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आईसीएआर ने गणेश विसर्जन के कचरे से बनाई जैविक खाद

आईसीएआर संस्थानों ने स्वच्छता ही सेवा के तहत गणेश विसर्जन के बाद सफाई अभियान चलाया और रांची तथा मुंबई में पूजा सामग्री से जैविक खाद तैयार की।

लेखक प्रकाशित · 2 मिनट
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आईसीएआर ने गणेश विसर्जन के कचरे से बनाई जैविक खाद

चर्चा में क्यों

26 सितंबर 2026 को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने स्वच्छता ही सेवा के तहत अपने संस्थानों में चलाए गए सफाई और जागरूकता कार्यक्रमों की जानकारी दी, जिनमें गणेश विसर्जन के बाद की सफाई और चढ़ावे से जैविक खाद बनाना शामिल रहा।

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अधीन कृषि शोध की शीर्ष संस्था है। इसने अपने संस्थानों में स्वच्छता ही सेवा कार्यों के तहत जागरूकता और सफाई के कार्यक्रम चलाए, जिनका ब्यौरा 26 सितंबर 2026 को सामने रखा गया। इन कार्यक्रमों का केंद्र गणेश विसर्जन के बाद की सफाई, सार्वजनिक स्थानों को स्वच्छ रखना और कचरे का जिम्मेदार प्रबंधन रहा।

पंडाल में दिया गया संदेश

विसर्जन के बाद सफाई पर एक जागरूकता कार्यक्रम स्थानीय गणेश पंडाल में रखा गया। लोगों को बताया गया कि मिट्टी से बनी मूर्तियां पर्यावरण के लिए बेहतर विकल्प क्यों हैं, और उनसे कहा गया कि प्लास्टर ऑफ पेरिस से बनी या हानिकारक रासायनिक रंगों वाली मूर्तियां पीने के पानी की टंकियों में विसर्जित न करें। उन्हें इसके लिए तय किए गए स्थानों का उपयोग करने तथा मूर्तियों और पूजा सामग्री को प्राकृतिक जल स्रोतों से दूर रखने के लिए कहा गया।

कचरे को अलग करना

कार्यक्रम में फूल, पूजा सामग्री, प्लास्टिक, थर्मोकोल और सजावट के बाकी कचरे को सही तरीके से इकट्ठा करने और निपटाने पर भी जोर दिया गया। वक्ताओं ने बताया कि विसर्जन स्थलों पर सफाई क्यों जरूरी है, कचरा फैलाने से क्यों बचना चाहिए और जल स्रोतों के पास कौन-सी सावधानियां रखनी चाहिए। इसके बाद पंडाल के आसपास का इलाका साफ किया गया तथा कचरा इकट्ठा कर अलग-अलग किया गया, ताकि उसका सुरक्षित निपटान हो सके।

रांची और मुंबई में खाद

दो संस्थानों ने चढ़ावे को संसाधन में बदल दिया। आईसीएआर-एनआईएसए, रांची (झारखंड) और आईसीएआर-सीआईआरसीओटी, मुंबई (महाराष्ट्र) में फूल तथा अन्य पूजा सामग्री जैसे आसानी से सड़ने वाले पदार्थ इकट्ठा कर बाकी कचरे से अलग किए गए। खाद बनाने लायक सामग्री को खाद केंद्रों में संसाधित कर जैविक खाद तैयार की गई, जिससे विसर्जन के दौरान निकला कचरा मिट्टी के लिए उपयोगी संसाधन बनकर लौटा।

कुल मिलाकर इन कार्यों का उद्देश्य स्वच्छता, साफ-सफाई, पर्यावरण संरक्षण और कचरे के जिम्मेदार प्रबंधन की समझ बढ़ाना तथा त्योहार के दौरान और उसके बाद सुरक्षित और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार तौर-तरीके अपनाने को बढ़ावा देना था। परिषद ने रेखांकित किया कि जल स्रोतों की रक्षा और सार्वजनिक स्थानों की स्वच्छता सामूहिक जिम्मेदारी और लोगों की भागीदारी पर टिकी है।

महत्वपूर्ण तथ्य

संस्थाभारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर)
संबंधित मंत्रालयकृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय
अभियानस्वच्छता ही सेवा
केंद्र बिंदुगणेश विसर्जन के बाद सफाई और कचरे का जिम्मेदार प्रबंधन
सुझाई गई मूर्तियांपर्यावरण के अनुकूल मिट्टी की मूर्तियां
जिनसे बचने को कहा गयाप्लास्टर ऑफ पेरिस और हानिकारक रासायनिक रंगों वाली मूर्तियां
खाद बनाने वाले संस्थानआईसीएआर-एनआईएसए, रांची (झारखंड) और आईसीएआर-सीआईआरसीओटी, मुंबई (महाराष्ट्र)
परिणामसड़ने वाली सामग्री से जैविक खाद
अलग किया गया कचराफूल, पूजा सामग्री, प्लास्टिक, थर्मोकोल और सजावट का कचरा

परीक्षा की दृष्टि से

याद रखें कि आईसीएआर कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अधीन है, अभियान स्वच्छता ही सेवा के तहत चला, मिट्टी की मूर्तियां और तय विसर्जन स्थल अपनाने तथा प्लास्टर ऑफ पेरिस की मूर्तियों और प्राकृतिक जल स्रोतों से बचने की सलाह दी गई, और खाद बनाने का काम आईसीएआर-एनआईएसए, रांची (झारखंड) तथा आईसीएआर-सीआईआरसीओटी, मुंबई (महाराष्ट्र) में हुआ।

अभ्यास प्रश्न

Q1.पर्यावरणमध्यम

गणेश विसर्जन के बाद इकट्ठा की गई सड़ने वाली सामग्री से किन दो आईसीएआर संस्थानों ने जैविक खाद तैयार की?

  1. A.आईसीएआर-सीआईआरबी, हिसार और आईसीएआर-आईएआरआई, नई दिल्ली
  2. B.आईसीएआर-एनआईएसए, रांची और आईसीएआर-सीआईआरसीओटी, मुंबई
  3. C.आईसीएआर-एनडीआरआई, करनाल और आईसीएआर-सीआईएफटी, कोच्चि
  4. D.आईसीएआर-आईआईएचआर, बेंगलुरु और आईसीएआर-सीआईसीआर, नागपुर
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. आईसीएआर-एनआईएसए, रांची और आईसीएआर-सीआईआरसीओटी, मुंबई

व्याख्या

सही उत्तर आईसीएआर-एनआईएसए, रांची और आईसीएआर-सीआईआरसीओटी, मुंबई है। इनमें से एक संस्थान झारखंड में और दूसरा महाराष्ट्र में है। यहां फूल तथा अन्य पूजा सामग्री जैसे आसानी से सड़ने वाले पदार्थ इकट्ठा कर बाकी कचरे से अलग किए गए और खाद बनाने लायक सामग्री को खाद केंद्रों में संसाधित कर जैविक खाद तैयार की गई। इस तरह विसर्जन के दौरान निकला कचरा मिट्टी के लिए उपयोगी संसाधन बन गया। विकल्प A, C और D में परिषद के दूसरे जाने-माने संस्थानों के नाम दिए गए हैं, लेकिन इस खाद बनाने के काम में उनका उल्लेख नहीं था, इसलिए वे गलत हैं। यह पूरा काम आईसीएआर संस्थानों में चल रहे स्वच्छता ही सेवा अभियान का हिस्सा था, जिसके तहत स्थानीय गणेश पंडाल में जागरूकता कार्यक्रम, आसपास के इलाके की सफाई और कचरे को अलग करने का काम भी हुआ।

Q2.पर्यावरणआसान

गणेश विसर्जन के बाद आईसीएआर के ये जागरूकता और सफाई कार्यक्रम किस अभियान के तहत आयोजित किए गए?

  1. A.नमामि गंगे
  2. B.मिशन लाइफ
  3. C.स्वच्छता ही सेवा
  4. D.जल जीवन मिशन
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. स्वच्छता ही सेवा

व्याख्या

सही उत्तर स्वच्छता ही सेवा है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने अपने संस्थानों में जागरूकता और सफाई की ये पहलें इसी अभियान के तहत आयोजित कीं, जिनका ध्यान गणेश विसर्जन के बाद की सफाई, सार्वजनिक स्थानों की स्वच्छता और कचरे के जिम्मेदार प्रबंधन पर था। विकल्प A यानी नमामि गंगे गंगा नदी के कायाकल्प से जुड़ा कार्यक्रम है और यहां उसका नाम नहीं आया। विकल्प B यानी मिशन लाइफ पर्यावरण के अनुकूल जीवनशैली को बढ़ावा देता है, लेकिन ये कार्यक्रम उसके तहत नहीं हुए। विकल्प D यानी जल जीवन मिशन घरों तक नल से पानी पहुंचाने से जुड़ा है और इस अभियान से उसका कोई संबंध नहीं है। इस अभियान के तहत लोगों को मिट्टी की मूर्तियों, तय विसर्जन स्थलों के उपयोग तथा फूल, पूजा सामग्री, प्लास्टिक और थर्मोकोल के सही निपटान के बारे में जागरूक किया गया।

Q3.पर्यावरणआसान

गणेश पंडाल के जागरूकता कार्यक्रम में लोगों से किन मूर्तियों को पीने के पानी की टंकियों में विसर्जित न करने को कहा गया?

  1. A.मिट्टी से बनी मूर्तियां
  2. B.प्लास्टर ऑफ पेरिस और हानिकारक रासायनिक रंगों वाली मूर्तियां
  3. C.कागज की लुगदी से बनी मूर्तियां
  4. D.हल्दी से बनी मूर्तियां
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. प्लास्टर ऑफ पेरिस और हानिकारक रासायनिक रंगों वाली मूर्तियां

व्याख्या

सही उत्तर प्लास्टर ऑफ पेरिस और हानिकारक रासायनिक रंगों वाली मूर्तियां है। कार्यक्रम में लोगों को पर्यावरण के अनुकूल मिट्टी की मूर्तियों के बारे में जागरूक किया गया और सलाह दी गई कि प्लास्टर ऑफ पेरिस से बनी या हानिकारक रासायनिक रंगों वाली मूर्तियां पीने के पानी की टंकियों में विसर्जित न करें। विकल्प A गलत है, क्योंकि मिट्टी की मूर्तियां ही वह विकल्प थीं जिन्हें अपनाने की सलाह दी गई, न कि जिनसे मना किया गया। विकल्प C और D में दी गई सामग्री की चर्चा इस कार्यक्रम में हुई ही नहीं। मूर्ति की सामग्री के अलावा लोगों से यह भी कहा गया कि वे विसर्जन के लिए तय स्थानों का ही उपयोग करें, मूर्तियों और पूजा सामग्री को प्राकृतिक जल स्रोतों में न डालें तथा विसर्जन स्थलों पर सफाई और सुरक्षा का ध्यान रखें, क्योंकि जल स्रोतों की रक्षा सामूहिक जिम्मेदारी और लोगों की भागीदारी पर टिकी है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आईसीएआर के ये सफाई कार्यक्रम किस अभियान के तहत हुए?

स्वच्छता ही सेवा के तहत। इसी के अंतर्गत परिषद के संस्थानों ने गणेश विसर्जन के बाद सफाई, सार्वजनिक स्थानों की स्वच्छता और कचरे के जिम्मेदार प्रबंधन पर जागरूकता कार्यक्रम चलाए।

किन आईसीएआर संस्थानों ने विसर्जन के चढ़ावे से खाद बनाई?

आईसीएआर-एनआईएसए, रांची (झारखंड) और आईसीएआर-सीआईआरसीओटी, मुंबई (महाराष्ट्र) ने। वहां सड़ने वाली सामग्री अलग कर खाद केंद्रों में संसाधित की गई और जैविक खाद तैयार हुई।

कार्यक्रम में किस तरह की मूर्तियों की सलाह दी गई?

मिट्टी से बनी पर्यावरण अनुकूल मूर्तियों की। लोगों से कहा गया कि प्लास्टर ऑफ पेरिस या हानिकारक रासायनिक रंगों वाली मूर्तियां पीने के पानी की टंकियों में न डालें और तय विसर्जन स्थलों का उपयोग करें।

स्रोत

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