निम्नलिखित सामग्रियों पर विचार कीजिए : 1. कृषि अवशेष 2. मक्के का दाना 3. अपशिष्ट जल उपचार की गाद (स्लज) 4. लकड़ी मिल का अपशिष्ट उपर्युक्त में से किनका उपयोग संधारणीय विमानन ईंधन (SAF) के उत्पादन के लिए कच्चे माल के रूप में किया जा सकता है?
- A.केवल 1 और 2
- B.केवल 3 और 4
- C.1, 2, 3 और 4
- D.केवल 1, 3 और 4
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर है C, 1, 2, 3 और 4। ये चारों सामग्रियाँ किसी न किसी स्वीकृत रूपांतरण विधि से संधारणीय विमानन ईंधन (SAF) में बदली जा सकती हैं।
SAF कच्चे तेल के बजाय नवीकरणीय या अपशिष्ट स्रोतों से बना जेट ईंधन है, जिसे विमान के इंजन बदले बिना सामान्य विमानन टरबाइन ईंधन में मिलाया जा सकता है। इसकी कई स्वीकृत विधियाँ हैं: तेल और वसा का हाइड्रोप्रोसेसिंग (HEFA); मक्के जैसी फ़सलों की शर्करा और स्टार्च से किण्वन द्वारा एथेनॉल या आइसोब्यूटेनॉल बनाकर जेट ईंधन (अल्कोहल-टू-जेट); और फ़सल अवशेष तथा लकड़ी मिल अपशिष्ट जैसे सेल्युलोज़ी पदार्थ, साथ ही सीवेज की गाद जैसे गीले अपशिष्ट, जिनका गैसीकरण कर या जैव-कच्चा तेल बनाकर शोधन किया जाता है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए 2027 में 1% और 2028 में 2% SAF मिश्रण के सांकेतिक लक्ष्य रखे हैं।
A गलत है: इसमें गाद और लकड़ी मिल अपशिष्ट छूट गए हैं, जो उपयोगी हैं।
B गलत है: इसमें फ़सल अवशेष और मक्के का दाना छूट गए हैं।
D गलत है: अल्कोहल-टू-जेट विधि से मक्के का दाना भी मान्य कच्चा माल है।
Exam tip: SAF कच्चा माल = तेल-वसा, शर्करा-स्टार्च, फ़सल और वन अवशेष, नगरीय व गीला कचरा; मुख्य विधियाँ HEFA और अल्कोहल-टू-जेट।
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंसोमैटिक सेल न्यूक्लियर ट्रांसफर (कायिक कोशिका केंद्रक स्थानांतरण) प्रौद्योगिकी का अनुप्रयोग क्या है?
- A.जैव लार्वानाशकों का उत्पादन
- B.जैव निम्नीकरणीय प्लास्टिक का विनिर्माण
- C.पशुओं का प्रजननीय क्लोनन
- D.रोगमुक्त जीवों का उत्पादन
उत्तर देखें
सोमैटिक सेल न्यूक्लियर ट्रांसफर, यानी SCNT, किसी पशु का क्लोन बनाने की तकनीक है। इसमें वैज्ञानिक एक अंड कोशिका लेकर उसका केंद्रक निकाल देते हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →कार्बनिक प्रकाश उत्सर्जक डायोड (OLED) का प्रयोग अनेक उपकरणों में डिजिटल डिस्प्ले बनाने में होता है। लिक्विड क्रिस्टल डिस्प्ले की तुलना में OLED डिस्प्ले के क्या लाभ हैं? 1. OLED डिस्प्ले को लचीले प्लास्टिक आधार पर बनाया जा सकता है। 2. OLED के प्रयोग से कपड़ों में लगे, लपेटे जा सकने वाले डिस्प्ले बनाए जा सकते हैं। 3. OLED के प्रयोग से पारदर्शी डिस्प्ले संभव हैं। नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए :
- A.केवल 1 और 3
- B.केवल 2
- C.1, 2 और 3
- D.उपर्युक्त में से कोई भी कथन सही नहीं है
उत्तर देखें
तीनों OLED के वास्तविक लाभ हैं, और ये इस तथ्य से निकलते हैं कि OLED का हर पिक्सेल अपना प्रकाश स्वयं बनाता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →भारत 'अंतर्राष्ट्रीय ताप-नाभिकीय प्रायोगिक रिएक्टर (ITER)' का एक महत्वपूर्ण सदस्य है। यदि यह प्रयोग सफल होता है, तो भारत को तात्कालिक लाभ क्या होगा?
- A.यह विद्युत उत्पादन के लिए यूरेनियम के स्थान पर थोरियम का प्रयोग कर सकता है
- B.यह उपग्रह नौवहन में वैश्विक भूमिका प्राप्त कर सकता है
- C.यह विद्युत उत्पादन में अपने विखंडन रिएक्टरों की दक्षता में भारी सुधार कर सकता है
- D.यह विद्युत उत्पादन के लिए संलयन रिएक्टर बना सकता है
उत्तर देखें
ITER यह सिद्ध करने का प्रयोग है कि नाभिकीय संलयन बड़े पैमाने पर ऊर्जा का स्रोत बन सकता है, और इसकी तकनीक सभी सदस्यों के साथ साझा होती है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →नॉन-फंजिबल टोकन (NFT) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए : 1. ये भौतिक परिसंपत्तियों के डिजिटल निरूपण को संभव बनाते हैं। 2. ये अद्वितीय क्रिप्टोग्राफिक टोकन हैं जो ब्लॉकचेन पर मौजूद होते हैं। 3. इनका समतुल्यता पर व्यापार या विनिमय किया जा सकता है और इसलिए इन्हें वाणिज्यिक लेन-देन के माध्यम के रूप में प्रयोग किया जा सकता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
- A.केवल 1 और 2
- B.केवल 2 और 3
- C.केवल 1 और 3
- D.1, 2 और 3
उत्तर देखें
NFT ब्लॉकचेन पर दर्ज अद्वितीय टोकन हैं जो किसी परिसंपत्ति का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं, पर नॉन-फंजिबल होने के कारण इन्हें पैसे की तरह एक के बदले एक नहीं बदला जा सकता।
पूरी व्याख्या पढ़ें →निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए : समाचारों में कभी-कभी दिखने वाले शब्द — संदर्भ/विषय 1. बेल II प्रयोग — कृत्रिम बुद्धि 2. ब्लॉकचेन प्रौद्योगिकी — डिजिटल/क्रिप्टोकरेंसी 3. CRISPR-Cas9 — कण भौतिकी उपर्युक्त में से कौन-सा/से युग्म सही सुमेलित है/हैं?
- A.केवल 1 और 3
- B.केवल 2
- C.केवल 2 और 3
- D.1, 2 और 3
उत्तर देखें
केवल ब्लॉकचेन अपने सही क्षेत्र से सुमेलित है। बेल II जापान के त्सुकुबा में सुपरKEKB इलेक्ट्रॉन-पॉज़िट्रॉन संघट्टक पर चलने वाला कण भौतिकी का प्रयोग है; यह मानक मॉडल से आगे की भौतिकी खोजने के लिए B मेसॉन का अध्ययन करता है, और TIFR जैसे भारतीय संस्थान इसमें भाग लेते हैं।
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