाल रक्त कणिकाओं का जन्मस्थान है, कब्रिस्तान नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि अग्न्याशय पाचक रस तथा इंसुलिन और ग्लूकैगॉन हार्मोन बनाता है और लाल कणिकाओं से उसका कोई संबंध नहीं।

Q4.सामान्य विज्ञानपूछा गया: CDS · 8 Nov 2020मध्यम

पराबैंगनी प्रकाश के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही नहीं है?

  1. A.यह एक विद्युत चुंबकीय तरंग है।
  2. B.यह निर्वात से होकर चल सकती है।
  3. C.यह एक अनुदैर्ध्य तरंग है।
  4. D.इसकी तरंगदैर्ध्य दृश्य प्रकाश से छोटी होती है।
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. यह एक अनुदैर्ध्य तरंग है।

व्याख्या

सही उत्तर है C। पराबैंगनी प्रकाश अनुप्रस्थ तरंग है, अनुदैर्ध्य नहीं, इसलिए यही कथन गलत है। विद्युत चुंबकीय तरंग में विद्युत और चुंबकीय क्षेत्र एक-दूसरे के तथा तरंग की चाल की दिशा के समकोण पर कंपन करते हैं, और यही अनुप्रस्थ तरंग की परिभाषा है। अनुदैर्ध्य तरंगों को दबने और फैलने के लिए कोई माध्यम चाहिए, जिसका सबसे जाना-पहचाना उदाहरण ध्वनि है। विकल्प A सही है, क्योंकि पराबैंगनी प्रकाश विद्युत चुंबकीय स्पेक्ट्रम में दृश्य प्रकाश और एक्स-किरणों के बीच आता है। विकल्प B सही है, क्योंकि विद्युत चुंबकीय तरंगों को माध्यम की जरूरत नहीं होती और वे खाली अंतरिक्ष पार कर लेती हैं, इसीलिए सूर्य की पराबैंगनी किरणें पृथ्वी तक पहुँचती हैं। विकल्प D सही है, क्योंकि पराबैंगनी तरंगदैर्ध्य लगभग 400 नैनोमीटर से घटकर 10 नैनोमीटर तक जाती है, जो बैंगनी प्रकाश से छोटी है; इसी अधिक ऊर्जा से त्वचा जलती है और इसे ओजोन परत सोख लेती है। परीक्षा टिप: सभी विद्युत चुंबकीय तरंगें अनुप्रस्थ होती हैं; ध्वनि जैसी यांत्रिक तरंगें ही अनुदैर्ध्य हो सकती हैं।

Q5.सामान्य विज्ञानपूछा गया: RRB NTPC · 14 Jun, 2026, Shift 3आसान

किसी रासायनिक अभिक्रिया में अभिकारकों और उत्पादों के मात्रात्मक अध्ययन को कौन-सा शब्द दर्शाता है?

  1. A.मोल अंश
  2. B.स्टॉइकियोमीट्री
  3. C.द्रव्यमान प्रतिशत
  4. D.मोलरता
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. स्टॉइकियोमीट्री

व्याख्या

सही उत्तर है B, स्टॉइकियोमीट्री, जिसे हिंदी में रससमीकरणमिति कहा जाता है। यह रसायन विज्ञान की वह शाखा है जो संतुलित रासायनिक समीकरण के आधार पर यह मापती है कि अभिक्रिया में प्रत्येक अभिकारक की कितनी मात्रा खर्च होती है और प्रत्येक उत्पाद की कितनी मात्रा बनती है। संतुलित समीकरण के गुणांक मोल अनुपात बताते हैं, और उसी अनुपात से रसायनज्ञ द्रव्यमान, गैसों का आयतन तथा कणों की संख्या निकालता है, सीमांत अभिकारक पहचानता है और प्रतिशत लब्धि की गणना करता है। यह शब्द ग्रीक के स्टॉइकियोन अर्थात तत्व और मेट्रोन अर्थात माप से बना है। विकल्प A गलत है क्योंकि मोल अंश किसी मिश्रण में एक घटक के मोल और कुल मोल का अनुपात है, जो सांद्रता बताने का तरीका है। विकल्प C गलत है क्योंकि द्रव्यमान प्रतिशत विलयन के 100 द्रव्यमान भाग में घटक का द्रव्यमान बताता है। विकल्प D गलत है क्योंकि मोलरता एक लीटर विलयन में घुले विलेय के मोल की संख्या है। परीक्षा टिप: स्टॉइकियोमीट्री संतुलित समीकरण पर चलती है, जबकि मोल अंश, मोलरता और द्रव्यमान प्रतिशत केवल सांद्रता बताते हैं।

Q6.सामान्य विज्ञानपूछा गया: NDA · 16 April 2023आसान

समान ताप और दाब पर मापे जाने पर सभी गैसों के समान आयतन में कणों की संख्या समान होती है। यह नियम किसने दिया?

  1. A.चार्ल्स
  2. B.बॉयल
  3. C.एवोगाद्रो
  4. D.लुसाक
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. एवोगाद्रो

व्याख्या

सही उत्तर है C, एवोगाद्रो। प्रश्न में दिया गया कथन एवोगाद्रो का नियम है, जिसे इतालवी वैज्ञानिक अमेडियो एवोगाद्रो ने 1811 में दिया था। इसके अनुसार समान ताप और दाब पर सभी गैसों के समान आयतन में अणुओं की संख्या समान होती है, इसलिए गैस का आयतन उसमें उपस्थित मोलों की संख्या के समानुपाती होता है। इसी कारण मानक ताप और दाब पर किसी भी गैस का एक मोल 22.4 लीटर आयतन घेरता है, और एक मोल में कणों की संख्या, लगभग 6.022 गुणा 10 की घात 23, को उनके नाम पर एवोगाद्रो संख्या कहा जाता है। A गलत है क्योंकि चार्ल्स का नियम स्थिर दाब पर गैस के आयतन को उसके ताप से जोड़ता है। B गलत है क्योंकि बॉयल का नियम कहता है कि स्थिर ताप पर आयतन दाब के व्युत्क्रमानुपाती होता है। D गलत है क्योंकि गे-लुसाक ने संयोजी आयतनों का नियम तथा दाब और ताप का नियम दिया था। परीक्षा टिप: एवोगाद्रो आयतन को अणुओं की संख्या से, बॉयल दाब से और चार्ल्स ताप से जोड़ता है।

Q7.सामान्य विज्ञानमध्यम

आमाशय में स्रावित हाइड्रोक्लोरिक अम्ल निम्नलिखित में से कौन सा कार्य करता है?

  1. A.वह सीधे वसा का पाचन करता है
  2. B.वह पेप्सिन की क्रिया के लिए अम्लीय माध्यम देता है और जीवाणुओं को मारता है
  3. C.वह भोजन से विटामिन अवशोषित करता है
  4. D.वह पित्त की तरह वसा का इमल्सीकरण करता है
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. वह पेप्सिन की क्रिया के लिए अम्लीय माध्यम देता है और जीवाणुओं को मारता है

व्याख्या

सही उत्तर B है। जठर ग्रंथियां हाइड्रोक्लोरिक अम्ल स्रावित करती हैं, जो आमाशय की अंतर्वस्तु को प्रबल अम्लीय बना देता है; पेप्सिन केवल ऐसे ही माध्यम में क्रिया कर सकता है, और यह अम्ल भोजन के साथ निगले गए अधिकांश जीवाणुओं को भी मार देता है। वही ग्रंथियां श्लेष्मा की एक परत भी स्रावित करती हैं जो आमाशय की भित्ति को इस अम्ल से पचने से बचाती है, और उस परत को हानि होने पर पेप्टिक अल्सर बन जाता है। विकल्प A गलत है क्योंकि कोई अम्ल वसा का पाचन नहीं करता; वसा का इमल्सीकरण पित्त करता है और फिर लाइपेज उसे तोड़ता है। विकल्प C गलत है क्योंकि विटामिनों का अवशोषण मुख्यतः छोटी आंत में होता है, आमाशय के अम्ल की क्रिया से नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि इमल्सीकरण यकृत में बने पित्त लवणों का कार्य है, और भोजन के ग्रहणी में पहुंचने पर पित्त वास्तव में इस अम्ल को उदासीन कर देता है।

Q8.सामान्य विज्ञानपूछा गया: RRB ग्रुप D · 17 Aug 2022, Shift 2आसान

निम्नलिखित में से कौन-सा भाग पौधों में गैसों के विनिमय में सहायक होता है?

  1. A.कोशिका झिल्ली
  2. B.केंद्रक
  3. C.रंध्र
  4. D.रक्षक कोशिकाएँ
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. रंध्र

व्याख्या

सही उत्तर है C, रंध्र। रंध्र पत्ती की सतह पर बने सूक्ष्म छिद्र हैं, जिनसे पौधा कार्बन डाइऑक्साइड लेता है और ऑक्सीजन तथा जलवाष्प बाहर निकालता है, इसलिए गैसों का विनिमय इन्हीं से होता है। प्रत्येक रंध्र के दोनों ओर सेम के बीज जैसी दो रक्षक कोशिकाएँ होती हैं, जो फूलकर छिद्र खोलती हैं और सिकुड़कर उसे बंद कर देती हैं; इसी तरह पौधा जल की हानि पर नियंत्रण रखता है। अधिकांश रंध्र पत्ती की निचली सतह पर होते हैं, जिससे सीधी धूप में जल कम उड़ता है। वाष्पोत्सर्जन भी मुख्य रूप से इन्हीं छिद्रों से होता है। A गलत है क्योंकि कोशिका झिल्ली एक कोशिका में पदार्थों के आने-जाने को नियंत्रित करती है, पूरे पौधे का गैस विनिमय नहीं। B गलत है क्योंकि केंद्रक आनुवंशिक पदार्थ रखता है और कोशिका की क्रियाओं का निर्देशन करता है। D गलत है क्योंकि रक्षक कोशिकाएँ केवल छिद्र को खोलती और बंद करती हैं, विनिमय रंध्र के छिद्र से ही होता है। परीक्षा टिप: गैस विनिमय और वाष्पोत्सर्जन रंध्र से होता है, खोलना और बंद करना रक्षक कोशिकाएँ करती हैं।

Q9.सामान्य विज्ञानमध्यम

मानव मूत्र का मुख्य नाइट्रोजनी अपशिष्ट यूरिया ______ में बनता है।

  1. A.वृक्क
  2. B.यकृत
  3. C.मूत्राशय
  4. D.प्लीहा
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. यकृत

व्याख्या

सही उत्तर B, यकृत है। जब शरीर आवश्यकता से अधिक प्रोटीन तोड़ता है, तो अमीनो अम्लों से उनका अमीनो समूह हटाया जाता है और इससे निकली अमोनिया अत्यंत विषैली होती है। यकृत इस अमोनिया को अभिक्रियाओं की एक श्रृंखला द्वारा, जिसे यूरिया चक्र या ऑर्निथीन चक्र कहते हैं, कहीं कम विषैले यौगिक यूरिया में बदल देता है। यूरिया फिर रक्त के साथ वृक्क तक जाता है, जो उसे केवल छानकर मूत्र में सांद्र करता है। विकल्प A ठीक इसी कारण गलत है: वृक्क यूरिया निकालता है, बनाता नहीं, और बनने के स्थान तथा निकलने के स्थान का यही अंतर प्रश्न परखता है। विकल्प C गलत है क्योंकि मूत्राशय केवल एक पेशीय थैली है, जो मूत्र को बाहर निकलने तक संचित रखती है। विकल्प D गलत है क्योंकि प्लीहा जीर्ण लाल रक्त कणिकाएं नष्ट करती है और रक्त संचित करती है। चूंकि मनुष्य मुख्यतः यूरिया निकालते हैं, उन्हें यूरियोत्सर्जी प्राणी कहा जाता है, अस्थिल मछलियों के अमोनियोत्सर्जी और पक्षियों तथा सरीसृपों के यूरिकोत्सर्जी होने के विपरीत।

Q10.सामान्य विज्ञानपूछा गया: RRB ALP · 22 Jan 2019, Shift 2मध्यम

तृतीय श्रेणी के उत्तोलक में आयास और भार किस प्रकार गति करते हैं?

  1. A.विपरीत दिशा में
  2. B.एक ही दिशा में
  3. C.लंबवत दिशा में
  4. D.भार के अनुसार
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. एक ही दिशा में

व्याख्या

सही उत्तर है B, एक ही दिशा में। तृतीय श्रेणी के उत्तोलक में आलंब एक सिरे पर होता है, आयास बीच में लगाया जाता है और भार दूसरे सिरे पर होता है। चूँकि आयास और भार दोनों आलंब के एक ही ओर पड़ते हैं, छड़ एक ही ओर घूमती है और दोनों एक ही दिशा में गति करते हैं। इसमें आयास भुजा भार भुजा से छोटी होती है, इसलिए यांत्रिक लाभ एक से कम रहता है और भार से अधिक बल लगाना पड़ता है; ऐसे उत्तोलक से गति और गति का बड़ा विस्तार मिलता है। मनुष्य की अग्रबाहु, चीनी उठाने वाला चिमटा, मछली पकड़ने की छड़ और स्टेपलर इसी प्रकार काम करते हैं। A गलत है क्योंकि आयास और भार विपरीत दिशा में प्रथम श्रेणी के उत्तोलक में चलते हैं, जिसमें आलंब दोनों के बीच होता है, जैसे सी-सॉ या कैंची। C गलत है क्योंकि उत्तोलक एक स्थिर बिंदु पर घूमता है और उसके दोनों सिरे कभी एक-दूसरे के समकोण पर नहीं चलते। D गलत है क्योंकि भार का मान लगने वाले बल को बदलता है, गति की दिशा को नहीं। परीक्षा टिप: प्रथम श्रेणी में आलंब बीच में, द्वितीय में भार बीच में और तृतीय में आयास बीच में।

Q11.सामान्य विज्ञानपूछा गया: CDS · 10 April 2022मध्यम

1 मोल ग्लूकोज के पूर्ण दहन में प्रयुक्त ऑक्सीजन गैस के मोलों की संख्या है:

  1. A.1
  2. B.3
  3. C.6
  4. D.12
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. 6

व्याख्या

सही उत्तर है C, 6। ग्लूकोज के पूर्ण दहन का संतुलित समीकरण है C6H12O6 धन 6O2 से 6CO2 धन 6H2O, अर्थात एक मोल ग्लूकोज को छह मोल ऑक्सीजन गैस चाहिए। इसे संतुलित करना सरल है: ग्लूकोज में छह कार्बन परमाणु हैं, इसलिए कार्बन डाइऑक्साइड के छह अणु बनते हैं, और उसके बारह हाइड्रोजन परमाणुओं से जल के छह अणु बनते हैं। इस प्रकार दाईं ओर अठारह ऑक्सीजन परमाणु चाहिए, और चूँकि ग्लूकोज स्वयं छह दे देता है, शेष बारह ऑक्सीजन गैस से आने चाहिए, जो O2 के छह अणु होते हैं। यही अभिक्रिया हमारी कोशिकाओं में ऑक्सी श्वसन के रूप में चलती है और प्रति मोल ग्लूकोज लगभग 2870 किलोजूल ऊर्जा देती है। विकल्प A गलत है, क्योंकि एक मोल ऑक्सीजन उपस्थित कार्बन का ऑक्सीकरण भी पूरा नहीं कर पाती। विकल्प B गलत है, क्योंकि तीन मोल से अभिक्रिया अधूरी रहती और कार्बन मोनोऑक्साइड बनती। विकल्प D गलत है, क्योंकि बारह ऑक्सीजन के परमाणुओं की गिनती है, अणुओं की नहीं। परीक्षा टिप: ग्लूकोज में कार्बन डाइऑक्साइड, जल और ऑक्सीजन के गुणांक सभी 6 होते हैं।

Q12.सामान्य विज्ञानपूछा गया: NDA · 10 April 2022मध्यम

1 मीटर लंबे दोलक (पेंडुलम) का आवर्तकाल लगभग कितना होता है?

  1. A.6 s
  2. B.4 s
  3. C.2 s
  4. D.1 s
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. 2 s

व्याख्या

सही उत्तर है C, 2 s। लगभग एक मीटर लंबा सरल दोलक एक पूरा दोलन करीब दो सेकंड में पूरा करता है, और इतनी लंबाई वाले दोलक को सेकंड दोलक कहा जाता है। सरल दोलक का आवर्तकाल T = 2 पाई गुणा L बटा g का वर्गमूल होता है, जहाँ L धागे की लंबाई है और g गुरुत्वीय त्वरण, जो लगभग 9.8 मीटर प्रति सेकंड वर्ग होता है। L = 1 मीटर रखने पर T = 2 x 3.14 x एक बटा 9.8 का वर्गमूल आता है, जो लगभग 2.01 सेकंड है। आवर्तकाल केवल लंबाई और g पर निर्भर करता है, गोलक के द्रव्यमान या उसे कितना किनारे खींचा गया है इस पर नहीं, बशर्ते दोलन छोटा हो। A गलत है क्योंकि 6 सेकंड के आवर्तकाल के लिए धागा लगभग 9 मीटर लंबा चाहिए। B गलत है क्योंकि 4 सेकंड के आवर्तकाल के लिए धागा लगभग 4 मीटर लंबा चाहिए। D गलत है क्योंकि 1 सेकंड का आवर्तकाल केवल लगभग 25 सेंटीमीटर के धागे का होता है। परीक्षा टिप: लंबाई चार गुनी होने पर ही आवर्तकाल दोगुना होता है।

Q13.सामान्य विज्ञानआसान

मनुष्य के दाएं फेफड़े में कितने खंड होते हैं?

  1. A.दो
  2. B.तीन
  3. C.चार
  4. D.एक
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. तीन

व्याख्या

सही उत्तर B, तीन है। दायां फेफड़ा तीन खंडों में बंटा होता है, ऊपरी, मध्य और निचला, जबकि बाएं में केवल दो होते हैं, क्योंकि हृदय वक्ष के बाईं ओर झुका होता है और वहां स्थान ले लेता है; बाएं फेफड़े में हृदय के लिए एक कटाव भी होता है जिसे हृदय खांच कहते हैं। विकल्प A गलत है क्योंकि दो बाएं फेफड़े के खंडों की संख्या है, और यह यहां ठीक उसी विद्यार्थी के लिए जाल है जिसे जोड़ी याद है पर यह याद नहीं कि कौन सी संख्या किस ओर की है। विकल्प C गलत है क्योंकि मनुष्य के किसी फेफड़े में चार खंड नहीं होते। विकल्प D गलत है क्योंकि एक अविभाजित फेफड़ा मानव की रचना ही नहीं है। यह नियम याद रखें कि दायां फेफड़ा दोनों में बड़ा है, तीन खंडों वाला, और बायां छोटा, दो खंडों वाला।

Q14.सामान्य विज्ञानपूछा गया: UPSC CAPF · 20 Dec 2020आसान

निम्नलिखित में से किस गैस में विद्युत प्रवाहित करने पर लाल प्रकाश उत्पन्न होता है?

  1. A.हीलियम
  2. B.आर्गन
  3. C.नाइट्रोजन
  4. D.नियॉन
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. नियॉन

व्याख्या

सही उत्तर है D, नियॉन। जब कम दबाव पर नियॉन भरी बंद नली में विद्युत प्रवाहित की जाती है, तो गैस के परमाणु उत्तेजित होकर चमकीला नारंगी-लाल प्रकाश देते हैं, इसीलिए विज्ञापन के साइनबोर्ड आज भी नियॉन साइन कहे जाते हैं। नियॉन एक अक्रिय गैस है, जिसकी खोज 1898 में रैम्से और ट्रैवर्स ने की थी; यह सामान्य यौगिक नहीं बनाती और वोल्टेज परीक्षकों, उच्च वोल्टता सूचकों तथा तड़ित निरोधकों में भी काम आती है। विसर्जन नली में हर गैस अपने ही रंग में चमकती है और यह रंग उसके परमाणु ऊर्जा स्तरों की पहचान होता है। विकल्प A गलत है, क्योंकि हीलियम हल्का गुलाबी-श्वेत प्रकाश देती है और वह गुब्बारों तथा वायुपोतों में भरने के लिए जानी जाती है। विकल्प B गलत है, क्योंकि आर्गन हल्के बैंगनी-नीले रंग में चमकती है और विद्युत बल्बों को भरने तथा वेल्डिंग में सुरक्षा कवच बनाने में काम आती है। विकल्प C गलत है, क्योंकि नाइट्रोजन नीलापन लिए चमकती है और इसका उपयोग अक्रिय पैकिंग गैस तथा द्रव शीतलक के रूप में होता है। परीक्षा टिप: विसर्जन नली में लाल प्रकाश नियॉन का, और साधारण बल्बों में भरी जाने वाली गैस आर्गन।

Q15.सामान्य विज्ञानकठिन

नेफ्रॉन के किस भाग में ग्लूकोज और अमीनो अम्ल का अधिकतम वरणात्मक पुनरवशोषण होता है?

  1. A.बोमन संपुट
  2. B.समीपस्थ कुंडलित नलिका
  3. C.हेनले का लूप
  4. D.संग्रह नलिका
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. समीपस्थ कुंडलित नलिका

व्याख्या

सही उत्तर B, समीपस्थ कुंडलित नलिका है। केशिकागुच्छ पर होने वाला निस्यंदन अंधा होता है: वह अपशिष्ट के साथ उपयोगी ग्लूकोज और अमीनो अम्ल भी बाहर धकेल देता है। बोमन संपुट के तुरंत बाद आने वाली समीपस्थ कुंडलित नलिका में सूक्ष्मांकुरों की ब्रश जैसी कोर होती है, जो उसे विशाल सतह देती है, और वह व्यवहार में सारा ग्लूकोज तथा अमीनो अम्ल और लगभग सत्तर से अस्सी प्रतिशत जल तथा लवण वापस ले लेती है। विकल्प A गलत है क्योंकि बोमन संपुट अतिसूक्ष्म निस्यंदन का स्थल है, जहां निस्यंद बनता है, पुनरवशोषित नहीं होता। विकल्प C गलत है क्योंकि हेनले का लूप दूसरा काम करता है: अपनी प्रतिधारा व्यवस्था से वह मध्यांश में लवण की प्रवणता बनाता है, जिससे सांद्र मूत्र बन सके, और वह जल तथा सोडियम पुनरवशोषित करता है, ग्लूकोज नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि संग्रह नलिका प्रतिमूत्रल हार्मोन के प्रभाव में जल का अंतिम समायोजन करती है। एक नैदानिक सूत्र ध्यान रखें: मूत्र में ग्लूकोज तभी आता है जब रक्त शर्करा उस मात्रा से बढ़ जाए जितनी समीपस्थ नलिका वापस ढो सकती है।

Q16.सामान्य विज्ञानपूछा गया: बिहार · 14 Oct 2022मध्यम

थर्मोप्लास्ट (तापसुघट्य प्लास्टिक)

  1. A.में बहुलकीकरण सभी दिशाओं में बढ़ने के कारण प्राथमिक बंधों का त्रिआयामी जाल होता है
  2. B.लंबी शृंखला वाले अणु होते हैं जो द्वितीयक बंधों से जुड़े रहते हैं
  3. C.में तापमान बढ़ने पर प्लास्टिक रूप से विकृत होने की क्षमता घटती जाती है
  4. D.में द्वितीयक बंध होते हैं और ताप ऊर्जा बढ़ने पर भी ये द्वितीयक बंध कभी नहीं टूटते
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. लंबी शृंखला वाले अणु होते हैं जो द्वितीयक बंधों से जुड़े रहते हैं

व्याख्या

सही उत्तर है B, लंबी शृंखला वाले अणु होते हैं जो द्वितीयक बंधों से जुड़े रहते हैं। थर्मोप्लास्टिक में बहुलक लंबी रेखीय या हल्की शाखित शृंखलाओं के रूप में रहता है, और एक शृंखला दूसरी से केवल वान्डरवाल्स जैसे कमजोर द्वितीयक बलों द्वारा जुड़ी होती है। ताप से इन कमजोर बंधों को ढीला करने भर की ऊर्जा मिल जाती है, इसलिए पदार्थ मुलायम हो जाता है, नया आकार ले लेता है और ठंडा होने पर फिर कठोर हो जाता है; यह चक्र बार-बार दोहराया जा सकता है, इसीलिए थर्मोप्लास्टिक कचरे का पुनर्चक्रण संभव है। पॉलिथीन, पॉलीप्रोपिलीन, पीवीसी, पॉलीस्टाइरीन और नायलॉन इसी वर्ग में आते हैं। A गलत है क्योंकि प्राथमिक बंधों का त्रिआयामी जाल बेकेलाइट जैसे थर्मोसेटिंग प्लास्टिक का लक्षण है, जो एक बार जमने पर फिर नहीं ढाला जा सकता। C गलत है क्योंकि तापमान बढ़ने पर विकृत होने की क्षमता घटती नहीं, बढ़ती है। D गलत है क्योंकि ताप ऊर्जा बढ़ने पर द्वितीयक बंध टूटते हैं, और इसी कारण प्लास्टिक मुलायम होता है। परीक्षा टिप: थर्मोप्लास्टिक में कमजोर द्वितीयक बंध और पुनः ढलाई, थर्मोसेटिंग में तिर्यकबंधित प्राथमिक बंध।

Q17.सामान्य विज्ञानआसान

मनुष्य में श्वासक्रिया के लिए मुख्य रूप से कौन सी पेशी उत्तरदायी है?

  1. A.हृद पेशी
  2. B.डायाफ्राम
  3. C.बाइसेप्स
  4. D.आमाशय की चिकनी पेशी
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. डायाफ्राम

व्याख्या

सही उत्तर B, डायाफ्राम है। यह एक गुंबदाकार पेशी पट है जो वक्ष गुहा को उदर से अलग करता है, और संकुचित होने पर चपटा हो जाता है, जिससे वक्ष का आयतन बढ़ता है, फेफड़ों के भीतर का दाब घटता है और वायु भीतर खिंच आती है; पसलियों के बीच की अंतरापर्शुक पेशियां पसली पिंजर को ऊपर तथा बाहर उठाकर सहायता करती हैं। विकल्प A गलत है क्योंकि हृद पेशी केवल हृदय की भित्ति में मिलती है और उसका कार्य रक्त पंप करना है, वायु नहीं। विकल्प C गलत है क्योंकि बाइसेप्स बांह की कंकाल पेशी है और श्वसन में उसकी कोई भूमिका नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि आमाशय की चिकनी पेशी भोजन का मंथन करती है और श्वासक्रिया से उसका कोई संबंध नहीं। डायाफ्राम के अचानक अनैच्छिक ऐंठन को ही हम हिचकी के रूप में अनुभव करते हैं।

Q18.सामान्य विज्ञानकठिन

किस हार्मोन की कमी से मधुमेह अनीश्वरी रोग होता है, जिसमें बहुत अधिक मात्रा में तनु मूत्र निकलता है?

  1. A.इंसुलिन
  2. B.प्रतिमूत्रल हार्मोन
  3. C.एल्डोस्टेरोन
  4. D.थायरॉक्सिन
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. प्रतिमूत्रल हार्मोन

व्याख्या

सही उत्तर B, प्रतिमूत्रल हार्मोन है। प्रतिमूत्रल हार्मोन, जिसे वैसोप्रेसिन भी कहते हैं, पीयूष ग्रंथि के पश्च भाग से निकलता है और नेफ्रॉन की दूरस्थ नलिका तथा संग्रह नलिका को जल वापस रक्त में खींचने पर लगाता है। यदि यह कम पड़ जाए, तो वह जल वापस नहीं आता और रोगी लीटरों अत्यंत तनु मूत्र निकालता है तथा उसे लगातार प्यास लगती है, यही मधुमेह अनीश्वरी रोग है। विकल्प A गलत है क्योंकि इंसुलिन की कमी से मधुमेह मेलिटस होता है, जो सर्वथा भिन्न विकार है, जिसमें रक्त ग्लूकोज बढ़ता है और शर्करा मूत्र में आ जाती है; मधुमेह शब्द का साझा होना ही यहां जाल है। विकल्प C गलत है क्योंकि अधिवृक्क वल्कुट का एल्डोस्टेरोन सोडियम के पुनरवशोषण तथा पोटैशियम के उत्सर्जन को नियंत्रित करता है, और उसकी कमी लवण संतुलन बिगाड़ती है, तनु मूत्र की बाढ़ नहीं लाती। विकल्प D गलत है क्योंकि थायरॉइड ग्रंथि का थायरॉक्सिन उपापचय की दर नियंत्रित करता है, और उसकी कमी से बच्चों में जड़मानवता तथा वयस्कों में मिक्सीडीमा होता है। याद रखें कि इंसिपिडस का अर्थ स्वादहीन और मेलिटस का अर्थ शहद जैसा मीठा है।

Q19.सामान्य विज्ञानकठिन

मानव रक्त में कार्बन डाइऑक्साइड का परिवहन मुख्य रूप से किस रूप में होता है?

  1. A.ऑक्सीहीमोग्लोबिन के रूप में
  2. B.प्लाज्मा में बाइकार्बोनेट आयन के रूप में
  3. C.मुक्त गैस के बुलबुलों के रूप में
  4. D.कार्बन मोनोऑक्साइड के रूप में
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. प्लाज्मा में बाइकार्बोनेट आयन के रूप में

व्याख्या

सही उत्तर B, बाइकार्बोनेट आयन के रूप में है। ऊतकों में बनी अधिकांश कार्बन डाइऑक्साइड लाल रक्त कणिकाओं में जाती है, जहां कार्बोनिक एनहाइड्रेज एंजाइम उसे जल से मिलाकर कार्बोनिक अम्ल बनाता है, जो तुरंत हाइड्रोजन और बाइकार्बोनेट आयनों में टूट जाता है; फिर बाइकार्बोनेट प्लाज्मा में फेफड़ों तक जाता है, जहां यही अभिक्रिया उलटी होती है और गैस बाहर निकाल दी जाती है। कुछ कम भाग हीमोग्लोबिन से जुड़कर कार्बेमिनोहीमोग्लोबिन के रूप में और थोड़ा घुली अवस्था में ढोया जाता है। विकल्प A गलत है क्योंकि ऑक्सीहीमोग्लोबिन वह रूप है जिसमें ऑक्सीजन का परिवहन होता है, कार्बन डाइऑक्साइड का नहीं। विकल्प C गलत है क्योंकि रक्त में गैस के मुक्त बुलबुले वाहिका अवरोध पैदा करते हैं और घातक होते हैं, वे सामान्य परिवहन का रूप नहीं हैं। विकल्प D गलत है क्योंकि कार्बन मोनोऑक्साइड अपूर्ण दहन से बनी विषैली गैस है जो हीमोग्लोबिन को अवरुद्ध करती है, शरीर उसे परिवहन के लिए नहीं बनाता।

Q20.सामान्य विज्ञानमध्यम

मानव हृदय के बाएं अलिंद और बाएं निलय के बीच स्थित कपाट को ______ कहा जाता है।

  1. A.त्रिवलनी कपाट
  2. B.द्विवलनी कपाट
  3. C.फुफ्फुस अर्धचंद्राकार कपाट
  4. D.महाधमनी अर्धचंद्राकार कपाट
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. द्विवलनी कपाट

व्याख्या

सही उत्तर B, द्विवलनी कपाट है। बाएं अलिंद और बाएं निलय के बीच के छिद्र की रक्षा दो पल्लों या वलनों वाला कपाट करता है, इसीलिए उसे द्विवलनी कपाट कहा जाता है; उसे मिट्रल कपाट भी कहते हैं, क्योंकि उसका आकार बिशप की मिट्रा जैसा लगता है। उसका काम यह है कि शक्तिशाली बायां निलय सिकुड़े तो रक्त वापस अलिंद में न धकेला जाए। विकल्प A गलत है क्योंकि तीन वलनों वाला त्रिवलनी कपाट हृदय की दूसरी ओर, दाएं अलिंद और दाएं निलय के बीच बैठता है; दोनों पक्षों को बदल देना इस प्रश्न की सबसे आम भूल है। विकल्प C गलत है क्योंकि फुफ्फुस अर्धचंद्राकार कपाट फुफ्फुस धमनी के मुख पर खड़ा है, जहां से रक्त दाएं निलय से फेफड़ों को जाता है। विकल्प D गलत है क्योंकि महाधमनी अर्धचंद्राकार कपाट महाधमनी के मुख पर खड़ा है, जहां से रक्त बाएं निलय से निकलता है, अर्थात द्विवलनी कपाट के बाद, कोष्ठों के बीच नहीं। एक उपयोगी स्मृति सूत्र यह है कि बाईं ओर दो वलन हैं और बाएं फेफड़े में दो खंड।

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