सरल आवर्त गति में दोलायमान पिंड की स्थितिज ऊर्जा कहां अधिकतम होती है?
- A.माध्य स्थिति पर
- B.अंतिम स्थितियों पर
- C.माध्य और अंतिम स्थिति के मध्य बिंदु पर
- D.पथ के प्रत्येक बिंदु पर
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर B, अंतिम स्थितियों पर है। स्थितिज ऊर्जा विस्थापन के वर्ग के अनुक्रमानुपाती होती है, अत: वह वहीं सर्वाधिक होती है जहां विस्थापन सर्वाधिक है, अर्थात पथ के दोनों सिरों पर, जहां पिंड क्षण भर के लिए विरामावस्था में होता है और उसकी गतिज ऊर्जा शून्य होती है। विकल्प A गलत है, क्योंकि माध्य स्थिति पर विस्थापन शून्य होने से स्थितिज ऊर्जा शून्य और गतिज ऊर्जा अधिकतम होती है। विकल्प C गलत है, क्योंकि मध्य बिंदु पर ऊर्जा दोनों रूपों में बंटी रहती है और कोई भी अधिकतम नहीं होती। विकल्प D गलत है, क्योंकि पथ के प्रत्येक बिंदु पर समान रहने वाली राशि कुल ऊर्जा (½kA²) है, स्थितिज ऊर्जा नहीं। विस्थापन के एक चक्र में दोनों ऊर्जाएं दो चक्र पूरे करती हैं, अत: उनकी आवृत्ति दोलन की आवृत्ति से दोगुनी होती है। कुल ऊर्जा आयाम के वर्ग के अनुक्रमानुपाती होती है।
पूरा लेख पढ़ें: दोलन: सरल आवर्त गति और सरल लोलक के नोट्स
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंयदि कोई कण सरल आवर्त गति कर रहा है, तो माध्य स्थिति पर उसका वेग _________ होता है।
- A.अधिकतम
- B.शून्य
- C.न्यूनतम
- D.इनमें से कोई नहीं
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सरल आवर्त गति में वेग ω√(A² - x²) होता है। माध्य स्थिति पर विस्थापन x शून्य होता है, अत: वेग अपने अधिकतम मान Aω पर पहुंच जाता है; इसी कारण गतिज ऊर्जा भी वहीं सर्वाधिक होती है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →एक बच्चा झूले पर बैठा है। भूमि से उसकी न्यूनतम और अधिकतम ऊंचाई क्रमश: 0.75 मीटर तथा 2 मीटर है। उसकी अधिकतम चाल होगी
- A.10 मी/से
- B.5 मी/से
- C.8 मी/से
- D.15 मी/से
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झूला एक लोलक की तरह है और उसकी चाल निम्नतम बिंदु पर सर्वाधिक होती है, जहां ऊपर प्राप्त सारी स्थितिज ऊर्जा गतिज ऊर्जा में बदल जाती है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →सरल लोलक का आवर्तकाल निम्नलिखित में से किस पर निर्भर नहीं करता?
- A.लोलक की लंबाई
- B.गोलक का द्रव्यमान
- C.गुरुत्वीय त्वरण
- D.इन सभी पर
उत्तर देखें
सरल लोलक का आवर्तकाल T = 2π√(l/g) होता है, जिसमें गोलक का द्रव्यमान कहीं नहीं आता; समान लंबाई के भारी और हल्के गोलक एक ही समय देते हैं, और यही द्रव्यमान का नियम है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →जहां गुरुत्वीय त्वरण 9.8 मीटर प्रति वर्ग सेकंड है, वहां सेकंड लोलक की लंबाई लगभग कितनी होती है?
- A.1 मीटर
- B.2 मीटर
- C.0.5 मीटर
- D.9.8 मीटर
उत्तर देखें
सेकंड लोलक वह है, जिसका आवर्तकाल ठीक दो सेकंड हो, अर्थात एक ओर से दूसरी ओर का प्रत्येक झूला एक सेकंड लेता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →यदि सरल लोलक की लंबाई चार गुनी कर दी जाए, तो उसका आवर्तकाल हो जाएगा
- A.चार गुना
- B.दो गुना
- C.आधा
- D.एक चौथाई
उत्तर देखें
आवर्तकाल लंबाई के वर्गमूल के अनुक्रमानुपाती होता है, अत: लंबाई चार गुनी करने पर आवर्तकाल √4 = 2 गुना हो जाता है; किसी लोलक का आवर्तकाल दोगुना करने के लिए उसकी लंबाई चार गुनी करनी पड़ती है।
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