त्रावणकोर राज्य के मार्तंड वर्मा ने डचों को किस युद्ध में पराजित किया था?
- A.वांडिवाश
- B.राक्षसी-तंगड़ी
- C.पुल्ललूर
- D.कोलाचेल
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर है D, कोलाचेल। 1741 के कोलाचेल युद्ध में त्रावणकोर के मार्तंड वर्मा की सेना ने डच ईस्ट इंडिया कंपनी को हराया।
डच मालाबार तट के काली मिर्च व्यापार पर नियंत्रण चाहते थे और त्रावणकोर के विरुद्ध प्रतिद्वंद्वी शासकों का साथ दे रहे थे। उनकी सेना वर्तमान तमिलनाडु के कन्याकुमारी जिले के तट पर कोलाचेल में उतरी और अगस्त 1741 में पराजित हुई। डच सेनापति यूस्टेकियस डी लैनॉय पकड़ा गया, बाद में त्रावणकोर की सेवा में आया और उसने वहां की सेना को यूरोपीय ढंग से प्रशिक्षित किया। इस युद्ध को प्रायः किसी भारतीय राज्य द्वारा यूरोपीय नौसैनिक शक्ति की पहली पराजय कहा जाता है, और इससे केरल में डच महत्वाकांक्षाएं समाप्त हो गईं।
A गलत है, क्योंकि 1760 का वांडिवाश युद्ध अंग्रेज़ों और फ्रांसीसियों के बीच हुआ। B गलत है, क्योंकि 1565 का राक्षसी-तंगड़ी या तालीकोटा युद्ध दक्कन सल्तनतों द्वारा विजयनगर की पराजय था। C गलत है, क्योंकि सातवीं सदी के आरंभ का पुल्ललूर युद्ध पल्लव राजा महेंद्रवर्मन प्रथम और चालुक्य राजा पुलकेशिन द्वितीय के बीच हुआ।
परीक्षा टिप: कोलाचेल 1741: मार्तंड वर्मा ने डचों को हराया; वांडिवाश 1760: अंग्रेज़ों ने फ्रांसीसियों को हराया।
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंकथन I: अंग्रेज़ों ने भारत पर भारतीय सिविल सेवा के नेतृत्व वाली एक आधुनिक नौकरशाही के माध्यम से शासन किया, जिसके सदस्यों की भर्ती खुली प्रतियोगिता पर आधारित योग्यता से होती थी कथन II: भारतीय सिविल सेवा भारतीयों की पूरे मन से भागीदारी पर आधारित थी
- A.दोनों कथन अलग-अलग सत्य हैं और कथन II, कथन I की सही व्याख्या है
- B.दोनों कथन अलग-अलग सत्य हैं, परंतु कथन II, कथन I की सही व्याख्या नहीं है
- C.कथन I सत्य है, परंतु कथन II असत्य है
- D.कथन I असत्य है, परंतु कथन II सत्य है
उत्तर देखें
भारतीय सिविल सेवा एक आधुनिक, योग्यता-आधारित नौकरशाही थी, जिसमें 1853 से खुली प्रतियोगी परीक्षाओं से भर्ती होती थी, पर व्यवहार में भारतीय दशकों तक इससे बाहर रखे गए।
पूरी व्याख्या पढ़ें →सोलहवीं शताब्दी के ग्रंथ चंडीमंगल की रचना किसने की थी?
- A.हेम सरस्वती
- B.माधव कंदली
- C.तुकाराम
- D.मुकुंदराम चक्रवर्ती
उत्तर देखें
'कविकंकण' उपाधि से सम्मानित बांग्ला कवि मुकुंदराम चक्रवर्ती ने सोलहवीं शताब्दी में चंडीमंगल की रचना की। मंगलकाव्य किसी देवता की स्तुति में लिखी गई लंबी बांग्ला कथा-कविताएँ हैं, और चंडीमंगल देवी चंडी का गुणगान करता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →महात्मा गांधी के दांडी मार्च से प्रेरित होकर तमिलनाडु में सी. राजगोपालाचारी ने नमक यात्रा कहाँ से कहाँ तक निकाली?
- A.तिरुनेलवेली से नागरकोइल
- B.कांचीपुरम से महाबलीपुरम
- C.त्रिचिनापल्ली से तंजौर तट पर वेदारण्यम
- D.चेन्नई से वेल्लोर
उत्तर देखें
अप्रैल 1930 में सी. राजगोपालाचारी स्वयंसेवकों के एक दल को तिरुचिरापल्ली, जिसे तब त्रिचिनापल्ली कहा जाता था, से तंजौर तट पर वेदारण्यम ले गए, जहाँ उन्होंने नमक कानून तोड़ा।
पूरी व्याख्या पढ़ें →निम्नलिखित में से किस विदेशी यात्री ने भारत के हीरों और हीरे की खानों के बारे में विस्तार से चर्चा की है?
- A.फ्रांस्वा बर्नियर
- B.जीन-बैप्टिस्ट टैवर्नियर
- C.जीन डी थेवेनो
- D.अब्बे बार्थेलेमी कैरे
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वे फ्रांसीसी रत्न व्यापारी थे और उनके यात्रा वृत्तांत में भारत के हीरों और खानों का विस्तृत वर्णन है। टैवर्नियर ने लगभग 1630 से 1668 के बीच पूर्व की छह यात्राएँ कीं और शाहजहाँ व औरंगज़ेब के शासनकाल में कई बार भारत आए।
पूरी व्याख्या पढ़ें →भारत के इतिहास के संदर्भ में, निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए : (शब्द : विवरण) 1. एरिपत्ति : वह भूमि, जिसका राजस्व गाँव के तालाब के रखरखाव के लिए अलग रखा जाता था 2. तनियूर : किसी एक ब्राह्मण या ब्राह्मणों के समूह को दान किए गए गाँव 3. घटिका : सामान्यतः मंदिरों से जुड़े विद्यालय उपर्युक्त युग्मों में से कौन-सा/से सही सुमेलित है/हैं?
- A.1 और 2
- B.केवल 3
- C.2 और 3
- D.1 और 3
उत्तर देखें
एरिपत्ति और घटिका का विवरण सही है, पर तनियूर ब्राह्मणों को दान किए गए गाँव नहीं थे। ये शब्द आरंभिक मध्यकालीन दक्षिण भारत, विशेषकर पल्लव और चोल काल के अभिलेखों में मिलते हैं।
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