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GK क्विजसामान्य विज्ञान

सामान्य विज्ञान मिश्रित क्विज: सेट 16

  • 20 प्रश्न
  • 20 मिनट
  • कठिनाई: मध्यम
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इस क्विज के बारे में

सामान्य विज्ञान मिश्रित क्विज़ (सेट 16) में 20 बहुविकल्पीय प्रश्न हैं, जो इस विषय के 11 अलग-अलग टॉपिक से लिए गए हैं: कार्य, ऊर्जा और शक्ति, जंतु जगत: अकशेरुकी और कशेरुकी, गुरुत्वाकर्षण और दाब और अन्य। इनमें से 14 प्रश्न पिछले वर्षों की वास्तविक परीक्षाओं में पूछे जा चुके हैं। टॉपिक-वार क्विज़ एक अध्याय की जाँच करता है, जबकि यह सेट पूरे विषय को एक साथ दोहराता है, जैसा परीक्षा में होता है जहाँ अगला प्रश्न किसी भी अध्याय से आ सकता है। हर प्रश्न के साथ सही विकल्प की और बाकी विकल्पों के गलत होने की व्याख्या दी गई है। समय का पालन करते हुए हल करें, अंत में व्याख्याएँ पढ़ें और जिस टॉपिक में गलती हुई उसके नोट्स दोबारा पढ़ें।

इस क्विज के प्रश्न

20 प्रश्न उत्तर और व्याख्या सहित

Q1.सामान्य विज्ञानपूछा गया: RRB ALP · 30 Aug 2018, Shift 1आसान

एक लड़का 120 N भार वाले एक बक्से को 2 m की ऊँचाई तक उठाता है। उसके द्वारा किया गया कार्य ________ है।

  1. A.60 J
  2. B.120 J
  3. C.240 J
  4. D.130 J
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. 240 J

व्याख्या

सही उत्तर है C, 240 J। गुरुत्व के विरुद्ध किया गया कार्य भार और ऊँचाई का गुणनफल होता है, इसलिए 120 × 2 = 240 जूल मिलता है। कार्य तब होता है जब कोई बल किसी पिंड को अपनी दिशा में खिसकाता है, और इसे W = F × s से नापा जाता है। यहाँ लड़के को कम से कम बक्से के भार 120 N के बराबर बल लगाना पड़ता है और वह उसे 2 मीटर ऊपर ले जाता है, इसलिए किया गया कार्य 240 जूल है। यह कार्य बक्से में गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा के रूप में जमा हो जाता है, और बक्सा वापस अपनी पुरानी जगह गिरे तो वही 240 जूल लौटा देगा। ध्यान रहे कि भार पहले ही न्यूटन में दिया गया है, इसलिए उसे g से दोबारा गुणा करने की ज़रूरत नहीं। विकल्प A गलत है, क्योंकि 60 J में भार को ऊँचाई से गुणा करने के बजाय भाग दिया गया है। विकल्प B गलत है, क्योंकि 120 J केवल भार है, ऊँचाई छूट गई है। विकल्प D गलत है, क्योंकि 130 J किसी चरण से मेल नहीं खाता। परीक्षा टिप: W = F × s, और गुरुत्व के विरुद्ध कार्य mgh होता है, जहाँ mg भार है।

Q2.सामान्य विज्ञानपूछा गया: SSC CHSL · 19 March 2020, Shift 1आसान

किस संघ के जंतुओं के पैर संधियुक्त होते हैं?

  1. A.मोलस्का
  2. B.निमेटोडा
  3. C.आर्थ्रोपोडा
  4. D.इकाइनोडर्मेटा
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. आर्थ्रोपोडा

व्याख्या

सही उत्तर है C, आर्थ्रोपोडा। नाम में ही उत्तर छिपा है - ग्रीक में आर्थ्रोस का अर्थ संधि और पोडोस का अर्थ पैर है, इसलिए आर्थ्रोपोडा वे जंतु हैं जिनके पैर संधियुक्त होते हैं। इनके शरीर पर काइटिन का कठोर बाह्य कंकाल होता है, शरीर खंडों में बँटा रहता है और परिसंचरण तंत्र खुला होता है। बढ़ने के लिए ये अपना कंकाल उतारते हैं, जिसे निर्मोचन कहते हैं। आर्थ्रोपोडा जंतु जगत का सबसे बड़ा संघ है, जिसमें कीट, मकड़ी, बिच्छू, केकड़ा, झींगा, कनखजूरा आदि आते हैं; ज्ञात जंतु जातियों में लगभग अस्सी प्रतिशत इसी संघ की हैं। विकल्प A गलत है, क्योंकि घोंघा, ऑक्टोपस और सीपी जैसे मोलस्का का शरीर कोमल होता है, जिसमें पेशीय पाद और प्रायः कवच होता है। विकल्प B गलत है, क्योंकि एस्केरिस जैसे निमेटोड बिना खंड वाले गोल कृमि हैं, जिनके पैर होते ही नहीं। विकल्प D गलत है, क्योंकि तारा मछली और समुद्री अर्चिन जैसे इकाइनोडर्म काँटेदार त्वचा वाले समुद्री जंतु हैं, जो नाल पाद से चलते हैं। परीक्षा टिप: आर्थ्रोपोडा सबसे बड़ा संघ, मोलस्का दूसरा सबसे बड़ा।

Q3.सामान्य विज्ञानआसान

किसी द्रव में डूबे पिंड पर ऊपर की ओर लगने वाला बल उसके द्वारा विस्थापित द्रव के भार के बराबर होता है। यह कथन किस नाम से जाना जाता है?

  1. A.पास्कल का नियम
  2. B.आर्किमिडीज सिद्धांत
  3. C.हुक का नियम
  4. D.बॉयल का नियम
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. आर्किमिडीज सिद्धांत

व्याख्या

सही उत्तर B, आर्किमिडीज सिद्धांत है। इसके अनुसार किसी द्रव में पूर्ण या आंशिक रूप से डूबे पिंड पर ऊपर की ओर उत्प्लावन बल लगता है जो विस्थापित द्रव के भार के बराबर होता है, इसलिए पिंड के भार में दिखने वाली आभासी कमी विस्थापित द्रव के भार के बराबर होती है। पिंड तब तैरता है जब विस्थापित द्रव का भार उसके अपने भार के बराबर हो, यही प्लवन का नियम है, और इसी से जहाज, पनडुब्बी, हाइड्रोमीटर तथा लैक्टोमीटर की व्याख्या होती है।

विकल्प A, पास्कल का नियम, बंद द्रव में दाब के संचरण से संबंधित है और हाइड्रोलिक मशीनों की व्याख्या करता है। विकल्प C, हुक का नियम, प्रत्यास्थता से संबंधित है और कहता है कि प्रत्यास्थ सीमा के भीतर प्रतिबल विकृति के अनुक्रमानुपाती होता है। विकल्प D, बॉयल का नियम, गैस नियम है, जिसके अनुसार स्थिर ताप पर निश्चित द्रव्यमान की गैस का दाब उसके आयतन के व्युत्क्रमानुपाती होता है। तरलों के दोनों नियम, पास्कल और आर्किमिडीज, वस्तुनिष्ठ प्रश्नों में सबसे अधिक आपस में बदले जाते हैं।

Q4.सामान्य विज्ञानपूछा गया: RRB ग्रुप D · 17 Sep 2018, Shift 1आसान

निषेचित अंड, अर्थात युग्मनज, ________ में स्थापित होता है।

  1. A.गर्भाशय ग्रीवा
  2. B.अंडाशय
  3. C.योनि
  4. D.गर्भाशय
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. गर्भाशय

व्याख्या

सही उत्तर है D, गर्भाशय। युग्मनज फैलोपियन नलिका से नीचे आते हुए विभाजित होता रहता है और कोशिकाओं का यह पिंड गर्भाशय की मोटी आंतरिक परत में स्थापित हो जाता है।

निषेचन स्वयं फैलोपियन नलिका में होता है, जहाँ शुक्राणु अंडाणु से संयुग्मन कर युग्मनज बनाता है। बार-बार विभाजन से यह भ्रूण बनता है, जो लगभग एक सप्ताह में गर्भाशय तक पहुँचकर एंडोमेट्रियम यानी हार्मोन द्वारा तैयार कोमल भित्ति में धँस जाता है। वहीं प्लेसेंटा विकसित होता है, जो माता के रक्त से भ्रूण तक भोजन और ऑक्सीजन पहुँचाता है तथा अपशिष्ट बाहर ले जाता है। मनुष्य में गर्भावधि लगभग नौ माह की होती है।

विकल्प A गलत है क्योंकि गर्भाशय ग्रीवा गर्भाशय का सँकरा मुख है, जो योनि में खुलता है। विकल्प B गलत है क्योंकि अंडाशय अंडाणु और हार्मोन बनाता है, भ्रूण धारण नहीं करता। विकल्प C गलत है क्योंकि योनि शुक्राणु ग्रहण करने वाला तथा प्रसव का मार्ग है।

परीक्षा टिप: निषेचन फैलोपियन नलिका में, स्थापन गर्भाशय में और पोषण प्लेसेंटा से।

Q5.सामान्य विज्ञानआसान

ऊष्मागतिकी का पहला नियम मूलतः किसका कथन है?

  1. A.ऊर्जा संरक्षण
  2. B.एंट्रॉपी की वृद्धि
  3. C.तापीय साम्य
  4. D.परम शून्य की अप्राप्यता
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. ऊर्जा संरक्षण

व्याख्या

सही उत्तर A, ऊर्जा संरक्षण है। पहला नियम कहता है कि किसी निकाय को दी गई ऊष्मा उसकी आंतरिक ऊर्जा की वृद्धि और उसके द्वारा किए गए बाह्य कार्य के योग के बराबर होती है। न कुछ नष्ट होता है न बनता है; ऊर्जा केवल रूप बदलती है, और यही ऊष्मा पर लागू संरक्षण का सिद्धांत है।

विकल्प B दूसरे नियम से संबंधित है, जो एंट्रॉपी की अवधारणा देता है और कहता है कि विलगित निकाय में वह कभी घटती नहीं। विकल्प C शून्यवें नियम से संबंधित है, जो कहता है कि किसी तीसरी वस्तु के साथ तापीय साम्य में रहने वाली दो वस्तुएँ आपस में भी साम्य में होती हैं और जिससे ताप मापना संभव होता है। विकल्प D तीसरे नियम से संबंधित है, जो कहता है कि परम शून्य की ओर बढ़ते हुए पूर्ण क्रिस्टल की एंट्रॉपी शून्य की ओर जाती है और परम शून्य प्राप्त नहीं किया जा सकता।

Q6.सामान्य विज्ञानपूछा गया: RRB ग्रुप D · 16 Oct 2018, Shift 2आसान

निम्नलिखित में से किनके संयोग से सोल्डर बनता है?

  1. A.सीसा और ताँबा
  2. B.टिन और लोहा
  3. C.सीसा और लोहा
  4. D.सीसा और टिन
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. सीसा और टिन

व्याख्या

सही उत्तर है D, सीसा और टिन। सोल्डर सीसा और टिन का मिश्रधातु है, जिसमें दोनों की मात्रा लगभग बराबर होती है।

मिश्रधातु किसी धातु के साथ एक या अधिक तत्वों का मिश्रण है, जिसे ऐसा गुण पाने के लिए बनाया जाता है जो शुद्ध धातु में नहीं होता। सोल्डर का महत्व इसलिए है कि यह मिश्रण सीसा या टिन दोनों से बहुत कम ताप पर पिघल जाता है, इसलिए यह सरलता से बहकर तारों और विद्युत जोड़ों को जोड़ने में काम आता है। परीक्षा में पूछी जाने वाली अन्य मिश्रधातुएँ हैं पीतल, जो ताँबा और जस्ता से बनता है, काँसा जो ताँबा और टिन से, स्टेनलेस स्टील जो लोहा, क्रोमियम और निकल से तथा जर्मन सिल्वर जो ताँबा, जस्ता और निकल से बनता है।

विकल्प A गलत है क्योंकि सीसा और ताँबा का मिश्रण सोल्डर नहीं है। विकल्प B गलत है क्योंकि टिन और लोहे से टिन की परत चढ़ाई जाती है, जिससे डिब्बे बनते हैं। विकल्प C गलत है क्योंकि सीसा और लोहा सोल्डर के रूप में प्रयुक्त नहीं होते।

परीक्षा टिप: सोल्डर = सीसा और टिन, कम गलनांक; पीतल = ताँबा और जस्ता, काँसा = ताँबा और टिन।

Q7.सामान्य विज्ञानपूछा गया: RRB ग्रुप D · 09 Dec, 2025, Shift 1आसान

निम्नलिखित में से किसमें कणों के बीच सबसे प्रबल आकर्षण बल होता है?

  1. A.जल
  2. B.लोहे की छड़
  3. C.ऐल्कोहॉल
  4. D.ऑक्सीजन गैस
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. लोहे की छड़

व्याख्या

सही उत्तर है B, लोहे की छड़। लोहे की छड़ ठोस है, और कणों के बीच आकर्षण बल ठोस अवस्था में सर्वाधिक प्रबल होता है।

ठोस में कण एक दूसरे के अत्यंत निकट निश्चित स्थानों पर रहते हैं और केवल कंपन कर सकते हैं, इसलिए ठोस का आकार निश्चित रहता है, आयतन निश्चित होता है और वह लगभग असंपीड्य होता है। द्रव में आकर्षण कम होता है, अतः कण एक दूसरे पर सरक सकते हैं और द्रव आयतन बनाए रखते हुए पात्र का आकार ले लेता है। गैस में आकर्षण सबसे कम होता है और कण तेज गति से स्वतंत्र भ्रमण करते हैं, इसलिए गैस पूरे पात्र में फैल जाती है और सरलता से संपीडित हो जाती है। इसी क्रम से यह भी स्पष्ट होता है कि ठोस का घनत्व सर्वाधिक और गैस का सबसे कम होता है।

विकल्प A गलत है क्योंकि जल द्रव है, जिसमें आकर्षण मध्यम होता है। विकल्प C गलत है क्योंकि ऐल्कोहॉल भी द्रव है और जल से अधिक तेजी से वाष्पित होता है। विकल्प D गलत है क्योंकि ऑक्सीजन गैस है, जिसमें कणों के बीच आकर्षण सबसे दुर्बल होता है।

परीक्षा टिप: आकर्षण बल ठोस > द्रव > गैस, और कणों की स्वतंत्रता इसका उल्टा क्रम रखती है।

Q8.सामान्य विज्ञानपूछा गया: SSC CHSL · 09 March, 2023, Shift 1मध्यम

निम्नलिखित में से किस पादप वर्ग के पौधों को शैवाल (एल्गी) कहा जाता है?

  1. A.आवृतबीजी
  2. B.टेरिडोफाइटा
  3. C.ब्रायोफाइटा
  4. D.थैलोफाइटा
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. थैलोफाइटा

व्याख्या

सही उत्तर है D, थैलोफाइटा। शैवाल थैलोफाइटा वर्ग में आते हैं, जो पादप जगत का सबसे सरल समूह है। इनका शरीर थैलस कहलाता है, अर्थात वह जड़, तना और पत्ती में विभाजित नहीं होता, और इनमें संवहन ऊतक भी नहीं होते। अधिकांश शैवाल जल में रहते हैं, प्रकाश संश्लेषण से अपना भोजन बनाते हैं और बीजाणुओं द्वारा प्रजनन करते हैं; स्पाइरोगायरा, यूलोथ्रिक्स, कारा और वॉल्वॉक्स इसके सामान्य उदाहरण हैं। विकल्प A गलत है, क्योंकि आवृतबीजी पुष्पीय पौधे हैं, जिनके बीज फल के भीतर बंद रहते हैं और जो सबसे विकसित समूह हैं। विकल्प B गलत है, क्योंकि टेरिडोफाइटा, जैसे फर्न, पहले ऐसे पौधे हैं जिनमें संवहन ऊतक होते हैं, यद्यपि इनमें बीज नहीं बनते। विकल्प C गलत है, क्योंकि ब्रायोफाइटा, जैसे मॉस और मार्केंशिया, पादप जगत के उभयचर कहलाते हैं और थैलोफाइटा से एक पायदान ऊपर हैं। परीक्षा टिप: क्रम है - थैलोफाइटा, ब्रायोफाइटा, टेरिडोफाइटा, अनावृतबीजी और आवृतबीजी।

Q9.सामान्य विज्ञानपूछा गया: RRB ALP · 23 Jan 2019, Shift 3मध्यम

निम्नलिखित में से कौन-सा त्रिसंयोजी (ट्राइवैलेंट) अपमिश्रक तत्व है?

  1. A.आर्सेनिक
  2. B.एंटीमनी
  3. C.बोरॉन
  4. D.फॉस्फोरस
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. बोरॉन

व्याख्या

सही उत्तर है C, बोरॉन। बोरॉन के बाहरी कोश में तीन इलेक्ट्रॉन होते हैं, इसलिए यह त्रिसंयोजी तत्व है और p-टाइप अपमिश्रक के रूप में प्रयोग होता है। जब बोरॉन, एल्युमिनियम, गैलियम या इंडियम जैसा त्रिसंयोजी परमाणु सिलिकॉन या जर्मेनियम में मिलाया जाता है, तो वह अपने चार पड़ोसी परमाणुओं के साथ केवल तीन सहसंयोजी बंध बना पाता है और एक बंध अधूरा रह जाता है। यह खाली स्थान कोटर (होल) कहलाता है, जो धन आवेश वाहक की तरह व्यवहार करता है, और अपमिश्रित क्रिस्टल p-टाइप अर्धचालक बन जाता है, जिसमें कोटर बहुसंख्यक वाहक होते हैं। इसके बजाय पंचसंयोजी परमाणु मिलाने पर एक मुक्त इलेक्ट्रॉन बचता है और n-टाइप अर्धचालक बनता है। विकल्प A गलत है, क्योंकि आर्सेनिक में पाँच संयोजी इलेक्ट्रॉन होते हैं। विकल्प B गलत है, क्योंकि एंटीमनी भी पंचसंयोजी है और n-टाइप अपमिश्रण में काम आता है। विकल्प D गलत है, क्योंकि फॉस्फोरस पंचसंयोजी है और क्रिस्टल को एक इलेक्ट्रॉन देता है। परीक्षा टिप: त्रिसंयोजी अपमिश्रक p-टाइप, पंचसंयोजी अपमिश्रक n-टाइप बनाते हैं।

Q10.सामान्य विज्ञानपूछा गया: RRB ग्रुप D · 16 Dec, 2025, Shift 3मध्यम

निम्नलिखित में से कौन-सी क्रिया सबसे अच्छी तरह दर्शाती है कि पदार्थ के कणों के बीच आकर्षण बल होता है?

  1. A.स्पंज को दबाना
  2. B.जल में चीनी घोलना
  3. C.चॉक की छड़ तोड़ना
  4. D.बर्फ को गर्म करके जल बनाना
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. चॉक की छड़ तोड़ना

व्याख्या

सही उत्तर है C, चॉक की छड़ तोड़ना। चॉक तोड़ने के लिए बल लगाना पड़ता है, क्योंकि उसके कण एक दूसरे को थामे रखते हैं, और यही खिंचाव कणों के बीच का आकर्षण बल है।

प्रत्येक पदार्थ कणों से बना है जो एक दूसरे को आकर्षित करते हैं, और इस आकर्षण की प्रबलता ही तय करती है कि किसी वस्तु को तोड़ना कितना कठिन है। यह आकर्षण ठोस में सर्वाधिक, द्रव में कम और गैस में सबसे कम होता है, इसी कारण लोहे की छड़ के लिए हथौड़ा चाहिए, जल को उँगली से अलग किया जा सकता है और वायु कोई प्रतिरोध नहीं करती। विद्यालय की वह क्रिया, जिसमें पहले चॉक, फिर पेंसिल और फिर लोहे की कील तोड़ने का प्रयास किया जाता है, विभिन्न ठोसों में इस बल का अंतर दिखाती है।

विकल्प A गलत है क्योंकि स्पंज दबाने से केवल उसके छिद्रों की वायु बाहर निकलती है। विकल्प B गलत है क्योंकि चीनी घुलना विसरण तथा कणों के बीच रिक्त स्थान दर्शाता है। विकल्प D गलत है क्योंकि बर्फ गर्म करना अवस्था परिवर्तन दिखाता है।

परीक्षा टिप: कणों के बीच आकर्षण ठोस में सर्वाधिक, द्रव में कम और गैस में सबसे कम।

Q11.सामान्य विज्ञानपूछा गया: RRB ALP · 30 Aug 2018, Shift 1आसान

तनी हुई धनुष से तीर छोड़ते समय धनुष की स्थितिज ऊर्जा किसमें बदल जाती है?

  1. A.रासायनिक ऊर्जा
  2. B.गतिज ऊर्जा
  3. C.ध्वनि ऊर्जा
  4. D.ऊष्मा ऊर्जा
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. गतिज ऊर्जा

व्याख्या

सही उत्तर है B, गतिज ऊर्जा। तना हुआ धनुष प्रत्यास्थ स्थितिज ऊर्जा संचित करता है, और डोरी छोड़ते ही यह संचित ऊर्जा उड़ते हुए तीर की गतिज ऊर्जा में बदल जाती है। स्थितिज ऊर्जा वह ऊर्जा है जो किसी पिंड में उसकी स्थिति या आकृति के कारण होती है। डोरी खींचने पर धनुष की आकृति बदलती है, इसलिए धनुर्धर द्वारा किया गया कार्य प्रत्यास्थ स्थितिज ऊर्जा के रूप में जमा हो जाता है; ऐसी ही ऊर्जा दबी हुई कमानी या घड़ी की चाबी वाली स्प्रिंग में भी जमा रहती है। डोरी छोड़ते ही धनुष अपनी पुरानी आकृति में लौटकर तीर को आगे धकेलता है और संचित ऊर्जा गति की ऊर्जा बन जाती है। थोड़ी ऊर्जा ध्वनि और ऊष्मा के रूप में भी जाती है, पर मुख्य परिवर्तन स्थितिज से गतिज ही है। विकल्प A गलत है, क्योंकि रासायनिक ऊर्जा ईंधन और भोजन के बंधों में होती है। विकल्प C गलत है, क्योंकि ध्वनि केवल छोटी सी हानि है। विकल्प D गलत है, क्योंकि ऊष्मा भी यहाँ मामूली हानि है। परीक्षा टिप: तना धनुष, दबी कमानी और खिंची गुलेल, तीनों प्रत्यास्थ स्थितिज ऊर्जा संचित करते हैं।

Q12.सामान्य विज्ञानपूछा गया: RRB ALP · 23 Jan 2019, Shift 3मध्यम

पूर्ण तरंग दिष्टकारी परिपथ (सेंटर-टैप) के लिए कितने P-N संधि डायोड की आवश्यकता होती है?

  1. A.2
  2. B.1
  3. C.4
  4. D.6
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. 2

व्याख्या

सही उत्तर है A, 2। सेंटर-टैप पूर्ण तरंग दिष्टकारी में दो p-n संधि डायोड लगते हैं, निवेश चक्र के हर आधे भाग के लिए एक। ट्रांसफार्मर की द्वितीयक कुंडली बीच से टैप की जाती है, जिससे उसके दोनों आधे भाग बराबर पर विपरीत चिह्न की वोल्टता देते हैं। एक आधे चक्र में ऊपर वाला डायोड चालन करता है और अगले आधे चक्र में नीचे वाला, और दोनों लोड में धारा एक ही दिशा में भेजते हैं, इसलिए निर्गत में हर चक्र में दो स्पंद मिलते हैं। यही कारण है कि पूर्ण तरंग दिष्टकारी का औसत निर्गत अधिक और तरंगिका (रिपल) कम होती है। पूर्ण तरंग दिष्टकारी बनाने का दूसरा तरीका ब्रिज परिपथ है, जिसमें चार डायोड लगते हैं पर सेंटर टैप की ज़रूरत नहीं होती। विकल्प B गलत है, क्योंकि एक डायोड से अर्ध तरंग दिष्टकारी बनता है। विकल्प C गलत है, क्योंकि चार डायोड ब्रिज दिष्टकारी में लगते हैं। विकल्प D गलत है, क्योंकि छह डायोड तीन-फेज दिष्टकारी में प्रयोग होते हैं। परीक्षा टिप: अर्ध तरंग 1, सेंटर-टैप पूर्ण तरंग 2, ब्रिज 4 डायोड।

Q13.सामान्य विज्ञानआसान

चंद्रमा की सतह पर किसी पिंड का भार पृथ्वी की सतह पर उसके भार का लगभग कितना होता है?

  1. A.आधा
  2. B.एक चौथाई
  3. C.छठा भाग
  4. D.उतना ही
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. छठा भाग

व्याख्या

सही उत्तर C, छठा भाग है। भार द्रव्यमान गुणा गुरुत्वीय त्वरण के बराबर होता है, और चंद्रमा पर गुरुत्वीय त्वरण पृथ्वी के मान का लगभग छठा भाग है, क्योंकि चंद्रमा का द्रव्यमान बहुत कम और त्रिज्या भी छोटी है। इसलिए साठ किलोग्राम के पिंड का द्रव्यमान चंद्रमा पर भी साठ किलोग्राम ही रहेगा, पर भार पृथ्वी के भार का लगभग छठा भाग रह जाएगा, इसीलिए अंतरिक्ष यात्री वहाँ लंबी उछाल भरकर चल पाते हैं।

विकल्प A और B, आधा तथा एक चौथाई, ऐसे गढ़े हुए अंश हैं जिनका चंद्रमा के द्रव्यमान और त्रिज्या से कोई संबंध नहीं। विकल्प D, उतना ही, पिंड के द्रव्यमान के लिए सही होता पर भार के लिए कभी नहीं, और यही वह भ्रम है जिसे यह प्रश्न पकड़ना चाहता है। एक पंक्ति का नियम याद रखें: द्रव्यमान स्थान से नहीं बदलता, भार बदलता है, और चंद्रमा पर यह परिवर्तन लगभग छठे भाग का होता है।

Q14.सामान्य विज्ञानपूछा गया: RRB NTPC · 15 June 2022, Shift 1आसान

यह कथन कि किसी द्रव में पूर्ण या आंशिक रूप से डूबी वस्तु पर लगने वाला ऊपर की ओर उत्प्लावन बल उस वस्तु द्वारा हटाए गए द्रव के भार के बराबर होता है, किससे संबंधित है?

  1. A.आर्किमिडीज का सिद्धांत
  2. B.बर्नूली का सिद्धांत
  3. C.बीयर लैम्बर्ट नियम
  4. D.पास्कल का नियम
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. आर्किमिडीज का सिद्धांत

व्याख्या

सही उत्तर है A, आर्किमिडीज का सिद्धांत। इसके अनुसार द्रव में पूरी या आंशिक रूप से डूबी वस्तु पर लगने वाला उत्प्लावन बल उतना ही होता है जितना उस वस्तु द्वारा हटाए गए द्रव का भार। यही कारण है कि कुएँ के भीतर पानी से भरी बाल्टी हल्की लगती है और लोहे का बना विशाल जहाज भी तैरता रहता है, क्योंकि उसका खोखला आकार इतना पानी हटाता है कि वह उसके अपने भार को संभाल ले। इसी सिद्धांत से प्लवन का नियम निकलता है और हाइड्रोमीटर से द्रव का घनत्व तथा धातु की शुद्धता मापी जाती है। B गलत है क्योंकि बर्नूली का सिद्धांत बहते द्रव की चाल और दाब के संबंध को बताता है और वायुयान के पंख पर उठाव समझाता है। C गलत है क्योंकि बीयर-लैम्बर्ट नियम यह बताता है कि विलयन से गुजरते समय प्रकाश कितना अवशोषित होता है। D गलत है क्योंकि पास्कल का नियम कहता है कि बंद द्रव पर लगाया गया दाब हर दिशा में समान रूप से फैलता है, जिस पर हाइड्रोलिक ब्रेक और लिफ्ट काम करते हैं। परीक्षा टिप: उत्प्लावन के लिए आर्किमिडीज, हाइड्रोलिक प्रेस के लिए पास्कल, पंख के उठाव के लिए बर्नूली।

Q15.सामान्य विज्ञानमध्यम

ताप की अवधारणा का आधार ऊष्मागतिकी का कौन सा नियम देता है?

  1. A.शून्यवाँ नियम
  2. B.पहला नियम
  3. C.दूसरा नियम
  4. D.तीसरा नियम
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. शून्यवाँ नियम

व्याख्या

सही उत्तर A, शून्यवाँ नियम है। यह कहता है कि यदि वस्तु क वस्तु ग के साथ तापीय साम्य में है और वस्तु ख भी वस्तु ग के साथ तापीय साम्य में है, तो क और ख आपस में भी तापीय साम्य में होंगी। इसी से तापमापी का प्रयोग संभव होता है, क्योंकि तापमापी उसी तीसरी वस्तु की भूमिका निभाता है और जिन दो वस्तुओं पर वह एक ही पाठ्यांक दे उनका ताप समान होता है।

विकल्प B पहला नियम ऊर्जा के हिसाब किताब से संबंधित है, ताप के अर्थ से नहीं। विकल्प C दूसरा नियम ऊष्मा के बहने की दिशा तय करता है और इंजन की दक्षता पर सीमा लगाता है। विकल्प D तीसरा नियम परम शून्य के निकट के व्यवहार से संबंधित है। शून्यवें नियम को तब पहचाना और नाम दिया गया जब शेष तीन नियमों की संख्या पहले ही तय हो चुकी थी, इसीलिए इसे शून्य कहा गया।

Q16.सामान्य विज्ञानपूछा गया: दिल्ली · DSSSB Asst. Supdt., 20 Jul 2024, S1आसान

मानव DNA की द्विकुंडलित संरचना में क्षार एडेनिन निम्नलिखित में से किस क्षार के साथ दो हाइड्रोजन बंध बनाकर क्षार-युग्म बनाता है?

  1. A.ग्वानिन
  2. B.साइटोसिन
  3. C.थाइमिन
  4. D.हिस्टोन
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. थाइमिन

व्याख्या

सही उत्तर है C, थाइमिन। DNA में एडेनिन हमेशा थाइमिन के साथ दो हाइड्रोजन बंधों से जुड़ता है, और ग्वानिन साइटोसिन के साथ तीन बंधों से। इसे पूरक क्षार-युग्मन कहते हैं, और इसी कारण DNA का एक सूत्र दूसरे की नकल बनाने में काम आता है। द्विकुंडली मॉडल 1953 में जेम्स वॉटसन और फ्रांसिस क्रिक ने रोज़ालिंड फ्रैंकलिन की एक्स-रे तस्वीरों की मदद से दिया था। एडेनिन और ग्वानिन दो वलय वाले प्यूरीन हैं, जबकि थाइमिन और साइटोसिन एक वलय वाले पिरिमिडीन हैं, इसलिए हर जोड़े की चौड़ाई बराबर रहती है और कुंडली एक-सी बनी रहती है। RNA में थाइमिन की जगह यूरेसिल होता है। विकल्प A गलत है, क्योंकि ग्वानिन भी एडेनिन की तरह प्यूरीन है और साइटोसिन से जोड़ा बनाता है। विकल्प B गलत है, क्योंकि साइटोसिन तीन हाइड्रोजन बंधों से ग्वानिन के साथ जुड़ता है। विकल्प D गलत है, क्योंकि हिस्टोन एक प्रोटीन है, जिसके चारों ओर गुणसूत्रों में DNA लिपटा रहता है; यह क्षार है ही नहीं। परीक्षा टिप: A की जोड़ी T से दो बंधों से, G की C से तीन बंधों से; RNA में T की जगह U होता है।

Q17.सामान्य विज्ञानपूछा गया: RRB ALP · 30 Aug 2018, Shift 1आसान

यांत्रिक ऊर्जा किसके बराबर होती है?

  1. A.गतिज ऊर्जा + रासायनिक ऊर्जा
  2. B.गतिज ऊर्जा + स्थितिज ऊर्जा
  3. C.गतिज ऊर्जा + ऊष्मा ऊर्जा
  4. D.गतिज ऊर्जा + विद्युत ऊर्जा
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. गतिज ऊर्जा + स्थितिज ऊर्जा

व्याख्या

सही उत्तर है B, गतिज ऊर्जा + स्थितिज ऊर्जा। किसी पिंड की यांत्रिक ऊर्जा उसकी गति की ऊर्जा और स्थिति की ऊर्जा का योग होती है। गतिज ऊर्जा ½mv² होती है और गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा mgh, तथा जब तक केवल गुरुत्व काम करता है और घर्षण नहीं होता, इनका योग स्थिर रहता है। यही यांत्रिक ऊर्जा संरक्षण का नियम है: ऊपर फेंकी गई गेंद जितनी गतिज ऊर्जा खोती है, उतनी ही स्थितिज ऊर्जा पाती है, और गिरती गेंद में इसका उल्टा होता है; इसीलिए सरल लोलक एक ही दो ऊँचाइयों के बीच झूलता रहता है। जब घर्षण या वायु प्रतिरोध लगता है, तो यांत्रिक ऊर्जा का कुछ भाग ऊष्मा और ध्वनि में बदल जाता है और वह संरक्षित नहीं रहती, यद्यपि निकाय की कुल ऊर्जा तब भी बनी रहती है। विकल्प A गलत है, क्योंकि रासायनिक ऊर्जा ईंधन और भोजन के बंधों में होती है। विकल्प C गलत है, क्योंकि ऊष्मा अणुओं की अनियमित गति की ऊर्जा है और अलग गिनी जाती है। विकल्प D गलत है, क्योंकि विद्युत ऊर्जा आवेशों की गति से मिलती है। परीक्षा टिप: यांत्रिक ऊर्जा = गतिज + स्थितिज, और यह केवल घर्षणरहित स्थिति में स्थिर रहती है।

Q18.सामान्य विज्ञानआसान

बैरोमीटर का प्रयोग निम्नलिखित में से किसे मापने के लिए किया जाता है?

  1. A.वायुमंडलीय दाब
  2. B.वायु की आर्द्रता
  3. C.पवन की गति
  4. D.महासागर की गहराई
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. वायुमंडलीय दाब

व्याख्या

सही उत्तर A, वायुमंडलीय दाब है। पारद बैरोमीटर वायुमंडल के दाब को पारे के स्तंभ से संतुलित करता है, जो समुद्र तल पर लगभग 76 सेंटीमीटर ऊँचा रहता है। पारा इसलिए चुना जाता है कि वह बहुत घना है, काँच को भिगोता नहीं और उसका वाष्प दाब कम है; जल के बैरोमीटर के लिए दस मीटर से लंबी नली चाहिए होगी। बैरोमीटर के पाठ में अचानक गिरावट तूफान की चेतावनी देती है।

विकल्प B, आर्द्रता, आर्द्रतामापी से मापी जाती है, जिसमें शुष्क और आर्द्र बल्ब वाला प्रकार सामान्य है। विकल्प C, पवन की गति, एनीमोमीटर से मापी जाती है, जिसमें प्रायः घूमते प्याले लगे होते हैं। विकल्प D, महासागर की गहराई, प्रतिध्वनि गहराईमापी अर्थात फैदोमीटर से ज्ञात की जाती है, जो समुद्र तल से परावर्तित ध्वनि तरंग का समय नापता है। यह भी ध्यान रखें कि बिना द्रव वाला निर्द्रव बैरोमीटर ऊँचाई के पैमाने पर अंशांकित करने पर अल्टीमीटर बन जाता है।

Q19.सामान्य विज्ञानआसान

सूर्य की ऊष्मा पृथ्वी तक मुख्यतः किस विधि से पहुँचती है?

  1. A.चालन
  2. B.संवहन
  3. C.विकिरण
  4. D.पहले चालन, फिर संवहन
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. विकिरण

व्याख्या

सही उत्तर C, विकिरण है। सूर्य और पृथ्वी के बीच का स्थान लगभग खाली है, और विकिरण ही ऊष्मा संचरण की वह विधि है जिसे किसी माध्यम की आवश्यकता नहीं होती: ऊर्जा विद्युत चुंबकीय तरंगों के रूप में प्रकाश की चाल से चलती है और द्रव्य से टकराने पर अवशोषित होती है।

विकल्प A चालन के लिए संपर्क में रहे कणों का होना आवश्यक है, इसलिए वह खाली अंतरिक्ष में काम नहीं कर सकता। विकल्प B संवहन के लिए ऐसा तरल चाहिए जो स्वयं चलकर ऊर्जा ले जा सके, जो सूर्य और पृथ्वी के बीच उपलब्ध नहीं है, यद्यपि वायुमंडल में आने के बाद उसी ऊष्मा को संवहन ही फैलाता है। विकल्प D दोनों कारणों से गलत है। विकिरण का अच्छा अवशोषक अच्छा उत्सर्जक भी होता है, इसीलिए काली सतह धूप में सबसे तेज गर्म होती है।

Q20.सामान्य विज्ञानपूछा गया: RRB ग्रुप D · 17 Sep 2018, Shift 1मध्यम

एक बल 1.0 किग्रा की वस्तु की चाल 4 मी/से से 8 मी/से कर देता है। बल द्वारा किया गया कार्य होगा ______।

  1. A.8 J
  2. B.32 J
  3. C.24 J
  4. D.16 J
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. 24 J

व्याख्या

सही उत्तर है C, 24 J। कार्य ऊर्जा प्रमेय के अनुसार किया गया कार्य गतिज ऊर्जा के परिवर्तन के बराबर होता है, अर्थात 0.5 × 1.0 × (8 का वर्ग घटा 4 का वर्ग) = 0.5 × (64 - 16) = 24 जूल।

गतिज ऊर्जा का सूत्र आधा m v वर्ग है, इसलिए 4 मी/से पर वस्तु की गतिज ऊर्जा 8 जूल और 8 मी/से पर 32 जूल होती है; बल को यही 24 जूल का अंतर देना पड़ता है। ध्यान रहे कि चाल दोगुनी करने पर गतिज ऊर्जा चार गुनी हो जाती है, क्योंकि सूत्र में चाल का वर्ग आता है। कार्य ऊर्जा प्रमेय पथ पर निर्भर नहीं करता, इसी कारण बल या दूरी जाने बिना भी यह प्रश्न हल हो जाता है।

विकल्प A गलत है क्योंकि 8 जूल केवल प्रारंभिक गतिज ऊर्जा है। विकल्प B गलत है क्योंकि 32 जूल अंतिम गतिज ऊर्जा है, परिवर्तन नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि 16 जूल चालों के वर्गों का अंतर गलत ढंग से लेने पर आता है।

परीक्षा टिप: कार्य = अंतिम गतिज ऊर्जा घटा प्रारंभिक गतिज ऊर्जा; चाल दोगुनी तो गतिज ऊर्जा चार गुनी।

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