ऑस्ट्रेलिया के मिल्टन डिक आईपीयू के अध्यक्ष चुने गए
तंजानिया के अरुषा में हुई 153वीं अंतर-संसदीय संघ सभा में ऑस्ट्रेलिया की प्रतिनिधि सभा के अध्यक्ष मिल्टन डिक आईपीयू के नए अध्यक्ष चुने गए हैं।

चर्चा में क्यों
तंजानिया के अरुषा में 153वीं अंतर-संसदीय संघ सभा के अंतिम दिन ऑस्ट्रेलिया की प्रतिनिधि सभा के अध्यक्ष मिल्टन डिक आईपीयू अध्यक्ष चुने गए और सभा ने अरुषा विज्ञप्ति स्वीकार की।
ऑस्ट्रेलिया की प्रतिनिधि सभा के अध्यक्ष मिल्टन डिक अंतर-संसदीय संघ (आईपीयू) के अगले अध्यक्ष चुने गए हैं। यह चुनाव आईपीयू की संचालन परिषद में गुप्त मतदान से हुआ, जिसकी बैठक तंजानिया के अरुषा में चल रही 153वीं आईपीयू सभा के अंतिम दिन हुई। सभा 5 से 9 अक्टूबर 2026 तक चली और पांचवें तथा अंतिम दिन संचालन परिषद ने शेष कार्य उठाए, जिनमें अध्यक्ष का चुनाव और विशेष बैठकों की रिपोर्टें शामिल थीं।
भारत ने कैसे मतदान किया
भारतीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने किया। आईपीयू अध्यक्ष के चुनाव में भारत के पास तीन मत होते हैं और ये मत हरिवंश के साथ दो लोकसभा सदस्यों — अनुराग सिंह ठाकुर और कमलजीत सहरावत — ने डाले। परिणाम घोषित होते ही भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने नए अध्यक्ष को व्यक्तिगत रूप से बधाई दी और उनके सफल कार्यकाल की कामना की। राज्यसभा सदस्य सस्मित पात्रा ने मिल्टन डिक को लोकसभा अध्यक्ष का बधाई पत्र सौंपा।
सभा ने क्या स्वीकार किया
संचालन परिषद का कार्य पूरा होने के बाद सभा ने अपने परिणाम दस्तावेज अंगीकार किए। सभा ने अरुषा विज्ञप्ति को स्वीकार किया। इसके साथ लोकतंत्र और मानवाधिकार संबंधी स्थायी समिति द्वारा प्रस्तुत वह प्रस्ताव भी पारित हुआ जिसका विषय सभी के लिए समावेशी सामाजिक विकास तथा दिव्यांगजनों के अधिकारों और सशक्तीकरण को बढ़ावा देने की संसदीय रणनीतियां था। तीसरा पाठ आपात मद के रूप में लिया गया, जिसमें जलवायु से जुड़ी आपदाओं पर तत्काल संसदीय कार्रवाई तथा हिमालयी क्षेत्र और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में सहनशीलता बढ़ाने की मांग की गई — यह विषय भारत के लिए सीधे महत्व रखता है।
सभा का समापन
बैठक का समापन तंजानिया की राष्ट्रीय सभा के अध्यक्ष मुसा अज्जान जुंगु ने किया, जो इस सभा के अध्यक्ष के रूप में इसकी अध्यक्षता कर रहे थे। पांच दिनों में भारतीय प्रतिनिधिमंडल के कार्य का योगदान सभा के प्रस्तावों और अंतिम परिणामों में रहा।
अंतर-संसदीय संघ के बारे में
आईपीयू राष्ट्रीय संसदों का विश्व निकाय है और बहुपक्षीय राजनीतिक संगठनों में सबसे पुराना है। यह वह मंच है जहां सरकारें नहीं, बल्कि विधायिकाएं आपस में मिलकर काम करती हैं। इसकी सभा वर्ष में दो बार बैठती है, इसकी संचालन परिषद संगठन की नीति और बजट तय करती है तथा अध्यक्ष चुनती है, और इसकी स्थायी समितियां वे प्रस्ताव तैयार करती हैं जिन पर सभा चर्चा करती है। प्रत्येक सदस्य संसद के प्रतिनिधिमंडल के पास मतों की निश्चित संख्या होती है, इसी कारण भारत के तीन मत उसके प्रतिनिधिमंडल के तीन सदस्यों ने अलग-अलग डाले। परीक्षार्थी के लिए परीक्षा योग्य बिंदु हैं — इस निकाय का संसदीय स्वरूप, प्रत्येक सभा का मेजबान शहर, संस्करण की संख्या, जारी विज्ञप्ति का नाम और नवनिर्वाचित अध्यक्ष का नाम।
महत्वपूर्ण तथ्य
| आयोजन | 153वीं अंतर-संसदीय संघ (आईपीयू) सभा |
|---|---|
| स्थान | अरुषा, तंजानिया |
| तिथियां | 5 से 9 अक्टूबर 2026 |
| नए आईपीयू अध्यक्ष | मिल्टन डिक, ऑस्ट्रेलिया की प्रतिनिधि सभा के अध्यक्ष |
| चुनाव की विधि | आईपीयू संचालन परिषद में गुप्त मतदान |
| भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व | हरिवंश, उपसभापति, राज्यसभा |
| भारत के मत | तीन — हरिवंश, अनुराग सिंह ठाकुर और कमलजीत सहरावत ने डाले |
| परिणाम दस्तावेज | अरुषा विज्ञप्ति |
| आपात मद | जलवायु आपदाएं तथा हिमालयी क्षेत्र में सहनशीलता |
| समापन | मुसा अज्जान जुंगु, तंजानिया की राष्ट्रीय सभा के अध्यक्ष |
परीक्षा की दृष्टि से
संस्करण (153वां), मेजबान शहर और देश (अरुषा, तंजानिया), तिथियां (5 से 9 अक्टूबर 2026), नवनिर्वाचित आईपीयू अध्यक्ष (ऑस्ट्रेलिया के मिल्टन डिक), भारतीय प्रतिनिधिमंडल के नेता (राज्यसभा उपसभापति हरिवंश), भारत के तीन मत, अरुषा विज्ञप्ति तथा हिमालयी क्षेत्र पर आपात मद याद रखें।
अभ्यास प्रश्न
अंतर-संसदीय संघ की 153वीं सभा में इसका अध्यक्ष कौन चुना गया है?
- A.हरिवंश
- B.मिल्टन डिक
- C.मुसा अज्जान जुंगु
- D.सस्मित पात्रा
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर मिल्टन डिक हैं, जो ऑस्ट्रेलिया की प्रतिनिधि सभा के अध्यक्ष हैं और सभा के अंतिम दिन आईपीयू संचालन परिषद में गुप्त मतदान के बाद निर्वाचित घोषित किए गए। विकल्प A यानी हरिवंश गलत है — वे राज्यसभा के उपसभापति हैं, उन्होंने अरुषा में भारतीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया और वे उन तीन भारतीय सदस्यों में थे जिन्होंने भारत के मत डाले, वे इस पद के उम्मीदवार नहीं थे। विकल्प C यानी मुसा अज्जान जुंगु गलत है, क्योंकि वे तंजानिया की राष्ट्रीय सभा के अध्यक्ष हैं और इस विशेष सभा के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने ही बैठक का समापन घोषित किया; मेजबान देश में एक सभा की अध्यक्षता करना और संगठन का प्रमुख होना दो अलग बातें हैं। विकल्प D यानी सस्मित पात्रा भी गलत है; वे प्रतिनिधिमंडल के राज्यसभा सदस्य हैं और उनकी भूमिका नवनिर्वाचित अध्यक्ष को लोकसभा अध्यक्ष का बधाई पत्र सौंपने की थी।
अंतर-संसदीय संघ की 153वीं सभा किस शहर में आयोजित हुई?
- A.नैरोबी, केन्या
- B.अदीस अबाबा, इथियोपिया
- C.अरुषा, तंजानिया
- D.कंपाला, युगांडा
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर अरुषा, तंजानिया है। सभा वहां 5 से 9 अक्टूबर 2026 तक चली और अंतिम दिन स्वीकार किए गए परिणाम दस्तावेज का नाम इसी कारण अरुषा विज्ञप्ति है। विकल्प A यानी केन्या का नैरोबी गलत है; नैरोबी में संयुक्त राष्ट्र के कई कार्यालय हैं, इसलिए यह विकल्प आकर्षक लगता है, पर आयोजन स्थल वह नहीं था। विकल्प B यानी इथियोपिया का अदीस अबाबा गलत है; यह अफ्रीकी संघ का मुख्यालय है और पूर्वी अफ्रीका की किसी बैठक के लिए भ्रामक विकल्प बनता है। विकल्प D यानी युगांडा का कंपाला गलत है और इस सभा से उसका कोई संबंध नहीं था। परीक्षार्थियों के लिए उपयोगी आदत यह है कि शहर को दस्तावेज से जोड़ लें — जब किसी विज्ञप्ति या घोषणापत्र के नाम में स्थान आता है, तो वही स्थान प्रायः मेजबान शहर होता है, इसलिए अरुषा विज्ञप्ति सीधे अरुषा की ओर ले जाती है।
153वीं आईपीयू सभा में भारतीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किसने किया?
- A.लोकसभा अध्यक्ष
- B.राज्यसभा के उपसभापति
- C.लोकसभा के उपाध्यक्ष
- D.विदेश मंत्री
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश हैं, जिन्होंने अरुषा में भारतीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया और आईपीयू अध्यक्ष पद के लिए भारत के मत डालने वाले तीन सदस्यों में से एक रहे। विकल्प A यानी लोकसभा अध्यक्ष गलत है, हालांकि इस आयोजन से उनका संबंध दूसरे रूप में है — नवनिर्वाचित अध्यक्ष को दिया गया बधाई पत्र लोकसभा अध्यक्ष का था, जिसे राज्यसभा सदस्य सस्मित पात्रा ने सौंपा। विकल्प C यानी लोकसभा के उपाध्यक्ष गलत है और यह दोनों सदनों तथा उनके पीठासीन अधिकारियों के बीच भ्रम मात्र है। विकल्प D यानी विदेश मंत्री एक सिद्धांत के कारण गलत है जिसे याद रखना उपयोगी है — अंतर-संसदीय संघ सरकारों का नहीं, राष्ट्रीय संसदों का मंच है, इसलिए वहां किसी देश का प्रतिनिधित्व उसकी विधायिका के सदस्यों का संसदीय प्रतिनिधिमंडल करता है, विदेश मंत्रालय नहीं। भारत के अन्य दो मत लोकसभा सदस्यों अनुराग सिंह ठाकुर और कमलजीत सहरावत ने डाले।
153वीं आईपीयू सभा में आपात मद के रूप में स्वीकार किया गया प्रस्ताव मुख्य रूप से किस विषय पर था?
- A.जलवायु आपदाओं और हिमालयी क्षेत्र में सहनशीलता पर संसदीय कार्रवाई
- B.संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार
- C.चुनावों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का नियमन
- D.अल्प विकसित देशों के लिए ऋण राहत
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर विकल्प A है। आपात मद के रूप में लिए गए पाठ में जलवायु से जुड़ी आपदाओं से निपटने तथा हिमालयी क्षेत्र और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में सहनशीलता मजबूत करने के लिए तत्काल संसदीय कार्रवाई की मांग की गई थी, और यह विषय भारत तथा उसके पड़ोसियों के लिए स्वाभाविक रूप से चिंता का है। विकल्प B यानी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार गलत है; वह संयुक्त राष्ट्र में सरकारों के बीच चलने वाली बहस का बार-बार उठने वाला विषय है, इस सभा का आपात मद नहीं। विकल्प C यानी चुनावों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का नियमन गलत है और यहां स्वीकार किए गए दस्तावेजों में उसका कोई स्थान नहीं है। विकल्प D यानी अल्प विकसित देशों के लिए ऋण राहत भी गलत है। परीक्षार्थियों को सभा के तीन परिणामों को अलग-अलग याद रखना चाहिए — अरुषा विज्ञप्ति, लोकतंत्र और मानवाधिकार संबंधी स्थायी समिति का दिव्यांगजनों के अधिकारों और सशक्तीकरण वाला प्रस्ताव, तथा जलवायु आपदाओं पर आपात मद।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
153वीं सभा में अंतर-संसदीय संघ का अध्यक्ष कौन चुना गया?
ऑस्ट्रेलिया की प्रतिनिधि सभा के अध्यक्ष मिल्टन डिक। उनका चुनाव तंजानिया के अरुषा में सभा के अंतिम दिन आईपीयू संचालन परिषद में गुप्त मतदान से हुआ।
153वीं आईपीयू सभा कहां आयोजित हुई?
तंजानिया के अरुषा में, 5 से 9 अक्टूबर 2026 तक। सभा ने अरुषा विज्ञप्ति स्वीकार की और इसका समापन तंजानिया की राष्ट्रीय सभा के अध्यक्ष मुसा अज्जान जुंगु ने किया।
भारतीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किसने किया?
राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने। अध्यक्ष चुनाव में भारत के तीन मत उन्होंने तथा लोकसभा सदस्यों अनुराग सिंह ठाकुर और कमलजीत सहरावत ने डाले।
सभा ने आपात मद के रूप में क्या स्वीकार किया?
वह प्रस्ताव, जिसमें जलवायु से जुड़ी आपदाओं से निपटने तथा हिमालयी क्षेत्र और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में सहनशीलता मजबूत करने के लिए तत्काल संसदीय कार्रवाई की मांग की गई।
स्रोत
- https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2321679 (नए टैब में खुलेगा) — Press Information Bureau
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