वंश भास्कर तथा वीर सतसई की रचना बूंदी दरबार के किस कवि ने की?
- A.दलपत विजय
- B.सूर्यमल्ल मिश्रण
- C.कविराजा बांकीदास
- D.केसोदास गाडण
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर है B, सूर्यमल्ल मिश्रण। वे उन्नीसवीं शताब्दी में बूंदी दरबार में थे और उन्होंने वंश भास्कर लिखा, जो हाड़ा शासकों का पद्य में विस्तृत इतिहास है, तथा वीर सतसई लिखी, जिसके सात सौ छंद वीर भावना से भरे हैं और 1857 के विद्रोह के काल में बहुत सुनाए गए। विकल्प A गलत है, क्योंकि दलपत विजय मेवाड़ राजवंश पर खुम्मान रासो से जुड़े हैं। विकल्प C गलत है, क्योंकि कविराजा बांकीदास जोधपुर दरबार के कवि थे, जिनकी बांकीदास री ख्यात राजस्थानी इतिहास की टिप्पणियों का पृथक संग्रह है। विकल्प D गलत है, क्योंकि केसोदास गाडण पूर्ववर्ती चारण परंपरा के हैं। इतिहास ग्रंथों के प्रश्नों के लिए बूंदी के साथ सूर्यमल्ल, मारवाड़ के साथ नैणसी और बीकानेर के साथ दयालदास जोड़िए। वीर सतसई के छंद 1857 के विद्रोह के काल में बहुत लोकप्रिय हुए और उन्हें राजस्थानी वीर काव्य की अंतिम बड़ी कड़ी माना जाता है।
पूरा लेख पढ़ें: राजस्थानी भाषा, बोलियां और साहित्य: परीक्षा नोट्स
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंभारतीय भाषा सर्वेक्षण में इस क्षेत्र की भाषा के लिए राजस्थानी नाम को प्रचलन किसने दिया?
- A.जॉर्ज अब्राहम ग्रियर्सन
- B.जेम्स टॉड
- C.गौरीशंकर हीराचंद ओझा
- D.सुनीति कुमार चटर्जी
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उन्होंने अपने भारतीय भाषा सर्वेक्षण में 1912 में इस क्षेत्र की बोलियों के समूह के लिए राजस्थानी नाम प्रयोग किया और उसकी बोलियों का वर्गीकरण किया, जिससे मरुभाषा तथा मरु गुर्जर जैसे पुराने नाम पीछे छूट गए।
पूरी व्याख्या पढ़ें →राजस्थानी की वागड़ी बोली मुख्यतः किन जिलों में बोली जाती है?
- A.सीकर और झुंझुनूं
- B.डूंगरपुर और बांसवाड़ा
- C.अलवर और भरतपुर
- D.कोटा और बूंदी
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राजस्थान के सुदूर दक्षिण में इन दोनों जिलों से बने क्षेत्र को वागड़ कहा जाता है और वहां की भील जनसंख्या वागड़ी बोलती है, जिसमें सीमावर्ती स्थिति के कारण राजस्थानी तथा गुजराती, दोनों के लक्षण मिलते हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →हाड़ौती, जिसे हरौती भी कहा जाता है, किन जिलों की बोली है?
- A.जैसलमेर और बाड़मेर
- B.कोटा, बूंदी, बारां और झालावाड़
- C.उदयपुर, भीलवाड़ा और चित्तौड़गढ़
- D.श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़
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दक्षिण पूर्व के ये चार जिले हाड़ा चौहानों का क्षेत्र थे, जिससे इस अंचल को हाड़ौती और बोली को हाड़ौती अथवा हरौती नाम मिला।
पूरी व्याख्या पढ़ें →राजस्थानी की सर्वाधिक बोली जाने वाली बोली कौन सी है?
- A.मेवाड़ी
- B.ढूंढाड़ी
- C.मारवाड़ी
- D.मेवाती
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यह जोधपुर, पाली, नागौर, बाड़मेर तथा जालोर की, अर्थात राज्य के सबसे बड़े क्षेत्र की बोली है और चारण कवियों का डिंगल काव्य इसी में रचा गया; मारवाड़ के व्यापारी समुदाय इसे देश भर में साथ ले गए।
पूरी व्याख्या पढ़ें →राजस्थानी काव्य की डिंगल शैली किस कवि वर्ग से जुड़ी है?
- A.पूर्वी राजस्थान के भाट कवि
- B.पश्चिमी राजस्थान के चारण कवि
- C.जालोर के जैन विद्वान
- D.मेवाड़ के दरबारी चित्रकार
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डिंगल मारवाड़ी पर आधारित साहित्यिक शैली है और चारणों ने इसका प्रयोग युद्ध, आन तथा आत्मबलिदान के वीर काव्य के लिए किया, जो ऊंचे गूंजते छंद में गाया जाता है; पृथ्वीराज राठौड़ की वेलि क्रिसन रुकमणी री इसका प्रसिद्ध उदाहरण है।
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