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GK24
भारतीय इतिहासमध्यम

शक क्षत्रपों को पराजित करने के बाद किस गुप्त शासक ने विक्रमादित्य उपाधि धारण की?

  1. A.समुद्रगुप्त
  2. B.कुमारगुप्त प्रथम
  3. C.चंद्रगुप्त द्वितीय
  4. D.चंद्रगुप्त प्रथम

सही उत्तर

C. चंद्रगुप्त द्वितीय

व्याख्या

सही उत्तर C, चंद्रगुप्त द्वितीय है। उसने गुजरात और मालवा में शक क्षत्रपों के प्रदेश जीते, जिससे गुप्तों को पश्चिमी बंदरगाह मिले, और उसने विक्रमादित्य, सिंहविक्रम तथा देवश्री उपाधियां धारण कीं; उसी के शासनकाल में चीनी यात्री फाह्यान भारत आया। विकल्प A गलत है क्योंकि समुद्रगुप्त ने कविराज और सर्वराजोच्छेत्ता उपाधियां लीं। विकल्प B गलत है क्योंकि कुमारगुप्त प्रथम ने महेंद्रादित्य उपाधि ली और परंपरा उसे नालंदा महाविहार की स्थापना का श्रेय देती है। विकल्प D गलत है क्योंकि साम्राज्यीय वंश के संस्थापक चंद्रगुप्त प्रथम महाराजाधिराज उपाधि के लिए याद किए जाते हैं; ध्यान रखें कि बाद में स्कंदगुप्त ने भी विक्रमादित्य उपाधि ली, इसलिए प्रश्न में दिया संदर्भ ही उत्तर तय करता है। महरौली का लौह स्तंभ, जिसमें चंद्र नामक राजा का उल्लेख है, सामान्यतः उसी से जोड़ा जाता है, और परंपरा कालिदास को उसके नवरत्नों में गिनती है।

पूरा लेख पढ़ें: प्राचीन और मध्यकालीन भारतीय शासकों की उपाधियां

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Q1.भारतीय इतिहासआसान

मौर्य सम्राट अशोक को उसके अपने अभिलेखों में किन उपाधियों से संबोधित किया गया है?

  1. A.महाराजाधिराज और परमेश्वर
  2. B.देवानांप्रिय और प्रियदस्सी
  3. C.अमित्रघात और एकब्राह्मण
  4. D.शिलादित्य और सत्याश्रय
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. देवानांप्रिय और प्रियदस्सी

अशोक के अभिलेख उसके व्यक्तिगत नाम का प्रयोग प्रायः नहीं करते; उनमें देवानांप्रिय प्रियदस्सी कहा गया है, जिसका अर्थ देवताओं का प्रिय और सुदर्शन है।

Q2.भारतीय इतिहासआसान

किस गुप्त शासक को सर्वराजोच्छेत्ता, यानी समस्त राजाओं का उच्छेदक कहा गया है?

  1. A.चंद्रगुप्त प्रथम
  2. B.समुद्रगुप्त
  3. C.चंद्रगुप्त द्वितीय
  4. D.स्कंदगुप्त
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. समुद्रगुप्त

उसके दरबारी कवि हरिषेण द्वारा रचित प्रयाग प्रशस्ति में गंगा घाटी, दक्षिणापथ और सीमावर्ती राज्यों के उसके अभियानों की सूची है और उसे सर्वराजोच्छेत्ता कहा गया है; उसी अभिलेख में विद्वत्ता के कारण उसे कविराज कहा गया और उसके सिक्कों पर वह वीणा बजाता दिखाया गया है।

Q3.भारतीय इतिहासमध्यम

त्रिसमुद्रतोयपीतवाहन, यानी जिसके घोड़ों ने तीन समुद्रों का जल पिया, यह उपाधि किस शासक की है?

  1. A.खारवेल
  2. B.गौतमीपुत्र सातकर्णि
  3. C.रुद्रदामन प्रथम
  4. D.कनिष्क
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. गौतमीपुत्र सातकर्णि

उसकी माता गौतमी बलश्री के नासिक गुहा अभिलेख में इस सातवाहन शासक को त्रिसमुद्रतोयपीतवाहन और एकब्राह्मण कहा गया है, तथा शक, यवन और पह्लवों के नाश का श्रेय दिया गया है।

Q4.भारतीय इतिहासआसान

दिल्ली का कौन सा सुल्तान लाख बख्श, यानी लाखों का दान करने वाला, कहलाता था?

  1. A.कुतुबुद्दीन ऐबक
  2. B.इल्तुतमिश
  3. C.बलबन
  4. D.फिरोजशाह तुगलक
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. कुतुबुद्दीन ऐबक

गुलाम या ममलूक वंश के इस संस्थापक को उसके उदार दान के कारण लाख बख्श कहा गया, और उसने दिल्ली में कुतुबमीनार तथा अजमेर में अढ़ाई दिन का झोंपड़ा बनवाना आरंभ किया।

Q5.भारतीय इतिहासमध्यम

दिल्ली सल्तनत के किस शासक ने जिल्ले इलाही, यानी ईश्वर की छाया, उपाधि धारण की?

  1. A.अलाउद्दीन खिलजी
  2. B.बलबन
  3. C.मुहम्मद बिन तुगलक
  4. D.रजिया
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. बलबन

1266 से 1287 तक गुटबंदी से कमजोर सल्तनत पर शासन करते हुए उसने जिल्ले इलाही और नियाबते खुदाई यानी ईश्वर का प्रतिनिधि जैसे दावे किए, और दरबारियों से सिजदा यानी भूमि पर झुककर प्रणाम तथा पायबोस यानी चरण चूमने की प्रथा कराई, जिससे गद्दी सरदारों से ऊपर दिखे।