राष्ट्रीय क्वांटम मिशन में 1,000 किलोमीटर क्वांटम-सुरक्षित संचार
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने बताया कि राष्ट्रीय क्वांटम मिशन के 2,000 किलोमीटर के आठ-वर्षीय लक्ष्य के मुकाबले भारत ने 1,000 किलोमीटर हासिल कर लिया है।

चर्चा में क्यों
10 अक्टूबर 2026 को पीएचडीसीसीआई के 121वें वार्षिक सत्र में डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि भारत 2,000 किलोमीटर के आठ-वर्षीय लक्ष्य के मुकाबले 1,000 किलोमीटर क्वांटम-सुरक्षित संचार तक पहुँच गया है और जैव-अर्थव्यवस्था लगभग 196 अरब डॉलर की है।
केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन, परमाणु ऊर्जा विभाग तथा अंतरिक्ष विभाग में राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने 10 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (पीएचडीसीसीआई) के 121वें वार्षिक सत्र को संबोधित किया। उन्होंने उद्योग जगत से कहा कि वह भारतीय शोध को प्रयोगशाला से निकालकर बाज़ार तक पहुँचाए, ताकि देश 2047 के लक्ष्यों तक पहुँच सके और रणनीतिक तकनीकों में आत्मनिर्भर बने।
क्वांटम संचार की उपलब्धि
राष्ट्रीय क्वांटम मिशन पर बोलते हुए मंत्री ने बताया कि देश ने क्वांटम-सुरक्षित संचार के लिए 2,000 किलोमीटर का आठ साल का लक्ष्य रखा था और तीन साल में ही 1,000 किलोमीटर का पड़ाव पार कर लिया। उन्होंने कहा कि क्वांटम संचार सुरक्षा और रणनीति, दोनों लिहाज़ से अहम है, इसलिए ऐसी अग्रणी तकनीकों में घरेलू क्षमता बनाना देश की ज़रूरत है।
जैव-अर्थव्यवस्था के आंकड़े
मंत्री ने भारत की जैव-अर्थव्यवस्था को लगभग 196 अरब अमेरिकी डॉलर बताया, जो 195 अरब डॉलर का आंकड़ा पार कर चुकी है, जबकि 2014 में यह करीब 10 अरब डॉलर थी। घोषित लक्ष्य 2030 तक 300 अरब अमेरिकी डॉलर का है। उन्होंने जैव प्रौद्योगिकी स्टार्टअप के फैलाव को इस बात का सबूत बताया कि जीवन विज्ञान और उच्च शोध नए उद्यम और नई आर्थिक क्षमता पैदा कर सकते हैं।
| संकेतक | आंकड़ा |
| हासिल क्वांटम-सुरक्षित संचार | तीन साल में 1,000 किलोमीटर |
| राष्ट्रीय क्वांटम मिशन का लक्ष्य | आठ साल में 2,000 किलोमीटर |
| जैव-अर्थव्यवस्था का आकार | लगभग 196 अरब डॉलर |
| जैव-अर्थव्यवस्था का लक्ष्य | 2030 तक 300 अरब डॉलर |
प्रयोगशाला से बाज़ार तक
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि विकास का अगला चरण कहीं और बनी तकनीक अपनाने से नहीं चलेगा, उसके लिए वैश्विक महत्व वाले स्वदेशी समाधान बनाने होंगे। नीतिगत सुधारों के बाद अंतरिक्ष क्षेत्र का विस्तार और रणनीतिक क्षेत्रों में निजी कंपनियों की भागीदारी दिखाती है कि वैज्ञानिक क्षमता को अनुकूल नीति का साथ मिलने पर क्या होता है। उन्होंने चाहा कि उद्योग शोध परियोजना के अंत में नहीं, बल्कि शुरुआत में ही जुड़े, जिससे वैज्ञानिक बाज़ार की ज़रूरत समझ सकें और पहले दिन से तैनाती के लिहाज़ से डिज़ाइन कर सकें। उन्होंने कहा कि पीएचडीसीसीआई जैसे संगठन शोधकर्ताओं और कारोबार को जोड़ सकते हैं, निवेश ला सकते हैं और किसी विचार को प्रयोगशाला से प्रोटोटाइप और फिर बिकने लायक उत्पाद तक पहुँचा सकते हैं।
सरकार की शोध, विकास एवं नवाचार (आरडीआई) पहल का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि शोध में निजी पूँजी ही खोजों को उपयोग में बदलने की रफ्तार तय करेगी। उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डेटा अवसंरचना और उच्च विनिर्माण में भारत की योजनाओं को दो शर्तों से जोड़ा: स्वदेशी तकनीक और भरोसेमंद ऊर्जा आपूर्ति। उनके मुताबिक तेज़ अमल, सरकार, उद्योग, शिक्षा जगत और स्टार्टअप के बीच मज़बूत साझेदारी तथा सफल नवाचार को बड़े पैमाने पर ले जाने की क्षमता ही तय करेगी कि देश 2047 तक कितनी दूर पहुँचता है।
महत्वपूर्ण तथ्य
| कार्यक्रम | पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (पीएचडीसीसीआई) का 121वाँ वार्षिक सत्र, नई दिल्ली |
|---|---|
| वक्ता | डॉ. जितेंद्र सिंह, केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) |
| हासिल क्वांटम-सुरक्षित संचार | तीन साल में 1,000 किलोमीटर |
| राष्ट्रीय क्वांटम मिशन का लक्ष्य | आठ साल में 2,000 किलोमीटर क्वांटम-सुरक्षित संचार |
| जैव-अर्थव्यवस्था का आकार | 195 अरब डॉलर पार, लगभग 196 अरब डॉलर; 2014 में करीब 10 अरब डॉलर |
| जैव-अर्थव्यवस्था का लक्ष्य | 2030 तक 300 अरब अमेरिकी डॉलर |
| सरकारी पहल | शोध, विकास एवं नवाचार (आरडीआई) पहल |
| दीर्घकालिक लक्ष्य | 2047 के राष्ट्रीय लक्ष्य और रणनीतिक आत्मनिर्भरता |
परीक्षा की दृष्टि से
याद रखें: राष्ट्रीय क्वांटम मिशन के आंकड़े (तीन साल में 1,000 किलोमीटर, आठ साल का लक्ष्य 2,000 किलोमीटर), जैव-अर्थव्यवस्था (2014 में करीब 10 अरब डॉलर, अब लगभग 196 अरब डॉलर, 2030 तक 300 अरब डॉलर का लक्ष्य), पीएचडीसीसीआई का 121वाँ वार्षिक सत्र, आरडीआई पहल, 2047 का रणनीतिक आत्मनिर्भरता लक्ष्य और डॉ. जितेंद्र सिंह के विभाग।
अभ्यास प्रश्न
राष्ट्रीय क्वांटम मिशन के तहत भारत ने कितना क्वांटम-सुरक्षित संचार हासिल किया है?
- A.500 किलोमीटर
- B.1,000 किलोमीटर
- C.1,500 किलोमीटर
- D.2,000 किलोमीटर
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर 1,000 किलोमीटर है। राष्ट्रीय क्वांटम मिशन के तहत देश ने क्वांटम-सुरक्षित संचार के लिए आठ साल में 2,000 किलोमीटर का लक्ष्य रखा था और 1,000 किलोमीटर का पड़ाव तीन साल में ही पार कर लिया, जो उस लक्ष्य की अपेक्षित रफ्तार से काफी आगे है। विकल्प D यानी 2,000 किलोमीटर पूरे आठ साल का लक्ष्य है, अब तक हासिल दूरी नहीं, इसलिए इस सेट में यही सबसे तीखा भ्रम है। विकल्प A और C में दी गई दूरियाँ इस विवरण में कहीं नहीं आतीं। क्वांटम संचार सुरक्षा और रणनीति, दोनों के लिहाज़ से महत्वपूर्ण है और मंत्री ने इसी उपलब्धि के सहारे कहा कि भारत को अग्रणी तकनीकों में घरेलू क्षमता बनानी होगी, आयात पर निर्भर नहीं रहना होगा। परीक्षा के लिए दोनों आंकड़े साथ याद रखें, क्योंकि प्रश्न अक्सर इन्हें अलग पहचानने पर ही बनता है।
2030 तक भारत की जैव-अर्थव्यवस्था के लिए कितना लक्ष्य रखा गया है?
- A.150 अरब डॉलर
- B.196 अरब डॉलर
- C.300 अरब डॉलर
- D.500 अरब डॉलर
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर 300 अरब डॉलर है। भारत की जैव-अर्थव्यवस्था 2014 के करीब 10 अरब डॉलर से बढ़कर लगभग 196 अरब डॉलर पर पहुँच गई है और 195 अरब डॉलर का आंकड़ा पार कर चुकी है, जबकि घोषित लक्ष्य 2030 तक इसे 300 अरब डॉलर तक ले जाना है। विकल्प B यानी 196 अरब डॉलर मौजूदा आकार है, लक्ष्य नहीं, इसलिए यही सबसे आकर्षक गलत उत्तर है, क्योंकि जो उम्मीदवार केवल एक आंकड़ा याद रखता है वह आम तौर पर अभी पढ़ा हुआ आंकड़ा चुन लेता है। विकल्प A मौजूदा आकार से भी कम है, इसलिए वह आगे का लक्ष्य नहीं हो सकता। विकल्प D में दिया गोल आंकड़ा इस दशक के लिए तय नहीं हुआ है। मंत्री ने इस वृद्धि को जैव प्रौद्योगिकी स्टार्टअप के विस्तार से जोड़ा।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने यह बातें किस उद्योग संगठन के वार्षिक सत्र में कहीं?
- A.फिक्की
- B.पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री
- C.सीआईआई
- D.एसोचैम
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री है। मंत्री ने नई दिल्ली में पीएचडीसीसीआई के 121वें वार्षिक सत्र को संबोधित किया, जिसमें उद्योग जगत के अग्रणी लोग, उद्यमी और अन्य हितधारक भारत की वृद्धि और नवाचार की प्राथमिकताओं पर चर्चा के लिए जुटे थे। उन्होंने कहा कि ऐसे संगठन शोधकर्ताओं और कारोबार के बीच पुल का काम कर सकते हैं, निवेश जुटा सकते हैं और किसी नवाचार को प्रयोगशाला से प्रोटोटाइप और फिर बाज़ार के लिए तैयार उत्पाद तक पहुँचाने में मदद कर सकते हैं। विकल्प A, C और D में फिक्की, सीआईआई और एसोचैम के नाम हैं, जो भारत के बड़े उद्योग संगठन हैं, लेकिन यह संबोधन पीएचडीसीसीआई के सत्र में हुआ और 121वाँ संस्करण इसी संगठन का है। नाम के साथ संस्करण संख्या भी याद रखें।
मंत्री ने रणनीतिक आत्मनिर्भरता के राष्ट्रीय लक्ष्य किस वर्ष के लिए बताए?
- A.2030
- B.2035
- C.2040
- D.2047
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर 2047 है। मंत्री ने उद्योग जगत से कहा कि वह नवाचार की रफ्तार बढ़ाए और तकनीकी क्षमता का विस्तार करे, जिससे भारत 2047 के राष्ट्रीय लक्ष्यों तक पहुँच सके और रणनीतिक आत्मनिर्भरता मज़बूत हो। यह वर्ष देश की आज़ादी के सौ साल का प्रतीक है। विकल्प A यानी 2030 इस संदर्भ में गलत है, क्योंकि उसी भाषण में वह वर्ष जैव-अर्थव्यवस्था के 300 अरब डॉलर के लक्ष्य से जुड़ा है और दोनों को मिला देना यहाँ सबसे आम गलती है। विकल्प B और C में दिए वर्ष इस संबोधन में नहीं आते। मंत्री ने 2047 के लक्ष्य को व्यावहारिक शर्तों से भी जोड़ा: स्वदेशी तकनीक, भरोसेमंद ऊर्जा आपूर्ति, आरडीआई पहल के तहत शोध में निजी भागीदारी और सरकार, उद्योग, शिक्षा जगत तथा स्टार्टअप के बीच साझेदारी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
राष्ट्रीय क्वांटम मिशन के तहत भारत ने कितना क्वांटम-सुरक्षित संचार हासिल किया है?
1,000 किलोमीटर, जो तीन साल में हासिल हुआ, जबकि आठ साल का लक्ष्य 2,000 किलोमीटर का है। डॉ. जितेंद्र सिंह ने पीएचडीसीसीआई के 121वें वार्षिक सत्र में यह जानकारी दी।
2030 तक भारत की जैव-अर्थव्यवस्था का लक्ष्य क्या है?
300 अरब अमेरिकी डॉलर। यह 2014 के करीब 10 अरब डॉलर से बढ़कर लगभग 196 अरब डॉलर तक पहुँच चुकी है और 195 अरब डॉलर का आंकड़ा पार कर गई है।
आरडीआई पहल क्या है?
सरकार की शोध, विकास एवं नवाचार पहल, जिसका मकसद शोध और विकास में निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाना है, ताकि वैज्ञानिक खोजें तेज़ी से व्यावसायिक उपयोग में बदल सकें।
स्रोत
- https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2321723 (नए टैब में खुलेगा) — Press Information Bureau
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