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भारत लगातार तीसरी बार आईएसए का अध्यक्ष चुना गया

अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन के अध्यक्ष पद के लिए भारत लगातार तीसरी बार चुना गया है, केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने शिखर सम्मेलन में यह जानकारी दी।

लेखक प्रकाशित · 2 मिनट
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भारत लगातार तीसरी बार आईएसए का अध्यक्ष चुना गया

चर्चा में क्यों

भारत अक्षय ऊर्जा शिखर सम्मेलन एवं प्रदर्शनी 2026 में केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने घोषणा की कि अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन के अध्यक्ष पद के लिए भारत लगातार तीसरी बार चुना गया है और फ्रांस सह-अध्यक्ष बना है।

सदस्य देशों ने अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (आईएसए) के अध्यक्ष पद के लिए भारत को लगातार तीसरे कार्यकाल के लिए चुना है। नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा, शिक्षा तथा उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रह्लाद जोशी ने भारत अक्षय ऊर्जा शिखर सम्मेलन एवं प्रदर्शनी 2026 के दौरान पत्रकारों से बातचीत में यह घोषणा की। उन्होंने भारत सरकार की ओर से सभी सदस्य देशों को इस भरोसे के लिए धन्यवाद दिया और सह-अध्यक्ष के रूप में फिर चुने जाने पर फ्रांस को बधाई दी।

गठबंधन का विस्तार

मंत्री ने स्मरण कराया कि सौर सहयोग की इसी सोच ने भारत और फ्रांस को 2015 में यह गठबंधन बनाने के लिए एक मंच पर लाया था। आज इसमें 130 हस्ताक्षरकर्ता और सदस्य देश हैं और यह विशेष रूप से ग्लोबल साउथ के लिए सहयोग का सशक्त मंच बन चुका है। भारत की सोच पावर टू एम्पावर तथा वन सन, वन वर्ल्ड, वन ग्रिड के विचारों पर टिकी है। श्री जोशी ने कहा कि अब प्राथमिकता वादों से निवेश की ओर, साझेदारी से परियोजनाओं की ओर और महत्वाकांक्षा से वास्तविक परिणाम की ओर बढ़ना है।

सौर परियोजनाओं के लिए धन

वित्त पोषण को गठबंधन की प्राथमिकताओं के केंद्र में रखा गया। 200 मिलियन अमेरिकी डॉलर का अफ्रीका सोलर फैसिलिटी उस महाद्वीप के वितरित नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में निवेश खोलने की दिशा में अहम कदम बताया गया। भारत ने इसके लिए लगभग 225 करोड़ रुपये, यानी 25 मिलियन डॉलर देने की प्रतिबद्धता जताई है। इसके अलावा 300 मिलियन डॉलर का नाइजीरिया वितरित नवीकरणीय ऊर्जा कोष ऐसा नमूना बताया गया जिसे पूरे अफ्रीका में बढ़ाया जा सकता है।

मदराशि
अफ्रीका सोलर फैसिलिटी200 मिलियन डॉलर
इसमें भारत का योगदानलगभग 225 करोड़ रुपये (25 मिलियन डॉलर)
नाइजीरिया वितरित नवीकरणीय ऊर्जा कोष300 मिलियन डॉलर

किसान, द्वीप और संस्थाएं

मंत्री ने सौर ऊर्जा से तीस लाख किसानों को सशक्त बनाने तथा एग्री-पीवी यानी खेती और सौर पैनल के साझा उपयोग तक काम बढ़ाने की बात कही। उन्होंने कहा कि भारत की पीएम-कुसुम पहल ने दिखाया है कि सौर ऊर्जा से चलने वाली खेती सिंचाई की लागत घटाती है और किसान की आय बढ़ाती है, और गठबंधन के जरिये इस मॉडल को सदस्य देशों, विशेष रूप से अफ्रीका में अपनाया जा रहा है। फिजी, मेडागास्कर, कोमोरोस और सेशेल्स में गठबंधन की मदद से अस्पताल तथा स्कूल रोशन हो रहे हैं, स्वच्छ पेयजल मिल रहा है और कृषि उत्पाद के लिए शीत भंडारण चल रहा है। मॉरीशस से शुरुआत करते हुए लघु द्वीपीय विकासशील देशों के लिए सौर और भंडारण के साझा अवसर तैयार किए जा रहे हैं।

राष्ट्रीय क्षमता निर्माण पर श्री जोशी ने 17 सोलर टेक्नोलॉजी एप्लीकेशन रिसोर्स सेंटर, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर शाइन तथा एआई आधारित आईएसए अकादमी का उल्लेख किया। शिखर सम्मेलन का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2 नवंबर 2026 को किया था और यह 5 नवंबर 2026 को समाप्त होगा।

महत्वपूर्ण तथ्य

घोषणाअंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन के अध्यक्ष पद पर भारत लगातार तीसरे कार्यकाल के लिए चुना गया
सह-अध्यक्षफ्रांस, पुनः निर्वाचित
घोषणा करने वालेप्रह्लाद जोशी, केंद्रीय नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री
अवसरभारत अक्षय ऊर्जा शिखर सम्मेलन एवं प्रदर्शनी 2026, नई दिल्ली
आईएसए की स्थापना2015, भारत और फ्रांस द्वारा
सदस्यता130 हस्ताक्षरकर्ता और सदस्य देश
अफ्रीका सोलर फैसिलिटी200 मिलियन डॉलर, भारत का योगदान लगभग 225 करोड़ रुपये (25 मिलियन डॉलर)
नाइजीरिया कोष300 मिलियन डॉलर का वितरित नवीकरणीय ऊर्जा कोष
मार्गदर्शक सोचपावर टू एम्पावर; वन सन, वन वर्ल्ड, वन ग्रिड

परीक्षा की दृष्टि से

याद रखें कि आईएसए अध्यक्ष पद पर भारत का यह लगातार तीसरा कार्यकाल है और सह-अध्यक्ष फ्रांस है, स्थापना वर्ष 2015, 130 हस्ताक्षरकर्ता और सदस्य देश, 200 मिलियन डॉलर का अफ्रीका सोलर फैसिलिटी तथा उसमें भारत का 225 करोड़ रुपये या 25 मिलियन डॉलर का अंश, 300 मिलियन डॉलर का नाइजीरिया कोष, 17 सोलर टेक्नोलॉजी एप्लीकेशन रिसोर्स सेंटर और नारा वन सन, वन वर्ल्ड, वन ग्रिड।

अभ्यास प्रश्न

Q1.अंतरराष्ट्रीयआसान

अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन के अध्यक्ष पद के लिए भारत लगातार कौन से कार्यकाल के लिए चुना गया है?

  1. A.पहले
  2. B.दूसरे
  3. C.तीसरे
  4. D.चौथे
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. तीसरे

अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन के सदस्य देशों ने भारत को इस समूह के अध्यक्ष पद के लिए लगातार तीसरे कार्यकाल के लिए चुना है, और केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री ने भारत सरकार की ओर से इस भरोसे के लिए सभी सदस्य देशों का आभार जताया।

Q2.अंतरराष्ट्रीयमध्यम

अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन की स्थापना किस वर्ष और किन दो देशों ने की थी?

  1. A.2010, भारत और जापान
  2. B.2015, भारत और फ्रांस
  3. C.2018, भारत और जर्मनी
  4. D.2020, भारत और डेनमार्क
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 2015, भारत और फ्रांस

सौर ऊर्जा की प्रगति का लाभ सबको समान रूप से मिले, इसी सोच ने इन दोनों देशों को उस वर्ष यह गठबंधन बनाने के लिए एक साथ लाया था, और यह मंच आज 130 हस्ताक्षरकर्ता तथा सदस्य देशों तक फैल चुका है और विशेष रूप से ग्लोबल साउथ के लिए…

Q3.अंतरराष्ट्रीयमध्यम

अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन के अफ्रीका सोलर फैसिलिटी में भारत ने कितनी राशि देने की प्रतिबद्धता जताई है?

  1. A.लगभग 225 करोड़ रुपये, यानी 25 मिलियन डॉलर
  2. B.लगभग 500 करोड़ रुपये, यानी 60 मिलियन डॉलर
  3. C.लगभग 1,000 करोड़ रुपये, यानी 120 मिलियन डॉलर
  4. D.लगभग 90 करोड़ रुपये, यानी 10 मिलियन डॉलर
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. लगभग 225 करोड़ रुपये, यानी 25 मिलियन डॉलर

अफ्रीका सोलर फैसिलिटी का कुल आकार 200 मिलियन डॉलर है और इसका उद्देश्य अफ्रीका के वितरित नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में निवेश को खोलना है; इसमें भारत का योगदान लगभग 225 करोड़ रुपये बताया गया है, जो 25 मिलियन डॉलर के बराबर है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन का अध्यक्ष कौन है?

भारत, जिसे सदस्य देशों ने लगातार तीसरे कार्यकाल के लिए अध्यक्ष चुना है। फ्रांस को गठबंधन का सह-अध्यक्ष पुनः चुना गया है।

अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन की स्थापना कब और किसने की थी?

इसकी स्थापना 2015 में भारत और फ्रांस की संयुक्त पहल पर हुई थी। आज इसमें 130 हस्ताक्षरकर्ता और सदस्य देश हैं और यह मुख्य रूप से ग्लोबल साउथ के साथ काम करता है।

अफ्रीका सोलर फैसिलिटी क्या है?

यह 200 मिलियन डॉलर की सुविधा है, जो अफ्रीका में वितरित नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में निवेश जुटाने के लिए बनाई गई है। भारत ने इसमें लगभग 225 करोड़ रुपये यानी 25 मिलियन डॉलर देने की प्रतिबद्धता जताई है।

स्रोत

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