उड़ान योजना के दस वर्ष, संशोधित उड़ान से नया चरण
क्षेत्रीय संपर्क योजना उड़ान ने 21 अक्तूबर 2016 से दस वर्ष पूरे किए। एक दशक में 687 मार्ग और 95 हवाई अड्डे चालू हुए तथा 1.72 करोड़ यात्रियों ने सफर किया।

चर्चा में क्यों
20 अक्तूबर 2026 को जारी पृष्ठभूमि दस्तावेज़ में उड़ान योजना के दस वर्ष पूरे होने का ब्योरा दिया गया। योजना 21 अक्तूबर 2016 को शुरू हुई थी और 4 जुलाई 2026 से संशोधित उड़ान का नया चरण चल रहा है।
क्षेत्रीय संपर्क योजना यानी उड़ान (उड़े देश का आम नागरिक) ने दस वर्ष पूरे कर लिए हैं। 20 अक्तूबर 2026 को जारी पृष्ठभूमि दस्तावेज़ में इस दशक का लेखा-जोखा दिया गया। योजना 21 अक्तूबर 2016 को शुरू हुई थी और इसका आधार राष्ट्रीय नागर विमानन नीति 2016 रही, जिसका मकसद था छोटे शहरों तक सस्ती हवाई सेवा पहुँचाना और उसे विमान कंपनियों के लिए भी फायदे का सौदा बनाना।
दशक के आंकड़े
पहली उड़ान अप्रैल 2017 में शिमला और दिल्ली के बीच चली। तब से योजना के तहत 687 क्षेत्रीय मार्ग चालू हुए और 95 हवाई अड्डे सेवा में आए, जिनमें 17 हेलीपोर्ट तथा दो वाटर एयरोड्रोम शामिल हैं। विमान कंपनियों ने 3.68 लाख से अधिक उड़ानें भरीं और 1.72 करोड़ यात्रियों को गंतव्य तक पहुँचाया। 15 अक्तूबर 2026 तक व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण (वीजीएफ) के रूप में 5091.23 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके थे। देश में चालू हवाई अड्डों की संख्या 2014 के 74 से बढ़कर 166 हो गई है और भारत अब दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा घरेलू विमानन बाजार है। इस क्षेत्र में रोजगार 2014 के करीब 3 मिलियन से बढ़कर 2026 में लगभग 7.7 मिलियन हो गया है और 2040 तक इसके 25 मिलियन तक पहुँचने का अनुमान है।
पूर्वोत्तर में उड़ान
पहाड़ी भूभाग के कारण पूर्वोत्तर राज्य लंबे समय तक हवाई संपर्क से वंचित रहे। वहाँ योजना के तहत 90 प्राथमिकता वाले मार्ग चालू किए गए हैं। क्षेत्र में 52 हवाई अड्डे, हेलीपोर्ट और वाटर एयरोड्रोम चिह्नित हुए, जिनमें से 12 काम कर रहे हैं।
संशोधित उड़ान में क्या है
अगला चरण 4 जुलाई 2026 को शुरू हुआ। यह वित्त वर्ष 2026-27 से 2035-36 तक दस वर्ष चलेगा और इसका कुल परिव्यय 28,840 करोड़ रुपये है। इसमें मौजूदा हवाई पट्टियों से 100 हवाई अड्डे बनाने के लिए आठ वर्षों में 12,159 करोड़ रुपये रखे गए हैं, यानी प्रति हवाई अड्डा करीब 100 करोड़ रुपये। लगभग 441 हवाई अड्डों के तीन साल के परिचालन और रखरखाव पर 2,577 करोड़ रुपये खर्च होंगे। 200 आधुनिक हेलीपैड के लिए 3,661 करोड़ रुपये हैं, प्रत्येक पर करीब 15 करोड़ रुपये। विमान कंपनियों को वीजीएफ के लिए 10,043 करोड़ रुपये मिलेंगे, जिसमें मदद तीसरे वर्ष से घटती जाएगी और किसी मार्ग पर एकाधिकार तीन वर्ष तक ही रहेगा। इसके अलावा पवन हंस के लिए दो एचएएल ध्रुव हेलीकॉप्टर और एलायंस एयर के लिए दो एचएएल डोर्नियर विमान खरीदने पर 400 करोड़ रुपये प्रस्तावित हैं, जो आत्मनिर्भर भारत से जुड़ा कदम है।
केंद्र और राज्य साथ-साथ
सरकार, भाग लेने वाले राज्यों तथा केंद्रशासित प्रदेशों और भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के बीच 21 समझौता ज्ञापन हुए हैं, जिससे तीनों के पास हवाई ढाँचा चुनने और विकसित करने का एक साझा ढाँचा आ गया है। एरोड्रोम विकास के लिए बना चैलेंज मोड पोर्टल राज्य सरकारों और केंद्रशासित प्रदेशों को अपनी पसंद की हवाई पट्टियाँ तथा हेलीपैड नामित करने देता है।
चार हवाई अड्डे, चार बदलाव
बिहार का पूर्णिया हवाई अड्डा 2025 में चालू हुआ और दस से अधिक जिलों को हवाई सेवा से जोड़ता है; कोलकाता की यात्रा घटकर लगभग दो घंटे और पटना की करीब एक घंटे रह गई, तथा इसका लगभग 2.8 किलोमीटर लंबा रनवे राज्य में सबसे लंबा है, जो ए320 और बी737 विमान संभाल सकता है। अरुणाचल प्रदेश का तेजू हवाई अड्डा 2021 से चल रहा है और लोहित जिले के दो लाख से अधिक लोगों को सेवा देता है, साथ ही अदरक, इलायची और चावल का कार्गो भेजता है। झारखंड का देवघर हवाई अड्डा जुलाई 2022 से बाबा बैद्यनाथ धाम आने वाले 10 लाख से अधिक श्रद्धालुओं को हवाई मार्ग देता है और वहाँ 30 से अधिक नए होटल खुले हैं। राजस्थान का किशनगढ़ हवाई अड्डा 2017 से इटली, संयुक्त अरब अमीरात और अमेरिका को संगमरमर भेज रहा है और वहाँ क्षेत्र का एकमात्र श्रेणी 'ए' उड़ान प्रशिक्षण संगठन है।
महत्वपूर्ण तथ्य
| योजना | उड़ान (उड़े देश का आम नागरिक), क्षेत्रीय संपर्क योजना |
|---|---|
| शुरुआत | 21 अक्तूबर 2016, राष्ट्रीय नागर विमानन नीति 2016 के तहत |
| पहली उड़ान | शिमला से दिल्ली, अप्रैल 2017 |
| चालू मार्ग | 687 |
| चालू हवाई अड्डे | 95, जिनमें 17 हेलीपोर्ट और दो वाटर एयरोड्रोम |
| यात्री | 1.72 करोड़, 3.68 लाख से अधिक उड़ानों में |
| वीजीएफ जारी | 5091.23 करोड़ रुपये, 15 अक्तूबर 2026 तक |
| देश में चालू हवाई अड्डे | 166, 2014 के 74 से बढ़कर |
| संशोधित उड़ान की शुरुआत | 4 जुलाई 2026 |
| संशोधित उड़ान परिव्यय | 28,840 करोड़ रुपये, वित्त वर्ष 2026-27 से 2035-36 |
| पूर्वोत्तर | 90 प्राथमिकता मार्ग चालू; चिह्नित 52 में से 12 हवाई अड्डे चालू |
परीक्षा की दृष्टि से
याद रखें, योजना की शुरुआत 21 अक्तूबर 2016, पूरा नाम उड़े देश का आम नागरिक, आधार राष्ट्रीय नागर विमानन नीति 2016, पहली उड़ान शिमला से दिल्ली अप्रैल 2017, दशक के आंकड़े 687 मार्ग, 95 हवाई अड्डे, 1.72 करोड़ यात्री और 5091.23 करोड़ रुपये वीजीएफ, तथा संशोधित उड़ान 4 जुलाई 2026 से 28,840 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ।
अभ्यास प्रश्न
क्षेत्रीय संपर्क योजना उड़ान किस तारीख को शुरू की गई थी?
- A.21 अक्तूबर 2014
- B.21 अक्तूबर 2016
- C.27 अप्रैल 2017
- D.4 जुलाई 2026
उत्तर देखें
क्षेत्रीय संपर्क योजना, जिसे उड़े देश का आम नागरिक यानी उड़ान कहा जाता है, इसी दिन शुरू हुई थी और सस्ती लेकिन कंपनियों के लिए भी फायदे वाली हवाई सेवा का इसका विचार उसी वर्ष बनी राष्ट्रीय नागर विमानन नीति से आया था।
पूरी व्याख्या पढ़ें →उड़ान योजना के पहले दशक में कितने क्षेत्रीय मार्ग चालू किए गए?
- A.687
- B.441
- C.368
- D.95
उत्तर देखें
योजना शुरू होने के दस वर्षों में देश भर में इतने क्षेत्रीय मार्ग सेवा में आए, और इसी दशक के दो बड़े आंकड़े हैं 3.68 लाख से अधिक उड़ानें तथा 1.72 करोड़ यात्री।
पूरी व्याख्या पढ़ें →संशोधित उड़ान योजना का कुल परिव्यय कितना है?
- A.12,159 करोड़ रुपये
- B.10,043 करोड़ रुपये
- C.28,840 करोड़ रुपये
- D.5,091 करोड़ रुपये
उत्तर देखें
यह 4 जुलाई 2026 को शुरू हुए अगले चरण का कुल प्रावधान है, जो वित्त वर्ष 2026-27 से 2035-36 तक चलेगा।
पूरी व्याख्या पढ़ें →उड़ान के किस हवाई अड्डे पर बिहार का सबसे लंबा, लगभग 2.8 किलोमीटर का रनवे है?
- A.देवघर हवाई अड्डा
- B.तेजू हवाई अड्डा
- C.किशनगढ़ हवाई अड्डा
- D.पूर्णिया हवाई अड्डा
उत्तर देखें
यह 2025 में चालू हुआ, इसने बिहार के दस से अधिक जिलों को हवाई सेवा दी, कोलकाता की यात्रा घटकर लगभग दो घंटे और पटना की करीब एक घंटे रह गई, और इसका लगभग 2.8 किलोमीटर लंबा रनवे राज्य में सबसे लंबा है, जिस पर ए320 तथा बी737 विमान उतर…
पूरी व्याख्या पढ़ें →अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
उड़ान योजना कब शुरू हुई और इसका पूरा नाम क्या है?
क्षेत्रीय संपर्क योजना 21 अक्तूबर 2016 को शुरू हुई। उड़ान का पूरा नाम उड़े देश का आम नागरिक है और यह राष्ट्रीय नागर विमानन नीति 2016 से निकली। इसकी पहली उड़ान अप्रैल 2017 में शिमला से दिल्ली के बीच चली थी।
दस वर्षों में उड़ान की उपलब्धि क्या रही?
योजना के तहत 687 क्षेत्रीय मार्ग और 95 हवाई अड्डे चालू हुए, जिनमें 17 हेलीपोर्ट तथा दो वाटर एयरोड्रोम हैं। 3.68 लाख से अधिक उड़ानों में 1.72 करोड़ यात्रियों ने सफर किया और 15 अक्तूबर 2026 तक 5091.23 करोड़ रुपये वीजीएफ के रूप में दिए गए।
संशोधित उड़ान योजना क्या है?
यह योजना का अगला चरण है, जो 4 जुलाई 2026 को शुरू हुआ और वित्त वर्ष 2026-27 से 2035-36 तक 28,840 करोड़ रुपये के परिव्यय से चलेगा। इसमें 100 नए हवाई अड्डे, 200 आधुनिक हेलीपैड, लगभग 441 हवाई अड्डों का रखरखाव और स्वदेशी विमान शामिल हैं।
स्रोत
- https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2325359 (नए टैब में खुलेगा) — Press Information Bureau
करेंट अफेयर्स 20 अक्टूबर 2026
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