जीएमपीसीएस लाइसेंस: सरकार ने उपग्रह संचार नियमों को भेदभावरहित बताया
संचार मंत्रालय ने कहा कि भारत की उपग्रह संचार प्राधिकरण व्यवस्था निष्पक्ष और भेदभावरहित है, तीनों जीएमपीसीएस लाइसेंसधारकों की सुरक्षा जाँच चल रही है।

चर्चा में क्यों
8 अक्टूबर 2026 को संचार मंत्रालय ने वक्तव्य जारी कर सोशल मीडिया के उस दावे को खारिज किया कि भारत में उपग्रह संचार सेवाओं का नियामकीय ढाँचा भेदभावपूर्ण ढंग से लागू किया जा रहा है।
संचार मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे उस दावे को खारिज कर दिया है जिसमें कहा गया था कि भारत में उपग्रह संचार सेवाओं से जुड़े नियम अलग-अलग कंपनियों पर अलग-अलग ढंग से लागू किए जा रहे हैं। मंत्रालय ने 8 अक्टूबर 2026 को जारी वक्तव्य में कहा कि सरकार ने दूरसंचार सेवाओं के लिए, और उनमें उपग्रह आधारित सेवाओं के लिए भी, जो प्राधिकरण व्यवस्था बनाई है वह निष्पक्ष है और हर आवेदक के लिए शर्तें एक जैसी रखती है।
तीन लाइसेंस, शर्तें एक जैसी
भारत में उपग्रह के जरिये वैश्विक वैयक्तिक मोबाइल संचार सेवा चलाने के लिए तीन कंपनियों को दूरसंचार लाइसेंस दिए गए हैं। अंग्रेजी में इस श्रेणी को संक्षेप में जीएमपीसीएस कहा जाता है। ये तीनों सेवाएँ गैर-भूतुल्यकालिक उपग्रह कक्षा पर आधारित हैं, अर्थात् इनके उपग्रह भूमध्य रेखा के ऊपर किसी एक स्थिर बिंदु पर नहीं टिके रहते, बल्कि धरती के सापेक्ष चलते रहते हैं। मंत्रालय के अनुसार ये लाइसेंस इसी प्रतिबद्धता का हिस्सा हैं कि देश में उपग्रह से मिलने वाली कनेक्टिविटी उपलब्ध कराई जाए।
पहले सुरक्षा जाँच, उसके बाद स्पेक्ट्रम
लाइसेंस की शर्तों के अनुसार हर कंपनी को यह दिखाना पड़ता है कि वह सुरक्षा शर्तों का पालन कर रही है। मंत्रालय ने बताया कि इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि दी जा रही सेवाएँ सुरक्षा अपेक्षाओं पर खरी उतरें और सभी उपयोगकर्ताओं तथा उनके आँकड़ों की सुरक्षा बनी रहे। इस समय तीनों लाइसेंसधारकों के मामले में यह सुरक्षा मूल्यांकन चल रहा है। जाँच पूरी होने के बाद ही कोई कंपनी अगले चरण में जाकर स्पेक्ट्रम आवंटन के लिए आवेदन कर सकती है। स्पेक्ट्रम मिलने पर ही लाइसेंसधारी नेटवर्क वास्तव में ग्राहकों तक सेवा पहुँचा पाता है।
आरोप निराधार क्यों कहा गया
चूँकि तीनों लाइसेंसधारकों में से किसी का भी सुरक्षा मूल्यांकन अभी पूरा नहीं हुआ है, इसलिए मंत्रालय ने कहा कि वे सभी मोटे तौर पर एक ही नियामकीय चरण पर खड़े हैं। इसी आधार पर उसने इस सुझाव को निराधार और भ्रमपूर्ण बताया कि यह ढाँचा या इसे लागू करने का तरीका अनुचित अथवा भेदभावपूर्ण है।
याद रखने योग्य क्रम
परीक्षार्थी के लिए इस खबर में सबसे काम की बात वह क्रम है जिससे भारत में कोई उपग्रह संचार कंपनी गुजरती है — पहले जीएमपीसीएस श्रेणी में दूरसंचार लाइसेंस, फिर लाइसेंस में लिखी सुरक्षा शर्तों के पालन का प्रमाण, उसके बाद स्पेक्ट्रम का आवंटन और तब सेवा की व्यावसायिक शुरुआत। केवल लाइसेंस मिल जाने से कोई कंपनी भारतीय ग्राहकों के लिए नेटवर्क शुरू नहीं कर सकती।
महत्वपूर्ण तथ्य
| वक्तव्य जारी करने वाला | संचार मंत्रालय |
|---|---|
| वक्तव्य की तिथि | 8 अक्टूबर 2026 |
| लाइसेंस श्रेणी | जीएमपीसीएस (उपग्रह के जरिये वैश्विक वैयक्तिक मोबाइल संचार) |
| दिए गए लाइसेंस | तीन |
| उपयोग में कक्षा | गैर-भूतुल्यकालिक उपग्रह कक्षा |
| लाइसेंस की शर्त | सुरक्षा शर्तों के पालन का प्रमाण देना |
| सुरक्षा मूल्यांकन के बाद का चरण | स्पेक्ट्रम आवंटन के लिए आवेदन |
| सरकार का पक्ष | ढाँचा निष्पक्ष और भेदभावरहित; भेदभाव का आरोप निराधार |
परीक्षा की दृष्टि से
याद रखें कि जीएमपीसीएस का पूरा रूप ग्लोबल मोबाइल पर्सनल कम्युनिकेशन बाय सैटेलाइट है, भारत में गैर-भूतुल्यकालिक उपग्रह कक्षा आधारित ऐसी सेवाओं के लिए तीन दूरसंचार लाइसेंस दिए गए हैं, सुरक्षा शर्तों का पालन लाइसेंस की अनिवार्य शर्त है, तीनों का सुरक्षा मूल्यांकन चल रहा है और इसके बाद का चरण स्पेक्ट्रम आवंटन है।
अभ्यास प्रश्न
भारत में जीएमपीसीएस (उपग्रह के जरिये वैयक्तिक मोबाइल संचार) सेवाओं के लिए कितनी कंपनियों को दूरसंचार लाइसेंस दिए गए हैं?
- A.एक
- B.दो
- C.तीन
- D.छह
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर तीन है। संचार मंत्रालय ने बताया कि गैर-भूतुल्यकालिक उपग्रह कक्षा पर आधारित उपग्रह संचार के लिए तीन जीएमपीसीएस कंपनियों को दूरसंचार लाइसेंस दिए गए हैं, और चूँकि तीनों का सुरक्षा मूल्यांकन अभी चल रहा है, इसलिए वे मोटे तौर पर एक ही नियामकीय चरण पर खड़े हैं। विकल्प A यानी एक गलत है, क्योंकि मंत्रालय ने एक से अधिक लाइसेंसधारकों की बात कही है; यदि लाइसेंसधारक केवल एक होता तो कंपनियों के बीच भेदभाव का प्रश्न ही निरर्थक हो जाता। विकल्प B यानी दो भी इसी कारण गलत है, क्योंकि लाइसेंस पाने वाली उपग्रह कंपनियों की संख्या इससे अधिक बताई गई है। विकल्प D यानी छह गलत है, क्योंकि सरकार के वक्तव्य में ऐसी कोई संख्या नहीं है; मंत्रालय ने इससे छोटा समूह बताया है और हर कंपनी को स्पेक्ट्रम माँगने से पहले लाइसेंस की सुरक्षा शर्तों के पालन का प्रमाण देना होगा। परीक्षार्थी तीन की संख्या को जीएमपीसीएस लाइसेंस और चल रहे सुरक्षा मूल्यांकन से जोड़कर याद रखें।
सरकार के वक्तव्य के अनुसार भारत में किसी उपग्रह संचार लाइसेंसधारक को स्पेक्ट्रम आवंटन माँगने से पहले क्या करना अनिवार्य है?
- A.अपने शेयर किसी मान्यता प्राप्त शेयर बाजार में सूचीबद्ध कराना
- B.लाइसेंस की सुरक्षा शर्तों के पालन का प्रमाण देना
- C.भारतीय भूमि से अपना उपग्रह स्वयं प्रक्षेपित करना
- D.कम से कम दस लाख ग्राहक जोड़ना
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर लाइसेंस की सुरक्षा शर्तों के पालन का प्रमाण देना है। संचार मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि लाइसेंस की नियम-शर्तों के अंतर्गत हर उपग्रह संचार लाइसेंसधारक को यह दिखाना होता है कि वह सुरक्षा शर्तों का पालन कर रहा है, जिसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि दी जा रही सेवाएँ सुरक्षा अपेक्षाओं पर खरी उतरें और सभी उपयोगकर्ताओं तथा उनके आँकड़ों की सुरक्षा बनी रहे। यह सुरक्षा मूल्यांकन हर लाइसेंसधारक के मामले में चल रहा है और इसके पूरा होने पर ही कोई कंपनी स्पेक्ट्रम आवंटन के अगले चरण में जा सकती है। विकल्प A गलत है, क्योंकि शेयर बाजार में सूचीबद्ध होना इस ढाँचे में स्पेक्ट्रम की कोई शर्त नहीं है। विकल्प C गलत है, क्योंकि प्राधिकरण का संबंध भारत में सेवाएँ देने से है, यह नहीं देखा जाता कि उपग्रह कहाँ से छोड़े गए; ये कंपनियाँ गैर-भूतुल्यकालिक कक्षा की उपग्रह श्रृंखला का उपयोग करती हैं। विकल्प D गलत है, क्योंकि स्पेक्ट्रम से पहले ग्राहकों की कोई न्यूनतम संख्या तय नहीं की गई है; शर्त सुरक्षा मूल्यांकन है, व्यावसायिक आकार नहीं।
सरकार के वक्तव्य के अनुसार भारत में लाइसेंस प्राप्त जीएमपीसीएस सेवाएँ किस प्रकार की उपग्रह कक्षा पर आधारित हैं?
- A.केवल भूस्थिर कक्षा
- B.गैर-भूतुल्यकालिक उपग्रह कक्षा
- C.चंद्र अंतरण कक्षा
- D.भूतुल्यकालिक अंतरण कक्षा
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर गैर-भूतुल्यकालिक उपग्रह कक्षा है। संचार मंत्रालय ने कहा कि उपग्रह के जरिये वैश्विक वैयक्तिक मोबाइल संचार सेवाओं के दूरसंचार लाइसेंस गैर-भूतुल्यकालिक उपग्रह कक्षा पर आधारित उपग्रह संचार के लिए दिए गए हैं। ऐसी कक्षाओं के उपग्रह पृथ्वी के किसी एक स्थिर बिंदु के ऊपर नहीं ठहरते, इसलिए इनमें उपग्रहों की पूरी श्रृंखला काम में लाई जाती है और एक उपग्रह निकलते समय उपयोगकर्ता को अगले उपग्रह को सौंप देता है। विकल्प A गलत है, क्योंकि वक्तव्य में इन सेवाओं को भूस्थिर नहीं बताया गया; भूस्थिर उपग्रह भूमध्य रेखा के ऊपर एक ही स्थान पर स्थिर प्रतीत होता है, जो गैर-भूतुल्यकालिक का उल्टा है। विकल्प C गलत है, क्योंकि चंद्र अंतरण कक्षा का उपयोग यानों को चंद्रमा की ओर भेजने में होता है और भारत में उपयोगकर्ताओं को दूरसंचार सेवा देने से उसका कोई संबंध नहीं है। विकल्प D गलत है, क्योंकि भूतुल्यकालिक अंतरण कक्षा केवल एक अस्थायी पथ है जिससे उपग्रह को ऊपर उठाया जाता है, यह इन सेवाओं की संचालन कक्षा नहीं है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
जीएमपीसीएस का पूरा नाम क्या है?
ग्लोबल मोबाइल पर्सनल कम्युनिकेशन बाय सैटेलाइट, अर्थात् उपग्रह के जरिये वैश्विक वैयक्तिक मोबाइल संचार। यह वह दूरसंचार लाइसेंस श्रेणी है जिसके तहत उपग्रह कंपनियाँ भारत में संचार सेवाएँ दे सकती हैं, और इसमें तीन कंपनियों को लाइसेंस मिले हैं।
स्पेक्ट्रम पाने से पहले लाइसेंसधारक को क्या करना होता है?
उसे लाइसेंस में दर्ज सुरक्षा शर्तों के पालन का प्रमाण देना होता है। तीनों लाइसेंसधारकों का सुरक्षा मूल्यांकन इस समय चल रहा है और इसे पूरा करने पर ही कोई कंपनी स्पेक्ट्रम आवंटन के लिए आगे बढ़ सकती है।
संचार मंत्रालय ने यह वक्तव्य क्यों जारी किया?
सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा जा रहा था कि भारत में उपग्रह संचार सेवाओं का नियामकीय ढाँचा भेदभावपूर्ण ढंग से लागू हो रहा है। मंत्रालय ने उत्तर दिया कि ढाँचा निष्पक्ष तथा भेदभावरहित है और तीनों लाइसेंसधारक मोटे तौर पर एक ही नियामकीय चरण पर हैं।
स्रोत
- https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2320510 (नए टैब में खुलेगा) — Press Information Bureau
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