प्रथम विश्व युद्ध ने यूरोप को निम्नलिखित में से किस प्रकार प्रभावित नहीं किया?
- A.वह ऋणदाताओं के महाद्वीप से कर्जदारों का महाद्वीप बन गया
- B.सैनिकों को नागरिकों की तुलना में ऊंचा सामाजिक दर्जा मिलने लगा
- C.हाल में अस्तित्व में आई रूढ़िवादी तानाशाही के लिए जन समर्थन घट गया
- D.सार्वजनिक जीवन में राष्ट्रीय सम्मान केंद्र में आ गया
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर है C। युद्ध से रूढ़िवादी तानाशाहियों का समर्थन घटा नहीं; 1918 के बाद उनके लिए जन समर्थन वास्तव में बढ़ा।
प्रथम विश्व युद्ध (1914–18) ने यूरोप को थका दिया। 1914 से पहले दुनिया को कर्ज देने वाले देश अब भारी कर्ज में थे, जिसका बड़ा भाग अमेरिका का था। युद्ध का महिमामंडन हुआ: सैनिकों को नागरिकों से ऊपर सम्मान मिला और राजनेता पुरुषों के आक्रामक, ताकतवर और मर्दाना होने पर जोर देने लगे। खाइयों की लड़ाई को वीरता के रूप में दिखाया गया और राष्ट्रीय सम्मान व बदला सार्वजनिक जीवन पर छा गया। इसी माहौल में 1922 के मुसोलिनी के इटली से 1933 के नाजी जर्मनी तक रूढ़िवादी और सत्तावादी शासनों को व्यापक समर्थन मिला।
A सच में हुआ: यूरोप ऋणदाताओं से कर्जदारों का महाद्वीप बन गया।
B सच में हुआ: जनता की नजर में सैनिकों का दर्जा नागरिकों से ऊपर हो गया।
D सच में हुआ: राष्ट्रीय सम्मान और बदले की पुकार सार्वजनिक जीवन के केंद्र में आ गई।
Exam tip: प्रथम विश्व युद्ध के बाद यूरोप कर्जदार बना, सैनिकों का महिमामंडन हुआ और रूढ़िवादी तानाशाहियों का समर्थन बढ़ा, जिससे फासीवाद का रास्ता खुला।
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंनिम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :
आज़ाद हिंद फ़ौज के गठन के बाद सुभाष चंद्र बोस ने
1. जापानी शिविरों में बंद भारतीय युद्धबंदियों में से बड़ी संख्या में सैनिक भर्ती किए
2. झाँसी की रानी के नाम पर एक महिला टुकड़ी बनाई
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- A.केवल 1
- B.केवल 2
- C.1 और 2 दोनों
- D.न तो 1, न ही 2
उत्तर देखें
आज़ाद हिंद फ़ौज के अधिकतर सैनिक जापान के पास बंद भारतीय युद्धबंदी थे, और बोस ने महिलाओं के लिए रानी झाँसी रेजिमेंट बनाई।
पूरी व्याख्या पढ़ें →फ्रांस्वा बर्नियर किसके चिकित्सक थे?
- A.शहजादा मुराद
- B.शहजादी जहाँआरा
- C.बादशाह शाहजहाँ
- D.शहजादा दारा शिकोह
उत्तर देखें
फ्रांसीसी चिकित्सक फ्रांस्वा बर्नियर शाहजहाँ के सबसे बड़े पुत्र दारा शिकोह के चिकित्सक रहे। बर्नियर 1658 में भारत पहुँचे, जब शाहजहाँ के पुत्रों के बीच उत्तराधिकार का युद्ध चल रहा था।
पूरी व्याख्या पढ़ें →1919 के रॉलेट अधिनियम के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :
1. इसे इंपीरियल लेजिस्लेटिव काउंसिल ने पारित किया था।
2. इस अधिनियम का विरोध करने के लिए खिलाफ़त समिति बनाई गई थी।
3. गांधीजी की गिरफ़्तारी के दौरान स्थानीय नेताओं को विरोध जारी रखने दिया गया।
उपर्युक्त में से कितने कथन सही नहीं हैं?
- A.एक
- B.दो
- C.तीन
- D.कोई नहीं
उत्तर देखें
कथन 1 सही है, पर कथन 2 और 3 सही नहीं हैं। मार्च 1919 का रॉलेट अधिनियम न्यायमूर्ति एस. ए. टी. रॉलेट की अध्यक्षता वाली राजद्रोह समिति पर आधारित था और सभी निर्वाचित भारतीय सदस्यों के विरोध के बावजूद इंपीरियल लेजिस्लेटिव काउंसिल ने इसे पारित किया।
पूरी व्याख्या पढ़ें →कांग्रेस में निम्नलिखित में से कौन समाजवादी विचारधारा का प्रतिनिधित्व करते थे?
- A.राजेंद्र प्रसाद
- B.नरेंद्र देव
- C.मौलाना आज़ाद
- D.सरदार पटेल
उत्तर देखें
आचार्य नरेंद्र देव कांग्रेस के भीतर समाजवादी समूह, कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी, के संस्थापक और प्रमुख विचारक थे। कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी 1934 में बनी; इसका स्थापना सम्मेलन पटना में हुआ और उसी वर्ष बाद में बंबई में बड़ा अधिवेशन हुआ।
पूरी व्याख्या पढ़ें →प्रारंभिक भारत के निम्नलिखित संवतों पर विचार कीजिए :
1. शक संवत 2. कलचुरि संवत 3. विक्रम संवत 4. हर्ष संवत 5. गुप्त संवत
सबसे पुराने से आरंभ करते हुए, उपर्युक्त संवतों का सही कालानुक्रम निम्नलिखित में से कौन-सा है?
- A.1 - 2 - 3 - 4 - 5
- B.3 - 1 - 5 - 2 - 4
- C.2 - 3 - 1 - 4 - 5
- D.3 - 1 - 2 - 5 - 4
उत्तर देखें
आरंभ वर्ष के अनुसार क्रम है: विक्रम, शक, कलचुरि, गुप्त और हर्ष संवत। विक्रम संवत 57 ईसा पूर्व से आरंभ होता है और आज भी उत्तर व पश्चिम भारत में प्रचलित है।
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