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राष्ट्रपति ने चार उच्च न्यायालयों में 14 न्यायाधीश नियुक्त किए

दिल्ली, जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख, झारखंड तथा कर्नाटक उच्च न्यायालयों में चौदह न्यायिक अधिकारियों को न्यायाधीश और अपर न्यायाधीश नियुक्त किया गया है।

लेखक प्रकाशित · 1 मिनट
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चर्चा में क्यों

विधि एवं न्याय मंत्रालय ने चार उच्च न्यायालयों में चौदह न्यायिक अधिकारियों की न्यायाधीश और अपर न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति की घोषणा की।

क्या घोषणा हुई

चौदह कार्यरत न्यायिक अधिकारियों को चार उच्च न्यायालयों में पदोन्नत किया गया है। विधि एवं न्याय मंत्रालय के अनुसार ये नियुक्तियां राष्ट्रपति ने संविधान से मिली शक्ति का प्रयोग करते हुए और भारत के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श के बाद कीं।

चौदह का बंटवारा

सबसे बड़ा हिस्सा दिल्ली उच्च न्यायालय को मिला, कुल सात। इनमें दो न्यायाधीश के रूप में जाएंगे और शेष पांच अपर न्यायाधीश के रूप में।

तीन अधिकारी झारखंड उच्च न्यायालय में न्यायाधीश बनेंगे। तीन कर्नाटक उच्च न्यायालय जाएंगे, वहां अपर न्यायाधीश के रूप में। एक अधिकारी को जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख उच्च न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त किया गया है।

न्यायाधीश और अपर न्यायाधीश का अंतर

यह अंतर जान लेना उपयोगी है, क्योंकि विज्ञप्ति में दोनों शब्द आते हैं और परीक्षा में भी आ सकते हैं। अपर न्यायाधीश की नियुक्ति स्थायी पद पर नहीं, एक निश्चित अवधि के लिए होती है, और सामान्यतः बाद में उन्हें स्थायी न्यायाधीश के रूप में पुष्ट किया जाता है। यहां नामित चौदह में से आठ न्यायाधीश हैं और छह अपर न्यायाधीश।

संवैधानिक प्रक्रिया

उच्च न्यायालय की नियुक्तियां भारत के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श के रास्ते होकर जाती हैं, और औपचारिक आदेश राष्ट्रपति जारी करते हैं। यही क्रम - पहले परामर्श, फिर आदेश - सबसे अधिक पूछा जाता है।

एक बात और ध्यान दें - जम्मू-कश्मीर और लद्दाख का उच्च न्यायालय एक ही है, इसलिए वहां की नियुक्ति दोनों केंद्र शासित प्रदेशों को कवर करती है।

परीक्षा की दृष्टि से

उच्च न्यायपालिका पर प्रश्न प्रायः यही पूछते हैं कि कितनी नियुक्तियां हुईं, किन न्यायालयों में और किसने कीं। यहां अंतिम का उत्तर है राष्ट्रपति, मुख्य न्यायाधीश से परामर्श के बाद, और कुल संख्या है चार उच्च न्यायालयों में चौदह।

महत्वपूर्ण तथ्य

कुल नियुक्तियां14 न्यायिक अधिकारी
दिल्ली उच्च न्यायालय2 न्यायाधीश और 5 अपर न्यायाधीश
झारखंड उच्च न्यायालय3 न्यायाधीश
कर्नाटक उच्च न्यायालय3 अपर न्यायाधीश
जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख1 न्यायाधीश
नियुक्ति प्राधिकारीभारत के राष्ट्रपति
परामर्शभारत के मुख्य न्यायाधीश
मंत्रालयविधि एवं न्याय मंत्रालय

परीक्षा की दृष्टि से

कुल संख्या चौदह और चारों न्यायालय याद रखें - दिल्ली, जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख, झारखंड तथा कर्नाटक। साथ ही यह भी कि नियुक्ति राष्ट्रपति करते हैं, मुख्य न्यायाधीश से परामर्श के बाद।

अभ्यास प्रश्न

Q1.नियुक्तियांआसान

सितंबर 2026 की घोषणा में कितने न्यायिक अधिकारियों को न्यायाधीश और अपर न्यायाधीश नियुक्त किया गया?

  1. A.दस
  2. B.बारह
  3. C.चौदह
  4. D.सोलह
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. चौदह

व्याख्या

उत्तर है चौदह। विधि एवं न्याय मंत्रालय ने चौदह कार्यरत न्यायिक अधिकारियों की पदोन्नति की घोषणा की, जो चार उच्च न्यायालयों में फैली है। सबसे बड़ा हिस्सा दिल्ली को मिला, जहां सात गए - दो न्यायाधीश और पांच अपर न्यायाधीश के रूप में। झारखंड को तीन न्यायाधीश मिले, कर्नाटक को तीन अपर न्यायाधीश, और एक अधिकारी जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख उच्च न्यायालय के न्यायाधीश बने।

संख्या याद रखने का सबसे सुरक्षित तरीका जोड़ है - सात और तीन और तीन और एक। जिन अभ्यर्थियों को केवल न्यायालयों की संख्या चार याद रहेगी, या केवल दिल्ली का हिस्सा सात, वे यहां चूक जाएंगे। शेष विकल्प ऐसी गोल संख्याएं हैं जो पास लगती हैं, पर घोषणा से मेल नहीं खातीं।

एक बात और - यह संख्या केवल इस घोषणा की है, किसी वर्ष या किसी न्यायालय की कुल रिक्तियों की नहीं। प्रश्न में यदि अवधि दी हो तो उसे ध्यान से पढ़ें।

Q2.नियुक्तियांमध्यम

संविधान के अनुसार उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति कौन करता है, और किससे परामर्श के बाद?

  1. A.प्रधानमंत्री, विधि मंत्री से परामर्श के बाद
  2. B.राष्ट्रपति, भारत के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श के बाद
  3. C.मुख्य न्यायाधीश, राष्ट्रपति से परामर्श के बाद
  4. D.राज्यपाल, उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श के बाद
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. राष्ट्रपति, भारत के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श के बाद

व्याख्या

उत्तर है राष्ट्रपति, भारत के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श के बाद। विज्ञप्ति दोनों बातें स्पष्ट कहती है - यह शक्ति संविधान राष्ट्रपति को देता है, और इसका प्रयोग मुख्य न्यायाधीश से परामर्श के बाद होता है। इन दोनों चरणों का क्रम महत्वपूर्ण है, क्योंकि प्रश्न कभी-कभी इन्हें उलट देता है।

विकल्प C यही उलटफेर करता है और सबसे प्रबल भ्रम है। प्रधानमंत्री और विधि मंत्री की नियुक्ति में कोई संवैधानिक भूमिका नहीं है, इसलिए विकल्प A गलत है। राज्यपाल उच्च न्यायालय की नियुक्तियों में परामर्श के दायरे में अवश्य आते हैं, पर नियुक्ति प्राधिकारी राज्यपाल नहीं हैं, अतः विकल्प D भी इसी आधार पर गलत है। इसे इस क्रम में याद रखें - पहले परामर्श, फिर आदेश।

इसीलिए इस प्रश्न को रटने के बजाय प्रक्रिया समझना बेहतर है - सिफारिश न्यायपालिका की ओर से आती है, परामर्श होता है, और औपचारिक आदेश राष्ट्रपति के नाम से निकलता है।

Q3.नियुक्तियांमध्यम

चौदह नियुक्तियों में सबसे अधिक किस उच्च न्यायालय को मिलीं?

  1. A.कर्नाटक उच्च न्यायालय
  2. B.झारखंड उच्च न्यायालय
  3. C.दिल्ली उच्च न्यायालय
  4. D.जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख उच्च न्यायालय
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. दिल्ली उच्च न्यायालय

व्याख्या

उत्तर है दिल्ली उच्च न्यायालय, जिसे चौदह में से सात मिले, यानी अकेले आधे। इन सात में से दो की नियुक्ति न्यायाधीश के रूप में हुई और शेष पांच की अपर न्यायाधीश के रूप में। यह बंटवारा विज्ञप्ति अलग से बताती है और स्वयं में ध्यान देने योग्य है।

बचे हुए सात तीन जगह बंटे। झारखंड ने तीन न्यायाधीश लिए, कर्नाटक ने तीन अपर न्यायाधीश, और जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख उच्च न्यायालय ने एक न्यायाधीश। अंतिम न्यायालय एक और कारण से देखने लायक है - एक ही उच्च न्यायालय दोनों केंद्र शासित प्रदेशों की सेवा करता है, जो अपने आप में परीक्षा का प्रश्न बनता है। तो क्रम हुआ - दिल्ली, फिर झारखंड और कर्नाटक बराबर, फिर जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख।

परीक्षा में यह प्रश्न कभी संख्या के रूप में आता है और कभी न्यायालय के नाम के रूप में, इसलिए दोनों को जोड़कर याद रखना सबसे सुरक्षित रहता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कितने न्यायाधीश और कितने उच्च न्यायालयों में नियुक्त हुए?

चौदह न्यायिक अधिकारी, चार उच्च न्यायालयों में - दिल्ली, जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख, झारखंड तथा कर्नाटक।

ये नियुक्तियां कौन करता है?

भारत के राष्ट्रपति, संविधान से मिली शक्ति के प्रयोग से, मुख्य न्यायाधीश से परामर्श के बाद।

अपर न्यायाधीश क्या होता है?

वह न्यायाधीश जिसकी नियुक्ति स्थायी पद पर नहीं बल्कि एक निश्चित अवधि के लिए होती है, और सामान्यतः बाद में स्थायी कर दिया जाता है।

स्रोत

इनके लिए उपयोगी:SSCUPSCUPSC सिविल सेवा