ओज़ोन छिद्र किस क्षेत्र के ऊपर है?
- A.अंटार्कटिक के ऊपर, मुख्यतः CFC गैसों के कारण।
- B.अंटार्कटिक के ऊपर, मुख्यतः कार्बन डाइऑक्साइड गैस के कारण।
- C.आर्कटिक के ऊपर, मुख्यतः CFC गैसों के कारण।
- D.आर्कटिक के ऊपर, मुख्यतः कार्बन डाइऑक्साइड गैस के कारण।
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर है A, अंटार्कटिक के ऊपर, मुख्यतः CFC गैसों के कारण। ओज़ोन छिद्र अंटार्कटिका के ऊपर समतापमंडलीय ओज़ोन परत का मौसमी रूप से बहुत पतला हो जाना है, जो मुख्यतः क्लोरोफ्लोरोकार्बन से निकली क्लोरीन के कारण होता है।
CFC, जो कभी रेफ्रिजरेटर, एयर कंडीशनर और एरोसोल स्प्रे में प्रयुक्त होते थे, समतापमंडल तक पहुँचते हैं, जहाँ पराबैंगनी प्रकाश उन्हें तोड़कर क्लोरीन परमाणु मुक्त करता है; एक क्लोरीन परमाणु हज़ारों ओज़ोन अणुओं को नष्ट कर सकता है। अंटार्कटिका में अत्यधिक ठंड से ध्रुवीय समतापमंडलीय बादल बनते हैं, जिन पर वसंत (सितंबर से नवंबर) में धूप लौटने पर यह अभिक्रिया तेज़ हो जाती है। 1985 में इस छिद्र की खोज के बाद 1987 में मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल बना।
B गलत है: कार्बन डाइऑक्साइड ग्रीनहाउस गैस है जो वैश्विक तापन बढ़ाती है; यह ओज़ोन को नष्ट नहीं करती।
C गलत है: आर्कटिक में भी कुछ ओज़ोन घटती है, पर हर वर्ष का गहरा छिद्र अधिक ठंडे अंटार्कटिक के ऊपर बनता है।
D गलत है: इसमें स्थान और कारण दोनों गलत हैं।
Exam tip: ओज़ोन छिद्र = अंटार्कटिक वसंत, CFC (क्लोरीन), मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल 1987; विश्व ओज़ोन दिवस 16 सितंबर; ओज़ोन डॉब्सन इकाई में मापी जाती है।
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंवायु प्रदूषण घटाने के लिए कृत्रिम रूप से वर्षा कराने में किसका उपयोग होता है?
- A.सिल्वर आयोडाइड और पोटैशियम आयोडाइड
- B.सिल्वर नाइट्रेट और पोटैशियम आयोडाइड
- C.सिल्वर आयोडाइड और पोटैशियम नाइट्रेट
- D.सिल्वर नाइट्रेट और पोटैशियम क्लोराइड
उत्तर देखें
कृत्रिम वर्षा यानी क्लाउड सीडिंग में यही लवण आम तौर पर प्रयोग होते हैं। क्लाउड सीडिंग में नमी वाले बादलों में विमान, रॉकेट या ज़मीनी जनरेटर से बहुत छोटे कण छिड़के जाते हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →भारत में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 के अनुसार, निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
- A.अपशिष्ट उत्पन्न करने वाले को अपशिष्ट को पाँच श्रेणियों में अलग करना होता है।
- B.ये नियम केवल अधिसूचित नगरीय स्थानीय निकायों, अधिसूचित नगरों और सभी औद्योगिक बस्तियों पर लागू होते हैं।
- C.ये नियम भराव क्षेत्रों और अपशिष्ट प्रसंस्करण सुविधाओं के स्थलों की पहचान के लिए सटीक और विस्तृत मानदंड देते हैं।
- D.अपशिष्ट उत्पन्न करने वाले के लिए यह अनिवार्य है कि एक ज़िले में उत्पन्न अपशिष्ट दूसरे ज़िले में न ले जाया जाए।
उत्तर देखें
2016 के नियम भराव क्षेत्रों और अपशिष्ट प्रसंस्करण सुविधाओं के स्थल चुनने के लिए विस्तृत मानदंड तय करते हैं। ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत बने और इन्होंने 2000 के नगरपालिका ठोस अपशिष्ट नियमों का स्थान लिया।
पूरी व्याख्या पढ़ें →जैविक ऑक्सीजन माँग (BOD) किसके लिए एक मानक कसौटी है?
- A.रक्त में ऑक्सीजन स्तर मापने
- B.वन पारितंत्रों में ऑक्सीजन स्तर की गणना करने
- C.जलीय पारितंत्रों में प्रदूषण आकलन
- D.अधिक ऊँचाई वाले क्षेत्रों में ऑक्सीजन स्तर के आकलन
उत्तर देखें
BOD बताता है कि किसी जल में कितना कार्बनिक प्रदूषण है। जैविक या जैव-रासायनिक ऑक्सीजन माँग घुली हुई ऑक्सीजन की वह मात्रा है जिसे वायवीय सूक्ष्मजीव पानी के नमूने के कार्बनिक पदार्थ को तोड़ने में खर्च करते हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए : पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 भारत सरकार को अधिकार देता है कि वह 1. पर्यावरण संरक्षण की प्रक्रिया में जन-भागीदारी की आवश्यकता तथा उसे प्राप्त करने की प्रक्रिया और रीति बताए 2. विभिन्न स्रोतों से पर्यावरणीय प्रदूषकों के उत्सर्जन या निस्सरण के मानक निर्धारित करे उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
- A.केवल 1
- B.केवल 2
- C.1 और 2 दोनों
- D.न तो 1, न ही 2
उत्तर देखें
यह अधिनियम केंद्र को उत्सर्जन और निस्सरण के मानक तय करने का अधिकार देता है, पर इसमें जन-भागीदारी का कोई प्रावधान नहीं है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →निम्नलिखित गतिविधियों पर विचार कीजिए : 1. खेतों में बड़े पैमाने पर बारीक पिसी बेसाल्ट चट्टान फैलाना 2. चूना मिलाकर महासागरों की क्षारीयता बढ़ाना 3. विभिन्न उद्योगों से निकलने वाली कार्बन डाइऑक्साइड को पकड़कर कार्बोनेटेड जल के रूप में परित्यक्त भूमिगत खदानों में पंप करना उपर्युक्त में से कितनी गतिविधियों पर कार्बन प्रग्रहण और पृथक्करण के लिए प्रायः विचार और चर्चा की जाती है?
- A.केवल एक
- B.केवल दो
- C.तीनों
- D.कोई नहीं
उत्तर देखें
ये तीनों गतिविधियाँ कार्बन डाइऑक्साइड को वातावरण से हटाकर लंबे समय तक बंद रखने के मान्य तरीके हैं।
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