सुश्री रानी अपने AC जनित्र को DC जनित्र में बदलना चाहती हैं। इसके लिए उन्हें निम्नलिखित में से किसका उपयोग करना होगा?
- A.विभक्त वलय प्रकार का दिक्परिवर्तक
- B.सर्पी वलय और ब्रुश
- C.अधिक प्रबल चुंबकीय क्षेत्र
- D.आयताकार तार का लूप
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर है A, विभक्त वलय प्रकार का दिक्परिवर्तक। विभक्त वलय दिक्परिवर्तक हर आधे चक्कर पर कुंडली का बाहरी परिपथ से संबंध उलट देता है, जिससे बाहर धारा एक ही दिशा में बहती है।
हर जनित्र में चुंबकीय क्षेत्र में घूमती कुंडली ऐसी धारा बनाती है जो हर आधे चक्कर पर दिशा बदलती है। AC जनित्र यह धारा दो पूरे सर्पी वलयों से बाहर भेजता है, इसलिए निर्गत धारा प्रत्यावर्ती होती है। DC जनित्र में इन दो पूरे वलयों की जगह दो हिस्सों में कटा एक वलय लगाया जाता है। ठीक जब कुंडली में धारा उलटती है, तभी वलय का हर हिस्सा दूसरे ब्रुश से जुड़ जाता है, इसलिए बाहरी परिपथ में धारा की दिशा एक-सी बनी रहती है। यही युक्ति विद्युत मोटर को भी घुमाती रहती है।
B गलत है, क्योंकि सर्पी वलय और ब्रुश तो AC जनित्र में पहले से होते हैं और प्रत्यावर्ती धारा ही देते हैं।
C गलत है, क्योंकि प्रबल चुंबक केवल प्रेरित धारा का परिमाण बढ़ाता है, उसकी दिशा नहीं बदलता।
D गलत है, क्योंकि आयताकार कुंडली दोनों प्रकार के जनित्रों में होती है।
Exam tip: सर्पी वलय से AC; विभक्त वलय दिक्परिवर्तक से DC, और यही DC मोटर में भी लगता है।
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंएक कप में स्थिर पड़े तरल के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? 1. तरल के सभी बिंदुओं पर दाब समान होता है 2. दीवारों पर दाब लगता है। 3. तरल में हर जगह दाब होता है। नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए :
- A.केवल 1 और 2
- B.केवल 2 और 3
- C.केवल 1
- D.1, 2 और 3
उत्तर देखें
स्थिर तरल दीवारों पर दाब डालता है और उसके हर बिंदु पर दाब होता है, पर यह दाब सभी गहराइयों पर बराबर नहीं होता।
पूरी व्याख्या पढ़ें →परम शून्य ताप 0 केल्विन है। °C मात्रक में निम्नलिखित में से कौन-सा परम शून्य ताप है?
- A.0 °C
- B.-100 °C
- C.-273.15 °C
- D.-173.15 °C
उत्तर देखें
केल्विन पैमाने का शून्य जल के हिमांक से 273.15 डिग्री नीचे होता है। केल्विन और सेल्सियस पैमानों में एक डिग्री का मान बराबर होता है, इसलिए T(K) = t(°C) + 273.15।
पूरी व्याख्या पढ़ें →डाइनाइट्रोजन (N₂) और डाइऑक्सीजन (O₂) वायु के मुख्य घटक हैं, फिर भी वे आपस में अभिक्रिया करके नाइट्रोजन के ऑक्साइड नहीं बनाते, क्योंकि
- A.अभिक्रिया को आरंभ करने के लिए उत्प्रेरक चाहिए
- B.नाइट्रोजन के ऑक्साइड अस्थायी होते हैं
- C.अभिक्रिया ऊष्माशोषी है और इसके लिए बहुत ऊंचा ताप चाहिए
- D.वायु में N₂ और O₂ का स्टॉइकियोमीट्री अनुपात इस अभिक्रिया के लिए आदर्श नहीं है
उत्तर देखें
नाइट्रोजन और ऑक्सीजन तभी मिलते हैं जब बहुत अधिक ऊर्जा दी जाए। नाइट्रोजन अणु बहुत मजबूत त्रिबंध से बंधा होता है, इसलिए उसे तोड़ने में बहुत ऊर्जा लगती है, और अभिक्रिया N₂ + O₂ → 2NO ऊष्मा अवशोषित करती है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →निकल उत्प्रेरक की उपस्थिति में वनस्पति तेलों का हाइड्रोजनीकरण किसका उदाहरण है?
- A.प्रतिस्थापन अभिक्रिया।
- B.विलोपन अभिक्रिया।
- C.योगात्मक अभिक्रिया।
- D.मुक्त-मूलक बहुलकीकरण।
उत्तर देखें
तेल के कार्बन–कार्बन द्विबंधों पर हाइड्रोजन जुड़ जाती है। वनस्पति तेल असंतृप्त होते हैं: उनकी वसीय अम्ल श्रृंखलाओं में C=C द्विबंध होते हैं, जिनके कारण वे द्रव रहते हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →एक धनात्मक आवेश ऐसे स्थान में दक्षिण की ओर गतिमान है जहां चुंबकीय क्षेत्र उत्तर दिशा की ओर है। गतिमान आवेश अनुभव करेगा :
- A.उत्तर दिशा की ओर एक विक्षेपक बल।
- B.पूर्व दिशा की ओर एक विक्षेपक बल।
- C.पश्चिम दिशा की ओर एक विक्षेपक बल।
- D.कोई विक्षेपक बल नहीं।
उत्तर देखें
आवेश ठीक क्षेत्र की उल्टी दिशा में चल रहा है, और चुंबकीय क्षेत्र अपनी रेखा पर चलते आवेश पर कोई बल नहीं लगाता।
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