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चेन्नई में कथकली महोत्सव शुरू, तीन घराने तीन शामें

चेन्नई के कलाक्षेत्र फाउंडेशन ने अपने वार्षिक कथकली महोत्सव का सत्रहवां संस्करण शुरू किया है, जिसमें तीन प्रमुख घराने एक-एक प्रस्तुति लेकर आए हैं।

लेखक प्रकाशित · 2 मिनट
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चेन्नई में कथकली महोत्सव शुरू, तीन घराने तीन शामें

चर्चा में क्यों

कलाक्षेत्र फाउंडेशन ने चेन्नई में अपने कथकली महोत्सव का सत्रहवां संस्करण शुरू किया, जो 20 सितंबर 2026 तक तीन शामों तक चलेगा।

तीन शामें, तीन घराने

कथकली कलाकारों का वार्षिक जमावड़ा चेन्नई में शुरू हो गया है, जो अब अपने सत्रहवें वर्ष में है। स्थान है तिरुवनमियूर का भारत कलाक्षेत्र सभागार और मेज़बान है कलाक्षेत्र फाउंडेशन, जो संस्कृति मंत्रालय के अधीन काम करता है। प्रस्तुतियाँ तीन शामों तक चलेंगी, 18 से 20 सितंबर 2026 तक।

इस वर्ष का सूत्र-वाक्य रखा गया है कथा रस संगम, यानी कहानियों के सार का संगम। इस कला को सिखाने वाले तीन संस्थान बुलाए गए हैं और हर एक एक प्रस्तुति ला रहा है - सदानम अकादमी, केरल कलामंडलम तथा मार्गी थिएटर।

पहली शाम

कार्यक्रम पौने छह बजे शुरू हुआ। मुख्य अतिथि थे भारतीय रेलवे यातायात सेवा के श्री के.के. मिश्रा, जो संस्कृति मंत्रालय में संयुक्त सचिव हैं। कलाक्षेत्र फाउंडेशन का संचालन देखने वाले श्री सुरेश कुमार चिक्कला भी उपस्थित रहे।

क्या मंचित हो रहा है

शुरुआत सदानम अकादमी की मंदोदरी से हुई। रामायण से ली गई यह प्रस्तुति रावण के अंतिम क्षणों पर टिकी है और इस पर कि उसकी रानी उसकी मृत्यु का समाचार किस तरह लेती है।

दूसरी शाम केरल कलामंडलम की है, जिसने अर्नेस्ट हेमिंग्वे के उपन्यास को कथकली में ढाला है - द ओल्ड मैन एंड द सी। इसके केंद्र में है मछुआरा सैंटियागो और उसका धैर्य किस कीमत पर टिकता है, यही प्रश्न।

समापन मार्गी थिएटर की रुग्मांगद चरितम से होगा। यह उस राजा की कथा है जिसकी भक्ति परखी जाती है, और जो एकादशी का व्रत निभाता है।

सुबह का सत्र

हर दिन एक शिक्षण सत्र भी है। सुबह रुक्मिणी अरंगम में व्याख्यान-प्रदर्शन होते हैं और उसके बाद कलाक्षेत्र फाउंडेशन के विद्यार्थी प्रस्तुति देते हैं।

संस्था स्वयं

परीक्षा की दृष्टि से कार्यक्रम से अधिक महत्वपूर्ण मेज़बान संस्था है। रुक्मिणी देवी अरुंडेल ने 1936 में कलाक्षेत्र फाउंडेशन की नींव रखी थी, और तब से यह उन प्रमुख स्थानों में गिना जाता है जहाँ भारतीय शास्त्रीय कलाएँ सिखाई और आगे बढ़ाई जाती हैं। संस्थापिका, वर्ष और शहर - ये तीन बातें याद रखने योग्य हैं।

महत्वपूर्ण तथ्य

आयोजन17वां कथकली महोत्सव
आयोजककलाक्षेत्र फाउंडेशन, संस्कृति मंत्रालय के तत्वावधान में
स्थानभारत कलाक्षेत्र सभागार, तिरुवनमियूर, चेन्नई
तिथि18 से 20 सितंबर 2026
विषयकथा रस संगम - कहानियों के सार का संगम
मुख्य अतिथिश्री के.के. मिश्रा, आईआरटीएस, संयुक्त सचिव, संस्कृति मंत्रालय
फाउंडेशन की स्थापना1936, रुक्मिणी देवी अरुंडेल द्वारा

परीक्षा की दृष्टि से

कलाक्षेत्र फाउंडेशन की संस्थापिका और स्थापना वर्ष पर प्रश्न की संभावना सबसे अधिक है - रुक्मिणी देवी अरुंडेल और 1936। इसके अलावा महोत्सव का नाम कथा रस संगम, शहर तथा तीनों भाग लेने वाले घराने भी पूछे जा सकते हैं।

अभ्यास प्रश्न

Q1.राष्ट्रीयआसान

17वें कथकली महोत्सव का आयोजन करने वाले कलाक्षेत्र फाउंडेशन की स्थापना किस वर्ष हुई थी?

  1. A.1936
  2. B.1947
  3. C.1955
  4. D.1962
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. 1936

व्याख्या

सही उत्तर 1936 है। संस्कृति मंत्रालय के अनुसार कलाक्षेत्र फाउंडेशन की स्थापना 1936 में रुक्मिणी देवी अरुंडेल द्वारा की गई थी, और तब से इसने भारतीय शास्त्रीय कलाओं के संरक्षण, अभ्यास और प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यही फाउंडेशन कथकली महोत्सव का आयोजन करता है, जिसके सत्रहवें संस्करण का उद्घाटन चेन्नई के तिरुवनमियूर स्थित भारत कलाक्षेत्र सभागार में किया गया।

शेष विकल्पों में दिए गए वर्षों का इस फाउंडेशन से कोई संबंध विज्ञप्ति में नहीं बताया गया है। अभ्यर्थियों को स्थापना वर्ष के साथ संस्थापिका का नाम भी जोड़कर याद रखना चाहिए, क्योंकि परीक्षाओं में ये दोनों तथ्य प्रायः एक साथ पूछे जाते हैं और कभी-कभी शहर भी पूछा जाता है। इसे एक पंक्ति में याद रखें - कलाक्षेत्र फाउंडेशन, 1936, रुक्मिणी देवी अरुंडेल, चेन्नई।

Q2.राष्ट्रीयमध्यम

कलाक्षेत्र फाउंडेशन द्वारा आयोजित 17वें कथकली महोत्सव का विषय क्या है?

  1. A.नृत्य संगम - नृत्य का संगम
  2. B.कथा रस संगम - कहानियों के सार का संगम
  3. C.नाट्य परंपरा - रंगमंच की परंपरा
  4. D.राग रस यात्रा - स्वरों की यात्रा
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. कथा रस संगम - कहानियों के सार का संगम

व्याख्या

सही उत्तर कथा रस संगम - कहानियों के सार का संगम है। संस्कृति मंत्रालय के अनुसार यह तीन दिवसीय महोत्सव इसी विषय पर आयोजित किया जा रहा है, जिसमें तीन प्रमुख कथकली संस्थानों - सदानम अकादमी, केरल कलामंडलम और मार्गी थिएटर - को एक मंच पर लाया गया है और प्रत्येक संस्थान एक विशिष्ट प्रस्तुति दे रहा है।

शेष तीनों विकल्प सुनने में विश्वसनीय लगते हैं, किंतु विज्ञप्ति में इनका कोई उल्लेख नहीं है और न ही इनका इस महोत्सव से कोई संबंध है। विषय के साथ तीनों प्रस्तुतियां भी याद रखने योग्य हैं - सदानम अकादमी की मंदोदरी, जो रामायण पर आधारित है; केरल कलामंडलम की द ओल्ड मैन एंड द सी, जो अर्नेस्ट हेमिंग्वे के उपन्यास पर आधारित है; और मार्गी थिएटर की रुग्मांगद चरितम।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कलाक्षेत्र फाउंडेशन की स्थापना कब और किसने की?

कलाक्षेत्र फाउंडेशन की स्थापना 1936 में रुक्मिणी देवी अरुंडेल ने की थी। इसने भारतीय शास्त्रीय कलाओं के संरक्षण, अभ्यास और प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

17वें कथकली महोत्सव का विषय क्या है?

इस महोत्सव का विषय कथा रस संगम - कहानियों के सार का संगम है।

महोत्सव में कौन से संस्थान प्रस्तुति दे रहे हैं?

सदानम अकादमी, केरल कलामंडलम और मार्गी थिएटर तीन दिनों में एक-एक विशिष्ट प्रस्तुति दे रहे हैं।

स्रोत

इनके लिए उपयोगी:SSCUPSCराज्य परीक्षाएं