राष्ट्रपति स्वामी श्रद्धानंद बलिदान शताब्दी समारोह में शामिल
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु 1 नवंबर 2026 को हरियाणा के कुरुक्षेत्र स्थित गुरुकुल में स्वामी श्रद्धानंद के 100वें बलिदान वर्ष के शताब्दी समारोह में शामिल हुईं।

चर्चा में क्यों
1 नवंबर 2026 को भारत की राष्ट्रपति हरियाणा के कुरुक्षेत्र स्थित गुरुकुल में स्वामी श्रद्धानंद के बलिदान शताब्दी वर्ष के समारोह में शामिल हुईं और उनके शैक्षिक एवं सामाजिक योगदान पर विचार रखे।
भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु 1 नवंबर 2026 को हरियाणा के कुरुक्षेत्र स्थित गुरुकुल में स्वामी श्रद्धानंद के बलिदान शताब्दी समारोह में शामिल हुईं। यह आयोजन उनके बलिदान के 100वें वर्ष की स्मृति में हुआ और राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में इस समाज सुधारक को श्रद्धांजलि अर्पित की।
मुंशीराम से स्वामी श्रद्धानंद तक
राष्ट्रपति ने उनकी जीवन-यात्रा को अत्यंत प्रेरक बताया - मुंशीराम से महात्मा मुंशीराम और फिर स्वामी श्रद्धानंद तक। उन्होंने कहा कि इस महापुरुष ने अपना जीवन वेदों की सेवा तथा समाज के उत्थान के लिए समर्पित कर दिया और उनका बलिदान सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
सामाजिक एकता और छुआछूत का विरोध
राष्ट्रपति ने स्मरण कराया कि वे सामाजिक एकता के प्रबल समर्थक थे और उन्होंने दिल्ली की जामा मस्जिद के मंच से आपसी सद्भावना तथा राष्ट्रीय एकता का संदेश दिया था। उनका मत था कि अस्पृश्यता के कलंक को मिटाना और दलितों का उद्धार करना देश की उन्नति के लिए सर्वाधिक आवश्यक है, तथा छुआछूत जैसी कुप्रथा वैदिक परंपरा की मूल भावना के विपरीत है।
शिक्षा और गुरुकुल पद्धति
उन्होंने गुरुकुल शिक्षा पद्धति को पुनर्जीवित एवं सुदृढ़ किया, जिससे राष्ट्रपति के शब्दों में भारतीय शिक्षा और संस्कृति की धारा को नवजीवन मिला। यह प्रयास आर्य समाज के संस्थापक महर्षि दयानंद सरस्वती द्वारा प्रतिपादित पुरातन आर्य शिक्षा पद्धति की दिशा में ही था।
| अवसर | बलिदान शताब्दी समारोह, बलिदान का 100वां वर्ष |
| स्थान | गुरुकुल, कुरुक्षेत्र, हरियाणा |
| तिथि | 1 नवंबर 2026 |
| जीवन के नाम | मुंशीराम, महात्मा मुंशीराम, स्वामी श्रद्धानंद |
| संबंधित संगठन | आर्य समाज, संस्थापक महर्षि दयानंद सरस्वती |
युवाओं के लिए संदेश
राष्ट्रपति ने कहा कि शताब्दी वर्ष उनके जीवन, उनके शैक्षिक एवं सामाजिक चिंतन तथा उनके समर्पण से शिक्षा लेने का अवसर है। उन्होंने कहा कि 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य की ओर बढ़ते हुए नागरिकों को देश की सांस्कृतिक विरासत पर गर्व करते हुए आधुनिक ज्ञान, विज्ञान, तकनीक, नवाचार और उद्यमशीलता को अपनाना चाहिए। उन्हें विश्वास है कि युवा उनके जीवन से प्रेरणा लेकर शिक्षित, आत्मनिर्भर, समरस और सशक्त भारत के निर्माण में योगदान देंगे।
महत्वपूर्ण तथ्य
| कौन शामिल हुईं | भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु |
|---|---|
| अवसर | स्वामी श्रद्धानंद का बलिदान शताब्दी समारोह, बलिदान का 100वां वर्ष |
| स्थान | गुरुकुल, कुरुक्षेत्र, हरियाणा |
| तिथि | 1 नवंबर 2026 |
| पूर्व नाम | मुंशीराम और बाद में महात्मा मुंशीराम |
| योगदान | वेदों की सेवा, गुरुकुल पद्धति का पुनर्जीवन, अस्पृश्यता का विरोध |
| प्रसिद्ध संबोधन | दिल्ली की जामा मस्जिद के मंच से सद्भावना और राष्ट्रीय एकता का संदेश |
| आर्य समाज के संस्थापक | महर्षि दयानंद सरस्वती |
परीक्षा की दृष्टि से
अवसर (बलिदान शताब्दी समारोह, बलिदान का 100वां वर्ष), स्थान (गुरुकुल, कुरुक्षेत्र, हरियाणा), तिथि, जीवन के तीन नाम, जामा मस्जिद के मंच से दिया संदेश, गुरुकुल पद्धति का पुनर्जीवन, आर्य समाज तथा महर्षि दयानंद सरस्वती से संबंध और 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य याद रखें।
अभ्यास प्रश्न
कुरुक्षेत्र में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु किस समाज सुधारक के बलिदान शताब्दी समारोह में शामिल हुईं?
- A.स्वामी विवेकानंद
- B.स्वामी श्रद्धानंद
- C.महर्षि दयानंद सरस्वती
- D.स्वामी सहजानंद
उत्तर देखें
राष्ट्रपति हरियाणा के कुरुक्षेत्र स्थित गुरुकुल में उनके बलिदान के सौवें वर्ष के समारोह में शामिल हुईं और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
पूरी व्याख्या पढ़ें →स्वामी श्रद्धानंद को उनके जीवन के प्रारंभिक काल में किस नाम से जाना जाता था?
- A.मुंशीराम
- B.मूलशंकर
- C.नरेंद्रनाथ
- D.गदाधर
उत्तर देखें
राष्ट्रपति ने उनके जीवन को मुंशीराम से महात्मा मुंशीराम और फिर स्वामी श्रद्धानंद तक की यात्रा बताया और इस क्रम को अत्यंत प्रेरणादायक कहा।
पूरी व्याख्या पढ़ें →स्वामी श्रद्धानंद ने किसके द्वारा प्रतिपादित पुरातन आर्य शिक्षा पद्धति को पुनर्जीवित करने का प्रयास किया?
- A.राजा राम मोहन राय
- B.ईश्वर चंद्र विद्यासागर
- C.महर्षि दयानंद सरस्वती
- D.ज्योतिबा फुले
उत्तर देखें
राष्ट्रपति ने कहा कि स्वामी श्रद्धानंद ने महर्षि दयानंद सरस्वती द्वारा प्रतिपादित पुरातन आर्य शिक्षा पद्धति को पुनर्जीवित करने के लिए अथक प्रयास किए और गुरुकुल शिक्षा पद्धति को पुनर्जीवित व सुदृढ़ करके भारतीय शिक्षा तथा संस्कृति की धारा को नवजीवन दिया।
पूरी व्याख्या पढ़ें →अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1 नवंबर 2026 को राष्ट्रपति किसके बलिदान शताब्दी समारोह में शामिल हुईं?
स्वामी श्रद्धानंद के। उनके बलिदान के 100वें वर्ष का समारोह हरियाणा के कुरुक्षेत्र स्थित गुरुकुल में हुआ, जहां राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
स्वामी श्रद्धानंद को पहले किस नाम से जाना जाता था?
उन्हें पहले मुंशीराम और बाद में महात्मा मुंशीराम कहा जाता था, इसके बाद वे स्वामी श्रद्धानंद बने। राष्ट्रपति ने इस जीवन-यात्रा को अत्यंत प्रेरणादायक बताया।
आर्य समाज की स्थापना किसने की थी?
महर्षि दयानंद सरस्वती ने। स्वामी श्रद्धानंद ने उनके द्वारा प्रतिपादित पुरातन आर्य शिक्षा पद्धति को पुनर्जीवित करने के लिए अथक प्रयास किए और गुरुकुल शिक्षा पद्धति को सुदृढ़ किया।
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