सितंबर 2026 की राज्यों वाली सीपीग्राम्स रिपोर्ट के अनुसार सेवोत्तम योजना के तहत पिछले पांच वित्त वर्षों में कितने अधिकारी प्रशिक्षित हुए?
- A.1,312 पाठ्यक्रमों में लगभग 43,738 अधिकारी
- B.454 पाठ्यक्रमों में लगभग 23,230 अधिकारी
- C.1,312 पाठ्यक्रमों में लगभग 92,822 अधिकारी
- D.500 पाठ्यक्रमों में लगभग 12,996 अधिकारी
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर 1,312 पाठ्यक्रमों में लगभग 43,738 अधिकारी है। राज्यों तथा संघ राज्य क्षेत्रों पर जारी 50वीं रिपोर्ट बताती है कि सेवोत्तम योजना के अंतर्गत पिछले पांच वित्त वर्षों में 1,312 प्रशिक्षण पाठ्यक्रम पूरे हुए, जिनमें शिकायत निपटान और सेवा वितरण पर लगभग 43,738 अधिकारियों को प्रशिक्षण मिला। विकल्प B दो अलग-अलग आंकड़ों को मिला देता है - 23,230 सितंबर 2026 में केंद्रीय मंत्रालयों के पास लंबित अपीलों की संख्या है, जबकि 454 समीक्षा बैठक मॉड्यूल के शुरू होने के बाद हुई कुल बैठकों की संख्या है। विकल्प C में पाठ्यक्रमों की संख्या सही है, पर उसके साथ 92,822 जोड़ दिया गया है, जो सितंबर 2026 में पोर्टल पर पंजीकृत नए उपयोगकर्ताओं का आंकड़ा है। विकल्प D में 12,996 दिया गया है, जो महीने में सामान्य सेवा केंद्रों के जरिये दर्ज शिकायतों की संख्या है। सेवोत्तम इस सुधार प्रक्रिया का क्षमता निर्माण वाला हिस्सा है, इसलिए उसके प्रशिक्षण आंकड़े निपटान के आंकड़ों के साथ दिए जाते हैं।
पूरा लेख पढ़ें: सीपीग्राम्स की 53वीं मासिक रिपोर्ट जारी, 2,38,579 शिकायतों का निपटारा
अभ्यास प्रश्न
53वीं सीपीग्राम्स मासिक रिपोर्ट के अनुसार सितंबर 2026 में केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों ने कितनी शिकायतों का निवारण किया?
- A.2,27,837
- B.2,38,579
- C.1,15,168
- D.85,687
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर 2,38,579 है। डीएआरपीजी की सितंबर 2026 की 53वीं मासिक सीपीग्राम्स रिपोर्ट में केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों द्वारा बंद की गई शिकायतों की संख्या 2,38,579 बताई गई है। विकल्प A में दिया 2,27,837 उसी महीने पोर्टल पर पहुंची नई शिकायतों का आंकड़ा है, यानी यह प्राप्त शिकायतों की संख्या है, निपटान की नहीं; निपटान प्राप्ति से अधिक रहा, इसी कारण लंबित मामले घटे। विकल्प C का 1,15,168 राज्यों तथा संघ राज्य क्षेत्रों पर जारी 50वीं रिपोर्ट से जुड़ा है, जहां 99,134 शिकायतें मिलीं और उतने मामलों का निवारण हुआ, इसलिए इसका केंद्रीय सचिवालय से कोई संबंध नहीं है। विकल्प D का 85,687 महीने के अंत में केंद्र के पास खुले पड़े मामलों की संख्या है, अर्थात लंबित मामले। रिपोर्ट यह भी बताती है कि केंद्रीय सचिवालय में मासिक निपटान लगातार 51वें महीने एक लाख मामलों के पार रहा और वर्ष 2026 में औसत निपटान समय 13 दिन रहा।
सितंबर 2026 में सीपीग्राम्स के तहत किस राज्य ने सबसे अधिक लोक शिकायतों का निपटारा किया?
- A.आंध्र प्रदेश
- B.हरियाणा
- C.उत्तर प्रदेश
- D.कर्नाटक
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर उत्तर प्रदेश है। राज्यों तथा संघ राज्य क्षेत्रों पर जारी 50वीं सीपीग्राम्स रिपोर्ट के अनुसार सितंबर 2026 में उत्तर प्रदेश ने सर्वाधिक 45,970 मामले बंद किए, जो हर दूसरे राज्य से बहुत आगे है। विकल्प A यानी आंध्र प्रदेश 8,340 निपटान के साथ दूसरे स्थान पर रहा, इसलिए वह शीर्ष पर नहीं है। विकल्प B यानी हरियाणा 6,437 मामलों के साथ तीसरे स्थान पर रहा। विकल्प D यानी कर्नाटक उसी रिपोर्ट के एक दूसरे आंकड़े से लिया गया भ्रम है - सामान्य सेवा केंद्रों के जरिये दर्ज शिकायतों में सबसे बड़ा हिस्सा कर्नाटक का रहा, जो यह बताता है कि शिकायतें कहां से आईं, न कि कितनी सुलझाई गईं। महीने में नए उपयोगकर्ताओं के पंजीकरण में भी सबसे बड़ा हिस्सा उत्तर प्रदेश का था। सभी राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों ने मिलकर 1,15,168 मामलों का निवारण किया, जबकि 30 सितंबर 2026 को 2,37,128 मामले लंबित थे।
ट्राई की अप्रैल-जून 2026 रिपोर्ट के अनुसार प्रति वायरलेस डेटा उपभोक्ता मासिक डेटा उपयोग कितना रहा?
- A.21.45 जीबी
- B.26.70 जीबी
- C.28.39 जीबी
- D.32.80 जीबी
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर 28.39 जीबी है। जून 2026 को समाप्त तिमाही में प्रति वायरलेस डेटा उपभोक्ता मासिक औसत डेटा उपयोग इस स्तर पर पहुंच गया, जो मार्च 2026 को समाप्त तिमाही में 26.70 जीबी था। विकल्प B वही पुराना आंकड़ा है और इसलिए पिछली तिमाही का है, समीक्षाधीन तिमाही का नहीं। विकल्प A और विकल्प D रिपोर्ट की किसी भी तिमाही से मेल नहीं खाते। इसी रिपोर्ट में तिमाही की कुल मोबाइल डेटा खपत 77,953 पीबी से बढ़कर 84,424 पीबी दर्ज हुई है, जबकि प्रति जीबी वायरलेस डेटा से औसत आय 7.51 रुपये से घटकर 7.13 रुपये रह गई। इससे समझ आता है कि डेटा का दाम गिरते रहने पर भी खपत कैसे बढ़ती है। इसके बावजूद वायरलेस सेवा का मासिक एआरपीयू बढ़कर 187.12 रुपये हो गया, क्योंकि उपभोक्ता पहले से काफी अधिक डेटा खर्च कर रहे हैं।
ट्राई की प्रदर्शन संकेतक रिपोर्ट के अनुसार जून 2026 के अंत में भारत में कुल टेलीफोन उपभोक्ता कितने थे?
- A.1,330.58 मिलियन
- B.1,300.25 मिलियन
- C.1,348.08 मिलियन
- D.1,114.17 मिलियन
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर 1,348.08 मिलियन है। जून 2026 को समाप्त तिमाही की रिपोर्ट में वायरलेस और वायरलाइन कनेक्शनों को मिलाकर यही कुल संख्या दर्ज है, जो पिछली तिमाही से 1.31 प्रतिशत और एक साल पहले की समान तिमाही से 10.65 प्रतिशत अधिक है। विकल्प A मार्च 2026 के अंत का आंकड़ा है, यानी पिछली तिमाही की संख्या, जहां से यह आधार बढ़ा है। विकल्प B केवल मोबाइल और फिक्स्ड वायरलेस एक्सेस कनेक्शनों का कुल है, इसलिए इसमें वायरलाइन उपभोक्ता शामिल नहीं हैं। विकल्प D तिमाही के अंत में इंटरनेट उपभोक्ताओं की संख्या है, जो बिल्कुल अलग संकेतक है, क्योंकि बहुत से कनेक्शन टेलीफोन उपभोक्ता के रूप में गिने जाते हैं, पर इंटरनेट उपभोक्ता नहीं होते। परीक्षार्थी को हर आंकड़े को उसके संकेतक से जोड़कर याद रखना चाहिए, क्योंकि कुल टेलीफोन उपभोक्ता, वायरलेस उपभोक्ता और इंटरनेट उपभोक्ता एक ही रिपोर्ट की तीन अलग गणनाएं हैं।
जून 2026 को समाप्त तिमाही के अंत में भारत का कुल टेली-घनत्व कितना था?
- A.90.96 प्रतिशत
- B.93.26 प्रतिशत
- C.94.31 प्रतिशत
- D.153.43 प्रतिशत
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर 94.31 प्रतिशत है। टेली-घनत्व हर सौ लोगों पर टेलीफोन कनेक्शन की संख्या बताता है और कुल टेली-घनत्व मार्च 2026 के अंत के 93.26 प्रतिशत से बढ़कर जून 2026 के अंत में 94.31 प्रतिशत हो गया। इसलिए विकल्प B पिछली तिमाही का आंकड़ा है, मौजूदा तिमाही का नहीं। विकल्प A वायरलेस टेली-घनत्व है, जिसमें मोबाइल और फिक्स्ड वायरलेस एक्सेस कनेक्शन गिने जाते हैं और जो कुल आंकड़े से कम रहता है, क्योंकि कुल आंकड़े में वायरलाइन कनेक्शन भी जुड़ते हैं। विकल्प D शहरी टेली-घनत्व है, जो सौ से अधिक है, क्योंकि शहरों में बहुत लोग एक से अधिक कनेक्शन रखते हैं; इसके मुकाबले ग्रामीण टेली-घनत्व 60.89 प्रतिशत रहा। चारों टेली-घनत्व अलग-अलग याद रखने चाहिए, क्योंकि परीक्षा में शहरी आंकड़ा कुल आंकड़े की जगह रख दिया जाता है।