सितंबर 2026 में जिसके दिशानिर्देश जारी हुए, उस राष्ट्रीय तटीय मिशन 2.0 का स्वीकृत परिव्यय कितना है?
- A.367 करोड़ रुपये
- B.767 करोड़ रुपये
- C.1,767 करोड़ रुपये
- D.2,767 करोड़ रुपये
सही उत्तर
B. 767 करोड़ रुपये
व्याख्या
सही उत्तर 767 करोड़ रुपये है। यह मिशन एक केंद्रीय क्षेत्र योजना है, इसलिए यह पूरी राशि केंद्र सरकार देती है और इसे 2030-31 तक नौ तटीय राज्यों तथा चार केंद्र शासित प्रदेशों में खर्च किया जाएगा। विकल्प A यानी 367 करोड़ रुपये गलत है, क्योंकि मिशन के साथ ऐसा कोई आँकड़ा जुड़ा नहीं है और स्वीकृत परिव्यय इससे अधिक है। विकल्प C यानी 1,767 करोड़ रुपये और विकल्प D यानी 2,767 करोड़ रुपये भी इसी कारण गलत हैं; ये बढ़ा-चढ़ाकर दिए गए वे आँकड़े हैं जिनसे परीक्षक जाँचता है कि अभ्यर्थी को सही संख्या याद है या केवल अनुमान है। परीक्षा की दृष्टि से इन तथ्यों को एक समूह में याद रखें, अर्थात योजना राष्ट्रीय तटीय मिशन 2.0, राशि 767 करोड़ रुपये, प्रकार केंद्रीय क्षेत्र योजना और अंतिम वर्ष 2030-31।
पूरा लेख पढ़ें: राष्ट्रीय तटीय मिशन 2.0 के दिशानिर्देश जारी, 767 करोड़ का परिव्यय
अभ्यास प्रश्न
राष्ट्रीय तटीय मिशन 2.0 कितने तटीय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू किया जाएगा?
- A.सात तटीय राज्य और तीन केंद्र शासित प्रदेश
- B.नौ तटीय राज्य और चार केंद्र शासित प्रदेश
- C.ग्यारह तटीय राज्य और दो केंद्र शासित प्रदेश
- D.तेरह तटीय राज्य और पाँच केंद्र शासित प्रदेश
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. नौ तटीय राज्य और चार केंद्र शासित प्रदेश
व्याख्या
सही उत्तर नौ तटीय राज्य और चार केंद्र शासित प्रदेश है। मिशन के लिए यही भौगोलिक दायरा बताया गया है और यह भारत की तटरेखा के स्वरूप से मेल खाता है, जहाँ समुद्र तट नौ राज्यों तथा द्वीपीय और तटीय केंद्र शासित प्रदेशों से होकर गुजरता है। विकल्प A दोनों संख्याओं को कम बताता है, इसलिए गलत है। विकल्प C भी दोनों जगह गलत है, क्योंकि तटीय राज्यों की संख्या ग्यारह नहीं है और केंद्र शासित प्रदेशों की संख्या दो नहीं है। विकल्प D तथ्य से सबसे दूर है और तेरह राज्यों की ऐसी तटरेखा बताता है जो भारत में नहीं है। अभ्यर्थी इस जोड़ी को परिव्यय और अवधि के साथ याद रखें, क्योंकि प्रश्न इन तीन में से किसी एक पर बनता है।
राष्ट्रीय तटीय मिशन 2.0 के कार्यान्वयन दिशानिर्देश किस मंत्रालय ने जारी किए?
- A.जल शक्ति मंत्रालय
- B.पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय
- C.पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय
- D.पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय
व्याख्या
सही उत्तर पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय है और दिशानिर्देश इसी मंत्रालय के मंत्री भूपेंद्र यादव ने नई दिल्ली में जारी किए। विकल्प A यानी जल शक्ति मंत्रालय नदियों, सिंचाई और पेयजल का काम देखता है, तटीय क्षेत्र का यह कार्यक्रम उसका नहीं है। विकल्प B यानी पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय समुद्री अनुसंधान और पूर्वानुमान सेवाएँ चलाता है और समुद्र से जुड़े किसी भी प्रश्न में स्वाभाविक भ्रम पैदा करता है, पर यह मिशन उसकी योजना नहीं है। विकल्प D यानी पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय बंदरगाहों और जहाजरानी से जुड़ा है। मिशन पर्यावरण मंत्रालय के पास है क्योंकि इसका विषय तटीय मजबूती है, जिसमें जोखिम आकलन, पारिस्थितिकी बहाली, प्रदूषण प्रबंधन और जैव विविधता संरक्षण शामिल हैं, तथा इनके साथ सतत पर्यटन और स्थानिक योजना भी जुड़ी है। अभ्यर्थी इस मिशन के चार बिंदु एक साथ याद रखें, अर्थात मंत्रालय, मंत्री का नाम, 767 करोड़ रुपये का परिव्यय और 2030-31 तक की अवधि, क्योंकि प्रश्न इनमें से किसी भी कोने से पूछा जा सकता है।
दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु प्रदूषण की रोकथाम, नियंत्रण और कमी के लिए काम करने वाली किस संस्था का नाम पर्यावरण मंत्रालय ने लिया?
- A.केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
- B.वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग
- C.राष्ट्रीय हरित अधिकरण
- D.भारत मौसम विज्ञान विभाग
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सही उत्तर: B. वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग
व्याख्या
सही उत्तर वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग यानी CAQM है, जिसे मंत्रालय ने संबंधित हितधारकों के साथ समन्वय करने वाली संस्था के रूप में नामित किया। विकल्प A यानी केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड देश भर में प्रदूषण मानक तय करता है और निगरानी नेटवर्क चलाता है, पर राजधानी क्षेत्र के लिए यहाँ नामित समन्वयकारी आयोग वह नहीं है। विकल्प C यानी राष्ट्रीय हरित अधिकरण पर्यावरण से जुड़े मामलों की सुनवाई करने वाला न्यायिक निकाय है, वह कार्यक्रम नहीं चलाता। विकल्प D यानी भारत मौसम विज्ञान विभाग मौसम का पूर्वानुमान देता है और हवा तथा तापमान के वे आँकड़े देता है जिन पर वायु गुणवत्ता का पूर्वानुमान टिकता है, इसलिए यह भ्रम पैदा करता है, पर यह प्रदूषण प्राधिकरण नहीं है। दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की हवा से जुड़े प्रश्न में सही उत्तर वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ही रहता है, इसलिए आँकड़ों के साथ इस संस्था का नाम भी याद रखें, क्योंकि परीक्षक दोनों में से किसी पर भी प्रश्न बना सकता है।
दिल्ली ने सितंबर 2026 के लिए कितना मासिक औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक दर्ज किया, जिसे पाँच वर्षों में सितंबर का सबसे कम बताया गया?
- A.92
- B.102
- C.112
- D.122
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 102
व्याख्या
सही उत्तर 102 है। पर्यावरण मंत्रालय ने दिल्ली का सितंबर का औसत 102 बताया और इसकी तुलना 2025 के 105, 2024 के 105, 2023 के 108 तथा 2022 के 104 से की, जिससे यह इन पाँच वर्षों में सितंबर का सबसे कम स्तर बनता है। विकल्प A यानी 92 गलत है, क्योंकि सूचकांक इतना नीचे नहीं आया; उससे दिल्ली मध्यम श्रेणी से बेहतर श्रेणी में चली जाती, जो वास्तविक स्थिति नहीं है। विकल्प C यानी 112 और विकल्प D यानी 122 दोनों उन पाँच सितंबरों के हर औसत से अधिक हैं, इसलिए इनमें से कोई भी सबसे कम नहीं हो सकता। अभ्यर्थी ध्यान रखें कि सबसे कम वाले दावे में तुलना का पूरा समूह महत्वपूर्ण होता है, इसलिए 102 के साथ 105, 105, 108 और 104 भी याद रखें।
जनवरी से सितंबर 2026 के बीच दिल्ली में कितने दिन दैनिक औसत AQI 200 से कम रहा, जो पाँच वर्षों में सर्वाधिक है?
- A.146 दिन
- B.187 दिन
- C.194 दिन
- D.214 दिन
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 194 दिन
व्याख्या
सही उत्तर 194 दिन है। दैनिक औसत 200 से कम होना मध्यम श्रेणी माना जाता है और चालू वर्ष के नौ महीनों में ऐसे 194 दिन रहे, जो पाँच वर्षों की तुलना में सर्वाधिक है। विकल्प A यानी 146 दिन 2022 का आँकड़ा है, जो इस समूह का सबसे कमजोर वर्ष था, और यही इसे आसान जाल बनाता है क्योंकि यह उसी तालिका से आता है। विकल्प B यानी 187 दिन 2025 का आँकड़ा है, अर्थात ठीक पिछले वर्ष का, और दो हाल के वर्षों को मिला देने पर अभ्यर्थी यही चुन बैठता है; 2024 में 188 और 2023 में 193 दिन थे। विकल्प D यानी 214 दिन तुलना में कहीं नहीं आता। खराब हवा वाले दिनों का 2022 के 127 से घटकर इस वर्ष 79 रह जाना भी इसी रुझान को दिखाता है।