लाइटहाउस पर्यटन 2024-25 में 18.63 लाख पर्यटकों तक पहुंचा
भारत में 205 लाइटहाउस हैं और लाइटहाउस पर्यटन 2014 के लगभग 4 लाख से बढ़कर 2024-25 में 18.63 लाख पर्यटकों तक पहुंच गया, 75 स्थल पर्यटन के लिए विकसित हुए।

चर्चा में क्यों
10 अक्टूबर 2026 को जारी एक पृष्ठभूमि दस्तावेज़ में बताया गया कि भारत अपने 205 लाइटहाउस को पर्यटन और संग्रहालय गंतव्यों के रूप में विकसित कर रहा है और 2024-25 में पर्यटकों की संख्या 18.63 लाख रही।
भारत की तटरेखा 11,000 किलोमीटर से ज़्यादा लंबी है और इस पर 205 लाइटहाउस खड़े हैं। 10 अक्टूबर 2026 को जारी एक पृष्ठभूमि दस्तावेज़ बताता है कि इन ऐतिहासिक मीनारों को अब आम लोगों के लिए खोला जा रहा है, जबकि जहाजों को सुरक्षित रास्ता दिखाने का उनका पहला काम वैसा ही बना हुआ है।
पर्यटन के आंकड़े
2014 में लाइटहाउस देखने आने वालों की संख्या करीब 4 लाख थी। 2024-25 में यह 18.63 लाख हो गई। देश में 75 लाइटहाउस को पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित किया गया है, जिनमें गुजरात के मांडवी और द्वारका, कर्नाटक का तादरी, तमिलनाडु का पंबन और केरल का विझिनजम शामिल हैं। टिकट अब डायरेक्टरेट जनरल ऑफ लाइटहाउस एंड लाइटशिप्स (डीजीएलएल) के डिजिटल पोर्टल से मिलते हैं। 25 और लाइटहाउस को इसी तरह विकसित करने का प्रस्ताव है। इस बदलाव से आस-पास के होटल, रेस्तरां, परिवहन सेवाओं और शिल्पकारों को रोज़गार भी मिला है।
रोशनी के पीछे की तकनीक
देश का हर लाइटहाउस सौर ऊर्जा से चलता है। गुजरात के सामियानी द्वीप पर तेल के दीपक की जगह सौर इलेक्ट्रॉनिक फ्लैशर आया और फिर 2016 में एलईडी लालटेन लगाई गई। जोड़िया में 2021 में ज़्यादा तेज़ रोशनी वाली एलईडी लालटेन लगी। तट पर मौजूद लाइटहाउस पर 87 ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (एआईएस) शोर स्टेशन काम करते हैं। एआईएस सोलास यानी समुद्र में जीवन की सुरक्षा के अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन के तहत जहाज और तट पर आधारित डेटा प्रसारण प्रणाली है, जो नेविगेशन की सुरक्षा बढ़ाती है।
लाइटहाउस संग्रहालय
चेन्नई, महाबलीपुरम, अलाप्पुझा, कन्नूर, मुट्टोम, द्वारका और गोपनाथ में लाइटहाउस संग्रहालय बनाए गए हैं। महाबलीपुरम को पल्लव राजाओं ने सातवीं सदी ईस्वी में समुद्री व्यापार के बंदरगाह के रूप में विकसित किया था। यहाँ पहला पारंपरिक लाइटहाउस 1887 में ओलाक्कनीश्वर मंदिर की छत पर बना था। 2004 में तीन 150 डब्ल्यू, 230 वी मेटल हैलाइड लैंप का क्लस्टर लगाया गया और 2020 में मुख्य लाइट को 236 वाट के एलईडी ऐरे में बदला गया, जो अपनी तरह की पहली थी। मौजूदा टावर पत्थर की चिनाई से बना 26 मीटर ऊँचा गोल ढाँचा है।
लोथल और विशाखापत्तनम
गुजरात के लोथल में नेशनल मैरीटाइम हेरिटेज कॉम्प्लेक्स में 77 मीटर ऊँचा लाइटहाउस संग्रहालय बनेगा, जिसकी अनुमानित लागत ₹266.11 करोड़ है और जिसे दुनिया का सबसे ऊँचा लाइटहाउस संग्रहालय बनाने की योजना है। इसमें 5डी डोम थिएटर, कोस्टल स्टेट्स पैविलियन, म्यूज़ियोटेल, इको रिज़ॉर्ट और इंडियन मैरीटाइम यूनिवर्सिटी के साथ बन रहा मैरीटाइम रिसर्च इंस्टीट्यूट भी शामिल होगा। इसका डिज़ाइन महाबलीपुरम लाइटहाउस से प्रेरित है। विशाखापत्तनम में पुराने लाइटहाउस इलाके में नए संग्रहालय के लिए 3,156 वर्ग मीटर ज़मीन तय की गई है।
महोत्सव और ब्रह्मपुत्र की नई रोशनी
भारतीय लाइटहाउस महोत्सव का पहला आयोजन 2023 में गोवा के फोर्ट अगुआडा में, दूसरा 2024 में ओडिशा के पुरी में और तीसरा 2026 में विशाखापत्तनम में हुआ। पुरी संस्करण में ओडिशा के पाँच विकसित लाइटहाउस गोपालपुर, पुरी, चंद्रभागा, पारादीप और फ़ॉल्स पॉइंट सामने रखे गए। ब्रह्मपुत्र नदी पर पांडु, बोगीबील, सिलघाट और विश्वनाथ घाट में चार लाइटहाउस बन रहे हैं, जो अंदरूनी जलमार्ग पर देश के पहले होंगे। हर टावर 20 मीटर ऊँचा होगा और कुल खर्च लगभग ₹84 करोड़ आएगा। हर स्थल पर संग्रहालय, एम्फीथिएटर, कैफेटेरिया, बच्चों के खेलने की जगह और स्मृति-चिह्न की दुकान भी होगी।
महत्वपूर्ण तथ्य
| भारत में लाइटहाउस | 205 |
|---|---|
| तटरेखा | 11,000 किलोमीटर से ज़्यादा |
| लाइटहाउस पर्यटन | 2014 में करीब 4 लाख से 2024-25 में 18.63 लाख पर्यटक |
| पर्यटन के लिए विकसित | 75 लाइटहाउस, 25 और प्रस्तावित |
| नोडल संस्था | डायरेक्टरेट जनरल ऑफ लाइटहाउस एंड लाइटशिप्स (डीजीएलएल), पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय |
| लाइटहाउस पर एआईएस शोर स्टेशन | 87 |
| लोथल लाइटहाउस संग्रहालय | 77 मीटर, ₹266.11 करोड़, नेशनल मैरीटाइम हेरिटेज कॉम्प्लेक्स का हिस्सा |
| विशाखापत्तनम संग्रहालय की ज़मीन | पुराने लाइटहाउस इलाके में 3,156 वर्ग मीटर |
| अंदरूनी जलमार्ग के पहले लाइटहाउस | ब्रह्मपुत्र पर पांडु, बोगीबील, सिलघाट और विश्वनाथ घाट, हर एक 20 मीटर, लगभग ₹84 करोड़ |
| भारतीय लाइटहाउस महोत्सव | फोर्ट अगुआडा, गोवा (2023); पुरी, ओडिशा (2024); विशाखापत्तनम (2026) |
परीक्षा की दृष्टि से
याद रखें: 205 लाइटहाउस, 11,000 किलोमीटर से लंबी तटरेखा, 2014 के करीब 4 लाख से 2024-25 में 18.63 लाख पर्यटक, पर्यटन के लिए विकसित 75 और प्रस्तावित 25 लाइटहाउस, 87 एआईएस शोर स्टेशन, लोथल का 77 मीटर ऊँचा ₹266.11 करोड़ का लाइटहाउस संग्रहालय, विशाखापत्तनम में 3,156 वर्ग मीटर ज़मीन, महोत्सव का क्रम गोवा 2023, पुरी 2024 और विशाखापत्तनम 2026, तथा ब्रह्मपुत्र के चार स्थल पांडु, बोगीबील, सिलघाट और विश्वनाथ घाट।
अभ्यास प्रश्न
भारत की तटरेखा पर कुल कितने लाइटहाउस खड़े हैं?
- A.155
- B.205
- C.255
- D.305
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर 205 है। भारत की तटरेखा 11,000 किलोमीटर से ज़्यादा लंबी है और इस पर 205 लाइटहाउस खड़े हैं। इनकी देखरेख पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के अधीन डायरेक्टरेट जनरल ऑफ लाइटहाउस एंड लाइटशिप्स करता है। इनका पहला काम आज भी जहाजों को सुरक्षित रास्ता दिखाना है और देश का हर लाइटहाउस सौर ऊर्जा से चलता है। विकल्प A यानी 155 वास्तविक संख्या से कम है और यह आंकड़ा कहीं दर्ज नहीं है। विकल्प C यानी 255 और विकल्प D यानी 305 दोनों वास्तविक संख्या से ज़्यादा हैं और इनसे नेटवर्क के आकार का गलत अंदाज़ा होता है। इस संख्या के साथ दो और आंकड़े याद रखें: 75 लाइटहाउस पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित हो चुके हैं और 25 और लाइटहाउस के विकास का प्रस्ताव है, यानी पर्यटन वाले लाइटहाउस इन्हीं 205 का हिस्सा हैं, कोई अलग समूह नहीं।
दुनिया का सबसे ऊँचा माना जा रहा 77 मीटर का लाइटहाउस संग्रहालय कहाँ बनाया जा रहा है?
- A.महाबलीपुरम, तमिलनाडु
- B.लोथल, गुजरात
- C.विशाखापत्तनम, आंध्र प्रदेश
- D.फोर्ट अगुआडा, गोवा
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर लोथल, गुजरात है। 77 मीटर ऊँचा यह लाइटहाउस संग्रहालय लोथल के नेशनल मैरीटाइम हेरिटेज कॉम्प्लेक्स का हिस्सा है और इसकी अनुमानित लागत ₹266.11 करोड़ है। लोथल प्राचीन समुद्री व्यापार से जुड़ा देश का अहम पुरातात्विक स्थल है। इस कॉम्प्लेक्स में 5डी डोम थिएटर, कोस्टल स्टेट्स पैविलियन, म्यूज़ियोटेल, इको रिज़ॉर्ट और इंडियन मैरीटाइम यूनिवर्सिटी के साथ बन रहा मैरीटाइम रिसर्च इंस्टीट्यूट भी शामिल होगा। विकल्प A सबसे नज़दीकी भ्रम है, क्योंकि लोथल संग्रहालय का डिज़ाइन महाबलीपुरम लाइटहाउस से प्रेरित है और महाबलीपुरम में अपना संग्रहालय भी है, लेकिन 77 मीटर का ढाँचा वहाँ नहीं बन रहा। विकल्प C गलत है, क्योंकि विशाखापत्तनम में अलग संग्रहालय प्रस्तावित है और उसके लिए 3,156 वर्ग मीटर ज़मीन तय हुई है। विकल्प D गलत है, क्योंकि गोवा का फोर्ट अगुआडा प्रोजेक्शन मैपिंग शो और पहले महोत्सव के लिए जाना जाता है।
अंदरूनी जलमार्ग पर भारत के पहले लाइटहाउस किस नदी के किनारे बनाए जा रहे हैं?
- A.गंगा
- B.गोदावरी
- C.ब्रह्मपुत्र
- D.महानदी
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर ब्रह्मपुत्र है। इस नदी के किनारे पांडु, बोगीबील, सिलघाट और विश्वनाथ घाट पर चार लाइटहाउस बनाए जा रहे हैं और ये समुद्र तट के बजाय अंदरूनी जलमार्ग पर देश का पहला लाइटहाउस इंफ्रास्ट्रक्चर होंगे। हर टावर 20 मीटर ऊँचा होगा, कुल खर्च लगभग ₹84 करोड़ आएगा और हर लाइटहाउस में सौर ऊर्जा के साथ मौसम की जानकारी देने वाले सेंसर भी लगेंगे। ये चारों स्थल पर्यटकों के लिए भी तैयार किए जा रहे हैं, जहाँ संग्रहालय, एम्फीथिएटर, कैफेटेरिया, बच्चों के खेलने की जगह, स्मृति-चिह्न की दुकान और सुंदर सार्वजनिक जगहें होंगी। विकल्प A, B और D में गंगा, गोदावरी और महानदी का नाम है, जो भारत की महत्वपूर्ण नदियाँ हैं, लेकिन इन पर इस तरह की कोई परियोजना इस दस्तावेज़ में दर्ज नहीं है। परीक्षा में चारों स्थानों के नाम याद रखना सबसे सुरक्षित तरीका है।
भारतीय लाइटहाउस महोत्सव का तीसरा संस्करण किस शहर में आयोजित हुआ?
- A.पुरी
- B.पणजी
- C.कोच्चि
- D.विशाखापत्तनम
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर विशाखापत्तनम है। भारतीय लाइटहाउस महोत्सव अब तक तीन बार हुआ है: पहला आयोजन 2023 में गोवा के फोर्ट अगुआडा में, दूसरा 2024 में ओडिशा के पुरी में और तीसरा 2026 में विशाखापत्तनम में। विशाखापत्तनम में लाइटहाउस तटीय पहचान के बड़े जश्न का केंद्र बना, जहाँ स्थानीय शिल्प, तटीय खान-पान और रात की रोशनी के साथ परिवार, युवा, कलाकार, उद्यमी और छात्र शामिल हुए। विकल्प A गलत है, क्योंकि पुरी में दूसरा संस्करण हुआ था, जिसमें सैंड आर्ट, बोट आर्ट, योग और लोक नृत्य के साथ ओडिशा के पाँच विकसित लाइटहाउस गोपालपुर, पुरी, चंद्रभागा, पारादीप और फ़ॉल्स पॉइंट सामने रखे गए। विकल्प B गलत है, क्योंकि गोवा का आयोजन पणजी के बजाय फोर्ट अगुआडा में हुआ था। विकल्प C में कोच्चि का नाम है, जहाँ तीनों संस्करणों में कोई आयोजन नहीं हुआ।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भारत में कुल कितने लाइटहाउस हैं?
11,000 किलोमीटर से लंबी तटरेखा पर 205 लाइटहाउस हैं। इनमें से 75 को पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित किया गया है और 25 और लाइटहाउस के विकास का प्रस्ताव है।
दुनिया का सबसे ऊँचा लाइटहाउस संग्रहालय कहाँ बन रहा है?
गुजरात के लोथल में नेशनल मैरीटाइम हेरिटेज कॉम्प्लेक्स में। 77 मीटर ऊँचे इस संग्रहालय की अनुमानित लागत ₹266.11 करोड़ है और इसका डिज़ाइन महाबलीपुरम लाइटहाउस से प्रेरित है।
अंदरूनी जलमार्ग पर भारत के पहले लाइटहाउस किस नदी पर बनेंगे?
ब्रह्मपुत्र नदी पर। पांडु, बोगीबील, सिलघाट और विश्वनाथ घाट पर चार लाइटहाउस बन रहे हैं, हर एक 20 मीटर ऊँचा, और कुल लागत लगभग ₹84 करोड़ है।
स्रोत
- बीकन से लैंडमार्क तक: (नए टैब में खुलेगा) — Press Information Bureau
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