सहकारिता मंत्रालय की 9वीं राष्ट्रीय समीक्षा कार्यशाला कहां हो रही है?
- A.रायपुर, छत्तीसगढ़
- B.बस्तर, छत्तीसगढ़
- C.भुवनेश्वर, ओडिशा
- D.नई दिल्ली
सही उत्तर
B. बस्तर, छत्तीसगढ़
व्याख्या
सही उत्तर छत्तीसगढ़ का बस्तर है, जहां सहकारिता मंत्रालय 8 और 9 अक्टूबर 2026 को अपनी 9वीं राष्ट्रीय समीक्षा कार्यशाला कर रहा है। मंत्रालय के सचिव ने उद्घाटन सत्र में बताया कि लंबे समय तक वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित रहे बस्तर जिले में सहकारी विकास पर कार्यशाला कराने का सुझाव केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने दिया था, और यही बात इस स्थान को संयोग के बजाय याद रखने योग्य बनाती है। विकल्प A यानी रायपुर राज्य की राजधानी है और जिसे केवल राज्य याद है, वह सहज रूप से यही चुनेगा। विकल्प C यानी भुवनेश्वर ओडिशा का है, और ओडिशा कार्यशाला की चर्चाओं में आता है, क्योंकि एक विषयगत सत्र में छत्तीसगढ़ तथा ओडिशा के वामपंथी उग्रवाद प्रभावित जिलों पर बात हुई, लेकिन वह स्थान नहीं है। विकल्प D यानी नई दिल्ली में ऐसी समीक्षाएं आमतौर पर होती हैं, इसीलिए इसे बस्तर में कराना स्वयं एक संदेश था।
पूरा लेख पढ़ें: बस्तर में 9वीं राष्ट्रीय सहकारिता समीक्षा कार्यशाला शुरू
अभ्यास प्रश्न
निर्यात, जैविक उत्पाद और बीज की मूल्य श्रृंखलाओं को मजबूत करने के लिए किन तीन राष्ट्रीय सहकारी संस्थाओं का उल्लेख हुआ?
- A.नेफेड, एनसीसीएफ और एनडीडीबी
- B.एनसीईएल, एनसीओएल और बीबीएसएसएल
- C.नाबार्ड, एनसीडीसी और इफको
- D.कृभको, अमूल और एनडीडीबी
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व्याख्या
सही उत्तर एनसीईएल, एनसीओएल और बीबीएसएसएल है, अर्थात राष्ट्रीय सहकारी निर्यात लिमिटेड, राष्ट्रीय सहकारी जैविक लिमिटेड और भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड। कार्यशाला में इन तीन राष्ट्रीय सहकारी संस्थाओं के माध्यम से निर्यात, जैविक उत्पादों और बीज की मूल्य श्रृंखलाओं को मजबूत करने तथा प्राथमिक सहकारी संस्थाओं को सशक्त बनाने पर विशेष ध्यान दिया गया। इसे याद रखना आसान है, यदि हर नाम को उसके क्षेत्र से जोड़ा जाए, अर्थात पहली से निर्यात, दूसरी से जैविक उत्पाद और तीसरी से बीज। विकल्प C में दो वित्तीय संस्थाओं के साथ एक उर्वरक सहकारी संस्था मिली हुई है, क्योंकि नाबार्ड की टीम कार्यशाला में शामिल हुई और राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम के साथ विशेष सत्र रखा गया, लेकिन दोनों का काम वित्त से जुड़ा है, इन मूल्य श्रृंखलाओं से नहीं। विकल्प A और D में प्रसिद्ध सहकारी तथा विपणन संस्थाओं के नाम हैं, जो इस उद्देश्य के लिए उल्लिखित तीन संस्थाएं नहीं थीं।
एनसीडीसी अधिनियम में हाल के संशोधन से क्या संभव हुआ है?
- A.निगम द्वारा व्यक्तिगत किसानों को सीधा ऋण
- B.सहकारी विकास को बढ़ावा देने वाली गैर-सहकारी संस्थाओं को वित्तीय सहायता
- C.सहकारी बैंकों को वाणिज्यिक बैंकों में बदलना
- D.निगम को भारतीय रिजर्व बैंक को हस्तांतरित करना
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व्याख्या
सही उत्तर सहकारी विकास को बढ़ावा देने वाली गैर-सहकारी संस्थाओं को वित्तीय सहायता है। सहकारिता मंत्रालय के सचिव ने बताया कि राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम अधिनियम में हाल के संशोधन से ऐसी संस्थाओं को भी सहायता देने का मार्ग प्रशस्त हुआ है, जो स्वयं सहकारी नहीं हैं लेकिन सहकारी विकास का कार्य करती हैं, और इससे राज्य स्तर की विभिन्न संस्थाओं के लिए निगम से सीधे धन लेने का रास्ता खुलता है, जिसका प्रभावी लाभ उठाने का उन्होंने राज्यों से आग्रह किया। विकल्प A गलत है, क्योंकि निगम संस्थाओं के माध्यम से काम करता है, व्यक्तिगत किसानों को ऋण देकर नहीं। विकल्प C संशोधन की किसी बात का वर्णन नहीं करता, क्योंकि कार्यशाला में इसके बजाय मॉडल सहकारी बैंकिंग ढांचे और सहकारी बैंकों की स्वायत्तता बनाए रखते हुए बेहतर निगरानी पर चर्चा हुई। विकल्प D भी गलत है, क्योंकि मंत्रालय भारतीय रिजर्व बैंक के साथ सहकारी बैंकों की संसाधन क्षमता बढ़ाने के लिए समन्वय कर रहा है, निगम का हस्तांतरण नहीं।
प्रस्तावित साझा सहकारी डिजिटल विपणन प्लेटफॉर्म के लिए किस संस्था ने सहयोग की पेशकश की?
- A.ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ओएनडीसी)
- B.गवर्नमेंट ई मार्केटप्लेस (जेम)
- C.भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम
- D.भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण
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व्याख्या
सही उत्तर ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स है। सहकारिता मंत्रालय सहकारी उत्पादों और कृषि उपज के अधिक प्रभावी विपणन के लिए एक साझा सहकारी डिजिटल प्लेटफॉर्म के प्रस्ताव पर विचार कर रहा है, और सचिव ने प्रतिभागियों को बताया कि ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स ने इस पहल के लिए अपने सहयोग की पेशकश की है। मंत्रालय आगे बढ़ने से पहले राज्यों से सुझाव और मार्गदर्शन लेना चाहता है, ताकि ऐसा व्यावहारिक तंत्र बने, जो सहकारी संस्थाओं को व्यापक बाजारों से जोड़े। विकल्प B यानी गवर्नमेंट ई मार्केटप्लेस सरकारी खरीद का प्लेटफॉर्म है, जिसके माध्यम से सरकारी विभाग वस्तुएं और सेवाएं खरीदते हैं, जो पूरी तरह अलग उद्देश्य है। विकल्प C यानी भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम खुदरा भुगतान प्रणालियां बनाता और चलाता है। विकल्प D यानी भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण आधार जारी करता है। इनमें केवल पहला ही ऐसा खुला डिजिटल वाणिज्य नेटवर्क है, जिस पर सहकारी विपणन प्लेटफॉर्म खड़ा किया जा सकता है।
प्रशस्त किस कानून के दायरे में आने वाली स्थितियों की जांच करता है?
- A.शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009
- B.दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016
- C.किशोर न्याय अधिनियम, 2015
- D.मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम, 2017
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व्याख्या
सही उत्तर दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 है। इस कानून में सूचीबद्ध स्थितियां ही प्रशस्त की जांच सूची का दायरा तय करती हैं और इसी रास्ते कक्षा की एक सामान्य निगरानी औपचारिक आकलन के लिए संदर्भ बन जाती है। विकल्प A यानी शिक्षा का अधिकार अधिनियम इस प्रश्न के लिए गलत है, भले वह नि:शुल्क और अनिवार्य प्रारंभिक शिक्षा को नियंत्रित करता है और स्कूल से जुड़े प्रश्न में पहला अनुमान बन जाता है। विकल्प C यानी किशोर न्याय अधिनियम गलत है, क्योंकि वह देखभाल और संरक्षण के जरूरतमंद बच्चों तथा कानून से टकराव वाले बच्चों से जुड़ा है, स्कूल में दिव्यांगता की जांच से नहीं। विकल्प D यानी मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम भी गलत है, क्योंकि वह मानसिक रोग से ग्रस्त व्यक्तियों के अधिकारों और देखभाल पर है। विभाग इस काम को राष्ट्रीय शिक्षा नीति और इसी दिव्यांगता कानून, दोनों से जोड़ता है।
समावेशी शिक्षा मॉड्यूल की देशव्यापी स्क्रीनिंग में कितने स्कूल शामिल हुए?
- A.20,000 से अधिक
- B.40,000 से अधिक
- C.60,000 से अधिक
- D.90,000 से अधिक
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व्याख्या
सही उत्तर 60,000 से अधिक स्कूल हैं और विभाग के अनुसार इस महीने भागीदारी और बढ़ने की संभावना है। बाकी विकल्प गलत हैं, क्योंकि उनमें संख्या बदल दी गई है, और विद्यार्थी को इस आंकड़े को इसी खबर के दूसरे आंकड़े से अलग रखना चाहिए, यानी पिछले तीन महीनों में इस समर्पित मॉड्यूल से बहत्तर लाख से अधिक शिक्षकों का संवेदीकरण। ये दोनों संख्याएं अलग-अलग चीजें मापती हैं, एक उन संस्थानों की गिनती है जिन्होंने एक दिन स्क्रीनिंग कराई और दूसरी उन शिक्षकों की, जो एक लगातार चलने वाली प्रक्रिया से गुजरे। यह भी याद रखने योग्य है कि मॉड्यूल तीस मिनट का है, बारह भारतीय भाषाओं में उपलब्ध है और यह केवल शिक्षकों के लिए नहीं, बल्कि प्रधानाचार्य से लेकर चालक और लिपिक तक, स्कूल में बच्चे से मिलने वाले हर व्यक्ति के लिए बना है।