त्रिसमुद्रतोयपीतवाहन, यानी जिसके घोड़ों ने तीन समुद्रों का जल पिया, यह उपाधि किस शासक की है?
- A.खारवेल
- B.गौतमीपुत्र सातकर्णि
- C.रुद्रदामन प्रथम
- D.कनिष्क
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर B, गौतमीपुत्र सातकर्णि है। उसकी माता गौतमी बलश्री के नासिक गुहा अभिलेख में इस सातवाहन शासक को त्रिसमुद्रतोयपीतवाहन और एकब्राह्मण कहा गया है, तथा शक, यवन और पह्लवों के नाश का श्रेय दिया गया है। विकल्प A गलत है क्योंकि कलिंग के खारवेल की जानकारी हाथीगुंफा अभिलेख से मिलती है, जिसमें उसे भिखुराज कहा गया है और जैन धर्म के संरक्षण का उल्लेख है। विकल्प C गलत है क्योंकि पश्चिमी भारत का शक शासक रुद्रदामन प्रथम जूनागढ़ शिलालेख के लिए प्रसिद्ध है, जो संस्कृत का पहला बड़ा राजकीय अभिलेख है। विकल्प D गलत है क्योंकि कुषाण शासक कनिष्क ने अपने सिक्कों पर देवपुत्र और शाओनानोशाओ उपाधियां अंकित कराईं, जो चीनी और ईरानी परंपरा से ली गई थीं। सातवाहनों की राजधानी प्रतिष्ठान यानी आज का पैठण थी, और इसी शासक को शक शासक नहपान की पराजय का श्रेय दिया जाता है, जिसके सिक्कों पर उसने पुनः छाप लगवाई।
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अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंमौर्य सम्राट अशोक को उसके अपने अभिलेखों में किन उपाधियों से संबोधित किया गया है?
- A.महाराजाधिराज और परमेश्वर
- B.देवानांप्रिय और प्रियदस्सी
- C.अमित्रघात और एकब्राह्मण
- D.शिलादित्य और सत्याश्रय
उत्तर देखें
अशोक के अभिलेख उसके व्यक्तिगत नाम का प्रयोग प्रायः नहीं करते; उनमें देवानांप्रिय प्रियदस्सी कहा गया है, जिसका अर्थ देवताओं का प्रिय और सुदर्शन है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →किस गुप्त शासक को सर्वराजोच्छेत्ता, यानी समस्त राजाओं का उच्छेदक कहा गया है?
- A.चंद्रगुप्त प्रथम
- B.समुद्रगुप्त
- C.चंद्रगुप्त द्वितीय
- D.स्कंदगुप्त
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उसके दरबारी कवि हरिषेण द्वारा रचित प्रयाग प्रशस्ति में गंगा घाटी, दक्षिणापथ और सीमावर्ती राज्यों के उसके अभियानों की सूची है और उसे सर्वराजोच्छेत्ता कहा गया है; उसी अभिलेख में विद्वत्ता के कारण उसे कविराज कहा गया और उसके सिक्कों पर वह वीणा बजाता दिखाया गया है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →शक क्षत्रपों को पराजित करने के बाद किस गुप्त शासक ने विक्रमादित्य उपाधि धारण की?
- A.समुद्रगुप्त
- B.कुमारगुप्त प्रथम
- C.चंद्रगुप्त द्वितीय
- D.चंद्रगुप्त प्रथम
उत्तर देखें
उसने गुजरात और मालवा में शक क्षत्रपों के प्रदेश जीते, जिससे गुप्तों को पश्चिमी बंदरगाह मिले, और उसने विक्रमादित्य, सिंहविक्रम तथा देवश्री उपाधियां धारण कीं; उसी के शासनकाल में चीनी यात्री फाह्यान भारत आया।
पूरी व्याख्या पढ़ें →दिल्ली का कौन सा सुल्तान लाख बख्श, यानी लाखों का दान करने वाला, कहलाता था?
- A.कुतुबुद्दीन ऐबक
- B.इल्तुतमिश
- C.बलबन
- D.फिरोजशाह तुगलक
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गुलाम या ममलूक वंश के इस संस्थापक को उसके उदार दान के कारण लाख बख्श कहा गया, और उसने दिल्ली में कुतुबमीनार तथा अजमेर में अढ़ाई दिन का झोंपड़ा बनवाना आरंभ किया।
पूरी व्याख्या पढ़ें →दिल्ली सल्तनत के किस शासक ने जिल्ले इलाही, यानी ईश्वर की छाया, उपाधि धारण की?
- A.अलाउद्दीन खिलजी
- B.बलबन
- C.मुहम्मद बिन तुगलक
- D.रजिया
उत्तर देखें
1266 से 1287 तक गुटबंदी से कमजोर सल्तनत पर शासन करते हुए उसने जिल्ले इलाही और नियाबते खुदाई यानी ईश्वर का प्रतिनिधि जैसे दावे किए, और दरबारियों से सिजदा यानी भूमि पर झुककर प्रणाम तथा पायबोस यानी चरण चूमने की प्रथा कराई, जिससे गद्दी सरदारों से ऊपर दिखे।
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