यदि सरल लोलक की लंबाई चार गुनी कर दी जाए, तो उसका आवर्तकाल हो जाएगा
- A.चार गुना
- B.दो गुना
- C.आधा
- D.एक चौथाई
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर B, दो गुना है। आवर्तकाल लंबाई के वर्गमूल के अनुक्रमानुपाती होता है, अत: लंबाई चार गुनी करने पर आवर्तकाल √4 = 2 गुना हो जाता है; किसी लोलक का आवर्तकाल दोगुना करने के लिए उसकी लंबाई चार गुनी करनी पड़ती है। विकल्प A गलत है, क्योंकि आवर्तकाल चार गुना तभी होता, जब वह लंबाई के सीधे अनुक्रमानुपाती होता, जो वह नहीं है। विकल्प C गलत है, क्योंकि लंबाई एक चौथाई करने पर आवर्तकाल आधा होता है, जो प्रश्न के विपरीत है। विकल्प D भी इसी कारण गलत है, और इसलिए भी कि लंबा लोलक कभी तेज दोलन नहीं कर सकता। यही वर्गमूल नियम बताता है कि चंद्रमा पर, जहां g लगभग छठा भाग है, आवर्तकाल लगभग 2.45 गुना हो जाता है। इसी कारण लंबाई नौ गुनी करने पर आवर्तकाल तीन गुना हो जाता है।
पूरा लेख पढ़ें: दोलन: सरल आवर्त गति और सरल लोलक के नोट्स
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंयदि कोई कण सरल आवर्त गति कर रहा है, तो माध्य स्थिति पर उसका वेग _________ होता है।
- A.अधिकतम
- B.शून्य
- C.न्यूनतम
- D.इनमें से कोई नहीं
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सरल आवर्त गति में वेग ω√(A² - x²) होता है। माध्य स्थिति पर विस्थापन x शून्य होता है, अत: वेग अपने अधिकतम मान Aω पर पहुंच जाता है; इसी कारण गतिज ऊर्जा भी वहीं सर्वाधिक होती है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →एक बच्चा झूले पर बैठा है। भूमि से उसकी न्यूनतम और अधिकतम ऊंचाई क्रमश: 0.75 मीटर तथा 2 मीटर है। उसकी अधिकतम चाल होगी
- A.10 मी/से
- B.5 मी/से
- C.8 मी/से
- D.15 मी/से
उत्तर देखें
झूला एक लोलक की तरह है और उसकी चाल निम्नतम बिंदु पर सर्वाधिक होती है, जहां ऊपर प्राप्त सारी स्थितिज ऊर्जा गतिज ऊर्जा में बदल जाती है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →सरल लोलक का आवर्तकाल निम्नलिखित में से किस पर निर्भर नहीं करता?
- A.लोलक की लंबाई
- B.गोलक का द्रव्यमान
- C.गुरुत्वीय त्वरण
- D.इन सभी पर
उत्तर देखें
सरल लोलक का आवर्तकाल T = 2π√(l/g) होता है, जिसमें गोलक का द्रव्यमान कहीं नहीं आता; समान लंबाई के भारी और हल्के गोलक एक ही समय देते हैं, और यही द्रव्यमान का नियम है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →जहां गुरुत्वीय त्वरण 9.8 मीटर प्रति वर्ग सेकंड है, वहां सेकंड लोलक की लंबाई लगभग कितनी होती है?
- A.1 मीटर
- B.2 मीटर
- C.0.5 मीटर
- D.9.8 मीटर
उत्तर देखें
सेकंड लोलक वह है, जिसका आवर्तकाल ठीक दो सेकंड हो, अर्थात एक ओर से दूसरी ओर का प्रत्येक झूला एक सेकंड लेता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →यदि लोलक घड़ी को पृथ्वी से चंद्रमा पर ले जाया जाए, जहां गुरुत्वीय त्वरण लगभग छठा भाग है, तो उसका आवर्तकाल
- A.घटेगा
- B.बढ़ेगा
- C.अपरिवर्तित रहेगा
- D.शून्य हो जाएगा
उत्तर देखें
आवर्तकाल g के वर्गमूल के व्युत्क्रमानुपाती होता है, अत: g घटकर छठा भाग रह जाने पर आवर्तकाल √6, लगभग 2.45 गुना हो जाता है; लोलक धीमे दोलन करता है और चंद्रमा पर ले जाई गई लोलक घड़ी बहुत सुस्त चलेगी।
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