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GK24
सरकारी योजनाएंमध्यम

निफ्ट, दिल्ली के खादी उत्कृष्टता केंद्र ने कितने खादी डिजाइन संग्रह विकसित किए हैं?

  1. A.1,024
  2. B.1,750
  3. C.2,129
  4. D.3,400

सही उत्तर

C. 2,129

व्याख्या

सही उत्तर 2,129 है। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय ने बताया कि निफ्ट, दिल्ली के खादी उत्कृष्टता केंद्र ने विभिन्न श्रेणियों में इतने खादी डिजाइन संग्रह तैयार किए हैं, जो खादी को आधुनिक फैशन तथा जीवनशैली में स्थान देने की कोशिश का हिस्सा है। इसी ब्योरे में नवयुग खादी की शुरुआत 710 नए उत्पादों के साथ और स्वाधा नाम की वेलनेस एवं योग परिधान श्रेणी की शुरुआत दर्ज है। विकल्प A, विकल्प B और विकल्प D में दिए कुल आंकड़े मंत्रालय के ब्योरे में कहीं नहीं हैं, और जो परीक्षार्थी डिजाइन संग्रह को उत्पादों की संख्या से भ्रमित करेगा, वह गलती से छोटा आंकड़ा चुन लेगा। इन संख्याओं को जोड़ी बनाकर याद रखना सबसे सुरक्षित है, अर्थात बड़ी संख्या निफ्ट केंद्र के डिजाइन संग्रह की और छोटी संख्या नवयुग खादी के उत्पादों की।

पूरा लेख पढ़ें: खादी: निफ्ट दिल्ली केंद्र ने 2,129 डिजाइन संग्रह तैयार किए

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Q1.सरकारी योजनाएंआसान

एमएसएमई मंत्रालय के अनुसार खादी कारीगरों में महिलाओं की हिस्सेदारी लगभग कितनी है?

  1. A.लगभग 40 प्रतिशत
  2. B.लगभग 55 प्रतिशत
  3. C.लगभग 65 प्रतिशत
  4. D.लगभग 80 प्रतिशत
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. लगभग 80 प्रतिशत

व्याख्या

सही उत्तर लगभग 80 प्रतिशत है। मंत्रालय ने बताया कि लगभग पांच लाख खादी कारीगरों में करीब चार बटा पांच हिस्सा महिलाओं का है और उनकी भागीदारी अगरबत्ती, हस्तनिर्मित कागज, हनी मिशन तथा सेवा उद्योगों में विशेष रूप से मजबूत रही है, जिससे उन्हें आर्थिक आत्मनिर्भरता का रास्ता मिला है। विकल्प A, विकल्प B और विकल्प C तीनों इस हिस्सेदारी को कम करके बताते हैं और ब्योरे के किसी आंकड़े से मेल नहीं खाते। परीक्षार्थी इस हिस्सेदारी को अहमदाबाद स्थित भारतीय उद्यमिता विकास संस्थान के मूल्यांकन अध्ययन के अलग निष्कर्ष से न मिलाएं, जिसमें बताया गया कि योजनाओं के दायरे में आए 75 प्रतिशत से अधिक कारीगरों की आय में हस्तक्षेप के बाद मापने योग्य वृद्धि हुई। एक आंकड़ा बताता है कि कारीगर कौन हैं और दूसरा यह कि उनकी कमाई का क्या हुआ।

Q2.सरकारी योजनाएंकठिन

केवीआईसी के आधुनिकीकरण पूरा कर चालू हुए दो केंद्रीय स्लाइवर संयंत्र कहां स्थित हैं?

  1. A.कर्नाटक के चित्रदुर्ग और केरल के कुट्टूर
  2. B.आंध्र प्रदेश के पोंडुरु और उत्तर प्रदेश के आगरा
  3. C.महाराष्ट्र के नागपुर और गुजरात के भावनगर
  4. D.तमिलनाडु के इरोड और आंध्र प्रदेश के गुंटूर
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. कर्नाटक के चित्रदुर्ग और केरल के कुट्टूर

व्याख्या

सही उत्तर कर्नाटक के चित्रदुर्ग और केरल के कुट्टूर है। मंत्रालय ने बताया कि खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग के केंद्रीय स्लाइवर संयंत्रों का आधुनिकीकरण चल रहा है और इन दोनों संयंत्रों ने यह काम पूरा कर उत्पादन शुरू कर दिया है, जिनमें चित्रदुर्ग संयंत्र अपनी आधी ऊर्जा आवश्यकता सौर स्रोत से पूरी करता है तथा पवन ऊर्जा पर विचार चल रहा है। विकल्प B में दो ऐसे स्थान मिला दिए गए हैं जो ब्योरे में दूसरे कारणों से आते हैं, क्योंकि पोंडुरु वह खादी किस्म है जिसे जीआई टैग मिला और आगरा में पहला ब्रिक्स एमएसएमई फोरम हुआ था। विकल्प C और विकल्प D में बताए औद्योगिक शहर इस ब्योरे में कहीं नहीं आते। परीक्षा की दृष्टि से दोनों संयंत्रों के स्थान, चित्रदुर्ग की सौर हिस्सेदारी और उनके स्वामी आयोग को जोड़कर याद रखना चाहिए।

Q3.सरकारी योजनाएंमध्यम

प्रस्तावित साझा सहकारी डिजिटल विपणन प्लेटफॉर्म के लिए किस संस्था ने सहयोग की पेशकश की?

  1. A.ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ओएनडीसी)
  2. B.गवर्नमेंट ई मार्केटप्लेस (जेम)
  3. C.भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम
  4. D.भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ओएनडीसी)

व्याख्या

सही उत्तर ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स है। सहकारिता मंत्रालय सहकारी उत्पादों और कृषि उपज के अधिक प्रभावी विपणन के लिए एक साझा सहकारी डिजिटल प्लेटफॉर्म के प्रस्ताव पर विचार कर रहा है, और सचिव ने प्रतिभागियों को बताया कि ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स ने इस पहल के लिए अपने सहयोग की पेशकश की है। मंत्रालय आगे बढ़ने से पहले राज्यों से सुझाव और मार्गदर्शन लेना चाहता है, ताकि ऐसा व्यावहारिक तंत्र बने, जो सहकारी संस्थाओं को व्यापक बाजारों से जोड़े। विकल्प B यानी गवर्नमेंट ई मार्केटप्लेस सरकारी खरीद का प्लेटफॉर्म है, जिसके माध्यम से सरकारी विभाग वस्तुएं और सेवाएं खरीदते हैं, जो पूरी तरह अलग उद्देश्य है। विकल्प C यानी भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम खुदरा भुगतान प्रणालियां बनाता और चलाता है। विकल्प D यानी भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण आधार जारी करता है। इनमें केवल पहला ही ऐसा खुला डिजिटल वाणिज्य नेटवर्क है, जिस पर सहकारी विपणन प्लेटफॉर्म खड़ा किया जा सकता है।

Q4.सरकारी योजनाएंकठिन

एनसीडीसी अधिनियम में हाल के संशोधन से क्या संभव हुआ है?

  1. A.निगम द्वारा व्यक्तिगत किसानों को सीधा ऋण
  2. B.सहकारी विकास को बढ़ावा देने वाली गैर-सहकारी संस्थाओं को वित्तीय सहायता
  3. C.सहकारी बैंकों को वाणिज्यिक बैंकों में बदलना
  4. D.निगम को भारतीय रिजर्व बैंक को हस्तांतरित करना
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. सहकारी विकास को बढ़ावा देने वाली गैर-सहकारी संस्थाओं को वित्तीय सहायता

व्याख्या

सही उत्तर सहकारी विकास को बढ़ावा देने वाली गैर-सहकारी संस्थाओं को वित्तीय सहायता है। सहकारिता मंत्रालय के सचिव ने बताया कि राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम अधिनियम में हाल के संशोधन से ऐसी संस्थाओं को भी सहायता देने का मार्ग प्रशस्त हुआ है, जो स्वयं सहकारी नहीं हैं लेकिन सहकारी विकास का कार्य करती हैं, और इससे राज्य स्तर की विभिन्न संस्थाओं के लिए निगम से सीधे धन लेने का रास्ता खुलता है, जिसका प्रभावी लाभ उठाने का उन्होंने राज्यों से आग्रह किया। विकल्प A गलत है, क्योंकि निगम संस्थाओं के माध्यम से काम करता है, व्यक्तिगत किसानों को ऋण देकर नहीं। विकल्प C संशोधन की किसी बात का वर्णन नहीं करता, क्योंकि कार्यशाला में इसके बजाय मॉडल सहकारी बैंकिंग ढांचे और सहकारी बैंकों की स्वायत्तता बनाए रखते हुए बेहतर निगरानी पर चर्चा हुई। विकल्प D भी गलत है, क्योंकि मंत्रालय भारतीय रिजर्व बैंक के साथ सहकारी बैंकों की संसाधन क्षमता बढ़ाने के लिए समन्वय कर रहा है, निगम का हस्तांतरण नहीं।

Q5.सरकारी योजनाएंमध्यम

निर्यात, जैविक उत्पाद और बीज की मूल्य श्रृंखलाओं को मजबूत करने के लिए किन तीन राष्ट्रीय सहकारी संस्थाओं का उल्लेख हुआ?

  1. A.नेफेड, एनसीसीएफ और एनडीडीबी
  2. B.एनसीईएल, एनसीओएल और बीबीएसएसएल
  3. C.नाबार्ड, एनसीडीसी और इफको
  4. D.कृभको, अमूल और एनडीडीबी
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. एनसीईएल, एनसीओएल और बीबीएसएसएल

व्याख्या

सही उत्तर एनसीईएल, एनसीओएल और बीबीएसएसएल है, अर्थात राष्ट्रीय सहकारी निर्यात लिमिटेड, राष्ट्रीय सहकारी जैविक लिमिटेड और भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड। कार्यशाला में इन तीन राष्ट्रीय सहकारी संस्थाओं के माध्यम से निर्यात, जैविक उत्पादों और बीज की मूल्य श्रृंखलाओं को मजबूत करने तथा प्राथमिक सहकारी संस्थाओं को सशक्त बनाने पर विशेष ध्यान दिया गया। इसे याद रखना आसान है, यदि हर नाम को उसके क्षेत्र से जोड़ा जाए, अर्थात पहली से निर्यात, दूसरी से जैविक उत्पाद और तीसरी से बीज। विकल्प C में दो वित्तीय संस्थाओं के साथ एक उर्वरक सहकारी संस्था मिली हुई है, क्योंकि नाबार्ड की टीम कार्यशाला में शामिल हुई और राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम के साथ विशेष सत्र रखा गया, लेकिन दोनों का काम वित्त से जुड़ा है, इन मूल्य श्रृंखलाओं से नहीं। विकल्प A और D में प्रसिद्ध सहकारी तथा विपणन संस्थाओं के नाम हैं, जो इस उद्देश्य के लिए उल्लिखित तीन संस्थाएं नहीं थीं।