वस्त्र मंत्रालय की विशेष अभियान 6 के तहत कार्यशालाएं
वस्त्र मंत्रालय ने विशेष अभियान 6 के तहत 15 अक्टूबर को साइबर सुरक्षा और ई-कचरा प्रबंधन पर कार्यशालाएं कीं, जिनमें 85 से अधिक अधिकारी शामिल हुए।

चर्चा में क्यों
16 अक्टूबर 2026 को वस्त्र मंत्रालय ने बताया कि उसने विशेष अभियान 6 के तहत साइबर सुरक्षा एवं सुरक्षित डिजिटल निपटान तथा ई-कचरा प्रबंधन जागरूकता पर कार्यशालाएं आयोजित कीं, जिनमें 85 से अधिक अधिकारी शामिल हुए।
वस्त्र मंत्रालय ने विशेष अभियान 6 के तहत 15 अक्टूबर 2026 को दो कार्यशालाएं कीं। एक कार्यशाला साइबर सुरक्षा एवं सुरक्षित डिजिटल निपटान पर थी और दूसरी ई-कचरा प्रबंधन जागरूकता पर। इनमें 85 से अधिक अधिकारियों ने भाग लिया, जिनमें मंत्रालय के सभी नोडल अधिकारी शामिल थे।
अभियान का मकसद
विशेष अभियान केंद्र सरकार के मंत्रालयों में लंबित मामलों को निपटाने, फाइलों तथा कबाड़ का निस्तारण करने और कार्यालय परिसर को व्यवस्थित करने के लिए चलाए जाते हैं। इस बार इसे दो नए विषयों तक बढ़ाया गया, यानी डिजिटल जानकारी को सुरक्षित तरीके से संभालना और उपयोग से बाहर हो चुके इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का सही निपटान।
साइबर सुरक्षा सत्र
अधिकारियों और कर्मचारियों को आज चल रहे हमलों के तरीकों से परिचित कराया गया। सत्र में फिशिंग, मैलवेयर, संदेश ऐप के जरिये भेजे जाने वाले धोखाधड़ी भरे संदेश और डिजिटल गिरफ्तारी जैसे घोटाले शामिल रहे, जिनमें ठग पुलिस या जांच अधिकारी बनकर डराकर पैसे वसूलते हैं। प्रतिभागियों को बताया गया कि संदिग्ध ईमेल, लिंक, अटैचमेंट और संदेश कैसे पहचाने जाएं, खासकर वे जो किसी परिचित के नाम से आते हैं या पैसे, एक बार के पासवर्ड (ओटीपी) अथवा निजी जानकारी मांगते हैं।
क्या सलाह दी गई
- अज्ञात लिंक पर क्लिक न करें और अपुष्ट फाइलें डाउनलोड न करें।
- संवेदनशील जानकारी डिजिटल माध्यमों पर साझा न करें।
- किसी भी संदिग्ध संदेश पर कार्रवाई से पहले उसकी सच्चाई जांचें।
- बुनियादी साइबर स्वच्छता बनाए रखें और सतर्क रहें।
- किसी भी साइबर घटना की तुरंत सूचना दें, जिससे आधिकारिक और निजी जानकारी सुरक्षित रहे।
ई-कचरा सत्र
दूसरी कार्यशाला में बताया गया कि इलेक्ट्रॉनिक कचरे का लापरवाह निपटान पर्यावरण का क्या नुकसान करता है। अधिकारियों को समझाया गया कि इससे मिट्टी और पानी दूषित होते हैं तथा खतरनाक पदार्थ बाहर निकलते हैं, जो मानव स्वास्थ्य और परितंत्र, दोनों के लिए जोखिम बन सकते हैं। इसके बाद दूसरा पहलू रखा गया, यानी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का पुन: उपयोग, मरम्मत और पुनर्चक्रण संसाधनों की बचत करते हैं, मूल्यवान सामग्री वापस निकालते हैं, नए कच्चे माल की मांग घटाते हैं और लैंडफिल में जाने वाले कचरे की मात्रा कम करते हैं।
उपकरणों का निपटान कैसे हो
कर्मचारियों को जागरूक किया गया कि अप्रचलित इलेक्ट्रॉनिक और विद्युत उपकरणों का उचित पृथक्करण किया जाए, उन्हें सुरक्षित तरीके से संभाला जाए और निपटान के लिए केवल अधिकृत माध्यमों से ही भेजा जाए, जैसा लागू ई-कचरा प्रबंधन नियमों में तय है। सत्रों में टिकाऊ कार्यालय व्यवहार अपनाने पर जोर दिया गया और यह बात रखी गई कि जिम्मेदार निपटान पर्यावरण संरक्षण, संसाधनों के कुशल उपयोग और चक्रीय अर्थव्यवस्था की दिशा में मदद करता है, जिसमें सामग्री फेंकने के बजाय इस्तेमाल में बनी रहती है।
महत्वपूर्ण तथ्य
| आयोजक | वस्त्र मंत्रालय |
|---|---|
| किसके तहत | विशेष अभियान 6 |
| कार्यशालाओं की तिथि | 15 अक्टूबर 2026 |
| भागीदारी | सभी नोडल अधिकारियों सहित 85 से अधिक अधिकारी |
| कार्यशालाओं के विषय | साइबर सुरक्षा एवं सुरक्षित डिजिटल निपटान; ई-कचरा प्रबंधन जागरूकता |
| बताए गए साइबर खतरे | फिशिंग, मैलवेयर, संदेश ऐप के धोखाधड़ी भरे संदेश और डिजिटल गिरफ्तारी घोटाले |
| क्या साझा न करें | संदिग्ध संदेशों में मांगे गए पैसे, एक बार के पासवर्ड (ओटीपी) और निजी जानकारी |
| ई-कचरे से नुकसान | मिट्टी और पानी का प्रदूषण तथा खतरनाक पदार्थों का रिसाव |
| जरूरी तरीका | पृथक्करण, सुरक्षित प्रबंधन और केवल अधिकृत माध्यमों से निपटान |
| बड़ा लक्ष्य | टिकाऊ कार्यालय व्यवहार और चक्रीय अर्थव्यवस्था |
परीक्षा की दृष्टि से
याद रखें कि ये कार्यशालाएं विशेष अभियान 6 के तहत हुईं, आयोजक वस्त्र मंत्रालय था, तिथि 15 अक्टूबर 2026 थी और सभी नोडल अधिकारियों सहित 85 से अधिक अधिकारी शामिल हुए, साइबर खतरों में फिशिंग, मैलवेयर, धोखाधड़ी भरे संदेश और डिजिटल गिरफ्तारी घोटाले बताए गए, तथा ई-कचरे का पृथक्करण कर केवल अधिकृत माध्यमों से निपटान ई-कचरा प्रबंधन नियमों के अनुसार जरूरी है।
अभ्यास प्रश्न
वस्त्र मंत्रालय ने साइबर सुरक्षा और ई-कचरा प्रबंधन पर कार्यशालाएं किस सरकारी अभियान के तहत आयोजित कीं?
- A.स्वच्छ भारत मिशन
- B.विशेष अभियान 6
- C.डिजिटल इंडिया मिशन
- D.मिशन कर्मयोगी
उत्तर देखें
साइबर सुरक्षा एवं सुरक्षित डिजिटल निपटान तथा ई-कचरा प्रबंधन जागरूकता पर दोनों कार्यशालाएं वस्त्र मंत्रालय ने इसी अभियान के तहत 15 अक्टूबर 2026 को आयोजित कीं और इनमें मंत्रालय के सभी नोडल अधिकारियों सहित 85 से अधिक अधिकारी शामिल हुए।
पूरी व्याख्या पढ़ें →वस्त्र मंत्रालय के साइबर सुरक्षा सत्र में निम्नलिखित में से किस खतरे पर चर्चा नहीं हुई?
- A.फिशिंग हमले
- B.मैलवेयर
- C.डिजिटल गिरफ्तारी घोटाले
- D.कार्यालय सर्वरों की क्रिप्टोजैकिंग
उत्तर देखें
जागरूकता सत्र में फिशिंग हमले, मैलवेयर, संदेश ऐप के जरिये भेजे जाने वाले धोखाधड़ी भरे संदेश और डिजिटल गिरफ्तारी घोटाले शामिल रहे, जिनमें ठग जांच या पुलिस अधिकारी बनकर पीड़ित को डराकर पैसे वसूलने की कोशिश करता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →ई-कचरा जागरूकता सत्र के अनुसार अप्रचलित इलेक्ट्रॉनिक और विद्युत उपकरणों का निपटान किस तरह किया जाना चाहिए?
- A.उचित पृथक्करण के बाद अधिकृत माध्यमों से
- B.सामान्य कार्यालय कचरे के साथ मिलाकर
- C.कार्यालय परिसर में ही जलाकर
- D.गोदामों में अनिश्चित समय तक रखकर
उत्तर देखें
अधिकारियों को जागरूक किया गया कि अप्रचलित इलेक्ट्रॉनिक और विद्युत उपकरणों का पृथक्करण किया जाए, उन्हें सुरक्षित तरीके से संभाला जाए और लागू ई-कचरा प्रबंधन नियमों के अनुसार निपटान के लिए केवल अधिकृत माध्यमों से भेजा जाए।
पूरी व्याख्या पढ़ें →अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
वस्त्र मंत्रालय ने ये कार्यशालाएं किस अभियान के तहत आयोजित कीं?
विशेष अभियान 6 के तहत। साइबर सुरक्षा एवं सुरक्षित डिजिटल निपटान तथा ई-कचरा प्रबंधन जागरूकता पर दोनों कार्यशालाएं 15 अक्टूबर 2026 को हुईं और इनमें 85 से अधिक अधिकारी शामिल हुए।
सत्र में किन साइबर खतरों पर चर्चा हुई?
फिशिंग हमले, मैलवेयर, संदेश ऐप के जरिये भेजे जाने वाले धोखाधड़ी भरे संदेश और डिजिटल गिरफ्तारी घोटाले। अधिकारियों को ऐसे संदेशों से सावधान किया गया जो परिचित का रूप धरते हैं या पैसे, ओटीपी अथवा निजी जानकारी मांगते हैं।
अप्रचलित इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का निपटान कैसे होना चाहिए?
उनका उचित पृथक्करण किया जाए, सुरक्षित तरीके से संभाला जाए और निपटान के लिए केवल अधिकृत माध्यमों से भेजा जाए, जैसा ई-कचरा प्रबंधन नियमों में तय है।
ई-कचरे का गलत निपटान क्यों चिंता की बात है?
इससे मिट्टी और पानी दूषित होते हैं तथा खतरनाक पदार्थ निकलते हैं, जो मानव स्वास्थ्य और परितंत्र को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसके बजाय पुन: उपयोग, मरम्मत और पुनर्चक्रण संसाधन बचाते हैं और लैंडफिल में जाने वाला कचरा घटाते हैं।
स्रोत
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