कुरुक्षेत्र में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु किस समाज सुधारक के बलिदान शताब्दी समारोह में शामिल हुईं?
- A.स्वामी विवेकानंद
- B.स्वामी श्रद्धानंद
- C.महर्षि दयानंद सरस्वती
- D.स्वामी सहजानंद
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर स्वामी श्रद्धानंद है। राष्ट्रपति हरियाणा के कुरुक्षेत्र स्थित गुरुकुल में उनके बलिदान के सौवें वर्ष के समारोह में शामिल हुईं और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। अपने संबोधन में उन्होंने मुंशीराम से महात्मा मुंशीराम और फिर स्वामी श्रद्धानंद बनने की यात्रा का उल्लेख किया, बताया कि उन्होंने अपना जीवन वेदों की सेवा तथा समाज के उत्थान को समर्पित किया, और दिल्ली की जामा मस्जिद के मंच से दिए उनके सद्भावना एवं राष्ट्रीय एकता के संदेश को स्मरण किया। विकल्प C निकट से जुड़ा होने पर भी गलत है - महर्षि दयानंद सरस्वती ने आर्य समाज की स्थापना की और पुरातन आर्य शिक्षा पद्धति का प्रतिपादन किया, जिसे स्वामी श्रद्धानंद ने आगे बढ़ाया, परंतु यह शताब्दी उनकी नहीं थी। विकल्प A और D गलत हैं क्योंकि इस आयोजन से इनका संबंध नहीं है।
पूरा लेख पढ़ें: राष्ट्रपति स्वामी श्रद्धानंद बलिदान शताब्दी समारोह में शामिल
अभ्यास प्रश्न
स्वामी श्रद्धानंद को उनके जीवन के प्रारंभिक काल में किस नाम से जाना जाता था?
- A.मुंशीराम
- B.मूलशंकर
- C.नरेंद्रनाथ
- D.गदाधर
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राष्ट्रपति ने उनके जीवन को मुंशीराम से महात्मा मुंशीराम और फिर स्वामी श्रद्धानंद तक की यात्रा बताया और इस क्रम को अत्यंत प्रेरणादायक कहा।
पूरी व्याख्या पढ़ें →स्वामी श्रद्धानंद ने किसके द्वारा प्रतिपादित पुरातन आर्य शिक्षा पद्धति को पुनर्जीवित करने का प्रयास किया?
- A.राजा राम मोहन राय
- B.ईश्वर चंद्र विद्यासागर
- C.महर्षि दयानंद सरस्वती
- D.ज्योतिबा फुले
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राष्ट्रपति ने कहा कि स्वामी श्रद्धानंद ने महर्षि दयानंद सरस्वती द्वारा प्रतिपादित पुरातन आर्य शिक्षा पद्धति को पुनर्जीवित करने के लिए अथक प्रयास किए और गुरुकुल शिक्षा पद्धति को पुनर्जीवित व सुदृढ़ करके भारतीय शिक्षा तथा संस्कृति की धारा को नवजीवन दिया।
पूरी व्याख्या पढ़ें →संसद परिसर के प्रेरणा स्थल पर रानी चेन्नम्मा की जयंती का कार्यक्रम किसके नेतृत्व में हुआ?
- A.अश्विनी वैष्णव, रेल मंत्री
- B.वी. सोमण्णा, रेल एवं जल शक्ति राज्य मंत्री
- C.सी. आर. पाटिल, जल शक्ति मंत्री
- D.ओम बिरला, लोकसभा अध्यक्ष
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उन्होंने सभा को संबोधित किया, रानी की जयंती और अंग्रेजों के विरुद्ध उनकी जीत के 202वें विजयोत्सव पर देशवासियों को शुभकामनाएं दीं तथा सहयोग करने वालों का आभार जताया।
पूरी व्याख्या पढ़ें →प्रेरणा स्थल पर जिनकी जयंती और विजयोत्सव मनाया गया, वे रानी चेन्नम्मा किस रियासत की रानी थीं?
- A.कित्तूर
- B.झांसी
- C.केलडी
- D.मैसूर
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कार्यक्रम के आधिकारिक विवरण में उन्हें कित्तूर रानी चेन्नम्मा और कित्तूर की वीरांगना कहा गया है, जिन्होंने एक साम्राज्यवादी शक्ति को चुनौती दी और इतिहास में प्रतिरोध की अमर प्रतीक के रूप में दर्ज हुईं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →संसद परिसर में कित्तूर रानी चेन्नम्मा का कौन सा विजयोत्सव मनाया गया?
- A.150वां
- B.175वां
- C.200वां
- D.202वां
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संसद परिसर के प्रेरणा स्थल पर हुए समारोह में दो अवसर एक साथ जुड़े थे, कित्तूर रानी चेन्नम्मा की जयंती और अंग्रेजों के विरुद्ध उनकी जीत का 202वां विजयोत्सव।
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