प्रकाशिक उपकरण बनाने में निम्नलिखित में से किस प्रकार के काँच का प्रयोग होता है?
- A.पाइरेक्स काँच
- B.मृदु काँच
- C.कठोर काँच
- D.फ्लिंट काँच
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर है D, फ्लिंट काँच। फ्लिंट काँच में लेड ऑक्साइड होता है, जिससे इसका अपवर्तनांक ऊँचा और पारदर्शिता अच्छी होती है, इसलिए यह प्रकाशिक उपकरणों के लेंस और प्रिज़्म में लगता है।
साधारण काँच मुख्य रूप से सोडा और चूने के साथ पिघलाई गई सिलिका है। अन्य घटक बदलने से इसके गुण बदल जाते हैं। लेड ऑक्साइड मिलाने से फ्लिंट काँच बनता है, जिसे लेड काँच भी कहते हैं, और यह प्रकाश को अधिक मोड़ता और फैलाता है। इसका उपयोग लेंस, प्रिज़्म, चश्मों और कैमरों में होता है, और रंगीन किनारों को मिटाने के लिए इसे अक्सर क्राउन काँच के साथ अवर्णक लेंस में जोड़ा जाता है। यही लेड काँच काटकर चमकाने पर क्रिस्टल के बर्तनों के रूप में बिकता है।
A गलत है क्योंकि पाइरेक्स बोरोसिलिकेट काँच है जो ऊष्मा सहता है और प्रयोगशाला तथा रसोई के बर्तनों में लगता है। B गलत है क्योंकि मृदु काँच यानी सोडा-लाइम काँच खिड़कियों और बोतलों का साधारण काँच है। C गलत है क्योंकि कठोर काँच यानी पोटाश-लाइम काँच ऊँचे ताप वाले उपकरणों में लगता है।
Exam tip: फ्लिंट (लेड) काँच लेंस और प्रिज़्म के लिए, पाइरेक्स (बोरोसिलिकेट) ताप के लिए, सोडा-लाइम खिड़कियों के लिए, क्राउन काँच चश्मों के लिए।
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंहाइड्रोजन बम और यूरेनियम बम क्रमशः किस पर आधारित हैं?
- A.नाभिकीय संलयन और विखंडन
- B.विखंडन और तापनाभिकीय संलयन
- C.भूतापीय विखंडन और संलयन
- D.भूतापीय संलयन और विखंडन
उत्तर देखें
हाइड्रोजन बम हल्के हाइड्रोजन नाभिकों को जोड़ता है, जबकि यूरेनियम बम भारी यूरेनियम-235 नाभिकों को तोड़ता है। नाभिकीय विखंडन में यूरेनियम-235 जैसा भारी नाभिक एक न्यूट्रॉन सोखकर दो हल्के नाभिकों में टूटता है और ऊर्जा तथा दो-तीन नए न्यूट्रॉन छोड़ता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →आवृतबीजी पौधों के बीजांड में निम्नलिखित में से कौन-सी अगुणित कोशिका नहीं है?
- A.बीजांडकाय (न्यूसेलस)
- B.सहायक कोशिका
- C.अंड
- D.प्रतिमुखी कोशिका
उत्तर देखें
बीजांडकाय यानी न्यूसेलस बीजांड का अपना द्विगुणित ऊतक है, जबकि सहायक कोशिकाएँ, अंड और प्रतिमुखी कोशिकाएँ भ्रूणकोष की अगुणित कोशिकाएँ हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →एक द्विध्रुवी संधि ट्रांजिस्टर में
- A.तीनों क्षेत्रों (उत्सर्जक, आधार और संग्राहक) में अशुद्धि की सांद्रता बराबर होती है
- B.उत्सर्जक में अशुद्धि की सांद्रता सबसे कम होती है
- C.संग्राहक में अशुद्धि की सांद्रता सबसे कम होती है
- D.आधार में अशुद्धि की सांद्रता सबसे कम होती है
उत्तर देखें
आधार को पतला और हल्का अपमिश्रित रखा जाता है ताकि उत्सर्जक से आए अधिकांश आवेश वाहक उसे पार कर संग्राहक तक पहुँच जाएँ।
पूरी व्याख्या पढ़ें →लाइसोसोम निम्नलिखित में से किस कोशिकांग से बनता है?
- A.केंद्रक
- B.अंतर्द्रव्यी जालिका
- C.गॉल्जी काय
- D.राइबोसोम
उत्तर देखें
लाइसोसोम गॉल्जी उपकरण से छोटी झिल्लीदार थैलियों के रूप में अलग होते हैं, जिनमें पाचक एंजाइम भरे रहते हैं। लाइसोसोम के जल-अपघटक एंजाइम पहले खुरदरी अंतर्द्रव्यी जालिका से जुड़े राइबोसोम पर बनते हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →11 Ω, 22 Ω और 33 Ω प्रतिरोध वाले तीन प्रतिरोधक समांतर क्रम में जोड़े गए हैं। उनका तुल्य प्रतिरोध कितना होगा?
- A.66 Ω
- B.22 Ω
- C.12 Ω
- D.6 Ω
उत्तर देखें
समांतर क्रम में प्रतिरोधों के व्युत्क्रम जुड़ते हैं: 1/11 + 1/22 + 1/33 = 11/66 = 1/6, इसलिए तुल्य प्रतिरोध 6 Ω है।
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