आईआईटीएम पुणे में सीएसएसआईएफ की पहली परामर्श बैठक
जलवायु विज्ञान को सेवाओं में बदलने वाले मंच सीएसएसआईएफ की पहली हितधारक बैठक आईआईटीएम पुणे में हुई, जिसमें 80 से अधिक संस्थानों के 150 से अधिक प्रतिभागी शामिल हुए।

चर्चा में क्यों
17 अक्टूबर 2026 को पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अधीन भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान, पुणे ने क्लाइमेट साइंस इनटू सर्विसेज फॉर इंडिया फोरम की पहली हितधारक परामर्श बैठक आयोजित की, जिसमें 80 से अधिक संस्थानों के 150 से अधिक प्रतिभागी शामिल हुए।
पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अधीन काम करने वाले भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान (आईआईटीएम), पुणे ने 17 अक्टूबर 2026 को अपने परिसर में क्लाइमेट साइंस इनटू सर्विसेज फॉर इंडिया फोरम (सीएसएसआईएफ) की पहली हितधारक परामर्श बैठक आयोजित की। देश के कई राज्यों के 80 से अधिक संस्थानों के 150 से अधिक प्रतिभागी इसमें शामिल हुए, जिनमें केंद्रीय मंत्रालय और विभाग, संचालन एजेंसियां, शोध एवं शैक्षणिक संस्थान, गैर-सरकारी संगठन, नागरिक समाज तथा निजी क्षेत्र के प्रतिनिधि थे।
बैठक का मुख्य प्रश्न
परामर्श का विषय यह था कि जलवायु पर हो रहे शोध को ऐसी सेवाओं में कैसे बदला जाए जिनका उपयोग लोग और सरकारें वास्तव में कर सकें। तकनीकी सत्र में आईआईटीएम में तैयार होने वाले मौसम तथा जलवायु उत्पाद, उनके पीछे के मॉडल और आंकड़े, तथा देश के लिए जलवायु सेवा सूचना प्रणाली (सीएसआईएस) बनाने की आवश्यकता पर चर्चा हुई।
किसने संबोधित किया
| स्वागत भाषण | डॉ. ए. सूर्यचंद्र राव, निदेशक, आईआईटीएम |
| मुख्य अतिथि | प्रोफेसर वी. के. दधवाल, पूर्व निदेशक, भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान |
| बैठक की रूपरेखा | डॉ. सुवर्णा फडणवीस, परियोजना निदेशक, जलवायु परिवर्तन शोध केंद्र, आईआईटीएम |
| सीएसआईएस की आवश्यकता पर | डॉ. रूपा कुमार कोल्ली, पूर्व प्रमुख, जलवायु अनुप्रयोग एवं सेवा प्रभाग, विश्व मौसम विज्ञान संगठन |
| नीति से जुड़ी जलवायु जानकारी पर | श्री अमरदीप राजू, वैज्ञानिक, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय |
क्षेत्रवार समूह
बैठक में अलग-अलग समूहों ने जल संसाधन एवं जल विज्ञान, कृषि एवं खाद्य सुरक्षा तथा आपदा प्रबंधन एवं जोखिम कम करने पर काम किया। अन्य समूहों ने स्वास्थ्य पर विचार किया, जिसमें भारी वर्षा, गर्मी और जंगल की आग जैसी अतियों पर विशेष बल रहा; ऊर्जा और वित्त पर, जिसमें नवीकरणीय ऊर्जा की ओर बदलाव, बीमा तथा आर्थिक जोखिम शामिल थे; तथा जलवायु अनुमान और सेवाओं पर, जिसमें समुद्री ऊष्मा लहरें, समुद्री उत्पादकता, तटीय संवेदनशीलता और प्रेक्षणों को सेवाओं में बदलने के ढांचे पर बात हुई। उपयोगकर्ताओं ने अपनी जरूरतें और कठिनाइयां बताईं और यह भी जाना कि संस्थान के आंकड़े तथा उत्पाद अभी क्या दे सकते हैं। प्रतिभागियों में भारत मौसम विज्ञान विभाग, नौसेना मुख्यालय, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल, भारतीय रिजर्व बैंक, इनकॉइस, एनसीपीओआर, आईसीएआर के संस्थान, राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और नगर निकाय शामिल थे। बैठक से निकली सिफारिशें मंच के आगे के काम को दिशा देंगी।
महत्वपूर्ण तथ्य
| आयोजन | क्लाइमेट साइंस इनटू सर्विसेज फॉर इंडिया फोरम (सीएसएसआईएफ) की पहली हितधारक परामर्श बैठक |
|---|---|
| आयोजक एवं स्थान | भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान (आईआईटीएम), पुणे |
| संबंधित मंत्रालय | पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय |
| तिथि | 17 अक्टूबर 2026 |
| भागीदारी | 80 से अधिक संस्थानों के 150 से अधिक प्रतिभागी |
| निदेशक, आईआईटीएम | डॉ. ए. सूर्यचंद्र राव |
| मुख्य अतिथि | प्रोफेसर वी. के. दधवाल, पूर्व निदेशक, भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान |
| प्रस्तावित प्रणाली | देश के लिए जलवायु सेवा सूचना प्रणाली (सीएसआईएस) |
| संबंधित शोध केंद्र | जलवायु परिवर्तन शोध केंद्र (सीसीसीआर), आईआईटीएम |
परीक्षा की दृष्टि से
याद रखें- मंच (क्लाइमेट साइंस इनटू सर्विसेज फॉर इंडिया फोरम, सीएसएसआईएफ), यह उसकी पहली हितधारक परामर्श बैठक थी, आयोजक (आईआईटीएम, पुणे) और उसका मंत्रालय (पृथ्वी विज्ञान), तिथि (17 अक्टूबर 2026), भागीदारी (80 से अधिक संस्थानों के 150 से अधिक प्रतिभागी), प्रस्तावित प्रणाली (जलवायु सेवा सूचना प्रणाली), आईआईटीएम के निदेशक (डॉ. ए. सूर्यचंद्र राव) तथा मुख्य अतिथि (प्रोफेसर वी. के. दधवाल)।
अभ्यास प्रश्न
क्लाइमेट साइंस इनटू सर्विसेज फॉर इंडिया फोरम की पहली हितधारक परामर्श बैठक किस संस्थान ने आयोजित की?
- A.भारत मौसम विज्ञान विभाग, नई दिल्ली
- B.भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान, पुणे
- C.राष्ट्रीय ध्रुवीय एवं समुद्री अनुसंधान केंद्र, गोवा
- D.भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान, तिरुवनंतपुरम
उत्तर देखें
सही उत्तर भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान, पुणे है, जिसने पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अधीन अपने ही परिसर में यह बैठक आयोजित की।
पूरी व्याख्या पढ़ें →बैठक की मेजबानी करने वाला आईआईटीएम, पुणे किस केंद्रीय मंत्रालय के अधीन कार्य करता है?
- A.पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय
- B.विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय
- C.पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय
- D.जल शक्ति मंत्रालय
उत्तर देखें
सही उत्तर पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय है, जिसके अधीन भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान काम करता है और जिसका नाम इस परामर्श बैठक की घोषणा में संबंधित मंत्रालय के रूप में दिया गया।
पूरी व्याख्या पढ़ें →परामर्श बैठक के तकनीकी सत्र में देश के लिए किस प्रणाली की आवश्यकता पर बल दिया गया?
- A.राष्ट्रीय आपदा चेतावनी नेटवर्क
- B.जलवायु सेवा सूचना प्रणाली
- C.एकीकृत मौसम ग्रिड
- D.राष्ट्रीय मानसून मिशन
उत्तर देखें
तकनीकी सत्र का आरंभिक व्याख्यान विश्व मौसम विज्ञान संगठन के जलवायु अनुप्रयोग एवं सेवा प्रभाग के पूर्व प्रमुख डॉ. रूपा कुमार कोल्ली ने दिया और बताया कि जलवायु संबंधी जानकारी उन लोगों तक पहुंचाने के लिए देश को ऐसी प्रणाली क्यों चाहिए जिन्हें उस पर कार्रवाई करनी है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →सीएसएसआईएफ की पहली हितधारक बैठक में कितने प्रतिभागी और कितने संस्थान शामिल हुए?
- A.50 से अधिक प्रतिभागी, 20 से अधिक संस्थान
- B.150 से अधिक प्रतिभागी, 80 से अधिक संस्थान
- C.250 से अधिक प्रतिभागी, 40 से अधिक संस्थान
- D.500 से अधिक प्रतिभागी, 120 से अधिक संस्थान
उत्तर देखें
बैठक में सरकारी मंत्रालयों और विभागों, संचालन एजेंसियों, शोध एवं शैक्षणिक संस्थानों, गैर-सरकारी संगठनों, नागरिक समाज तथा निजी क्षेत्र के हितधारक शामिल हुए, जो देश के कई राज्यों से आए थे।
पूरी व्याख्या पढ़ें →अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
सीएसएसआईएफ क्या है और उसकी पहली हितधारक बैठक कहां हुई?
सीएसएसआईएफ का अर्थ क्लाइमेट साइंस इनटू सर्विसेज फॉर इंडिया फोरम है। इसकी पहली हितधारक परामर्श बैठक 17 अक्टूबर 2026 को भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान, पुणे में हुई, जिसमें 80 से अधिक संस्थानों के 150 से अधिक प्रतिभागी शामिल हुए।
आईआईटीएम पुणे किस मंत्रालय के अधीन है?
पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अधीन। इसका जलवायु परिवर्तन शोध केंद्र वे जलवायु मॉडल, आंकड़े और उत्पाद तैयार करता है जिन पर इस परामर्श बैठक में चर्चा हुई।
बैठक में देश के लिए किस प्रणाली की आवश्यकता पर बात हुई?
जलवायु सेवा सूचना प्रणाली यानी सीएसआईएस पर। विश्व मौसम विज्ञान संगठन के जलवायु अनुप्रयोग एवं सेवा प्रभाग के पूर्व प्रमुख डॉ. रूपा कुमार कोल्ली ने बताया कि भारत को ऐसी प्रणाली क्यों चाहिए।
स्रोत
- https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2324660 (नए टैब में खुलेगा) — Press Information Bureau
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