तीनकठिया व्यवस्था समाप्त करने वाला चंपारण कृषि अधिनियम किस वर्ष पारित हुआ?
- A.1916
- B.1917
- C.1918
- D.1920
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर C, 1918 है। सरकार ने 1917 में चंपारण कृषि जाँच समिति नियुक्त की, जिसके एक सदस्य गांधी जी थे, और उसकी रिपोर्ट के आधार पर 1918 में चंपारण कृषि अधिनियम पारित हुआ। इस अधिनियम ने तीनकठिया की बाध्यता समाप्त की और बागान मालिकों से अवैध वसूली का एक भाग किसानों को लौटाने की अपेक्षा की।
विकल्प A गलत है क्योंकि 1916 कांग्रेस के लखनऊ अधिवेशन का वर्ष है, जहाँ राजकुमार शुक्ल गांधी जी से मिले। विकल्प B गलत है क्योंकि 1917 सत्याग्रह और जाँच समिति का वर्ष है, अधिनियम का नहीं, और परीक्षक इसी एक वर्ष के अंतर को जाँचते हैं। विकल्प D गलत है क्योंकि 1920 असहयोग आंदोलन और कांग्रेस के नागपुर अधिवेशन का वर्ष है, जो चंपारण के बाद का अध्याय है। क्रम इस प्रकार याद रखें: 1916 भेंट, 1917 सत्याग्रह और जाँच, 1918 अधिनियम।
पूरा लेख पढ़ें: चंपारण सत्याग्रह और बिहार का स्वतंत्रता संग्राम
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंचंपारण सत्याग्रह भारत के निम्नलिखित में से किस राज्य में हुआ था?
- A.ओडिशा
- B.गुजरात
- C.बिहार
- D.पश्चिम बंगाल
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चंपारण उत्तर बिहार का जिला है, जिसका मुख्यालय मोतीहारी है, और 1917 का सत्याग्रह वहीं निलहे बागान मालिकों की तीनकठिया व्यवस्था के विरुद्ध हुआ।
पूरी व्याख्या पढ़ें →महात्मा गांधी को चंपारण आने के लिए किसने प्रेरित किया?
- A.राजेंद्र प्रसाद
- B.राजकुमार शुक्ल
- C.ब्रजकिशोर प्रसाद
- D.मजहरुल हक
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शुक्ल चंपारण के किसान थे, जिन्होंने 1916 के कांग्रेस के लखनऊ अधिवेशन में गांधी जी से भेंट की और स्थान-स्थान पर उनके पीछे जाकर आग्रह करते रहे, जब तक गांधी जी जिले में आने को तैयार नहीं हो गए।
पूरी व्याख्या पढ़ें →चंपारण की तीनकठिया व्यवस्था में किसान को नील उगाना पड़ता था
- A.अपनी भूमि के प्रत्येक बीस कट्ठा में से तीन कट्ठा पर
- B.प्रत्येक बीस बीघा में से तीन बीघा पर
- C.अपनी कुल जोत के एक तिहाई पर
- D.प्रत्येक जोत के तीन एकड़ पर
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तीनकठिया शब्द इस बाध्यता से बना है कि भूमि के प्रत्येक बीस कट्ठा में से तीन कट्ठा पर नील बोना पड़ता था, और स्थानीय माप में बीस कट्ठा से एक बीघा बनता था।
पूरी व्याख्या पढ़ें →चंपारण के बागान मालिक नील की खेती से मुक्ति देने के बदले जो बढ़ा हुआ लगान लेते थे, उसे क्या कहा जाता था?
- A.तावान
- B.शरहबेशी
- C.अबवाब
- D.बेगार
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जब कृत्रिम रंग ने प्राकृतिक नील का बाजार नष्ट कर दिया, तब बागान मालिकों ने काश्तकारों को नील उगाने की बाध्यता से मुक्त किया पर उनका लगान स्थायी रूप से बढ़ा दिया; इस वृद्धि को शरहबेशी कहा गया।
पूरी व्याख्या पढ़ें →चंपारण सत्याग्रह के लिए गांधी जी बिहार में सबसे पहले किस नगर पहुँचे?
- A.मोतीहारी
- B.मुजफ्फरपुर
- C.पटना
- D.बेतिया
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गांधी जी 10 अप्रैल 1917 को पटना पहुँचे, नगर में थोड़ा रुके, फिर मुजफ्फरपुर गए, जहाँ जे. बी. कृपलानी अध्यापन करते थे और उन्होंने विद्यार्थियों को स्वागत के लिए एकत्र किया था, और उसके बाद ही चंपारण के मोतीहारी गए, जहाँ उन्हें जिला छोड़ने का आदेश दिया गया।
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