निम्नलिखित में से किसने अष्टांगिक मार्ग के दर्शन का प्रतिपादन किया?
- A.शंकराचार्य
- B.महावीर स्वामी
- C.रामानुज
- D.गौतम बुद्ध
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. गौतम बुद्ध
व्याख्या
सही उत्तर D, गौतम बुद्ध है। अष्टांगिक मार्ग बुद्ध द्वारा सारनाथ में दिए पहले उपदेश के चार आर्य सत्यों में चौथा है, और यह भोग तथा कठोर तप के बीच का मध्यम मार्ग बताता है, सम्यक दृष्टि, सम्यक संकल्प, सम्यक वाणी, सम्यक कर्म, सम्यक आजीविका, सम्यक प्रयत्न, सम्यक स्मृति और सम्यक समाधि। विकल्प A, शंकराचार्य, ने अद्वैत वेदांत का उपदेश दिया, जिसमें मोक्ष इस ज्ञान से मिलता है कि केवल ब्रह्म सत्य है, उन्होंने कोई अष्टांगिक मार्ग नहीं बताया। विकल्प B, महावीर स्वामी, ने सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान और सम्यक चरित्र के त्रिरत्न तथा पांच महाव्रत बताए, इसलिए उनकी योजना त्रिविध और पंचविध है, अष्टविध नहीं। विकल्प C, रामानुज, ने विशिष्टाद्वैत तथा भक्ति अर्थात प्रपत्ति का मार्ग बताया। अभ्यर्थी इस मार्ग को पतंजलि के अष्टांग योग से भी भ्रमित करते हैं, जो यम से समाधि तक है और भिन्न परंपरा का है।