रमेश 2 m से अधिक दूरी पर रखी वस्तुओं को स्पष्ट नहीं देख पाता। इस दोष को किस क्षमता के लेंस से ठीक किया जा सकता है?
- A.+0.5 D
- B.−0.5 D
- C.+0.2 D
- D.−0.2 D
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर है B, −0.5 D। रमेश को निकट-दृष्टि दोष है और उसका दूर बिंदु 2 m है, इसलिए उसे −2 m फोकस दूरी वाला अवतल लेंस चाहिए, जिसकी क्षमता 1/(−2) = −0.5 डायॉप्टर है।
निकट-दृष्टि दोष (मायोपिया) में व्यक्ति पास की वस्तुएं साफ़ देखता है पर दूर की वस्तुएं धुंधली दिखती हैं, क्योंकि दूर की वस्तु का प्रतिबिंब रेटिना के आगे बन जाता है। इसका कारण नेत्रगोलक का लंबा होना या नेत्र लेंस का अधिक वक्र होना हो सकता है। अवतल (अपसारी) लेंस दूर की वस्तु से आने वाली किरणों को ऐसा कर देता है मानो वे दूर बिंदु से आ रही हों, और दोष ठीक हो जाता है। इसके लिए लेंस की फोकस दूरी ऋण चिह्न के साथ दूर बिंदु की दूरी के बराबर होती है। डायॉप्टर में क्षमता मीटर में फोकस दूरी का व्युत्क्रम होती है।
A गलत है, क्योंकि धनात्मक क्षमता उत्तल लेंस की होती है, जो दूर-दृष्टि दोष ठीक करता है, यह दोष नहीं।
C गलत है, क्योंकि यह उत्तल लेंस है और इसका मान 1/2 की जगह 1/5 लेने की भूल से आता है।
D गलत है, क्योंकि −0.2 D का लेंस 5 m दूर बिंदु के लिए होगा, 2 m के लिए नहीं।
Exam tip: निकट-दृष्टि दोष में अवतल लेंस, f = −(दूर बिंदु); क्षमता P = 1/f (मीटर में)।
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंयदि किसी पौधे के गुणसूत्रों के एक समूह को N से दर्शाया जाए, तो द्विनिषेचन में एक द्विगुणित पौधे के युग्मनज और भ्रूणपोष केंद्रक में क्रमशः गुणसूत्रों के कितने समूह होंगे?
- A.N और 2N
- B.2N और 2N
- C.N और 3N
- D.2N और 3N
उत्तर देखें
युग्मनज द्विगुणित (2N) होता है और प्राथमिक भ्रूणपोष केंद्रक त्रिगुणित (3N) होता है। द्विनिषेचन पुष्पी पौधों की विशेषता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →दी गई अभिक्रिया के लिए निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही नहीं है? Fe(s) + CuSO4(aq) → FeSO4(aq) + Cu(s)
- A.लोहा अपचायक है
- B.अभिक्रिया के बाद विलयन का रंग हरा हो जाता है
- C.कॉपर लोहे से अधिक अभिक्रियाशील धातु है
- D.यह अभिक्रिया रेडॉक्स अभिक्रिया का उदाहरण है
उत्तर देखें
यह अभिक्रिया इसलिए होती है कि लोहा कॉपर से अधिक अभिक्रियाशील है और उसे उसके लवण से बाहर कर देता है, इसलिए कथन C गलत है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
- A.जाइलम में वाहिनिकाएं (ट्रेकीड), वाहिकाएं, जाइलम मृदूतक और जाइलम तंतु होते हैं।
- B.पौधों में लचीलापन दृढ़ोतक (स्क्लेरेनकाइमा) के कारण होता है।
- C.मृदूतक (पैरेनकाइमा) में अंतरकोशिकीय अवकाश नहीं होते।
- D.जाइलम में चालनी पट्टिका, चालनी नलिका और सहचर कोशिकाएं होती हैं।
उत्तर देखें
ये चारों तत्व मिलकर वह जटिल ऊतक बनाते हैं जो जड़ों से पानी और खनिज ऊपर ले जाता है। वाहिनिकाएं और वाहिकाएं लंबी, मृत, मोटी भित्ति वाली नलिकाएं हैं जिनसे पानी चढ़ता है; जाइलम मृदूतक इसका एकमात्र जीवित भाग है और भोजन जमा करता है; जाइलम तंतु सहारा देते हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →जब प्रकाश किसी अणु द्वारा प्रकीर्णित होता है और प्रकीर्णित प्रकाश की आवृत्ति बदल जाती है, तो इस परिघटना को कहते हैं
- A.रैले प्रकीर्णन
- B.रमन प्रभाव
- C.प्रकाश-विद्युत प्रभाव
- D.रदरफ़ोर्ड प्रकीर्णन
उत्तर देखें
रमन प्रभाव में अणुओं द्वारा प्रकीर्णित प्रकाश का एक छोटा भाग बदली हुई आवृत्ति के साथ निकलता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →निम्नलिखित में से कौन-सा रेडॉक्स अभिक्रिया का उदाहरण नहीं है?
- A.AlCl3 + 3H2O → Al(OH)3 + 3HCl
- B.2NaH → 2Na + H2
- C.4Fe + 3O2 → 2Fe2O3
- D.CuSO4 + Zn → Cu + ZnSO4
उत्तर देखें
यह जल-अपघटन की अभिक्रिया है, जिसमें किसी भी तत्व की ऑक्सीकरण संख्या नहीं बदलती, इसलिए न कुछ ऑक्सीकृत होता है न अपचित।
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