जैवमंडल रिजर्व दिवस: भारत में 18 रिजर्व, 13 यूनेस्को सूची में
अंतरराष्ट्रीय जैवमंडल रिजर्व दिवस 3 नवंबर को है; भारत में 18 अधिसूचित जैवमंडल रिजर्व हैं, जिनमें 13 यूनेस्को के विश्व नेटवर्क में शामिल हैं।

चर्चा में क्यों
2 नवंबर 2026 को जारी सरकारी पृष्ठभूमि दस्तावेज 3 नवंबर को मनाए जाने वाले अंतरराष्ट्रीय जैवमंडल रिजर्व दिवस को रेखांकित करता है और बताता है कि भारत के 18 अधिसूचित रिजर्व में 13 यूनेस्को के विश्व नेटवर्क में हैं।
अंतरराष्ट्रीय जैवमंडल रिजर्व दिवस हर वर्ष 3 नवंबर को मनाया जाता है। इसकी घोषणा यूनेस्को ने की थी, ताकि इन भूदृश्यों की उस भूमिका पर ध्यान जाए जो वे जैव विविधता के संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय आजीविका बचाने में निभाते हैं। भारत में 18 अधिसूचित जैवमंडल रिजर्व हैं, जिनमें से 13 यूनेस्को के विश्व जैवमंडल रिजर्व नेटवर्क में शामिल हैं और यह दक्षिण एशिया में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त रिजर्व की सबसे बड़ी संख्या है। ये पश्चिमी घाट से लेकर ऊंचाई वाले रेगिस्तान और समुद्री पर्यावास तक फैले हैं।
जैवमंडल रिजर्व का विचार
जैवमंडल रिजर्व वह क्षेत्र है, जिसे राष्ट्रीय सरकार जैव विविधता के संरक्षण और सतत विकास, दोनों के लिए चिह्नित करती है। यूनेस्को का मानव एवं जैवमंडल (एमएबी) कार्यक्रम, जो 1971 में शुरू हुआ, इन क्षेत्रों को जीवित प्रयोगशाला मानता है, जहां सतत विकास की पद्धतियां परखी जाती हैं। राष्ट्रीय उद्यान या वन्यजीव अभयारण्य वन्यजीव कानून के तहत वन्यजीव और पर्यावास की रक्षा करते हैं, जबकि जैवमंडल रिजर्व संरक्षित पारिस्थितिकी को आसपास के समुदायों से जोड़ता है। इसके तीन कार्य हैं: संरक्षण, सतत आर्थिक विकास और वैज्ञानिक सहयोग।
तीन क्षेत्र
प्रत्येक रिजर्व कोर क्षेत्र में बंटा होता है, जहां सुरक्षा सबसे कड़ी है और मानवीय गतिविधि केवल अनुकूल शोध व निगरानी तक सीमित रहती है; बफर क्षेत्र, जहां पर्यावरण शिक्षा, शोध और नियंत्रित पारिस्थितिक पर्यटन की अनुमति है; तथा संक्रमण क्षेत्र, जहां बस्तियां, जिम्मेदार खेती, सतत वानिकी और पारिस्थितिक पर्यटन चलते रहते हैं। दुनिया भर में रिजर्व में औसतन 18 प्रतिशत कोर, 30 प्रतिशत बफर और 52 प्रतिशत संक्रमण क्षेत्र होता है।
भारत और विश्व नेटवर्क
- यूनेस्को के नेटवर्क में 145 देशों के 797 जैवमंडल रिजर्व हैं, जिनके भीतर रहने वाले करीब 300 मिलियन लोगों को इनका सीधा लाभ मिलता है
- ये स्थल पृथ्वी की भूमि सतह के लगभग 5 प्रतिशत हिस्से में हैं, पर दुनिया की थलीय रीढ़धारी प्रजाति समृद्धि का 60 प्रतिशत से अधिक इनमें है
- भारत दुनिया के 17 महा-जैवविविध देशों में है, जहां पृथ्वी की भूमि के केवल 2.4 प्रतिशत हिस्से पर दर्ज प्रजातियों का लगभग 7 से 8 प्रतिशत मौजूद है
- पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय का जैवमंडल रिजर्व प्रभाग जैव विविधता संरक्षण योजना चलाता है, जो प्राकृतिक संसाधन एवं पारिस्थितिकी संरक्षण की उप-योजना है, और राज्यों को 60:40 के अनुपात में सहायता अनुदान देता है
भारत के कुछ रिजर्व
- तमिलनाडु, केरल और कर्नाटक में फैला नीलगिरि भारत का सबसे पुराना रिजर्व है
- उत्तराखंड का नंदा देवी और सिक्किम का कंचनजंगा हिमालयी क्षेत्र में हैं
- पश्चिम बंगाल का सुंदरबन तथा तमिलनाडु का मन्नार की खाड़ी तटीय और समुद्री पर्यावास समेटते हैं
- मध्य प्रदेश के पचमढ़ी और पन्ना, ओडिशा का सिमलीपाल तथा आंध्र प्रदेश का शेषाचलम प्रायद्वीपीय पट्टी में हैं
- हिमाचल प्रदेश का कोल्ड डेजर्ट यूनेस्को के विश्व नेटवर्क में भारत का सबसे नया प्रवेशी है और गुजरात का ग्रेट रण ऑफ कच्छ अधिसूचित रिजर्व में क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे बड़ा है
असम के मानस और डिब्रू-सैखोवा, अरुणाचल प्रदेश का देहांग-देबांग, अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह का ग्रेट निकोबार, केरल व तमिलनाडु में फैला अगस्त्यमलाई तथा मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में फैला अचानकमार-अमरकंटक इस सूची को पूरा करते हैं, जिससे साफ होता है कि यह नेटवर्क पहाड़, वन, रेगिस्तान और द्वीप पर्यावास तक कितना फैला हुआ है।
महत्वपूर्ण तथ्य
| दिवस | अंतरराष्ट्रीय जैवमंडल रिजर्व दिवस, 3 नवंबर |
|---|---|
| घोषणा | यूनेस्को |
| भारत के रिजर्व | 18 अधिसूचित, जिनमें 13 विश्व जैवमंडल रिजर्व नेटवर्क में |
| एमएबी कार्यक्रम | यूनेस्को का मानव एवं जैवमंडल कार्यक्रम, 1971 में शुरू |
| वैश्विक नेटवर्क | 145 देशों में 797 जैवमंडल रिजर्व, करीब 300 मिलियन निवासी |
| क्षेत्र | कोर, बफर और संक्रमण; वैश्विक औसत 18, 30 और 52 प्रतिशत |
| तीन कार्य | संरक्षण, सतत आर्थिक विकास और वैज्ञानिक सहयोग |
| भारत की हिस्सेदारी | 17 महा-जैवविविध देशों में एक, भूमि के 2.4 प्रतिशत हिस्से पर दर्ज प्रजातियों का लगभग 7 से 8 प्रतिशत |
| योजना | जैव विविधता संरक्षण, प्राकृतिक संसाधन एवं पारिस्थितिकी संरक्षण की उप-योजना, 60:40 के अनुपात में सहायता |
परीक्षा की दृष्टि से
3 नवंबर की तारीख और यूनेस्को की घोषणा, भारत के 18 अधिसूचित रिजर्व जिनमें 13 विश्व नेटवर्क में, 1971 का एमएबी कार्यक्रम, तीन क्षेत्र और उनके वैश्विक औसत 18, 30 व 52 प्रतिशत, नेटवर्क के 145 देशों में 797 रिजर्व तथा यह बात याद रखें कि नीलगिरि सबसे पुराना और कोल्ड डेजर्ट सबसे नया भारतीय प्रवेशी है।
अभ्यास प्रश्न
अंतरराष्ट्रीय जैवमंडल रिजर्व दिवस किस तारीख को मनाया जाता है?
- A.22 मई
- B.3 नवंबर
- C.5 जून
- D.11 नवंबर
उत्तर देखें
यह दिवस हर वर्ष इसी तारीख को मनाया जाता है और इसकी घोषणा यूनेस्को ने की थी, ताकि यह उजागर हो कि जैवमंडल रिजर्व जैव विविधता का संरक्षण करते हुए सतत विकास और भीतर रहने वाले लोगों की आजीविका को कैसे सहारा देते हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →भारत के अधिसूचित जैवमंडल रिजर्व में से कितने यूनेस्को के विश्व जैवमंडल रिजर्व नेटवर्क का हिस्सा हैं?
- A.11
- B.13
- C.18
- D.21
उत्तर देखें
पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अनुसार भारत में 18 अधिसूचित जैवमंडल रिजर्व हैं और इनमें से 13 यूनेस्को के विश्व जैवमंडल रिजर्व नेटवर्क में शामिल हैं, जिससे देश के पास दक्षिण एशिया में अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त रिजर्व की सबसे बड़ी संख्या है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →यूनेस्को का मानव एवं जैवमंडल कार्यक्रम किस वर्ष शुरू हुआ था?
- A.1971
- B.1986
- C.1992
- D.2000
उत्तर देखें
मानव एवं जैवमंडल कार्यक्रम उसी वर्ष शुरू हुआ, जिसका उद्देश्य मनुष्य और उसके पर्यावरण के संबंध सुधारने के वैज्ञानिक तरीकों को बढ़ावा देना था, और जैवमंडल रिजर्व इसी ढांचे के तहत सतत विकास की पद्धतियां परखने वाली जीवित प्रयोगशाला के रूप में काम करते हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
अंतरराष्ट्रीय जैवमंडल रिजर्व दिवस कब मनाया जाता है?
हर वर्ष 3 नवंबर को। इस दिवस की घोषणा यूनेस्को ने की थी, ताकि जैव विविधता संरक्षण और सतत विकास में जैवमंडल रिजर्व के योगदान पर ध्यान जाए।
भारत में कितने जैवमंडल रिजर्व हैं?
भारत में 18 अधिसूचित जैवमंडल रिजर्व हैं, जिनमें से 13 यूनेस्को के विश्व जैवमंडल रिजर्व नेटवर्क का हिस्सा हैं। यह दक्षिण एशिया में अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त रिजर्व की सबसे बड़ी संख्या है।
जैवमंडल रिजर्व के तीन क्षेत्र कौन-से हैं?
सबसे कड़ी सुरक्षा वाला कोर क्षेत्र, शिक्षा, शोध और नियंत्रित पारिस्थितिक पर्यटन की अनुमति देने वाला बफर क्षेत्र तथा बस्तियों व सतत आजीविका वाला संक्रमण क्षेत्र। वैश्विक औसत क्रमशः 18, 30 और 52 प्रतिशत है।
स्रोत
- https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2331747 (नए टैब में खुलेगा) — Press Information Bureau
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