पुष्टिमार्ग संप्रदाय का प्रमुख स्थान श्रीनाथजी मंदिर नाथद्वारा में है, जो किस जिले में स्थित है?
- A.राजसमंद
- B.चित्तौड़गढ़
- C.भीलवाड़ा
- D.अजमेर
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर A, राजसमंद है। नाथद्वारा, जिसका अर्थ प्रभु का द्वार है, बनास नदी पर राजसमंद जिले में है, और वृंदावन से लाई गई श्रीनाथजी के रूप में कृष्ण की प्रतिमा वहां 1672 में महाराणा राजसिंह प्रथम के शासनकाल में प्रतिष्ठित हुई; यह नगर मंदिर की पृष्ठभूमि के लिए बनने वाली पिछवाई चित्रकला का भी घर है। विकल्प B, चित्तौड़गढ़, में सांवलिया जी का मंदिर तथा विजय स्तंभ वाला विशाल दुर्ग है। विकल्प C, भीलवाड़ा, हरणी महादेव और मांडलगढ़ के लिए जाना जाता है, नाथद्वारा के लिए नहीं। विकल्प D, अजमेर, में पुष्कर का ब्रह्मा मंदिर तथा ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह है। राजसमंद जिले में कुंभलगढ़ दुर्ग और उसी महाराणा राजसिंह प्रथम द्वारा बनवाई राजसमंद झील भी है, इसलिए इस जिले से एक से अधिक प्रश्न बनते हैं। पुष्टिमार्ग संप्रदाय के प्रवर्तक वल्लभाचार्य थे और श्रीनाथजी उसी संप्रदाय के प्रधान स्वरूप हैं, यह तथ्य भी प्रश्नपत्र में पूछा जाता है।
पूरा लेख पढ़ें: राजस्थान के मंदिर, बावड़ियां और स्थापत्य कला: प्रमुख तथ्य
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंदिलवाड़ा जैन मंदिरों का समूह माउंट आबू में है, जो राजस्थान के किस जिले में स्थित है?
- A.पाली
- B.सिरोही
- C.राजसमंद
- D.उदयपुर
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माउंट आबू, जो राजस्थान का एकमात्र पर्वतीय स्थल और अरावली का सर्वोच्च भाग है, सिरोही जिले में है, और दिलवाड़ा के संगमरमर के पांच मंदिर उसी ढाल पर खड़े हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →दिलवाड़ा का विमल वसहि मंदिर, जो आदिनाथ को समर्पित है और 1031 में बना, किसने बनवाया था?
- A.विमल शाह
- B.धरणा शाह
- C.वस्तुपाल और तेजपाल
- D.गुमान चंद पटवा
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दिलवाड़ा के मंदिरों में सबसे पुरानी और सबसे बड़ी विमल वसहि 1031 में गुजरात के सोलंकी शासक के मंत्री विमल शाह ने बनवाई और यह प्रथम जैन तीर्थंकर आदिनाथ को समर्पित है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →रणकपुर का चौमुखा जैन मंदिर, जो अपने 1,444 तराशे स्तंभों के लिए प्रसिद्ध है, मेवाड़ के किस शासक के शासनकाल में बना?
- A.राणा सांगा
- B.महाराणा कुंभा
- C.महाराणा प्रताप
- D.महाराणा राजसिंह प्रथम
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पाली जिले के रणकपुर में आदिनाथ का मंदिर पंद्रहवीं शताब्दी में सेठ धरणा शाह ने महाराणा कुंभा की अनुमति और आश्रय से बनवाया, जिन्होंने भूमि तथा रणकपुर नाम भी दिया; मंदिर चौमुखा कहलाता है क्योंकि प्रतिमा चारों दिशाओं की ओर है, और 1,444 स्तंभ उसकी प्रसिद्ध विशेषता हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →आभानेरी की चांद बावड़ी, जो लगभग 3,500 सीढ़ियों वाली गहरी बावड़ी है, राजस्थान के किस जिले में है?
- A.दौसा
- B.बूंदी
- C.टोंक
- D.अलवर
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चांद बावड़ी दौसा जिले के आभानेरी गांव में है और लगभग नौवीं शताब्दी में निकुंभ वंश के राजा चंद से जोड़ी जाती है; यह तेरह मंजिल नीचे उतरती है और उसमें दोहरी आड़ी तिरछी व्यवस्था में लगभग तीन हजार पांच सौ सकरी सीढ़ियां हैं, तथा उसके पास हर्षत माता का…
पूरी व्याख्या पढ़ें →रानी नाथावती द्वारा 1699 में बनवाई गई रानीजी की बावड़ी किस नगर में है, जिसे बावड़ियों का शहर कहा जाता है?
- A.जोधपुर
- B.बूंदी
- C.जैसलमेर
- D.जयपुर
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हाड़ौती क्षेत्र में हाड़ा चौहानों की राजधानी बूंदी में इतनी बावड़ियां हैं कि उसे बावड़ियों का शहर कहा जाता है, और उनमें सर्वश्रेष्ठ रानीजी की बावड़ी है, जो 1699 में रानी नाथावती ने ऊंचे प्रवेश द्वार और तराशे तोड़ों के साथ बनवाई।
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