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भारत मात्रा के हिसाब से दुनिया का सबसे बड़ा वैक्सीन उत्पादक

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत मात्रा के हिसाब से दुनिया का सबसे बड़ा वैक्सीन उत्पादक है और 100 से ज्यादा देशों को वैक्सीन की आपूर्ति करता है।

लेखक प्रकाशित · 2 मिनट
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भारत मात्रा के हिसाब से दुनिया का सबसे बड़ा वैक्सीन उत्पादक

चर्चा में क्यों

13 सितंबर 2026 को डॉ. जितेंद्र सिंह ने नई दिल्ली में सीईपीआई बोर्ड और इन्वेस्टर्स काउंसिल के रिसेप्शन में कहा कि भारत मात्रा के हिसाब से दुनिया का सबसे बड़ा वैक्सीन उत्पादक और आपूर्तिकर्ता है।

भारत मात्रा के हिसाब से दुनिया का सबसे बड़ा वैक्सीन उत्पादक और आपूर्तिकर्ता है। केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने 13 सितंबर 2026 को यह बात कही। वे कोएलिशन फॉर एपिडेमिक प्रीपेयर्डनेस इनोवेशन यानी सीईपीआई के बोर्ड और इन्वेस्टर्स काउंसिल के उच्च स्तरीय रिसेप्शन में बोल रहे थे। इसका आयोजन जैव प्रौद्योगिकी विभाग और सीईपीआई ने मिलकर नई दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में किया। सीईपीआई की गवर्नेंस बैठक एक दशक बाद भारत लौटी है।

वैश्विक आपूर्ति में भारत

आपूर्ति पाने वाले देश100 से अधिक
विश्व वैक्सीन उत्पादन में हिस्सालगभग 60 प्रतिशत
डब्ल्यूएचओ की रूटीन टीकाकरण जरूरत65 प्रतिशत से अधिक पूरी
जैव-अर्थव्यवस्था, 2025195.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर, 18 प्रतिशत वृद्धि
बायोटेक स्टार्टअप11 हजार 855, इनमें 2025 में जुड़े 1 हजार 780
जैव-अर्थव्यवस्था में बायोफार्मा हिस्सालगभग 30 प्रतिशत

भारत और सीईपीआई की साझेदारी

भारत सीईपीआई का संस्थापक सदस्य है। डीबीटी, बीआईआरएसी और सीईपीआई के बीच रणनीति पहली बार अक्तूबर 2019 में लागू हुई थी। इसे सितंबर 2025 में पांच और वर्षों के लिए बढ़ाया गया। भारत केंद्रित मिशन का नाम आईएनडी-सीईपीआई है। इसे बीआरआईसी-टीएचएसटीआई और बीआईआरएसी लागू करते हैं।

साझेदारी के नतीजे

इस मिशन से जीईएमसीओवीएसी-19 सामने आई, जो कोविड-19 के विरुद्ध भारत की पहली एमआरएनए वैक्सीन है और जिसे आपात इस्तेमाल की मंजूरी मिली। एक इनएक्टिवेटेड चिकनगुनिया वैक्सीन कैंडिडेट के फेज II और फेज III परीक्षण चल रहे हैं। मंकीपॉक्स और पैन-सारबेकोवायरस के लिए मल्टीवैलेंट सेल्फ-असेम्बल्ड नैनोकेज तकनीक पर आधारित कैंडिडेट उन्नत प्री-क्लिनिकल चरण में हैं। बीआरआईसी-टीएचएसटीआई बायोएसे लैबोरेटरी सीईपीआई की 17 केंद्रीकृत नेटवर्क प्रयोगशालाओं में से एक है। इसने आठ वैक्सीन कैंडिडेट को सहयोग दिया और एक लाख से अधिक नमूनों की जांच की है।

प्रशिक्षण और आगे की राह

पीएसीटी कार्यक्रम ने 2,400 से अधिक प्रतिभागियों को ऑनलाइन प्रशिक्षण दिया है। ये प्रतिभागी 14 मित्र और पड़ोसी देशों से आए। मंत्री ने कहा कि भारत में बीमारियों की विविधता स्वयं पैथोजन अनुसंधान के लिए वैज्ञानिक बढ़त है। उन्होंने कहा कि देश एक ओर संक्रामक रोगों और दूसरी ओर बढ़ते गैर-संक्रामक व मेटाबोलिक रोगों का सामना कर रहा है। उन्होंने कहा कि भारत केवल अपनी तैयारी ही नहीं, बायोमेडिकल समाधानों के वैश्विक भंडार में भी योगदान दे सकता है।

महत्वपूर्ण तथ्य

वक्ताडॉ. जितेंद्र सिंह, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)
अवसरसीईपीआई बोर्ड और इन्वेस्टर्स काउंसिल रिसेप्शन, इंडिया इंटरनेशनल सेंटर, नई दिल्ली
सीईपीआई का पूरा नामकोएलिशन फॉर एपिडेमिक प्रीपेयर्डनेस इनोवेशन
वैक्सीन पाने वाले देश100 से अधिक
विश्व वैक्सीन उत्पादन में हिस्सालगभग 60 प्रतिशत
जैव-अर्थव्यवस्था, 2025195.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर, 18 प्रतिशत वृद्धि
बायोटेक स्टार्टअप11 हजार 855, इनमें 2025 में जुड़े 1 हजार 780
भारत की पहली एमआरएनए कोविड-19 वैक्सीनजीईएमसीओवीएसी-19, आईएनडी-सीईपीआई के तहत
सीईपीआई की केंद्रीकृत नेटवर्क प्रयोगशालाएं17, इनमें बीआरआईसी-टीएचएसटीआई बायोएसे लैब

परीक्षा की दृष्टि से

सीईपीआई का पूरा नाम, भारत का संस्थापक सदस्य होना, 2025 में जैव-अर्थव्यवस्था का 195.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर होना, विश्व वैक्सीन उत्पादन में लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा, पहली एमआरएनए कोविड-19 वैक्सीन जीईएमसीओवीएसी-19 और सीईपीआई की 17 नेटवर्क प्रयोगशालाएं याद रखें।

अभ्यास प्रश्न

Q1.विज्ञान और प्रौद्योगिकीआसान

सीईपीआई (CEPI) का पूरा नाम क्या है?

  1. A.काउंसिल फॉर एपिडेमिक प्रिवेंशन इन इंडिया
  2. B.कोएलिशन फॉर एपिडेमिक प्रीपेयर्डनेस इनोवेशन
  3. C.सेंटर फॉर इमर्जिंग पैथोजन इन्वेस्टिगेशन
  4. D.कमीशन फॉर एपिडेमिक पॉलिसी एंड इम्युनाइजेशन
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. कोएलिशन फॉर एपिडेमिक प्रीपेयर्डनेस इनोवेशन

व्याख्या

सही उत्तर है कोएलिशन फॉर एपिडेमिक प्रीपेयर्डनेस इनोवेशन। इसके बोर्ड और इन्वेस्टर्स काउंसिल की बैठक नई दिल्ली में हुई तथा जैव प्रौद्योगिकी विभाग और सीईपीआई ने मिलकर इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में उच्च स्तरीय रिसेप्शन आयोजित किया। इस बैठक के साथ संगठन की गवर्नेंस एक दशक बाद भारत लौटी। भारत इस गठबंधन का संस्थापक सदस्य और लंबे समय से रणनीतिक भागीदार रहा है। जैव प्रौद्योगिकी विभाग तथा बीआईआरएसी सीईपीआई के साथ एक त्रिपक्षीय रणनीति पर काम करते हैं, जो पहली बार अक्तूबर 2019 में लागू हुई और सितंबर 2025 में पांच और वर्षों के लिए बढ़ाई गई। विकल्प A, C और D गढ़े हुए नाम हैं और विज्ञप्ति में कहीं नहीं आते। अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थाओं के संक्षिप्त नाम अक्सर पूछे जाते हैं, इसलिए हर अक्षर का सही शब्द याद रखें।

Q2.विज्ञान और प्रौद्योगिकीमध्यम

विज्ञप्ति के अनुसार 2025 में भारत की जैव-अर्थव्यवस्था का आकार कितना था?

  1. A.165.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर
  2. B.185.7 बिलियन अमेरिकी डॉलर
  3. C.195.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर
  4. D.215.9 बिलियन अमेरिकी डॉलर
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. 195.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर

व्याख्या

सही उत्तर है 195.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर। भारत की जैव-अर्थव्यवस्था 2025 में इस आकार तक पहुंची और इसमें अठारह प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर्ज हुई। देश का बायोटेक स्टार्टअप इकोसिस्टम बढ़कर 11 हजार 855 स्टार्टअप तक पहुंचा, जिनमें से 1 हजार 780 अकेले उसी वर्ष जुड़े, और बायोफार्मा क्षेत्र की हिस्सेदारी जैव-अर्थव्यवस्था में लगभग तीस प्रतिशत है। मंत्री ने इन्हीं आंकड़ों के आधार पर कहा कि भारत की क्षमताओं को अब केवल वैक्सीन निर्माण के नजरिए से नहीं देखा जा सकता, क्योंकि देश उन्नत वैक्सीन तकनीक और जटिल जैविक उत्पादों की ओर बढ़ चुका है। विकल्प A, B और D में दिए आंकड़े विज्ञप्ति में नहीं हैं। परीक्षा में ऐसा आंकड़ा उसके वर्ष और वृद्धि दर के साथ पूछा जाता है, इसलिए तीनों बातें साथ याद रखें।

Q3.विज्ञान और प्रौद्योगिकीमध्यम

आईएनडी-सीईपीआई मिशन के तहत सामने आई भारत की पहली एमआरएनए कोविड-19 वैक्सीन कौन सी है?

  1. A.जीईएमसीओवीएसी-19
  2. B.भारतवैक-19
  3. C.नैनोकोव-21
  4. D.सारबेवैक्स-19
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. जीईएमसीओवीएसी-19

व्याख्या

सही उत्तर है जीईएमसीओवीएसी-19। भारत केंद्रित सीईपीआई मिशन, आईएनडी-सीईपीआई, को बीआरआईसी-टीएचएसटीआई और बीआईआरएसी लागू करते हैं और यह वैक्सीन इसके महत्वपूर्ण नतीजों में शामिल है। इसे आपात इस्तेमाल की मंजूरी मिली थी। इस मिशन के अन्य परिणामों में एक इनएक्टिवेटेड चिकनगुनिया वैक्सीन कैंडिडेट शामिल है, जिसके फेज II और फेज III परीक्षण चल रहे हैं, तथा मंकीपॉक्स और पैन-सारबेकोवायरस के लिए मल्टीवैलेंट सेल्फ-असेम्बल्ड नैनोकेज तकनीक पर आधारित कैंडिडेट, जो उन्नत प्री-क्लिनिकल चरण में हैं। साझेदारी ने साझा ढांचा भी बनाया, क्योंकि बीआरआईसी-टीएचएसटीआई बायोएसे लैबोरेटरी सीईपीआई की 17 केंद्रीकृत नेटवर्क प्रयोगशालाओं में से एक है और इसने आठ वैक्सीन कैंडिडेट को सहयोग दिया है और वैक्सीन विकास के लिए एक लाख से अधिक नमूनों की जांच की है। विकल्प B, C और D गढ़े हुए नाम हैं और विज्ञप्ति में इनका कोई उल्लेख नहीं है। परीक्षा में वैक्सीन का नाम, उसका प्लेटफॉर्म और उसे तैयार करने वाला मिशन, तीनों साथ याद रखने चाहिए।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीईपीआई का पूरा नाम क्या है?

कोएलिशन फॉर एपिडेमिक प्रीपेयर्डनेस इनोवेशन। भारत इसका संस्थापक सदस्य है और इसके बोर्ड तथा इन्वेस्टर्स काउंसिल की बैठक एक दशक बाद 13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में हुई।

भारत की जैव-अर्थव्यवस्था कितनी बड़ी है?

यह 2025 में 195.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंची और इसमें 18 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि रही। इसमें बायोफार्मा क्षेत्र की हिस्सेदारी लगभग 30 प्रतिशत है।

आईएनडी-सीईपीआई की पहली बड़ी उपलब्धि कौन सी वैक्सीन है?

जीईएमसीओवीएसी-19, जो कोविड-19 के विरुद्ध भारत की पहली एमआरएनए वैक्सीन है और जिसे आपात इस्तेमाल की मंजूरी मिली। यह मिशन बीआरआईसी-टीएचएसटीआई और बीआईआरएसी लागू करते हैं।

स्रोत

इनके लिए उपयोगी:SSCSSC CGLIBPS