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आईपीआरडी 2026 में रक्षा मंत्री ने समुद्री लचीलापन बढ़ाने पर जोर दिया

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने नई दिल्ली में भारतीय नौसेना के हिंद-प्रशांत क्षेत्रीय संवाद 2026 में स्मारक संबोधन देते हुए आपूर्ति शृंखला विविधीकरण पर बल दिया।

लेखक प्रकाशित · 2 मिनट
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आईपीआरडी 2026 में रक्षा मंत्री ने समुद्री लचीलापन बढ़ाने पर जोर दिया

चर्चा में क्यों

4 नवंबर 2026 को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने नई दिल्ली में भारतीय नौसेना और राष्ट्रीय समुद्री प्रतिष्ठान द्वारा आयोजित हिंद-प्रशांत क्षेत्रीय संवाद 2026 में स्मारक संबोधन दिया।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 4 नवंबर 2026 को नई दिल्ली में हिंद-प्रशांत क्षेत्रीय संवाद (आईपीआरडी) 2026 में स्मारक संबोधन दिया। आईपीआरडी भारतीय नौसेना का वार्षिक शीर्ष स्तरीय अंतरराष्ट्रीय सामरिक सम्मेलन है, जिसे इस बार राष्ट्रीय समुद्री प्रतिष्ठान (एनएमएफ) के साथ मिलकर आयोजित किया जा रहा है। तीन दिवसीय यह सम्मेलन 3 नवंबर 2026 को आरंभ हुआ था।

रक्षा मंत्री ने क्या कहा

उनका मुख्य तर्क यह था कि समुद्री सुरक्षा का वातावरण तनावपूर्ण होने पर वैश्वीकरण से पीछे हटना समाधान नहीं है। समाधान यह है कि राष्ट्रों की एक-दूसरे पर निर्भरता को अधिक सुरक्षित और टिकाऊ बनाया जाए। इसके लिए उन्होंने चार उपाय गिनाए: आपूर्ति शृंखलाओं का विविधीकरण, भरोसेमंद समुद्री ढांचा, समुद्र में हो रही गतिविधियों की बेहतर जानकारी तथा क्षेत्रीय साझेदारों के बीच व्यापक सहयोग, साथ ही व्यवधान का पूर्वानुमान लगाने, उसे सहने और उससे उबरने की क्षमता। उन्होंने महासागरों को राष्ट्रों और सभ्यताओं के बीच पुल बताया, न कि दीवार, और चेताया कि कुछ देश तथा पक्ष समुद्र के महत्व का संकीर्ण एकपक्षीय लाभ के लिए दुरुपयोग करना चाहते हैं। व्यापार में जानबूझकर बाधा, नौवहन की स्वतंत्रता को चुनौती और संकरे समुद्री मार्गों को हथियार बनाने की प्रवृत्ति इसके लक्षण बताए गए।

प्रौद्योगिकी और असमानता

रक्षा मंत्री ने कहा कि समुद्री खतरे अब केवल सैन्य नहीं हैं। समुद्री डकैती, तस्करी, अवैध मत्स्यन, साइबर हमले और प्राकृतिक आपदाएं भी गैर-परंपरागत चुनौतियों में शामिल हैं। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, स्वचालित प्रणालियां और नए संवेदक समुद्र की निगरानी का स्वरूप बदल रहे हैं, परंतु उन्होंने आगाह किया कि प्रौद्योगिकी राष्ट्रों के बीच असमानता का नया कारण नहीं बननी चाहिए, क्योंकि हिंद-प्रशांत में देशों की अनुसंधान और आर्थिक क्षमता बहुत असमान है। उनके शब्दों में सर्वाधिक उपयोगी प्रौद्योगिकी वह नहीं है जो सबसे महंगी हो, बल्कि वह है जो वास्तविक समस्या का समाधान करे।

भारत की समुद्री दृष्टि

संबोधन में समुद्र को 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य से जोड़ा गया। सागरमाला के अंतर्गत बंदरगाह आधारित विकास का उल्लेख हुआ और समुद्री अमृत काल विजन 2047 को राष्ट्रीय खाका बताया गया। खुली, समावेशी और नियम आधारित समुद्री व्यवस्था के प्रति भारत की प्रतिबद्धता महासागर दृष्टि के माध्यम से दोहराई गई, जिसका पूर्ण रूप है क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास के लिए पारस्परिक एवं समग्र उन्नति। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 2019 में घोषित हिंद-प्रशांत महासागर पहल को सात परस्पर जुड़े क्षेत्रों में सहयोग का व्यावहारिक ढांचा बताया गया।

अन्य वक्ता

नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन ने कहा कि समुद्री सहयोग उपकरण खरीदने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि साझेदार देशों में ऐसी क्षमता बनानी चाहिए जिसे वे स्वयं संचालित और उन्नत कर सकें। थलसेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ तथा वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल आशुतोष दीक्षित भी उपस्थित रहे। एक सत्र में पूर्व नौसेना प्रमुख एडमिरल आर के धोवन, एडमिरल सुनील लांबा, एडमिरल करमबीर सिंह और एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी के साथ श्रीलंका नौसेना के पूर्व कमांडर एडमिरल जयंत परेरा ने चर्चा की।

महत्वपूर्ण तथ्य

आयोजनहिंद-प्रशांत क्षेत्रीय संवाद (आईपीआरडी) 2026
आयोजकभारतीय नौसेना एवं राष्ट्रीय समुद्री प्रतिष्ठान (एनएमएफ)
स्थान और अवधिनई दिल्ली, तीन दिवसीय सम्मेलन, 3 नवंबर 2026 से
स्मारक संबोधनरक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, 4 नवंबर 2026
नौसेना प्रमुखएडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन
महासागरक्षेत्रों में सुरक्षा और विकास के लिए पारस्परिक एवं समग्र उन्नति
हिंद-प्रशांत महासागर पहलप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 2019 में घोषित, सात जुड़े क्षेत्र
समुद्री खाकासमुद्री अमृत काल विजन 2047, सागरमाला के अंतर्गत बंदरगाह आधारित विकास

परीक्षा की दृष्टि से

याद रखें कि आईपीआरडी भारतीय नौसेना का वार्षिक शीर्ष स्तरीय सामरिक सम्मेलन है जो राष्ट्रीय समुद्री प्रतिष्ठान के साथ होता है, 2026 संस्करण 3 नवंबर को नई दिल्ली में शुरू हुआ, महासागर का पूर्ण रूप, हिंद-प्रशांत महासागर पहल की घोषणा का वर्ष, समुद्री अमृत काल विजन 2047 तथा उपस्थित तीनों सेना प्रमुखों के नाम।

अभ्यास प्रश्न

Q1.रक्षाआसान

नई दिल्ली में हिंद-प्रशांत क्षेत्रीय संवाद 2026 में स्मारक संबोधन किसने दिया?

  1. A.नौसेना प्रमुख
  2. B.रक्षा मंत्री
  3. C.थलसेना प्रमुख
  4. D.पृथ्वी विज्ञान मंत्री
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. रक्षा मंत्री

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने नई दिल्ली में इस संवाद का स्मारक संबोधन दिया और कहा कि समुद्र में राष्ट्रों की पारस्परिक निर्भरता को छोड़ने की जगह उसे अधिक सुरक्षित बनाना चाहिए।

Q2.रक्षामध्यम

संबोधन में उल्लिखित महासागर दृष्टि का पूर्ण रूप क्या है?

  1. A.एशियाई क्षेत्रों की वृद्धि के लिए समुद्री विरासत एवं सुरक्षा समझौता
  2. B.क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास के लिए पारस्परिक एवं समग्र उन्नति
  3. C.निकटवर्ती क्षेत्रों की वृद्धि एवं पत्तन सुरक्षा के लिए समुद्री गठबंधन
  4. D.क्षेत्रों में उन्नत पत्तन एवं सागरमाला वृद्धि मिशन
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास के लिए पारस्परिक एवं समग्र उन्नति

रक्षा मंत्री ने इस दृष्टि का उल्लेख करते हुए दोहराया कि भारत खुली, समावेशी और नियम आधारित समुद्री व्यवस्था चाहता है और यह भी कहा कि हिंद-प्रशांत का समुद्री भविष्य कोई एक देश अकेले तय नहीं कर सकता।

Q3.रक्षामध्यम

संबोधन में समुद्री सहयोग का व्यावहारिक ढांचा बताई गई हिंद-प्रशांत महासागर पहल प्रधानमंत्री ने किस वर्ष घोषित की थी?

  1. A.2015
  2. B.2017
  3. C.2019
  4. D.2021
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 2019

रक्षा मंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उसी वर्ष घोषित हिंद-प्रशांत महासागर पहल समुद्री सहयोग को सात परस्पर जुड़े क्षेत्रों में आगे बढ़ाने का व्यावहारिक ढांचा है, और उन्होंने प्रतिभागियों से आग्रह किया कि संवाद में उठे विचार साझेदारी, परियोजनाओं और मापने योग्य परिणामों में बदलें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हिंद-प्रशांत क्षेत्रीय संवाद क्या है?

यह भारतीय नौसेना का वार्षिक शीर्ष स्तरीय अंतरराष्ट्रीय सामरिक सम्मेलन है, जो राष्ट्रीय समुद्री प्रतिष्ठान के साथ आयोजित होता है। 2026 संस्करण नई दिल्ली में तीन दिवसीय है और 3 नवंबर 2026 को आरंभ हुआ।

महासागर दृष्टि का पूर्ण रूप क्या है?

क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास के लिए पारस्परिक एवं समग्र उन्नति। रक्षा मंत्री ने खुली, समावेशी और नियम आधारित समुद्री व्यवस्था के प्रति भारत की प्रतिबद्धता दोहराते हुए इसका उल्लेख किया।

रक्षा मंत्री ने कौन से गैर-परंपरागत समुद्री खतरे गिनाए?

समुद्री डकैती, तस्करी, अवैध मत्स्यन, साइबर हमले और प्राकृतिक आपदाएं, जो परंपरागत सैन्य गतिविधियों से अलग चुनौतियां हैं।

स्रोत

करेंट अफेयर्स 4 नवंबर 2026

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